सर्पाकार विवाह नाडी चक्र (Sarpakar Vivah Nadi Chakra)

विवाह करने से पूर्व वर-वधू की कुण्डलियों का अनेक प्रकार से मिलान किया जाता है. जिसमें अष्टकूट मिलान, ग्रह मिलान, कुण्डलियों के शुभ व अशुभ योग, मांगलिक योग व आधुनिक काल में रक्त मिलान भी इन मिलानों में सम्मिलित हो गया है. विवाह करने वाले वर-वधू दोनों का जीवन पूर्णता: सुखमय बना रहे, इसके लिये दोनों ही कुण्डलियों का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया जाता है.

विवाह से पूर्व किये जाने वाले सभी मिलानों का अपना- अपना महत्व है. फिर भी इन सभी मिलानों में नाडी-मिलान (Nadi matching is important) को विशेष महत्व दिया जाता है. वर-वधू की गुण मिलान तालिका में नाडी मिलान होने पर सबसे अधिक 8 अंक दिये जाते है.

यहां विशेष रुप से समझने योग्य बात यह है कि वर-वधू की नाडियों का मिलान न होने पर दोनों को बहुत अधिक चिन्तित नहीं होना चाहिए. क्योकि कई बार कुण्डलियों में नाडी मिलान नहीं हो रहा होता है. पर नाडी दोष (Nadi Dosha) के निवारण के योग (Combinations for removal of Nadi Dosha) कुण्डलियों में अनेक बार हो रहा होता है. ऎसे में नाडी दोष को अनदेखा कर देना ही उचित रहता है. (Nadi dosha should be ignored if resolved)

सर्पाकार विवाह नाडी चक्र का आधार (Foundation of Sarpakar Vivah Nadi Chakra)

सर्पाकार विवाह नाडी चक्र का आधार तीन प्रकार की नाडीयां होती है. जिनके नाम इस प्रकार है
  1. आदि नाडी (Aadi Nadi)

  2. मध्य नाडी (Madhya Nadi)

  3. अन्त नाडी (Antya Nadi)

सर्पाकार विवाह नाडी चक्र का निर्माण- (Making the Sarpakar Vivah Nadi Chakra)

सर्पाकार विवाह नाडी चक्र को सर्पाकार रुप में बनाया जाता है. इसमें तीन लेटे हुए सर्पों की आकृ्ति बनती है. तथा ये तीनों सर्प, तीन नाडियों का प्रतिनिधित्व कर रहे होते है. इस सर्पाकार विवाह नाडी चक्र में सबसे ऊपर वाले सर्प को आदि नाडी, मध्य के सर्प को मध्य नाडी व अन्तिम सर्प को अन्त नाडी कहा जाता है.
इस विवाह नाडी चक्र में तीन-तीन नक्षत्र स्थापित किये जाते है. नक्षत्रों की स्थापना अश्विनी नक्षत्र से आरम्भ की जाती है. तथा कुल 27 नक्षत्र इसमें शामिल किये जाते है.

सर्पाकार नाडियों में नक्षत्रों की स्थापना (Establishment of Nakshatras in Sarpakar Nadi)

आदि नाडी नक्षत्र (Nakshatra in Aadi Nadi)
आदि नाडी में अश्विनी, आर्दा, पुनर्वसु, उतरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा व पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र स्थापित किये जाते है.

मध्य नाडी नक्षत्र (Nakshatra in Madhya Nadi)
मध्य नाडी में भरणी, मृ्गशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वा आषाढा, घनिष्ठा व उतरा भाद्रपद आदि नक्षत्र स्थापित किये जाते है.

अन्त नाडी नक्षत्र (Nakshatra in Antha Nadi)
अन्त नाडी नक्षत्र में कृ्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उतरा आषाढा, श्रवण व रेवती नक्षत्र स्थापित किये जाते है.

सर्पाकार नाडी चक्र का फल विचार (Predicting through Sarpakar Nadi Chakra)


1. समान राशि व असमान नक्षत्र (Same Sign and Different Nakshatras)
सर्पाकार नाडी चक्र में वर-वधू दोनों की एक ही राशि और भिन्न-भिन्न नक्षत्र होने पर दोनों के मध्य स्नेह पूर्ण संबन्ध रहने की संभावना बनती है. दोनों के नक्षत्रों की दूरी जितनी कम होती है. दोनों में निकटता व सामंजस्य उतना ही अधिक होता है.

2. समान नक्षत्र व असमान राशियां (Same Nakshatra and Different Signs)
इसी प्रकार जब वर-वधू दोनों के एक ही नक्षत्र हों व जन्म की राशियां भिन्न- भिन्न होती है. तब भी वर-वधू के आपसी सहयोग व प्रेम में वृ्द्धि होती है. अर्थात ये दोनों योग वैवाहिक जीवन के लिये शुभ फलकारी होते है.

3. नाडी समानता के फल (Result for Same Nadis)
सर्पाकार नाडी चक्र में वर-वधू की एक ही नाडी होना शुभ नहीं माना जाता है. आदि नाडी में समानता होने पर पति को, मध्य नाडी में दोनों को व अन्त नाडी में समानता होना पत्नी के लिये अशुभ माना गया है.

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