प्रेम संबंधों को लेकर युवाओं के मन में बहुत सी कल्पनाएं जन्म लेती रहती है. उम्र के इस पड़ाव पर जब व्यक्ति अपने साथी की तलाश में होता है तो उसका मन किन बातों से प्रभावित होगा यह कहना आसान नहीं होता है. पर वहीं ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे
जन्म कुण्डली में राहु-केतु से निर्मित होने वाला योग है. राहु को कालसर्प का मुख माना गया है. अगर राहु के साथ कोई भी ग्रह उसी राशि और नक्षत्र में शामिल हो तो वह ग्रह कालसर्प योग के मुख में ही स्थित माना जाता है. वहीं यदि कोई ग्रह राहु की
कुछ अशुभ योगों की गिनती में यमघंटक योग का नाम भी आता है. यह वह योग है जो अच्छे कार्यों में त्याज्य होता है. इस योग में व्यक्ति के किए गए शुभ कार्यों में असफलता की संभावना बढ़ जाती है. ज्योतिष में इन्हीं कुछ योगों को अशुभ योगों की श्रेणी
इस वर्ष 9 मार्च 2018 को 10:15 पर बृहस्पति तुला राशि में वक्री होकर गोचर करेंगे. बृहस्पति का वक्री होना अचानक से होने वाले बदलावों और जीवन की परिस्थितियों में आने वाले उतार-चढा़वों को दर्शाने वाला होगा. ग्रह का वक्रत्व होना परिणामों को अधिक
किसी भी मुख्य कार्य को करने के लिए ज्योतिष में शुभ मुहूर्त विचार के बारे में बताया गया है. कई बार परिस्थिति वश अथवा समय के अभाव के चलते उपयुक्त समय न मिल पाने के कारण कोई सुनिश्चित या निर्धारित मुहूर्त नही मिल पाता है, तब उस समय सर्वार्थ
इस वर्ष 7 मार्च 2018 को मंगल 18:27 पर अपनी वृश्चिक राशि को छोड़कर धनु राशि में प्रवेश करेंगे. धनु में पहले से ही शनि महाराज का गोचर हो रहा है ऐसे में मंगल का शनि के साथ युति संबंध अचानक से होने वाले बदलावों को दिखाने वाला होगा. मंगल और शनि
काम को लेकर सभी के मन नई-नई योजनाएं बनती ही रहती है. हर व्यक्ति यह चाहता है की जब भी वह कोई नय काम शुरू करे तो उसे उक्त काम में अच्छी सफलता मिले. अपने काम से वह धन और मान सम्मान की प्राप्ति करे और उसका कार्यक्षेत्र शुभता और समृद्धि से
नए और अच्छे वाहन की चाहत तो सभी के मन में रहती है, पर इसके साथ ही जो वस्तु हम ले रहे हैं वो सही रहे कोई दिक्कत न आई और हमारे लिए शुभदायक हो यह सभी बातें मन में चलती ही रहती हैं. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ही हमारे आचार्यों ने कुछ
गुरू पुष्य योग एक बहुत ही विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण योग माना जाता है. ज्योतिष में इस योग की बहुत महत्ता है. इस योग के समय किए गए कार्यों में सफलता एवं शुभता की संभावना में वृद्धि होती है. इसके साथ ही व्यक्ति को सकारात्मक फलों की प्राप्ति होती
ज्योतिष में खरीदारी करने से संबंधित कई योगों के बारे में विवरण मिलता है. जिनमें शुभाशुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है. इन्ही योग में से ऎसे दो योग हैं द्विपुष्कर योग और त्रिपुष्कर योग. इन योगों में भूमि संपति से संब्म्धित कार्य शुभ होते हैं.
अधिक मास को पुरुषोत्तम या मल मास, अधिमास, मलिम्लुच, संसर्प, अंहस्पति मास भी कहा जाता है. सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रत्येक तीसरे वर्ष में एक चन्द्रमास की वृद्धि कर दी जाती है इसी को अधिक मास कहा जाता है. इस
मंगल 2018 | Mars 2018 मंगल 16 जनवरी 2018 में वृश्चिक राशि में 29:10 पर प्रवेश करेंगे. मंगल 7 मार्च 2018 को धनु राशि में 18:27 पर प्रवेश करेंगे. मंगल 2 मई 2018 को मकर राशि में 16:19 पर प्रवेश करेंगे. मंगल 26 जून 2018 को मकर राशि में 26:34
प्राचीन काल से, भारतीय वैदिक ज्योतिष में ऋषियों ने सोलह संस्कारों का वर्णन किया है. इन सोलह संस्कारों के अन्तर्गत यह भी कहा जाता है कि बच्चे के मुण्डन संस्कार समारोह के बारे में भी उल्लेख किया गया है। वर्ष 2018 में, मुण्डन संस्कार समारोह
ज्योतिष में कुछ योगों को अशुभ योगों की श्रेणी में रखा गया है जैसे कक्रय योग, दग्ध योग, कुलिक योग और यमघण्टक इत्यादि योग. यह योग शुभ-मंगल कार्यों को करने के लिए त्याज्य माने जाते हैं अत: शुभ कामों को करने के लिए इन अशुभ योगों को त्यागना
ज्योतिष में बहुत से योगों का वर्णन मिलता है. इन योगों में अच्छे और बुरे दोनों ही प्रकार के योग मिलते हैं. ज्वालामुखी योग अशुभ योगों में से एक योग है. इस योग में कभी कोई शुभ काम आरंभ नहीं करना चाहिए. शुभ तो क्या कोई भी महत्वपूर्ण कार्य इस
वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तब उस समयावधि को संक्रान्ति कहते हैं. भचक्र में कुल 12 राशियाँ होती हैं. इसलिए सूर्य संक्रान्ति भी बारह ही होती है. इन बारह संक्रान्तियों को हमारे ऋषियों ने चार
सत्यनारायण व्रत प्रर्त्येक माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. लेकिन कभी-कभी यह व्रत चतुर्दशी तिथि में भी रखा जाता है. क्योंकि चन्द्रोदय कालिक एवं प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा ही व्रत के लिए ग्रहण करनी चाहिए. सत्यनारायण व्रत में कथा,
प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान शंकर की पूजा तथा व्रत किया जाता है. शंकर जी को भोलेनाथ भी कहा गया है. यह जरा सी पूजा करने पर ही प्रसन्न हो जाते हैं. शिवरात्रि के दिन पूरा दिन निराहार
गण्डमूल नक्षत्रों का प्रारम्भ और समाप्तिकाल (भारतीय समयानुसार) - 2018 | Starting and ending time of Gandmul Nakshatra 2018 (Indian Time) : प्रारम्भकाल समाप्तिकाल तिथि समय (घण्टे-मिनट) तिथि समय (घण्टे-मिनट) 4 जनवरी 06:07 5 जनवरी 26:16 13
प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और इस दिन भगवान शंकर की पूजा की जाती है. यह व्रत शत्रुओं पर विजय हासिल करने के लिए अच्छा माना गया है. प्रदोष काल वह समय कहलाता है जिस समय दिन और रात का मिलन होता है. भगवान शिव की पूजा एवं उपवास-