वक्री मंगल का मिथुन राशि में गोचर - 30 अक्टूबर 2022 मंगल का शुभ प्रभाव व्यक्ति को साहस, ताकत और पराक्रमी बनाता है, जबकि कमजोर अवस्था में ग्रह व्यक्ति के आत्मविश्वास को कमजोर करता है. यह मेष और वृश्चिक राशियों का स्वामी है. इसका राशि बदलाव

शुक्र, जिसे प्रेम और वैभव के ग्रह के रूप में भी जाना जाता है, अपनी ही राशि तुला से मंगल की राशि, यानी वृश्चिक में गोचर करेगा. इस गोचर के दौरान प्रेम की तीव्रता और जोश से मुलाकात होगी. शुक्र का वृश्चिक राशि में प्रवेश गोचर 11 नवंबर 2022 को

सूर्य की शक्तिशाली ऊर्जा किसी भी ग्रह को जला सकती है और ग्रह की शक्ति को भड़का भी सकती है, जिसके सूर्य निकट होता है. शुक्र का अस्त होना अशांत प्रेम जीवन का प्रतीक बन सकता है. अधिकांश मामलों में प्यार का बलिदान करियर या अन्य व्यक्तिगत

सूर्य को आत्मा एवं ऊर्जा माना जाता है, वैदिक ज्योतिष में यह इन्हीं तत्वों का कारक बनकर जीवन के विकास में सहायक बनता है. कुण्डली में यह राष्ट्र राजा और पिता का स्वाभाविक कारक होता है. इस ग्रह की शक्ति व्यक्ति की समाज में स्थिति को निर्धारित

मंगल ग्रह साहस, हिम्मत और बहादुरी और ताकत का प्रतिनिधित्व करता है. मंगल जब एक राशि से निकल कर किसी दूसरी राशि में जाता है तो इस समय को मंगल के राशि गोचर के रुप में जाना जाता है. मंगल का गोचर मिथुन राशि में होना गोचर की दृष्टि से महत्वपूर्ण

सूर्य 30 दिनों की अवधि के लिए वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे. कुंडली में सूर्य की स्थिति का जीवन में बहुत महत्व होता है और यह उसके समग्र व्यक्तित्व को प्रभावित करती है. सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर बहुत विशेष होता है. सूर्य को नेतृत्व,

बुध का वृश्चिक राशि में गोचर किसी व्यक्ति के संचार, व्यवहार, व्यवसाय और तर्क -विश्लेषण के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाने वाला होता है. यह गोचर विभिन्न राशियों के लोगों के लिए कई सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम देने वाला हो सकता है. बुध का शुभ

वैदिक ज्योतिष में, सूर्य को सभी ग्रहों में राजा का प्रतिनिधित्व प्राप्त है. सूर्य की स्थिति सभी ग्रहों के लिए नियंत्रक के रुप में होती है. सौर गणना द्वारा सौर मास का निर्धारण करती है. सूर्य का कन्या राशि गमन विशेष रुप से खास होता है. सूर्य

बुध ग्रह व्यक्ति के संचार कौशल, विचारशीलता, तर्क वितर्क, क्षमताओं और बुद्धि, वाणी का कारक है. इस कारन से बुध का राशि बदलाव जब भी होता है इन गुणों पर इसका असर अवश्य दिखाई देता है. बुध का कन्या राशि से तुला राशि में गोचर 26 अक्तूबर 2022 को

मंगल का वृष राशि में प्रवेश 10 अगस्त 2022 को होगा. राशि परिवर्तन का समय 10 अगस्त 2022 को बुधवार  09:32 के करीब होगा.  मंगल शक्ति, साहस, सहनशक्ति, समर्पण, इच्छाशक्ति, कुछ भी करने की प्रेरणा होता है और किसी भी कार्य को पूरा करने की

17 अक्टूबर 2022 को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य का तुला राशि प्रवेश ज्योतिष शास्त्र अनुसार महत्वपूर्ण होता है. इस समय एक विशेषता यह होगी की सूर्य अपनी नीचस्थ राशि तुला में गोचर करेगा. सूर्य की स्थिति तुला में कमजोर मानी गई

बुध ग्रह बौद्धिक गतिविधियों, संगती प्रभाव, तर्क वितर्क, भाषा बोली को प्रभावित करने वाला ग्रह है. बुध का गोचर जब किसी राशि में होता है तो यह बुध के गुणों को भी प्रभावित करने वाला समय होता है. बुध के राशि प्रवेश के साथ राशि के गुण धर्म बुध

शनि की चाल में जब बदलाव होता है तो वक्री अवस्था का असर काफी चीजों को बदल देता है. शनि एक लम्बे समय तक मकर राशि में रहे ओर कुंभ में आए लेकिन वक्री होकर एक बार फिर से मकर में ही जाने वाले हैं. अब इस समय के दौरान जिन राशियों को शनि साढे़साति

वैदिक ज्योतिष में, सूर्य को एक प्रमुख ग्रह माना जाता है और यह आत्मा-ऊर्जा का निर्माता बनता है. हमारी ऊर्जा किस तरह से काम करेगी किस ओर बढ़ेगी ये सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है. 17 अगस्त 2022 को सिंह राशि में सूर्य प्रवेश करेगा. यह सरकार

बुध का मिथुन राशि में प्रवेश जुलाई माह के दौरान होगा. 2 जुलाई को सुबह 09:42 पर बुध वृष राशि से निकल कर मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे. बुध का प्रवेश अपने ही घर पर होना एक शुभ संकेत माना जाता है. मिथुन राशि बुध के स्वामित्व की राशि है

मंगल - मेष राशि - मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा, शक्ति, इच्छाओं, काम करने की तीव्रता, आक्रामक स्वभाव, क्रोध, लड़ने की क्षमता, सैनिक, खिलाड़ी आदि का प्रतिनिधित्व करता है. और मेष राशि जो राशि चक्र की पहली राशि है अग्नि तत्व से युक्त होती है तथा मंगल

28 जुलाई 2022 को बृहस्पति का मार्गी से वक्री अवस्था में बदलाव होगा. जिस प्रकार मार्गी बृहस्पति अनुकूलता को दर्शाता है वहीं गुरु का वक्रत्व अनुकूलता को दर्शाता है. वैदिक ज्योतिष में, बृहस्पति का गोचर काफी महत्व रखता है. गुरु का असर ज्ञान,

सूर्य का मृगशिरा नक्षत्र प्रवेश कई मायनों में बदलावों की स्थिति को दर्शाता है. किसी भी ग्रह का राशि और नक्षत्र बदलाव किसी न किसी रुप में बदलाव का संकेत अवश्य देता है. मृगशिरा नक्षत्र वृषभ राशि और मिथुन राशि के मध्य आता है. मृगशिरा नक्षत्र

18 जून 2022 को शुक्र के वृष राशि में गोचर से शुक्र का बल वृद्धि पाएगा. शुक्र से जुड़े वस्तुओं में भी वृद्धि देखने को मिलेगी, इस समय पर कुछ अच्छी वस्तुओं की प्राप्ति होगी. आस पास की स्थिति भी भौतिक रुप से समृद्धि होने लगेगी. कुछ अच्छी

शनि देव अपने स्वरुप एवं अपने प्रभाव के कारण सभी के मध्य एक अत्यंत रहस्यमय एवं कठोर देव के रुप में स्थापित हैं शनि देव को सनातन धर्म में एवं ज्योतिष शास्त्र दोनों ही स्थानों पर काफी महत्व प्रदान किया गया है. वैदिक संस्कृति में शनि को नौ