एक लम्बे समय से शनि मकर राशि में गोचर कर रहे हैं. मकर राशि शनि के स्वामित्व की राशि है. शनि का मकर राशि में गोचर करना शनि के कारक तत्वों में वृद्धि करने वाला हो सकता है. शनि के गोचर में शनि ग्रह की चाल का प्रभाव भी बहुत असरदायक रुप से

मंगल ग्रह 06 सितंबर 2021 को कन्या राशि में गोचर करेंगे. मंगल का कन्या राशि प्रवेश एवं गोचर सभी राशियों के जातकों के लिए महत्वपुर्ण होगा और इस के प्रभाव से कुछ राशियों पर अधिक असर दिखाई देगा और कुछ को इससे लाभ की प्राप्ति होगी. मंगल का

सूर्य का प्रत्येक माह में एक राशि से दूरी राशि में प्रवेश अत्यंत महत्वपूर्ण घटना होती है. सूर्य का यह राशि परिवर्तन सौर मास गणना में संक्रांतिकाल भी कहलाता है. कर्क राशि में प्रवेश का समय सूर्य के उत्तरायण से दक्षिणायन जाने का भी होता है.

Venus the planet of beauty, Romance and comfort will now transit in the Zodiac of Sun the most fierce, Passionate and adventurous planet. Venus is transiting in Leo. This transit in Leo will bring in a lot of changes as it is moving from

Mohd. Yusuf Khan alias Dilip Kumar was born on 11th december in the year 1922 in a pashtun family in Peshawar,  the city of flowers, which is now in the territory of Pakistan. He had 12 siblings. His childhood was not the bed of

वर्तमान समय 2021 में गुरु ग्रह का गोचर कुंभ राशि में हो रहा है. कुंभ राशि में गोचर करते हुए गुरु जून माह में इसी राशि में वक्री अवस्था में गोचर करेंगे ओर यह समय सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक सभी क्षेत्रों पर असर डालने वाला होगा. देवगुरु

कन्या राशि ओर बुध के मध्य एक बहुत ही गहरा संबंध है. बुध को कन्या राशि का स्वामित्व प्राप्त है इस कारण से कन्या राशि बुध के अधिकार क्षेत्र में आती है. बुध ग्रह के लिए कन्या राशि उसके लिए मजबूत स्थिति तैयार करती है. बुध के कन्या राशि में

बृहस्पति का कुम्भ राशि में प्रवेश 6 अप्रैल 2021 को होगा. वर्तमान समय में बृहस्पति मकर राशि में गोचर कर रहे हैं. पर 6 अप्रैल 2021 में 00:23 मिनिट पर बृहस्पति का कुम्भ राशि में प्रवेश होगा. इसके साथ ही एक लम्बे समय से चली आ रही गुरु शनि कि

20 नवंबर 2020 को गुरु मकर राशि में वापसी कर रहे हैं. गुरु का अब मकर राशि में आना सभी लोगों पर अलग-अलग रुप से प्रभाव डालने वाला होगा. गुरु के लिए मकर राशि उसकी कमजोर राशि है यहां आकर गुरु के बल में कमी आ जाती है और इसी स्थान पर गुरु नीच

चतुर्ग्रही योग से अर्थ होता है कि जब कोई चार ग्रह एक साथ किसी एक राशि में स्थित हों. इस योग के प्रभाव के फलस्वरुप राशि पर उन सभी चार ग्रहों का प्रभाव होने पर विशेष लक्ष्ण उभरते हैं. कुंडली के किसी भी भाव मे स्थिति चार ग्रहों का योग उन के

शुक्र का गोचर सिंह राशि से निकल कर कन्या राशि में जाना 23 अक्टूबर के दिन संपन्न होगा. कन्या राशि में शुक्र का गोचर होने वाला है. शुक्र ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में धन लाभ देने वाला और सौंदर्य, विलासिता का कारक भी बताया गया है. कुंडली में

बुध ग्रह एक बौद्धिकज्ञान और उचित मार्ग को निर्धारित करने वाला उत्तम स्थान प्राप्त ग्रह है. इस ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवन को चहुंमुखी प्रतिभा से भर देने वाला होता है. बुध ग्र्ह एक प्र्कार की चंचलता और आकर्षण क्षमता से भी युक्त माना गया

सूर्य का कन्या राशि में जाना कन्या संक्रांति के नाम से जाना जाता है. कन्या संक्रांति में सूर्य का पूजन और राशि का पूजन होता है. इस समय पर सूर्य का बुध के स्वामित्व की राशि कन्या में प्रवेश होता है. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को आत्मा

गुरु (बृहस्पति) ग्रह का धनु राशि में मार्गी होने का फल गुरु का ग्रह का किसी भी राशि में गोचर का फल बहुत ही प्रभावशाली होता है. गुरु कहीं भी स्थित हों वह अपने प्रभाव से चारों ओर प्रकाश से उस स्थान को आलौकित करता ही है. इसी प्रकार गुरु ग्रह

बुध की स्थिति ग्रहों में एक कौमल ओर प्रसन्नचित स्वरुप ग्रह की है. बुध की स्थिति व्यक्ति को दिशाज्ञान देने में अत्यंत ही सक्षम ओर सुलभ होती है. बुध का एक राशि से दूसरी राशि में जाना बुध के लिए प्रभावों और उसके कारक तत्वों को प्रभावित करने

वर्तमान में शुक्र का गोचर कर्क राशि में हो रहै, पर जल्द ही शुक्र का प्रवेश सिंह राशि में होगा. शुक्र का सिंह राशि में जाना कुछ न कुछ परिवर्तनों की ओर इशारा करते हुए दिखाई देगा. जिस समय पर शुक्र का गोचर सिंह में जाने पर एक प्रकार की सौम्यता

मंगल का गोचर इस बार मेष राशि से पुन: मीन में होगा और ऎसा इस कारण होगा क्योंकि मंगल वक्री होंगे. मंगल की चाल में बदलाव के कारण वह मेष राशि से निकल कर उलटे मीन राशि में प्रवेश करेंगे. 4 अक्टूबर 2020 को वक्री अवस्था में मंगल मीन राशि में

मंगल का गोचर अर्थात “भ्रमण काल”. मंगल जब किसी राशि में होता है घूम रहा हो उस समय को मंगल के गोचर की संज्ञा दी जाती है. राशि में उसकी स्थिति बहुत मजबूर होती है. ऎसे में जब भी मंगल अपनी मूलत्रिकोण राशि में जाते हैं, तो उस कारण मंगल के मिलने

सिंह संक्रांति का समय अगस्त माह के मध्य समय पर आता है. सिंह संक्रांति सूर्य के सिंह राशि में गोचर करने के समय को कहा जाता है. सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश ही सूर्य संक्रांति होता है. सूर्य संक्रांति के समय पर पूजा स्नान और दान के कार्य

1 सितंबर 2020 को शुक्र का कर्क राशि में प्रवेश होगा. इससे पहले शुक्र मिथुन राशि में गोचर कर रहे होंगे पर सितंबर की शुरुआत के साथ ही शुक्र अपनी चाल में बदलाव करेंगे. इस समय पर शुक्र का कर्क राशि में जाना वृष और तुला राशि के जातकों के लिए