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शंखपाल कालसर्प दोष का ज्योतिषीय आधार (Shankpal Kalsarp Dosh)

Shankpal Kalsarp Doshaराहु केतु को नवग्रहों में छाया ग्रह कहते हैं. इन दोनों ग्रहों का भौतिक अस्तित्व नहीं होने के कारण इसे इस नाम से जाना जाता है. यही दोनों ग्रह जब शेष सातों ग्रहों को अपनी छाया के अंदर ले लेते हैं यानी जब इन दोनों ग्रहों के बीच शेष सातों ग्रह आ जाते हैं तब कालसर्प नामक अशुभ योग बनता है. जिस प्रकार मंगल ग्रह के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम एवं द्वादश में होने पर मांगलिक योग को उसके अशुभ प्रभाव के कारण उसे के नाम से जाना जाता है ठीक इसी प्रकार कालसर्प योग को उसके अशुभ प्रभाव के कारण दोष के रूप में जाना जाता है.

ज्योतिषशास्त्र के विद्वानों ने राहु केतु की स्थिति के अनुसार कालसर्प दोष के कई प्रकार बताएं हैं जिनमें एक है शंखपाल कालसर्प दोष. भारतीय ग्रंथों में जिन प्रमुख नागों का जिक्र आया है उनमें वासुकि, शेषनाग, तक्षक एवं शंखपाल का जिक्र आया है. इन्हीं शंखपाल नाग के नाम पर कालसर्प दोष का चौथा रूप है.

शंखपाल कालसर्प दोष का निर्माण - How Shankpal Kalsarp Dosh forms?
शंखपाल कालसर्प दोष (Shankpal Kalsarp Dosh) जन्मपत्री में उस स्थिति में बनता है जब राहु चौथे घर में बैठा हो और केतु दशवें घर में विराजमान हो. सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरू, शुक्र ये सभी ग्रह एक ही दिशा में एक ही गालर्द्ध में राहु और केतु के बीच बैठै हों. इस कालसर्प दोष (Shankpal Kaalsarp Dosh) में राहु भूमि, भवन, माता से मिलने वाले सुख के घर में होता है जबकि, केतु आजीविका के घर में बैठा होता है.

शंखपाल कालसर्प का फल (Effects of Shankpal Kalsarp Dosh)
यह दोष जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है वह हमेशा एक अनजाने भय से भयभीत रहता है. शिक्षा में बाधाएं आने की गुंजाइश रहती है. यह दोष व्यक्ति को माता से मिलने वाले स्नेह एवं सुख को कम करता है. किसी बात को लेकर माता से विवाद एवं मतभेद की भी आशंका रहती है. बहनों से सम्बन्ध में खटास होने के कारण उनसे मिलने वाले सहयोग में कमी आती है.

इस दोष के कारण व्यक्ति मानसिक उलझनों में घिरा रहता है. मकान एवं भूमि के मामलों में उन्हें नुकसान होने की संभावना रहती है. इन सुखों को पाना इनके लिए कुछ कठिन भी होता है. अगर यह अपना घर खरीद लें अथवा बनवायें फिर भी उसमें रहते हुए इन्हें आत्म संतोष की कमी महसूस होती है.

नौकरी एवं व्यवसाय में इन्हें काफी संघर्ष करना होता है. आजीविका में उतार-चढ़ाव के कारण आर्थिक परेशानियां भी व्यक्ति को महसूस होती है. वाहन सुख के मामले में भी यह दोष बाधक माना जाता है. अधीनस्थों से पूरा सहयोग नहीं मिल पाता है इनके कारण व्यक्ति को कार्य में कठिनाईयों को सामना करना होता है. मित्रों एवं परिजनों के विश्वासघात की भी संभावना बनी रहती है.
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शंखपाल दोष के उपाय (Remedies for Shankpal Kalsarp Dosh)
भगवान शिव अपने गले में नागों की माला धारण करते हैं. नाग जाति भगवान शिव को अपना आराध्य मानते हैं तथा भगवान शिव भी उनके प्रति कृपालु रहते हैं अत: किसी भी प्रकार का सर्प दोष होने पर शिव की शरण में जाना कल्याणकारी होता है. ज्योतिषशास्त्र में शंखपाल कालसर्प (Shankpal Kalsarp Dosh) के उपाय के तौर पर यह कहा गया है कि, जिनकी जन्मपत्री में शंखपाल कालसर्प दोष (Shankpal Kaalsarp Dosh) है उन्हें इस दोष के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए शिवलिंग पर चांदी के सर्प चढ़ाने चाहिए. मां सरस्वती एवं गणपति जी की पूजा से भी शंखपाल कालसर्प दोष का अशुभ प्रभाव कम होता है.

भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को मोर पंख से सजाकर उनकी पूजा करने से शंखपाल कालसर्प दोष (Shankpal Kalsarp Dosh) के कष्ट से मुक्ति मिलती है. शंखपाल कालसर्प दोष (Shankpal Kalsarp Dosh) की शांति हेतु उड़द के आटे का सर्प बनाकर वर्ष भर नियमित उसकी पूजा करने के बाद जल में प्रवाहित कर देना चाहिए.
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