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कृष्णमूर्ति पद्धति और बारहवां स्थान – KP Astrology and Twelfth House

कृष्णमूर्ती पद्धति में नक्षत्रों के आधार पर ज्योतिषी आंकलन किया जाता है. नक्षत्रों पर आधारित होने पर इसमें सभी भाव के नक्षत्र और उपनक्षत्र के स्वामियों का अध्य्यन करने की आवश्यकता होती है. प्रत्येक भाव के नक्षत्र और उस उपनक्षत्र स्वामी का अध्ययन बारीकी से करने पर ज्योतिष की महत्वपूर्ण भविष्यवाणियां की जा सकती हैं. यहां सभी भावों की अपनी एक पहचान और उनके गुण धर्म होते हैं.

जन्म कुण्डली का बारहवां भाव कई तरह के बदलावों और विशेषताओं को दर्शाता है. हर एक भाव का एक दूसरे के साथ ताल मेल ओर निर्भरता का आधार इस प्रकार है जिसके द्वारा जातक को अपने जीवन में हर प्रकार के सुख दुख की अभिव्यक्ति भी प्राप्त होती है. जहां वैदिक ज्योतिष में कुण्डली भाव और उनके स्वामी, ग्रह, कारक, दृष्टि इत्यादि से बहुत सी बातों का विचार किया जाता है. परन्तु कृष्णमूर्ती प्रणाली में सभी भावों तथा ग्रहों के नक्षत्र, उपनक्षत्र तथा उप-उपनक्षत्र स्वामी को अधिक महत्व दिया गया है.

कृष्णमूर्ती पद्धति में वैदिक ज्योतिष के अनुरुप फल भी होते हैं लेकिन उनका निर्णय नक्षत्रों के द्वारा किया जाता है.

प्रथम भाव का उपनक्षत्र स्वामी व्यय भाव अर्थात द्वादश भाव का उपनक्षत्र स्वामी है तो उसे बहुत देर तक सोना पसन्द होता है. आलसी होता है, उसे अकेला रहना पसन्द होता है. वह घूमना -फिरना पसन्द करता है. विदेश जाना जातक का आकर्षण केन्द्र बना होता है. उसकी सोच बैरागियों जैसी होती है.

बारहवें स्थान को व्यय स्थान कहते है. जीवन में सभी प्रकार की कमियों के लिये इस भाव को देखा जाता है. कालपुरुष की कुण्डली में इस भाव में गुरु की मीन राशि होती है. इसलिये इस स्थान को मोक्ष स्थान के रुप में भी देखा जाता है. बारहवें स्थान से शरीर के अंगों में पैरों के तलवे, आँख आदि का ज्ञान होता है.


बारहवें स्थान की विशेषताएं (Specialties of the Twelfth House as per KP Systems)

बारहवां भाव होने के कारण इस भाव से विदेश यात्राएं देखी जाती है. यह भाव बंधन का भाव भी है. हर प्रकार की पांबन्दियां तथा रोक-टोक इस भाव से देखी जाती है. जेल, सजा इत्यादि के लिये बारहवां भाव देखा जाता है. लम्बी अवधि के लिये विदेश में निवास, लम्बी अवधि के लिये अस्पताल में रहना, सभी प्रकार के व्यय, निवेश, धन संबन्धी चिन्ताएं, ऋण का भुगतान, व्यावसायिक हानियां व कार्यक्षेत्र में मिलने वाली असफलता बारहवें घर से देखी जाती हैं. दूसरों को दु:ख देने वाले विषय बारहवें घर से देखे जा सकते है.

लम्बी यात्राएं भी इसी भाव से देखी जाती है. जातक का विदेश में जाना वहां निवास करने कि योजना कितनी सफल रहेगी हम इस भाव से समझ सकते हैं. यह भाव जब अपनी दशा काल में होता है तो इस समय जातक को ट्रैवलिंग पर अधिक रहना पड़ सकता है. किसी न किसी कारण से या तो अपने लिए या दूसरों के लिए उसे यात्राएं करनी पड़ सकती हैं.

इस स्थान से व्यक्ति की विदेश या बाहरी यात्राओं की स्थिति कैसी रहेगी. लम्बी यात्राएं क्या सुखद होंगी या उनमें परेशानियां झेलनी पड़ेंगी इन बातों को समझने के लिए बारहवें भाव की मदद लेनी पड़ती है.


बारहवां भाव और मारक प्रभाव

बारहवां भाव एक प्रकार से संकट और तनाव को दिखाता है. जीवन में किसी भी प्रकार की कमी को देखने के लिए इस भाव के सूक्षम अध्य्यन की जरुरत होती है. यह कुण्डली का ऎसा स्थान है जहां से व्यक्ति की आयु की समाप्ति का विश्लेषण भी किया जा सकता है. एक प्रकार से यह मारक भाव भी बन जाता है. इससे ही किसी व्यक्ति के जीवन में आने वाले संकट और परेशानियों का आगमन होता है. इस की दशा का प्रभाव जीवन में की असफलता और कठीनाई को दिखाने वाला होता है. यह व्यक्ति की निद्रा को भी प्रभावित करता है. जीवन में बढ़ रहे व्यय अर्थात खर्च चाहे वे किसी भी रुप में रहे हों व्यक्ति के सुख-चैन को अवश्य ही प्रभावित करते हैं.

जीवन में होने वाले संकट किसी भी प्रकार की दुर्घटना एवं प्राणों पर संकट आने की स्थिति को हम इसी भाव से समझ सकते हैं. मृत्यु तुल्य कष्ट देने में भी इस भाव की भूमिका होती है. ऎसे में इस भाव से संबंधित नक्षत्र स्वामी की दशा जातक के जीवन में कष्ट ओर व्यर्थ की भागदौड़ ला सकती है.


अन्य विशेषताएं (Other Characteristics of the Twelfth House as per KP Systems)

इस भाव से ज्ञात होने वाली अन्य बातों में गुप्त विद्याएं जैसे तन्त्र-मन्त्र, गुप्त साधनाएं, श्मशान, परलोक इत्यादि विषयों की जानकारी भी बारहवें स्थान से होती है. यह भाव दर्शाता है मोक्ष के महत्व को, इसके द्वारा जातक को जीवन में किस प्रकार से मोक्ष एवं मुक्त्ति का मार्ग मिल पाएगा इसे समझने की जरुरत होगी. कई बार इस स्थन पर केतु के नक्षत्र की स्थिति व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त करने में सहायक बनती है. जातक के स्वयं के प्रयासों से उसे अपने कार्यों की परिणीति भी प्राप्त होती है.

इसके अतिरिक्त यह भाव आराम का घर होता है, जैसा कि हम पहले ही इस बात को बता चुके हैं कि निद्रा व शयन कक्ष के विषय में भी इस घर से जाना जाता है. यहां हमे कितनि शांति मिलेगी और किस प्रकार हम अपना सुकून को पा सकेंगे क्योंकि य्ह ऎसा स्थान है जहां हम मानसिक रुप से अपने लिए कुछ शांति के पल चाहते हैं. पर अगर इस समय पर ही हमें उलझनें मिलें और तनाव बरकरार रहे तो जातक के लिए एक अच्छी नींद प्राप्त कर पाना भी आसान नही हो पाता है.

इस स्थिति को हम इस तरह से भी समझ सकते हैं कि प्रथम भाव का उपनक्षत्र स्वामी व्यय भाव अर्थात द्वादश भाव का उपनक्षत्र स्वामी है तो उसे बहुत देर तक सोना पसन्द होता है. कई बार जातक एकांत भी पसंद होता है. जातक को ट्रैवलिंग करना पसंद आता है. विदेश जाना जातक का आकर्षण केन्द्र बना होता है.


बारहवें भाव से संबन्धित अन्य बातें (Other Information of the Twelfth House as per KP Systems)

बारहवें भाव को विदेशों से संबन्ध का विश्लेषण करने के लिये भी देखा जाता है. द्वादश भाव में मीन राशि होने पर उसमें केतु की उपस्थिति मोक्ष दिलाने वाली कही गई है. इस भाव से छोटे-भाई बहनों का प्रमोशन देखा जाता है तथा भाई-बन्धुओं के सम्मान के लिये भी इस भाव का विचार किया जाता है.

माता की विदेश यात्राओं के लिये बारहवें भाव को देख सकते हैं. संतान की चिन्ताओं व परेशानियों को जानने के लिये यह भाव देखा जा सकता है. जीवनसाथी के साथ वैवाहिक जीवन में आ रही दिक्कतों को समझने के लिये यह भाव सहयोगी हो सकता है. बारहवें भाव से प्रतियोगिताओं में सफलता का भी विचार किया जाता है.


घर में स्थान (Place of the Twelfth House in the Home as per KP Systems)

बारहवें स्थान को घर के आस-पास की जगहों के रुप में देखा जाता है. जातक का बाहरी माहौल कैसा है उसकी अभिव्यक्ति भी हमें इस भाव से समझने में मिलती है. कई बार बाहरी रुप से स्थितियां हमारे लिए बहुत अधिक अनुकूल नही हो पाती हैं या इसके विपरित हमें बाहरी माहौल अधिक अनुकूल लगता है और हम घर से अधिक बाहर रहना पस्म्द करते हैं. इन सभी बातों को समझने के लिए हमें इस भाव को समझने की आवश्यकता होती है.

बारहवें भाव की दशा और उसकी स्थिति को जानकर उसके नक्षत्र स्वामी ओर उप नक्षत्र की स्थिति को देख कर इस भाव से मिलने वाले शुभाशुभ फलों की जान पाने में सफलता प्राप्त हो सकती है. कृष्णमूर्ती के द्वारा हम भावों की शक्ति को नक्षत्र के प्रभाव एवं उसके गुणों से और भी अधिक बेहतर रुप में जान सकते हैं.

Article Categories: KP Astrology