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कृष्णमूर्ति पद्धति और दशम भाव – KP Astrology and Tenth House

जन्म कुण्डली में दशम भाव से काम यानी कर्म क्षेत्र के बारे में पता चलता है. जीवन में कार्य क्षेत्र में आप किस प्रकार अपनी ओर से प्रयत्न करते हैं और कैसे आप इस स्थिति के सामने अपने जीवन को किस प्रकार बेहतर रुप में आगे ले कर चल पड़ते हैं. कुंडली के दसवें घर से जातक के काम काज और व्यवसाय में आने वाले उतार चढा़वों का पता चल पाता है. कार्य क्षेत्र से संबंधित उतार-चढ़ाव और सफलता व असफलताएं व्यक्ति के जीवन को प्रभावित भी करता है. जातक अपने व्यवसायिक क्षेत्र में कितनी सफलताएं उसके आगे आएंगी या उसे कब अपने जीवन में असफलताएं दिखाई देती हैं इन बातों को जानकर ही व्यक्ति अपने लिए बेहतर भविष्य निर्माण को कर सकता है.

दशम भाव को कर्म स्थान के नाम से भी जाना जाता है. शरीर के अंगों में दशम भाव घुटनों का प्रतिनिधित्व करते है. घुटनों में होने वाली किसी भी तरह की पीडा का सम्बन्ध शनि देव व दशम भाव से होता है. शनि देव को कर्म करने के लिये प्रेरित करने वाला ग्रह कहा जाता है. यह भाव कर्म भाव होने के कारण व्यक्ति कि मेहनत संघर्ष का उल्लेख करता है. धन कमाने के लिये किया गया कोई भी कार्य दशम भाव से देखा जाता है.


दशम भाव की विशेषताएं:(Specialties of the Tenth House as per K P Systems)

यह भाव काम कि सफलता के लिये भी देखा जाता है. इस भाव से व्यक्ति के कार्यक्षेत्र का विश्लेषण किया जाता है तथा सफलता प्राप्ति के लक्ष्य को पाने के लिये व्यक्ति की चाह भी इसी घर से देखी जाती है.

दशम भाव से हर प्रकार का सम्मान देखा जा सकता है. व्यक्ति अपने काम के कितना कुशल होगा और किसी प्रकार उसे जीवन में सफलता के साथ साथ सम्मान की भी प्राप्ति हो सकेगी ये बातें हमें दशम भाव की गणना से ही आती है. दसवें भाव में ग्रहों की स्थिति एवं राशि के प्रभाव से व्यक्ति के काम में उत्पन्न होने वाले गुण दोषों को जाना जा सकता है. जातक को मिलने वाले अधिकार इत्यादि की जानकारी भी इस भाव से मिलती है.

दशम भाव सत्ता पक्ष का भाव भी कहा जाता है. इस भाव के अधिकार से ही कोई व्यक्ति राजनिति में अपने स्थान को बेहतर ढंग से जान सकता है. अधिकार व अधिकारों का प्रयोग करने की प्रवृति भी दशम भाव से देखी जाती है. राजनीति के क्षेत्र में यहां शनि की स्थिति भी मजबूत होने पर सत्ता पर जातक की अच्छी पकड़ भी बन सकती है.

दशम भाव से हमारे कर्म हैं. ऎसे में जब जन्म कुण्डली से मृत्य के बारे में जाना जाता है तो कहा जाता है की दशम भाव के स्वामी की दशा भी देखी जा सकती है, क्योंकि ये हमारे कर्मों के समापन को दिखाती है. कर्म की समाप्ति ही जीवन कि भी समाप्ति होती है.


दशम भाव से विचार की जाने वाली अन्य बातें:(Other Information of the Tenth House as per K P Systems)

इस भाव से देखी जाने वाली अन्य बातों में अधिकारी व सत्ता पद पर आसीन उच्च अधिकारियों का नाम लिया जाता है जैसे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सरकार, सरकारी दफ्तर. जबकि राजनीति में विपक्षी पक्ष के लिए चतुर्थ भाव को देखा जाता है.

इस भाव की जानकारी में जातक को अपने जीवन में आने वाले उतार-चढा़व भी देखने को मिलते हैं. सत्ता के गलियारों की चमक से लेकर आपके जीवन में फैशन, कला विज्ञान इत्यादि में अपनी भूमिका को समझने के लिए इस भाव को समझना पड़ता है.


दशम भाव में ग्रहों का प्रभाव

सूर्य ग्रह

दशम भाव में सूर्य बली होता है, सूर्य व्यवसाय व नौकरी के लिए शुभ माना जाता है. व्यक्ति साहस और उत्साह के साथ काम भी करता है. उच्च पद पर आसिन व सरकार से पद पाने वाला बनता है. इस भाव में सूर्य की स्थिति जातक को सरकारी क्षेत्र में सहयोग देने वालि होती है.


चंद्रमा ग्रह

दसवें भाव में चंद्रमा की राशि स्थिति या स्वयं के होने के कारण जातक अपने काम को बेहतर काम करने वाला बनता है. अपने काम में एक प्रकार से बेहतर काम करने वाला होता है और लोगों के मध्य सम्मान भी मिल पाता है.


मंगल ग्रह

मंगल की दशम भाव में स्थिति भी अनुकूल मानी जाती है. व्यक्ति साहस के साथ अपने कामों में आगे बढ़ता जाता है. अपने काम में वह परिश्रम में कमी नही करता है. जातक ऎसे क्षेत्र में बेहतर कर सकता है जो काम जमीन एवं संपत्ति से जुड़े होते है. इस काम में मंगल को पृथ्वी से जुड़ा माना है ऎसे में भूमि से संबंधित काम उसके लिए सकारात्मक होते है.


बुध ग्रह

बुध राशि स्वामी या ग्रह होने पर व्यक्ति को ऎसी चीजों की ओर आकर्षित करता है जिनमें शारीरिक बल के बदले मानसिक बल की मांग ज्यादा हो. बौद्धिकता से संपन्न काम में जातक को सफलता प्राप्त होती है. इसके प्रभाव से व्यक्ति को लेखन एवं शिक्षण इत्यादि क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं.


बृहस्पति ग्रह

दसवें घर में बृहस्पति भी उच्च स्तर के कार्य की ओर व्यक्ति का झुकाव लाता है. व्यक्ति के समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाने में भी सहायक बनता है. इसमें जातक अपनी बुद्धि विवेक से काम करते हुए आगे बढ़ता है. नान टेक्निकल काम में ज्यादा रुचि ले सकता है.


शुक्र ग्रह

शुक्रे के दसवें भाव में राशि स्वामी या ग्रह होने पर का फल जातक को कला के क्षेत्र से धन कमाने के लिए प्रेरित करता है. संगीत और कला क्षेत्र में व्यक्ति के भीतर लगाव भी बहुत गहरा होता है. इसके अलावा फैशन से संबंधित काम भी उसे प्रभावित कर सकते हैं.


शनि ग्रह

जातक को ऎसे क्षेत्रों में काम करने की चाह होती है जो सेवा से जुड़े होते हैं. शनि का प्रभाव राजनीति का काम देता है. शनि की राशि और शनि की उपस्थिति एवं शनि नक्षत्र का प्रभाव जातक को भागदौड़ अधिक देता है.


राहु - केतु

राहु-केतु के प्रभाव से व्यक्ति को टेक्निकल से जुड़े काम मिल सकते हैं. अपने कार्य क्षेत्र में उसे अधिक प्रयास भी करने पड़ते है. विरोधियों को दबाने में सक्षम हो सकता है. आपने काम के लिहाज से वह यात्राएं भी कर सकता है. विदेश संबंधी कार्य भी उसके काम में आते हैं.


सम्बन्धित लोगों के लिए दशम भाव का फल: (Results of the Tenth House for Your Friends and Relatives as per K.P.Systems)

छोटे भाई-बहनों की दुर्घटनाओं के लिए दशम भाव का विश्लेषण किया जाता है. दशम भाव आजिविका का भाव है होने के साथ ही साथ भाव नवम से द्वितिय भाव होने के कारण पिता के संचित धन का घर भी माना जाता है. संतान की बीमारियों को समझने के लिये दशम भाव का प्रयोग किया जा सकता है. जीवनसाथी को वाहन मिलेगा अथवा नहीं इस विषय में भी नवम भाव का विचार किया जाता है. घर खरीदने से पूर्व इस घर पर भी ग्रहों का प्रभाव देखना चाहिए. बडे भाई-बहनों की विदेश यात्रा का संबन्ध दशम घर से होता है. देश की राजनीति का आपके जीवन पर प्रभाव का आंकलन भी दशम घर से किया जाता है. राजनैतिक व्यवस्था के लिये भी यह भाव देखा जाता है. कारोबार की तरक्की का संबन्ध भी दशम घर से होता है.


दशम भाव से घर के स्थानों का विचार:- (Place of the Tenth House in the Home as per K.P.Systems)

घर की छत को दशम भाव का स्थान माना जाता है. यह एक ऎसा स्थान है जो जीवन को वो संभाले रख सकने में बहुत सहयोगात्म्क है.

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