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कृष्णमूर्ति पद्धति और षष्टम भाव – KP Astrology and Sixth House

जन्म कुण्डली का छठा भाव एक प्रकार से दु:स्थान भी होता है. इस भाव की राशि, ग्रह प्रभाव इत्यादि के कारण जातक को जीवन में कई तरह के उतार-चढा़व बने ही रहती हैं. इस भाव का प्रभाव जातक को विरोधियों, बीमारी और कर्ज की स्थिति से रुबरु कराता है. कृष्णमूर्ति पद्धति में इस भाव और इसमें बैठे ग्रह नक्षत्र एवं राशि नक्षत्र के आधार पर सूक्ष्म विवेचन द्वारा जातक के जीवन की घटनाओं को समझ कर फलादेश किया जाता है.

जन्म कुण्डली में छठे भाव को ऋण भाव के नाम से भी जाना जाता है. शरीर के अंगों में इस भाव से पेट, पाचन तंत्र आदि देखा जाता है. इसलिए इस घर को पेट से होने वाली बीमारियों का विचार किया जाता है. इस घर के स्वामी के पीड़ित होने पर व्यक्ति के रोग ग्रस्त होने की संभावनाएं बनती है. चिकित्सा शास्त्र के अनुसार भी पाचन-तन्त्र में परेशानी हुए बिना स्वास्थ्य में खराबी आने की संभावनाएं कम ही रहती है.

छठे भाव को समझने के लिए आवश्यक है की इसकी मुख्य बातों को समझा जाए. जब हम किसी चीज की रचना को समझ जाते हैं तो उससे प्राप्त प्रभाव को बेहतर रुप में समझ सकते हैं.


छठे घर की विशेषताएं: (Specialities of the Sixth House as per K P Systems)

छठे घर से काम के प्रति समर्पण, काम करने का तरीका, नौकरी में स्थायित्व तथा खाने-पीने के आदतों की वजह से होने वाली बीमारियों का आंकलन किया जाता है. जातक की बीमारी जल्द से ठीक होगी या समये लगेगा इस बात को समझने एक लिए इस भाव की स्थिति को देखा जाता है. इस भाव के प्रभाव में यदि लग्न ग्रसित होता है तो जातक की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और कमजोर होने के कारण जातक व्यक्ति जल्द ही रोगों के प्रभाव में आ सकता है.

छठा घर कोर्ट-कचहरी का होने के कारण जिस भाव का स्वामी इस घर में स्थित होता है. उस भाव से जुडे सम्बन्ध के कारण कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ता है जैसे:- तीसरे घर का स्वामी, जन्म कुण्डली में अगर छठे घर में हो तथा भाईयों से सम्बन्ध मधुर न हो तो, किसी मामले को लेकर कोर्ट-कचहरी में जाने की स्थिति बन सकती है. छठे घर से प्रतिस्पर्धाओं का विचार किया जाता है. खेल में जीतना, चुनाव में जीतना, तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए भी इसी घर को देखा जाता है.

इसी प्रकार नौकरी के क्षेत्र में भी इस भाव से संबंधित फलों को देखा जाता है. जीवन में मिलने वाली पहली नौकरी को इसी से देखा जा सकता है. यह भाव स्पर्धा का भाव है और जीवन में होने वाली अनेक प्रतियोगिताओं में आप किस प्रकार विजयी होंगे ओर आपको इस क्षेत्र में कैसे लाभ मिलेगा ये बातें समझने के लिए बहुत छठे भाव की आवश्यकता प्राप्त होती है.

इसी प्रकार लग्न का संबंध जब षष्ठम भाव और अष्टम भाव से होता है तो इस स्थिति में जातक को असाध्य रोग होने की संभावना भी अधिक हो जाती है. इस स्थान पर मंगल जैसे पाप ग्रह के होने से व्यक्ति में संघर्ष से लड़ कर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति भी जन्म लेती है.


छठे भाव में स्थित ग्रह

सूर्य -कुण्डली के छठे भाव में सूर्य की स्थिति जातक को कष्ट और परेशानी देने वाली होती है. जीवन में वाद-विवाद और तनाव की स्थिति झेलनी पड़ सकती है.


चंद्रमा -चंद्रमा का छटे भाव में होना व्यक्ति के लिए परेशानी और रोग की संभावना में वृद्धि करने वाला होता है. मानसिक रुप से चिंताएं अधिक घेरे रहती हैं.


मंगल -छठे भाव में मंगल का प्रभाव व्यक्ति को साहसी बनाता है. जातक अपने विरोधियों को समाप्त कर सकने कि क्षमता रखता है. व्यक्ति अपने रोग एवं शत्रु को समाप्त करने के काबिल भी होता है.


बुध - छठे भाव में बुध के होने से, जातक व्यर्थ के वाद विवाद से ग्रस्त रह सकता है. मित्रों के साथ अनबन झेलनी पड़ सकती है. त्वचा से जुड़े रोग प्रभावित कर सकते हैं.


बृहस्पति -छठे भाव में बृहस्पति के होने से जातक को संघर्ष अधिक करना पड़ता है. अपने लोगों का विरोध भी सहन करना पड़ सकता है.


शुक्र -छठे भाव में शुक्र होने के कारण व्यक्ति नशे से जल्द ही प्राभ्वित हो सकता है. मित्रों की संख्या भी अधिक होती है.


शनि -शनि का छठे भाव में होना व्यक्ति को रोग दे सकता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है.


अन्य बातें: (Other Information as per K P Systems)

इस घर से देखी जाने वाली अन्य बातों में सफाई, सफाई विभाग, मजदूर यूनियन, नौकर, दुश्मनी, परेशानियां, ऋण, ओवर ड्राफ्ट सुविधा तथा पालतू पशुओं का विचार किया जाता है. ये भाव उन स्थितियों को दर्शाता है जहां संघर्ष अधिक करने की आवश्यकता होती है. किसी भी काम को जातक कितनी सक्ष्मता से आगे बढ़ते हुए ले जाता है वह हमे इस भाव के द्वारा पता चल पाता है.


इस घर से संबन्धित लोगों से मिलने वाले फल: (Results from Other People are Related to this House as per K P Systems)

छठा घर, तीसरे घर से चतुर्थ घर होने के कारण इस घर से छोटे-भाई बन्धुओं की भौतिक सुख-सुविधाओं को देखा जाता है. इस घर से इनकी शिक्षा भी देखी जाती है. भाईयों के द्वारा घर या वाहन लेने की संभावनाओं का विचार भी इसी घर से होता है. छोटी यात्राएं, घर बदलना, संतान की आर्थिक स्थिति, जीवनसाथी का विदेश जाना, पिता का मान-सम्मान, शोहरत का विचार भी इस घर से किया जाता है.

इस भाव में व्यक्ति को अपने घर, सुख, का , किसी पर विजय पाने इत्यादि बातों के लिए इस भाव की मदद चाहिए होती है. यहां स्थिति कोई शुभ ग्रह अपने प्रभाव से हार सा जाता है. उसकी स्थिति कमजोर हो जाती है और अपनी शुभता को नहीं दे पाता है.


छठे भाव का घर में स्थान:(Place of the Sixth House in the Home as per K P Systems)

अनाज या पका हुआ खाना रखने की जगह, नौकरों का कमरा, जानवरों के रहने का स्थान घर में छठे भाव का स्थान माना जाता है. प्रश्न लग्न में खोई हुई वस्तु का संबन्ध इस भाव से आने पर वस्तु को इन स्थानों पर तलाशने से खोई वस्तु मिलने की संभावना रहती है.

छठा घर, सप्तम भाव का व्यय स्थान होने के कारण जीवनसाथी के व्ययों की जानकारी देता है. वैवाहिक मामलों को लेकर कोर्ट-कचहरी में जाने की संभावनाएं इस घर से देखी जाती है. साझेदारी व्यापार का टूटना भी इस घर का प्रभाव होता है.

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