ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य के जीवन पर बारह राशियों का महत्वपूर्ण प्रभाव होता है. इन्हीं बारह राशियों के आधार पर जन्म नाम का निर्धारण होता. जन्म कुण्डली में चन्द्रमा जिस राशि में स्थित होता है, वह राशि चन्द्र राशि होती है. इसे जन्म राशि के नाम से भी जाना जाता है और इसे “नाम राशि” की संज्ञा भी दी जाती है. ज्योतिष के अनुसार सत्ताईस नक्षत्र माने गए हैं इन नक्षत्रों के चार चरण होते हैं. इस प्रकार जन्म के समय जिस नक्षत्र का जो चरण होता है, उसी नक्षत्र चरण अक्षर से जो नाम राशि बनती है, वह जन्म राशि कहलाती है.
जन्म राशि के आधार पर शादी-ब्याह, सभी मंगल कार्यं, ग्रहों के शुभ-अशुभ प्रभाव और वास्तविक स्थिति पर विचार किया जाता है. हिन्दू धर्म संस्कारों में नामकरण इसी राशि नाम से जुड़ हुआ है. नाम के साथ मनुष्य का घनिष्ठ सम्बन्ध रहता है. नाम से संबंधित राशि का प्रभाव व्यक्ति पर अवश्य पड़ता है. सभी राशियों का अलग-अलग प्रभाव और स्वभाव होता है. इसी के अनुसार सभी ग्रह और नक्षत्र हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं. कौन-कौन से नाम अक्षर किस राशि के लिए उपयुक्त होते हैं वह इस प्रकार हैं –
राशि और नाम | Astrological signs and Names
मेष राशि | Aries Sign
मेष राशि भचक्र की पहली राशि होती है. यह अग्नि तत्व राशि है, इसका स्वामी मंगल अग्नि ग्रह है, मेष राशि के जातक ओजस्वी, साहसी तथा दृढ इच्छाशक्ति वाले होते हैं. मेष राशि वाले व्यक्तियों के नाम के अक्षर की शुरूआत चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ अक्षर से होती है.
वृष राशि | Taurus Sign
वृषभ राशि दूसरी राशि है. यह पृथ्वी तत्व राशि है अत: इस राशि के जातकों में सहन शक्ति अच्छी होती है तथा यह लोग व्यवहारिक होते हैं. इस प्रकार के लोग सामाजिक होते हैं और अन्य लोगों को आदर की नजर से देखते है तथा सत्कार करने में हमेशा आगे रहते हैं. इनके नाम के अक्षर की शुरुआत ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो अक्षरों से होती है.
मिथुन राशि | Gemini Sign
मिथुन राशि तीसरी राशि है यह द्विस्वभव वाली राशि होती है. इस राशि के जातक में बहुमुखी प्रतिभा होती है. कार्य को जल्दी और चतुरायी से करने की क्षमता रखते हैं. संवेदनशीलता और चंचलता इनके व्यक्तित्व में समाहित है. इनके नाम के अक्षर की शुरुआत – का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह जैसे अक्षरों से होती है.
कर्क राशि | Cancer Sign
राशि चक्र की चौथी राशि है. कर्क रशि वालों में अपने विचारों के प्रती दृढ़ रहने की शक्ति होती है. इनमें अपार कल्पना शक्ति होती है, स्मरण शक्ति बहुत तीव्र होती है, इनके नाम के अक्षर की शुरुआत -ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो अक्षरों से होती है.
सिंह राशि | Leo Sign
यह राशिचक्र की पांचवीं राशि है. इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं, शाही जीवन जीना पसंद होता है. मर्यादा मे रहना अच्छा लगता है और निड़र होते हैं. इस राशि के नाम के अक्षर की शुरुआत- मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे जैसे अक्षरों से होती है.
कन्या राशि | Virgo Sign
यह भचक्र की छठी राशि है. इस राशि के जातक दिमाग की अपेक्षा ह्रदय से काम लेना अधिक पसंद करते हैं. इस राशि के लोग संकोची और शर्मीले स्वभव के होते हैं. इस राशि के नाम के अक्षर की शुरूआत – ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो अक्षरों से होते हैं.
तुला राशि | Libra Sign
यह भचक्र की सातवीं राशि है. तुला राशि के जातक आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं. जीवन की कठिन परिस्थितियों को भी सहजता से लेते है. इस राशि का जातक सुलझा हुआ होता है तथा कूटनितिज्ञता से युक्त होता है. निर्णय लेने से पूर्व खूब सोच-विचार कर लेना उचित समझते है. इस राशि के नाम अक्षरों की शुरुआत रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते अक्षरों से होती है.
वृश्चिक राशि | Scorpio Sign
यह आठवीं राशि है. इस राशि के जातकों का स्वभाव रहस्यमयी होता है. इस राशि के व्यक्ति गहरी भावनाओं से युक्त होते है. इस राशि के व्यक्ति सोच विचार कर बोलने वाले होते हैं. इस राशि के नाम अक्षरों की शुरुआत – तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू अक्षरों से होती है.
धनु राशि | Sagittarius Sign
यह राशिचक्र की नवीं राशि होती है. इस राशि के जातक में फुर्तीलापन देखा जा सकता है. ओज पूर्ण एवं आशावादी होते है. उत्तम वक्ता और सक्रिय रहते है. इस राशि के नाम अक्षरों की शुरुआत – ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे अक्षरों से होती है.
मकर राशि | Capricorn Sign
यह राशिचक्र की दसवीं राशि है. इस राशि के जातक व्यवहारिक होते हैं. मजबूते इरादों वाले तथा आगे बढने की उच्च महत्वकांक्षा से पूर्ण होते हैं. इनमें जीवन शक्ति की अधिकता होती है. परिस्थितियों से समझौता करने में कुशल होते हैं. इस राशि के नाम अक्षरों की शुरुआत – भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी अक्षरों से होती है.
कुंभ राशि | Aquarius Sign
यह भचक्र की ग्यारहवीं राशि है.इस राशि के जातकों को स्वतन्त्र रुप से कार्य करना पसन्द होता है. इनमें अच्छे मित्र बनने का गुण विद्यमान होता है. इस राशि के नाम अक्षरों की शुरुआत – गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा जैसे अक्षरों से होती है.
मीन राशि | Pisces Sign
यह भचक्र की बारहवीं राशि है. इस राशि के जातक धार्मिक, भगवान से डरने वाले होते है. इनके भितर संयमी, रुढीवादी, अन्तर्मुखी एहसास देखा जा सकता है. इस राशि के नाम अक्षरों की शुरुआत – दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची अक्षरों से होती है.
दशमांश कुण्डली को D – 10 कुण्डली भी कहा जाता है. दशमांश कुण्डली का उपयोग व्यवसाय मे उन्नति , प्रतिष्ठा, सम्मान और आजीविका में बढोत्तरी, समाज में सफलता प्राप्त करने इत्यादि को देखने के लिए किया जाता है. दशमांश कुण्डली की विवेचना भी उतनी ही आवश्यक हो जाती है जैसे लग्न या नवांश कुण्डली की. इस कुण्डलि में दशम भाव दशमेश का सर्वाधिक महत्व है. इसके साथ ही साथ दश्मांश से माता पिता के सुख दुख एवं आयु का विचार होता है.
जन्म कुण्डली के पंचम भाव से संतान के बारे में पूर्ण रुप से विवेचन किया जाता है. इसी पंचम भाव के सूक्ष्म अध्ययन के लिए वैदिक ज्योतिष में सप्तांश कुण्डली का आंकलन किया जाता है. जन्म कुण्डली का पंचम भाव 30 अंश का होता है. इस 30 अंश को सात बराबर भागों में बाँटकर सप्ताँश कुण्डली बनाई जाती है.
द्वादशांश को D-12 कुण्डली भी कहा जाता है. द्वादशांश कुण्डली द्वारा माता-पिता के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है. इस कुण्डली का अध्ययन करने से माता पिता के जीवन के उतार चढावों के बारे में जानकारी मिलती है. इसके साथ ही साथ इससे हमें आयु के बारे में भी जानकारी प्राप्त होती है. द्वादशांश कुण्डली बनाने के लिए 30 अंश के 12 बराबर भाग किए जाते हैं. इसका प्रत्येक भाग 2 अंश 30 मिनट का होता है. इस प्रत्येक भाग द्वारा फल कथन करना आसान होता है और व्यक्ति के चरित्र एवं उसके अनेक पहलुओं पर विचार किया जाता है.
वैदिक ज्योतिष में नवमांश कुण्डली को कुण्डली का पूरक माना गया है. यह एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कुण्डली मानी जाती है क्योंकि इसे लग्न कुण्डली के बाद सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. जहां लग्न कुण्डली देह को दर्शाती है वहीं नवमांश कुण्डली आत्मा को अभिव्यक्त करती है. पराशर संहिता अनुसार व्यक्ति की जन्म कुन्डली का संबंध नवांश कुण्डली के साथ उचित प्रकार से बन जाता है तो वर्गोत्तम नवमांश बनता है और ऎसा होने पर व्यक्ति को अच्छे फलों की प्राप्ति होती है.
वैदिक ज्योतिष द्वारा हम कुण्डली में स्थित शिक्षा के योग के बारे में भी जान सकते हैं. जातक की शिक्षा कैसी होगी और वह शैक्षिक योग्यता में किन उचाइयों को छूने में सक्षम हो सकेगा. आज के समय में सभी अपनी शिक्षा में उच्च शिखर पाने की चाहत रखते हैं. माता पिता भी संतान की शिक्षा को लेकर चिन्तित देखे जा सकते हैं. वर्तमान समय में विद्या के क्षेत्र में बहुत बदलाव आया है.
गृहस्थ जीवन में सुख की चाह हर व्यक्ति के मन में समाई हुई होती है. जीवन का सच्चा सुख व्यक्ति को हर राह पर आगे ही लेकर जाता है परंतु परिवार में व्याप्त कलह – कलेश व्यक्ति के जीवन को कठीनाईयों एवं परेशानियों से भर देते हैं. इसी गृह कलेश से बचने के लिए ज्योतिष में कई प्रकार के उपाय दिए गए हैं जिनका उपयोग करने से जीवन को सुखमय एवं खुशहाल बनाया जा सकता है.
चिकित्सा ज्योतिष के विषय में ज्योतिष शास्त्र में बहुत कुछ लिखा गया है. कुछ नियम पुराणों में भी दिए गए हैं. विष्णु वेद-पुराण के अनुसार भोजन करते समय जो नियम दिए गए हैं वह हमें बताते हैं कि भोजन करते समय व्यक्ति को अपना मुख पूर्व दिशा या उतर दिशा में रखना चाहिए और ऎसा इसलिए क्योंकि उससे पाचन क्रिया अनुकूल बनी रहती है.
व्यवसाय में कैसी स्थिति रहेगी इस विषय का आंकलन ज्योतिष द्वारा किया जा सकता है. ग्रहों की किस प्रकार की दृष्टि, युति या स्थान परिवर्तन कैसा हो रहा है, इन सभी तथ्यों के आधार पर कारोबार में सफलता-असफलता एवं लाभ हानि को ज्ञात किया जा सकता है. जन्म कुण्डली के अनुसार व्यक्ति में कार्यनिष्ठा का भाव देखने के लिये दशम घर से शनि का संबन्ध देखा जाता है.