ग्रहों के गोचर समय और इसका प्रभाव

ग्रह गोचर का महत्व भारतीय ज्योतिषशास्त्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। ग्रहों का गोचर हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव डालता है। जब ग्रह अपनी कक्षा में किसी विशेष स्थान से गुजरते हैं, तो उनके प्रभाव का आकलन किया जाता है और उन प्रभावों के अनुसार हम अपने जीवन के बारे में निर्णय लेते हैं। ग्रहों के गोचर समय और उनके प्रभाव को समझने के लिए, हमें हर ग्रह के गोचर के दौरान होने वाले परिवर्तनों को समझना जरूरी है।

चंद्र ग्रह (2.5 दिन, 54 से 60 घंटे)

चंद्र ग्रह की गति सबसे तेज होती है और यह लगभग 2.5 दिन (54 से 60 घंटे) में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश कर जाता है। चंद्रमा मन, मानसिक स्थिति, भावनाओं और मानसिक संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। जब चंद्रमा किसी राशि से गुजरता है, तो उस राशि के स्वामी ग्रहों का प्रभाव उस समय विशेष रूप से महसूस होता है।

प्रभाव:

  • चंद्रमा का गोचर: चंद्रमा का गोचर मानसिक स्थिति और भावनाओं पर प्रभाव डालता है। यदि चंद्रमा शुभ ग्रह के साथ हो, तो यह मानसिक शांति, संतुलन और आनंद लाता है। वहीं यदि चंद्रमा अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो, तो यह मानसिक तनाव, चिंता और परेशानी का कारण बन सकता है।
  • मनोबल में वृद्धि या कमी: चंद्र ग्रह के प्रभाव से व्यक्ति का मनोबल बढ़ सकता है, यदि वह शुभ ग्रहों से संपर्क करता है। वहीं, किसी बुरे ग्रह से संपर्क करने पर यह उथल-पुथल और मानसिक अस्थिरता का कारण बन सकता है।

मंगल ग्रह (45 दिन)

मंगल ग्रह लगभग 45 दिनों में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। मंगल युद्ध, साहस, उर्जा और उत्साह का प्रतीक है। यह ग्रह युद्ध और संघर्ष की स्थिति में भी महत्वपूर्ण होता है।

प्रभाव:

  • साहस और उत्साह में वृद्धि: मंगल का गोचर व्यक्ति में साहस और उत्साह को बढ़ाता है। यह समय कार्यों को तेजी से करने और कोई नया साहसिक कार्य आरंभ करने के लिए शुभ होता है।
  • संघर्ष और टकराव: यदि मंगल किसी अशुभ स्थान से गुजर रहा है, तो यह संघर्ष, तकरार और मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। इस समय पर व्यक्ति को अपने गुस्से और क्रोध पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता होती है।

बुध ग्रह (21 दिन)

बुध ग्रह लगभग 21 दिन में अपनी राशि बदलता है। यह ग्रह संवाद, तर्कशक्ति, बुद्धि, व्यापार और संचार का प्रतिनिधित्व करता है। बुध का गोचर बातचीत और निर्णय लेने की क्षमता पर प्रभाव डालता है।

प्रभाव:

  • बुद्धिमत्ता में वृद्धि: यदि बुध शुभ ग्रहों के साथ गोचर करता है, तो यह व्यक्ति की तर्कशक्ति और बुद्धिमत्ता में वृद्धि कर सकता है। यह समय अच्छे निर्णय लेने और संवाद में सफलता प्राप्त करने के लिए उपयुक्त होता है।
  • व्यापार में सफलता: व्यापारिक मामलों में बुध का गोचर लाभकारी हो सकता है, खासकर यदि वह शुभ ग्रहों से प्रभावित हो। वहीं यदि बुध अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो, तो व्यापार में समस्याएं और गलतफहमियां हो सकती हैं।

बृहस्पति ग्रह (12 महीने)

बृहस्पति ग्रह का गोचर लगभग 12 महीनों में एक राशि से दूसरी राशि में होता है। बृहस्पति शिक्षा, ज्ञान, शुभता और समृद्धि का प्रतीक है। यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव और तरक्की लाने वाला ग्रह माना जाता है।

प्रभाव:

  • आध्यात्मिक उन्नति: बृहस्पति का गोचर व्यक्ति को आध्यात्मिक दृष्टि से मजबूत बना सकता है। यह समय धार्मिक कार्यों और उच्च शिक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए उपयुक्त होता है।
  • समृद्धि और खुशहाली: बृहस्पति का शुभ गोचर वित्तीय स्थिति में सुधार और समृद्धि का कारण बन सकता है। इसके प्रभाव से जीवन में खुशहाली और सुख-शांति का अनुभव होता है।

शुक्र ग्रह (26 दिन)

शुक्र ग्रह लगभग 26 दिनों में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। शुक्र ग्रह प्रेम, सौंदर्य, कला, विवाह और समर्पण का प्रतीक है। यह ग्रह सुख-संस्कृति और संबंधों का संकेतक होता है।

प्रभाव:

  • प्रेम और संबंधों में वृद्धि: शुक्र का गोचर व्यक्ति के प्रेम जीवन और संबंधों में सुधार कर सकता है। यह समय विवाह, संबंधों को मजबूत करने और नए दोस्ती बनाने के लिए उपयुक्त होता है।
  • आध्यात्मिकता और कला में रुचि: शुक्र का गोचर कला, संगीत, और साहित्य में रुचि को बढ़ा सकता है। यह समय सौंदर्य के प्रति आकर्षण और भौतिक सुखों का अनुभव करने के लिए शुभ होता है।

शनि ग्रह (2.5 वर्ष, 30 महीने)

शनि ग्रह लगभग 2.5 वर्षों में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। शनि ग्रह कर्म, न्याय, कड़ी मेहनत और समय का प्रतीक होता है। यह ग्रह व्यक्ति के जीवन में कठिनाई और चुनौतियां ला सकता है, लेकिन यह इन चुनौतियों का सामना करने पर व्यक्ति को मजबूत बनाता है।

प्रभाव:

  • कड़ी मेहनत और चुनौतियां: शनि का गोचर व्यक्ति को कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देता है। यह समय चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन यह समय आत्मनिर्भर बनने और जीवन के कठिन पहलुओं का सामना करने का होता है।
  • कर्म का फल: शनि के गोचर के दौरान व्यक्ति को उसके पिछले कर्मों का फल मिलता है। यदि व्यक्ति ने अच्छे कर्म किए हैं, तो उसे सफलता और सम्मान मिलता है, लेकिन यदि उसने बुरे कर्म किए हैं, तो उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

सूर्य ग्रह (30 दिन, एक महीना)

सूर्य ग्रह लगभग 30 दिनों में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। सूर्य आत्मा, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और पिता का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रभाव:

  • आत्मविश्वास में वृद्धि: सूर्य का गोचर आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाता है। यह समय निर्णय लेने और किसी को नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त होता है।
  • स्वास्थ्य और जीवन शक्ति: सूर्य का गोचर व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन शक्ति पर भी प्रभाव डालता है। शुभ गोचर में व्यक्ति की ऊर्जा और जीवन शक्ति बढ़ती है, जबकि अशुभ गोचर में स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

राहु और केतु (1.5 वर्ष, 18 से 19 महीने)

राहु और केतु की गति लगभग 1.5 वर्ष (18 से 19 महीने) होती है। ये ग्रह छायाग्रह होते हैं और भ्रम, धोखाधड़ी, माया और परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका प्रभाव जीवन में अनिश्चितता और बदलाव लाता है।

प्रभाव:

  • राहु का गोचर: राहु का गोचर व्यक्ति के जीवन में भ्रम, धोखाधड़ी और अप्रत्याशित घटनाओं को जन्म दे सकता है। यह समय नए विचारों और दिशा में बदलाव का संकेत हो सकता है।
  • केतु का गोचर: केतु का गोचर व्यक्ति को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मजबूत बनाता है, लेकिन यह समय मानसिक चिंता और मानसिक अस्थिरता भी पैदा कर सकता है।

ग्रहों के गोचर का प्रभाव जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पड़ता है। इन गोचरों के समय में व्यक्ति को अपनी स्थिति के अनुसार निर्णय लेने और सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक जीवन पर गहरा असर डालता है, और इसके अनुसार जीवन की दिशा में बदलाव हो सकता है। हर ग्रह का गोचर एक नया अध्याय लेकर आता है, जिसे समझना और सही तरीके से उसका सामना करना आवश्यक होता है।

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