वर्षफल कुण्डली का पहला भाव बताएगा आपके बारे में ऎसी बातें जिन्हें जान कर आप हो जाएंगे हैरान

विभिन्न भावों में ग्रह स्थिति के परिणाम पराशरी सिद्धांतों पर आधारित यह परिणाम वर्ष कुण्डली में भी उपयोगी होते हैं. ग्रह अपने विभिन्न भावों में अपने कारकतत्व राशि आधिपत्य व अपनी स्थिति के अनुसार फल देता है. ग्रहों द्वारा लग्न, पंचम और नवम भाव के स्वामी होना सदैव शुभता से युक्त माना जाता है. इसके विपरित छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी अशुभ फल दायक माने गए हैं.

पराशर जी के अनुसार ग्रहों द्वारा एकादश भाव का आधिपत्य भी अभुभ परिणामदायक माना है. इस प्रकार विभिन्न लग्नों की कुण्डलियों में ग्रह विभिन्न परिणामदायक हैं. यह समझना आवश्यक है कि कुण्डली के बलिष्ठ होने के लिए नैसर्गिक शुभ ग्रह गुरू, बुध, शुक्र तथा शुक्ल पक्ष का चंद्रमा केन्द्र या त्रिकोण में स्थित होने चाहिएं और अशुभ ग्रह सूर्य, मंगल, शनि, राहु-केतु तृतीय, अष्टम अथवा एकादश भावों में स्थित होने चाहिएं.

सभी ग्रह चाहें वह शुभ हों अथवा अशुभ, सदा ही शुभ परिणामदायक होंगे यदि वह उच्चता युक्त या स्वराशि में स्थित हों. यही सिद्धांत राजयोग कारक ग्रहों पर भी लागू होता है.

प्रथम भाव में विभिन्न ग्रह | Planets in First House

सूर्य ग्रह | Sun Planet

बलिष्ठ होने पर  नैतिकता पूर्ण, इच्छा शक्ति युक्त, सत्ताप्रेमी, अच्छा स्वास्थ्य, चिंतामणि जी के अनुसार शुभ स्थित से युक्त होने पर भाग्य में सफलता, सम्मान, राजा से सम्मान, पिता का स्नेह तथा सफलता का सूचक होता है.

चंद्र ग्रह | Moon Planet

चंद्रमा कुण्डली में बलिष्ठ होने पर प्रेम से युक्त होता है, मन से सुखद व माता का सुख पाता है.  मानसिक स्थिति व उच्च मनोबल की प्राप्ती होती है. चित्त की प्रसन्नता, यात्रा के प्रति उत्सुक होता है, सुख शंति, धन संपत्ति पाता है. कमजोर व क्षीण होने पर मन में अस्थिरता रहती है, अविश्वासी होता है, चंचल होता है. व्यक्ति घुमक्कड़ व उद्देश्यहीन जीवन यापन जीता है.

मंगल ग्रह | Mars Planet

मंगल के मजबूत होने पर मंगल साहस, वीरता, शौर्य, शक्ति देता है. शत्रु पर विजय, भूमि, अचल संपत्ति दिलाता है. कमजोर होने पर स्वास्थ्य सुख में कमी करता है, जानवरों द्वारा काटना, दुर्घटना, जलना, घाव या शल्य क्रिया, आपरेशन, उच्च रक्तचाप, गर्भपात इत्यादि का कारण बन सकता है.

बुध ग्रह | Venus Planet

बुध ग्रह बलिष्ठ होने पर बुद्धि चातुर्य, वाणी, मनोविनोद देता है. गणित, लेखन, तर्क-वितर्क, मुद्रण, ज्योतिष विज्ञान, नृत्य एवं नाटक में योग्यता देता है. कमजोर होने पर बुध गला, नाक, कान, हकलाना, बोलने में कष्ट, मानसिक असंतोष देता है. त्वचा संबंधि रोग, राहु युक्त होने पर भ्रामक बनाता है.

गुरू ग्रह | Jupiter Planet

बलिष्ठ होने पर बृहस्पति जी ज्ञान, विद्वता, शिक्षा में उच्चता देते हैं. धार्मिक कार्यों, श्रेष्ठजनों का साथ, भक्ति, प्राचीन साहित्य, धन संपत्ति, मान सम्मान मिलता है. व्यक्ति धर्मार्थ संस्थाओं में कार्यरत होता है कानूनी क्षेत्र, जज, न्यायाल्य, वकील, लेखापरीक्षक, सम्पादक, प्राचार्य, शिक्षाविद, अध्यापन का कार्य कर सकता है. ज्योतिषी, वेदो और शास्त्रों में निपुण होता है. कुण्डली में गुरू के क्षीण होने पर आंडबर से युक्त, फिजूलखर्च करने वाला और खाने का शौकीन होता है.  शरीर में मोटापा हो सकता है, मधुमेह, चिरकालीन बीमारियां हो सकती हैं.

शुक्र ग्रह | Venus Planet

बलिष्ठ होने पर शुक्र ग्रह वैवाहिक संबंधों, पत्नि, इन्द्रिय भोग विलास, यौन विषय, सभी प्रकार की सुख स्म्पत्ति, आभूषणों, सुंदरता, सुगंधित वस्तुओं को प्रदान करता है. सुन्दर शरीर, बडी आंखे व दिखने में आकर्षक, घुंघराले बाल, काव्यात्मक होता है. कमजोर निर्बल होने पर विलासिता, व्यभिचार, शराब, नशीले पदार्थों, से युक्त होता है.

शनि ग्रह | Saturn Planet

बलिष्ठ होने पर लंबा जीवन, खुशहाली, संपत्ति-जायदाद से युक्त होता है. क्षीण होने पर शनि ग्रह मृत्यु, दुख, दरिद्रता, अनादर, निर्धनता देता है.

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वर्षफल कुण्डली से जाने कैसा रहेगा दशम भाव में ग्रहों का फल

वर्ष फल कुण्डली में दशम भाव में स्थित ग्रहों के प्रभाव, जातक के जीवन को अनेक प्रकार से प्रभावित करते हैं. वर्ष फल कुण्डली ज्योतिष शास्त्र की तीन शाखाओं में से एक है. वर्ष फल मुख्यत: किसी विशेष घटनाओं को अध्ययन करने के संदर्भ में प्रयुक्त किया जाता है. फलों को जानने के लिए उनमें सभी विभिन्न भावों में स्थित ग्रहों के कारकों का फल देखना होता है.

सूर्य ग्रह | Sun Planet

दशम भाव में सूर्य दिशा बल से युक्त होता है अर्थात दिग्बली होता है. यहां पर स्थित सूर्य व्यवसाय व नौकरी के लिए शुभ माना जाता है लेकिन इसी के साथ-साथ यह माता से वियोग व दूरी भी देने वाला बनता है. यहां स्थित होने के प्रभाव स्वरूप संतान के लिए दिक्कत देने वाला बन सकता है. जातक साहस व ओज से भरपूर होता है. घूमने का शौकिन होता है, मान सम्मान को पाने वाला व प्रतिष्ठा से युक्त होता है. उच्च पद पर आसिन व सरकार से पद पाने वाला बनता है. व्यक्ति का मन अशांत भी रह सकता है.

चंद्र ग्रह | Moon Planet

चंद्र के दशम भाव में स्थित होने के कारण सफलता प्राप्त होती है. जातक अच्छे कार्य करने वाला बनता है. फलदीपिका के अनुसार जातक उत्तम कार्य करने वाला, मन से संतुष्ट होता है. सभी प्रकार की सफलताएं दिलाता है. जनता के मध्य समान और प्रतिष्ठा मिलती है, यात्राएं करनी पड़ती हैं, उसे राजा से सम्मान की प्राप्ति हो सकती है. समाज में सम्मान और प्रेम की प्राप्ति हो सकती है.

मंगल ग्रह | Mars Planet

दशम भाव में मंगल ग्रह होने के कारण दिग्बली होता है, उच्च राशि में स्थित मंगल होने के कारण व्यक्ति बलिष्ठ होता है. साहसी होता है, शक्ति संपन्न होता है. शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला होता है. पिड़ीत होने पर मानसिक अशांति बनी रह सकती है. घरेलू विवाद रह सकते हैं अथवा संपत्ति विवाद हो सकता है, माता से झगडे की स्थित उत्पन्न हो सकती है. धोखे या छल से धन हानि की संभावना बनी रह सकती है जिस कारण तनाव बना रह सकता है.

बुध ग्रह | Mercury Planet

बुध के इस भाव में स्थित होने के कारण आयु में वृद्धि प्राप्त होती है. बोलने में निपुण होता है, बुद्धिमान व सजग. शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाला, वाहन, संगीत व कला के प्रति विशेष लगाव उत्पन्न हो सकता है. कार्यों में सफलता पाता है.

बृहस्पति ग्रह | Jupiter Planet

बृहस्पति के दशम भाव में स्थित होने के कारण व्यक्ति सम्मानित जीवन जीता है. शुभ साथी पाता है अच्छे लोगों से मित्रता बनती है. ज्ञान की चाह बनी रहती है. लोगों में गणमान्य बनता है. विद्वान होता है व जीवन में सुख पाता है. समाज में सम्मान व उन्नती पाता है. धर्म के कार्यों में अग्रसर व भाग्य का साथ पाता है.

शुक्र ग्रह | Venus Planet

शुक्र के दशम भाव में स्थित होने पर धन्वान बनता है ऎश्वर्य का जीवन मिलता है, यात्रा से लाभ की प्राप्ति होती है. संगीत व कला के प्रति रूचि उत्पन्न होती है. व्यक्ति को मित्रों का साथ मिलता है, घर में सुख व सौभाग्य की प्राप्ति होती है. माता का स्नेह व सुख प्राप्त होता है वाहन का सुख मिलता है.

शनि ग्रह | Saturn Planet

शनि के दशम भाव में होने पर यदि बलिष्ठ हो तो राजसी सम्मान दिलाता है. नेता व राजनीतिज्ञ का इच्छुक होता है, विदेश में सम्मान पाता है, परंतु कमजोर होने पर माता को तकलीफ झेलनी पड़ सकती है, घर से अलग रहना पड़ सकता है व जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं से दो चार होना पड़ सकता है.

राहु ग्रह | Rahu Planet

राहु के दशम भाव में होने पर व्यक्ति को राजा तुल्य जीवन मिलता है, संपति की प्राप्ति होती है. खर्चीला होता है. क्षीण होने पर बुरे आचरण से युक्त हो सकता है, चरित्रहीन बेईमान हो सकता है. अपनी योग्यता में कमी झेलनी पड़ सकती है, व्यक्ति में मूर्खता अधिक झलकती है, शिक्षा में कमी व कुछ व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं. स्त्री की कुण्डली में होने पर दांपत्य सुख में कमी आ सकती अथवा गंभीर रोग.

केतु ग्रह | Ketu Planet

जातक विद्वान व चालाक होता है, मेष, वृषभ व तुला राशि में होने पर बलिष्ठ, आत्मसम्मान से युक्त होता है. शत्रुओं पर विजय पाता है, विदेश में निवास तथा विदेश संबंधी काम दे सकता है. माता को कष्ट की स्थिति झेलनी पड़ सकती है. भाग्य में कमी व संघर्ष अधिक करना पड़ सकता है. पिडित होने पर मानसिक अशांति मिल सकती है.

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वर्षफल कुंडली के नवम भाव में अगर हों ये ग्रह तो बन सकते हैं भाग्यशाली

ग्रह स्थिति के परिणाम पराशरी सिद्धांतों पर आधारित यह परिणाम वर्ष कुण्डली में भी उपयोगी होते हैं. ग्रह अपने विभिन्न भावों में अपने आधिपत्य व अपनी स्थिति के अनुसार फल देता है. सभी ग्रह चाहें वह शुभ हों अथवा अशुभ, सदा ही शुभ परिणामदायक होंगे यदि वह उच्चता युक्त या स्वराशि में स्थित हों. यही सिद्धांत राजयोग कारक ग्रहों पर भी लागू होता है.

सूर्य ग्रह | Sun Planet

नवम भाव में स्थित सूर्य व्यक्ति को योग्य संतान देता है. आध्यात्मिक जीवन में प्रगती मिलती है जीवन में उन्नती पाता है. संतान की ओर से सुख पाता है. समाज में उच्च स्थिति को पाता है. सफलता व परिवार का सुख मिलता है, खुशहाली व प्रेम की प्राप्ति होती है. सत्ता का सुख, धन व धर्म कर्म के कार्यों को पाता है.

चंद्र ग्रह | Moon Planet

चंद्रमा कुण्डली में नवम भाव में व्यक्ति धैर्यवान होता है. स्वभाव में सौम्यता बनी रहती है.अच्छे व्यक्तिव के कारण लोग उससे प्रभावित रहते हैं, सभी के साथ मेल जोल रखने वाला व हंसमुख होता है. स्वस्थ जीवन का आनंद लेने वाला होता है. संगीत व कलात्मक अभिरूचियों से प्रसन्न व प्रतिष्ठित रहता है.

मंगल ग्रह | Mars Planet

सत्ताप्रेमी, व स्वभाव में कूटनीतिज्ञ होता है, मंगल पंचम भाव में होने के कारण व्यक्ति उच्च पद को पाता है, सत्ता के सुख और राजा से सम्मान पा सकता है, साहस से भरपूर होता है, सभी से लगाव अधिक हो सकता है. अशुभ ग्रहों के प्रभव के कारण शुभ फलों में कमी आ सकती है. संतान से परेशानी हो सकती है. व्यक्ति के स्वभाव में चतुरता व चालाकी का भाव हो सकता है.

बुध ग्रह | Mercury Planet

बुध के होने के कारण व्यक्ति में शिक्षा में सफलता मिलती है. लोगों से सहायता व सहयोग मिलता है हंसमुख व व्यवहार कुशल होता है, अचानक से प्रोपर्टी से लाभ मिल सकता है. व्यक्ति लेखक या काव्यात्मक हो सकता है, पर अगर पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो संतान व विद्या में कमी आती है.

गुरू ग्रह | Jupiter Planet

जातक को विद्वान ज्ञानी बनाता है, धर्म के प्रति आसक्त होता है. शुभ गुणों को पाता है, संतान की ओर से सुख का भाव मिलता है. शुभ युक्त व बली अवस्था में होने के कारण जीवन में लोगों से स्नेह प्राप्त होता है. पीडित होने पर संतान की ओर से दिक्कत होती है

शुक्र ग्रह | Venus Planet

प्रेम से युक्त और कलात्मकता से भरा हुआ बनाता है. धनी, कवि कलाकार व शुभता बनी रहती है. शुक्र के शुभता में होने से वाणी में मिठास आती है, व्यक्ति सभी का प्रेमी बनता है. वैवाहिक संबंधों में मधुरता आती है. शुभता से युक्त होने पर धन लाभ भी देता है. बलिष्ठ होने पर भोग विलास, आभूषणों, सुंदरता, सुगंधित वस्तुओं को प्रदान करता है.

शनि ग्रह | Saturn Planet

यहां स्थित शनि अकेलापन देता है. विवाह में कठिनाई होता है. विदेश में निवास देता है. धन की हानि करा सकता है. अपने लोगों से दूर भी कर सकता है. अशुभता होने पर विवाह में देरी, धन की हानी, व्यवहार में जिद्दीपन आता है. कष्ट, दरिद्र और परिवार से  दूर कर सकता है. .

राहु ग्रह | Rahu Planet

राहु के होने पर धन युक्त व बुद्धि को अस्थिर करता है मानसिक संताप रहता है. संघर्ष बने रहते हैं. कुछ पाने के लिए अत्यधिक संघर्ष की स्थिति से गुजरना पड़ सकता है. संतान संबंधि परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं.मजबूत होने पर प्रतिष्ठा देता है, सम्मान में वृद्धि कराता है, खराब होने पर गुस्सैल स्वभाव, साथी के साथ तनाव बने रहना.

केतु ग्रह | Ketu Planet

सरकार से धन लाभ और हानी भी हो सकती है. विदेश यात्राएं भी देता है. जातक घमंडी व अहंकारी बनता है, छोती बातों में गुस्सा करने वाला होता है. पिता के साथ संबंधों में तनाव की स्थिति बनी रहती है.

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वर्षफल कुंडली के अष्टम भाव में कैसा रहेगा सभी ग्रहों का फल आईये जानें विस्तार से

ग्रह स्थिति के परिणाम पराशरी सिद्धांतों पर आधारित यह परिणाम वर्ष कुण्डली में भी उपयोगी होते हैं. ग्रह अपने विभिन्न भावों में अपने आधिपत्य व अपनी स्थिति के अनुसार फल देता है. ग्रहों द्वारा लग्न, पंचम और नवम भाव के स्वामी होना सदैव शुभता से युक्त माना जाता है. इसके विपरित छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी अशुभ फल दायक माने गए हैं. सभी ग्रह चाहें वह शुभ हों अथवा अशुभ, सदा ही शुभ परिणामदायक होंगे यदि वह उच्चता युक्त या स्वराशि में स्थित हों. यही सिद्धांत राजयोग कारक ग्रहों पर भी लागू होता है.

सूर्य ग्रह | Sun Planet

अष्टम भाव में स्थित सूर्य जीवन में अनेक कठिन परिस्थितियां देता है. व्यक्ति को संघर्ष अधिक करना पडता है. धोखेबाज व लंपट हो सकता है. यात्राओं को अधिक करते है. पीडित होने पर नैतिकता से हीन, अग्नि से भय रह सकता है. जीवन साथी के स्वास्थ्य में कमी बनी रह सकती है.

चंद्र ग्रह | Moon Planet

चंद्रमा कुण्डली में अष्टम भाव में गम्भीर रोग हो सकते हैं, शत्रु हावी रह सकते हैं. इसी के साथ अशुभ राशि में होने पर आयु में कमी हो सकती है. दमा हो सकता है, जोडों में दर्द व मिर्गी का रोग हो सकता है. आपदाओं से ग्रस्त और परेशान रह सकता है.

मंगल ग्रह | Mars Planet

सत्ताप्रेमी, व स्वभाव में कूटनीतिज्ञ होता है, पीडित होने भ्रष्टाचार में लिप्त हो सकता है. इस भाव में मांगल्य का अभाव हो सकता है. स्त्री की कुण्डली में होने पर परेशानी युक्त हो सकता है. दुर्घटना, घाव या चिकित्सा, उच्च रक्तचाप, गर्भपात इत्यादि का कारण बन सकता है.

गुरू ग्रह | Jupiter Planet

स्वभाव से झगडालू हो सकता है. अत्यधिक क्रोध व गुस्सा हो सकता है. परिवार में कलह हो सकती है या संपत्ति को लेकर कोई विवाद उभर सकता है. यदि यह अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो तो धन हानी या पैतृक संपत्ति विवाद हो सकता है. आंडबर से युक्त, फिजूलखर्च करने वाला और खाने का शौकीन होता है. लम्बी बीमारियां हो सकती हैं.

शुक्र ग्रह | Venus Planet

कमजोर होने पर उत्साह में कमी बनी रहती है व स्मरण शक्ति कमजोर हो सकती है. पीडित होने पर जातक धोखेबाज हो सकता है. वैवाहिक जीवन के लिए सुखद नहीं रहता. विलासिता, व्यभिचार, शराब, नशीले पदार्थों, से युक्त होता है. आयु में कमी व व्याधि का डर बना रह सकता है. परंतु शुभता से युक्त होने पर धन लाभ भी देता है. बलिष्ठ होने पर भोग विलास, आभूषणों, सुंदरता, सुगंधित वस्तुओं को प्रदान करता है.

शनि ग्रह | Saturn Planet

यहा स्थित शनि शुभ फल देने वाला होता है. आयु में वृद्धि करता है, जायदाद से युक्त होता है. सुन्दर बडी आंखे व दिखने में आकर्षक होता है. परंतु इसी के साथ विदेश में निवास देता है. धन की हानि करा सकता है. अपने लोगों से दूर भी कर सकता है.

राहु ग्रह | Rahu Planet

मजबूत होने पर प्रतिष्ठा देता है, सम्मान में वृद्धि कराता है, खराब होने पर गुस्सैल स्वभाव, जीवन साथी के साथ तनाव बने रहना, सरकार से धन लाभ और हानी भी हो सकती है. विदेश यात्राएं भी देता है.

केतु ग्रह | Ketu Planet

केतु के प्रभाव स्वरूप जातक घमंडी व अहंकारी बनता है, छोती बातों में गुस्सा करने वाला होता है. पिता के साथ संबंधों में तनाव की स्थिति बनी रहती है.

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उच्च राशि में स्थित ग्रह का फल | Results of An Exalted Planet

अपनी दशा में उच्च राशि में स्थित ग्रह शुभ परिणाम देने वाले होते हैं. सूर्य मेष और सिंह राशियों में होने पर जीवन में अनेक प्रकार की सफलता मिल सकती है. यह मेष में उच्च का होने के कारण अपनी दशा में राज्य सम्मान व सुख दे सकता है. वहीं मंगल मकर, मेष या वृश्चिक राशि में स्थित हों तो अपनी दशा में भाईयों का सुख, भूमि भवन का सुख प्राप्त होता है. पराक्रम व साहस की वृद्धि कर सफलता प्राप्त होती है.

ग्रहों का दशाफल अनेक प्रकार से अपने प्रभावों को दर्शाता है. उच्च की राशि का ग्रह है तो उसके प्रभावों में शुभता अधिक देखी जा सकती है, लेकिन अगर वही ग्रह नीच का हो तो उसका प्रभाव विपरीत असर देने वाला रहता है. कोई ग्रह किन परिस्थितियों से घिरा हुआ है व किस राशि में है यहां हम उच्च राशिग्रह की दशा फल पर विचार करेंगे अर्थात जब ग्रह अपनी उच्चता में होता है तो उसका दशाफल कैसे प्रभाव उत्पन्न करता है.

उच्चस्थ ग्रह जातक को वैभव तथा यश प्रदान करने वाला होता है. इस अवस्था में जातक को वस्त्र आभूषण और वाहन की प्राप्ति होती है. पद प्रतिष्ठा में वृद्धि मिलती है. जातक राजा के सामान सुख प्राप्त करता हे. शत्रुओं का दमन होता है तथा रूकावटें दूर होने लगती हैं. उच्चस्थ ग्रह की दशा में भू-संपदा का लाभ होता है राज्यसम्मान की प्राप्ति होती है तथा व्यक्ति के भीतर धैर्य और नैतिकता का समावेश देखा जा सकता है.

उच्च का सूर्य जातक को नेतृत्व की क्षमता प्रदान करता है. वाहन सुख प्राप्त होता है. अच्छी वस्तुओं की प्राप्ति होती है पर साथ ही उसमें गर्व की भावना भी अधिक देखी जा सकती है. चंद्रमा की यह स्थित होने पर जातक को स्त्री सुख, संतान सुख की अनुभूति प्राप्त होती है. जातक को माता का प्रेम प्राप्त होता है, मन में भावनों की अधिकत अहोती है तथा तीर्थाटन एवं पर्यटन के मौके प्राप्त होते हैं.

उच्चस्थ मंगल व्यक्ति को क्रोध और बाहुबल दे सकता है. व्यक्ति को स्त्री सुख तथा बंधुओं का सुख प्राप्त होता है. उच्चस्थ बुध के प्रभाव से जातक को धन-संपदा प्राप्त होती है. हास्य एवं मनोविनोद का व्यवहार पाता है. बौद्धिकता उन्नत होती है, जातक व्यापार एवं व्यवसाय में उन्नती पाता है. मित्रों, संबंधियों एवं संतान का सुख प्राप्त होता है.

उच्चस्थ गुरू के प्रभाव स्वरुप जातक को विद्वता प्राप्त होती है, उसे शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त होता है अपने क्षेत्र में अग्रीण्य स्थान पाता है. मान, पद-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है. व्यवहार में धर्म के प्रति आस्थावान होता है. शुक्र की उच्चता में व्यक्ति को भौतिक सुखों के प्रति अधिक लालसा का भाव हो सकता है, व्यक्ति स्त्री संग के कारण धन का नाश पाता है. धर्म विरोधी कार्यों में रूचि रखने वाला हो सकता है.

उच्चस्थ शनि उच्चस्थ शनि की दशा में सत्ता का सुख प्राप्त हो सकता है, पिता एवं अन्य संबंधियों से विरोध भी झेलना पड़ सकता है. जीवन में कठिनाईयों का सामना करने की दिशा मिलती है, सही गलत का पता चलता है. उच्चस्थ राहु की दशा जातक को विदेश यात्राओं को करने का वसर मिलता है. राज्य के उच्च अधिकारियों से मैत्री होती है तथा धन एवं सुख की प्राप्ति होती है, धार्मिक स्थानों की यात्राएं भी कर सकता है.

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कैसा रहेगा वर्ष कुंडली का पांचवा भाव और उसमें बैठे ग्रहों का फल

वर्ष फल कुण्डली में पंचम भाव में जो ग्रह स्थित होते हैं, उनके प्रभावों को जानने हेतु आप कई बातों का अनुसरण कर सकते हैं कि ग्रह के कारक तत्व व उसका प्रभाव वर्ष कुण्डली पर कैसा रहने वाला है. कुण्डली में ग्रहों की स्थिति बहुत मायने रखती है ग्रहों का शुभता लिए होने से जातक आनंद व सुख की अनुभूति कर पाता है.

सूर्य ग्रह | Sun Planet

वर्ष फल कुण्डली के पांचवें भाव में सूर्य के शुभ स्थिति में होने पर जातक समाज में उच्च स्थिति को पाता है.  सफलता व परिवार का सुख मिलता है, खुशहाली व प्रेम की प्राप्ति होती है. सत्ता का सुख, धन व धर्म कर्म के कार्यों को पाता है. सूर्य कमजोर होने पर प्रेम की पीडा़, अलगाव हो सकता है. संतान का दुख व देरी का सामना करना पड़ सकता है. शिक्षा में बाधा व कमी आ सकती है.

चंद्र ग्रह | Moon Planet

चन्द्रमा के पंचम भाव में होने पर व्यक्ति धैर्यवान होता है. स्वभाव में सौम्यता बनी रहती है. आकर्षक व्यक्तिव के कारण लोग उससे प्रभावित रहते हैं, सभी के साथ मेल जोल रखने वाला व हंसमुख होता है. स्वस्थ जीवन का आनंद लेने वाला होता है. संगीत व कलात्मक अभिरूचियों से प्रसन्न व प्रतिष्ठित रहता है.

मंगल ग्रह | Mars Planet

मंगल पंचम भाव में होने के कारण व्यक्ति उच्च पद को पाता है, सत्ता के सुख और राजा से सम्मान पा सकता है, साहस से भरपुर होता है टैक्निकल शिक्षा के प्रति लगाव अधिक हो सकता है. अशुभ ग्रहों के प्रभव के कारण शुभ फलों में कमी आ सकती है. संतान से परेशानी हो सकती है. व्यक्ति के स्वभाव में चतुरता व चालाकी का भाव हो सकता है.

बुध ग्रह | Mercury Planet

बुध के पंचम भाव में होने के कारण व्यक्ति में शिक्षा में सफलता मिलती है. लोगों से सहायता व सहयोग मिलता है हंसमुख व व्यवहार कुशल होता है, अचानक से प्रोपर्टी से लाभ मिल सकता है. व्यक्ति लेखक या काव्यात्मक हो सकता है, पर अगर पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो संतान व विद्या में कमी आती है.

बृहस्पति ग्रह | Jupiter Planet

जातक को विद्वान ज्ञानी बनाता है, धर्म के प्रति आसक्त होता है. शुभ गुणों को पाता है, संतान की ओर से सुख का भाव मिलता है. शुभ युक्त व बली अवस्था में होने के कारण जीवन में लोगों से स्नेह प्राप्त होता है. पीडित होने पर संतान की ओर से दिक्कत होती है.

शुक्र ग्रह | Venus Planet

प्रेम से युक्त और कलात्मकता से भरा हुआ बनाता है. धनी, कवि कलाकार व शुभता बनी रहती है. शुक्र के शुभता में होने से वाणी में मिठास आती है, व्यक्ति सभी का प्रेमी बनता है. वैवाहिक संबंधों में मधुरता आती है.

शनि ग्रह | Saturn Planet

यदि वह मजबूत स्थिति में हो तो जातक को धनी व व्यवहार से सौम्य बनाता है. व्यक्ति परिश्रम करने वाला बनता है तथ अमेहनत से आगे बढ़ता है. अशुभता होने पर विवाह में देरी, धन की हानी, व्यवहार में जिद्दीपन आता है. कष्ट, दरिद्र और परिवार से  दूर कर सकता है, सौंदर्य में कमी हो सकती है.

राहु ग्रह | Rahu Planet

राहु के होने पर धन युक्त व बुद्धि को अस्थिर करता है मानसिक संताप रहता है. सफलता मिलती है परंतु संघर्ष भी बने रहते हैं. कुछ अच्छा पाने के लिए अत्यधिक संघर्ष की स्थिति से गुजरना पड़ सकता है. दुविधा बनी रह सकती है, संतान संबंधि परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं.

केतु ग्रह | Ketu Planet

मंत्र सिद्धि देता है, संतान की तकलीफ बनी रहती है. सरकार से हानि मिल सकती है मानसिक उग्रता बनी रहेगी. उतावलापन बना रह सकता है.

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वर्षफल कुण्डली का सातवां भाव और उसमें बैठे ग्रहों का फल

वर्ष फल कुण्डली के सातवें भाव में ग्रहों के प्रभाव का विशलेषण करके इस भाव से संबंधित फलों को जाना जा सकता है. सातवें भाव में ग्रहों का प्रभाव जातक के जीवन में कई तरह से बदलाव ला सकता है, समाज में स्थिति का सशक्त होना और जीवन में होने बदलाव को जानने में इसकी बहुत महत्वता होती है. वर्ष फल मुख्यत: किसी विशेष वर्ष की घटनाओं का पता लगाने हेतु बहुत महत्वपूर्ण विधि है. ग्रहों के प्रभावों द्वारा जो फल प्राप्त होते हैं वह जातक के जीवन को अनेक प्रकार से प्रभावित करते हैं. फलों को जानने के लिए उनमें सभी विभिन्न भावों में स्थित ग्रहों के कारकों का फल देखना होता है.

सूर्य ग्रह | Sun Planet

सूर्य सातवें भाव में अशुभ परिणामदायक होता है, जीवन में सुख व खुशियों में कमी बनी रहती. विवाह में विलंब हो सकता है और वैवाहिक सुख में कमी बनी रहती है. अपनी शुभ स्थिति या उच्चता में होने पर भी कुछ कमी तो बनी ही रहती है. चिंताओं से घिरा रह सकता है, मन अशांत रह सकता है, परंतु समाज में अपनी पैठ बनाने के लिए अनुकूल हो सकता है.

चंद्र ग्रह | Moon Planet

चंद्र के सप्तम भाव में स्थित होने पर लाभ पाता है, व्यापार में लाभ मिलता है. वैभव सुख पाता है, संतुष्ट होता है,चंद्रमा के उच्च व शुभता युक्त होने पर सुंदर व कुशल साथी की प्राप्ति हो सकती है. आकर्षक व्यक्तिव बना रहता है. परंतु कमजोर व पिडीत होने पर मन से अशांत साथी से दूरी बनी रहती है, काम में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है. निवासस्थान से दूर जाना पड़ सकता है. मानसिक रुप से तनाव कि स्थिति से गुजरना पड़ सकता है.

मंगल ग्रह | Mars Planet

सप्तम भाव में मंगल दोष होता है, व्यक्ति विदेश में निवास करता है और मंगल ग्रह के प्रभाव स्वरूप मानसिक अशांति बनी रह सकती है. लोगों से विवाद रह सकते हैं, बिजनेस में संघर्ष की स्थिति और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, वैवाहिक सुख में तनाव उभर सकता है. धोखे से धन हानि की संभावना बनी रह सकती है जिस कारण तनाव बना रह सकता है.

बुध ग्रह | Mercury Planet

बुध के सप्तम भाव में स्थित होने के कारण शुभता में कमी आती है. वैवाहिक दृष्टिकोण से शुभ नहीं होता, दांपत्य जीवन में तनाव की स्थिति झेलनी पड़ सकती है. साझेदारी में कार्य को नुकसान या घाटा हो सकता है, यह सुंदर साथी को भी दर्शाता है.

बृहस्पति ग्रह | Jupiter Planet

बृहस्पति के सप्तम भाव में स्थित होने पर उच्च पद की प्राप्ति होती है. आकर्षक व्यक्तित्व व गुणों में वृद्धि होती है. धनी व सौम्यता से युक्त होता है. काव्यात्मक रचना व लेखन में निपुंणता मिलती है. आकर्षक भार्या व पुत्रों का साथ मिलता है. बृहस्पति सप्तम भाव में होने पर वैवाहिक जीवन की सुरक्षा बनी रहती है. व्यक्ति में ज्ञान की चाह बनी रहती है, विद्वान होता है व जीवन में सुख पाता है. समाज में सम्मान व उन्नती पाता है.

शुक्र ग्रह | Venus Planet

शुक्र के सप्तम भाव में स्थित होने पर सदगुणों से युक्त भार्या मिलती है, संतान का सुख मिलता है. वैभव व सुख की प्राप्ति होती है. विवाह से लाभ होता है. जन प्रशंसक होता है. भाग्य का साथ पाता है.वाहन, संगीत व कला के प्रति विशेष लगाव उत्पन्न हो सकता है. यात्रा करनी पड़ सकती है और यात्रा से लाभ की प्राप्ति होती है. मित्रों का साथ मिलता है, घर में सुख व सौभाग्य की प्राप्ति होती है. परंतु पीडित हो तो विवाह में विलंब हो सकता है.

शनि ग्रह | Saturn Planet

शनि के सातवें भाव में स्थित होने के कारण विवाह गैर जाती में हो सकता है, परंपराओं के विपरित काम कर सकता है. शनि केतु व शुक्र सप्तम भाव में विजातिय विवाह के सूचक बनते हैं. पीडित होने पर मित्रता में धोखा, अनैतिक कामों में लगा होना और इसी प्रकार के कामों से धन कमाने की ओर अग्रसर हो सकता है.

राहु ग्रह | Rahu Planet

राहु सातवें भाव में होने पर व्यवहार में क्रोद्ध बना रहता है, सौंदर्य में कमी आती है. आलस्य होता है, कमी झेलनी पड़ सकती है, काम में रुकावटें व असफलता बनी रहती है. अरूचि व कमी झेलनी पड़ सकती है. विजातिय विवाह का योग बन सकता है. दांपत्य सुख में कमी आ सकती अथवा गुप्त रोग प्रभावित कर सकते हैं.

केतु ग्रह | Ketu Planet

घर से अलग रहना पड़ सकता है व जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं से दो चार होना पड़ सकता है. यात्राओं से भय बना रहता है. जीवन साथी के साथ में कमी का अनुभव होता है. संघर्ष अधिक करना पड़ सकता है. शनि से पिडित होने पर मानसिक अशांति मिल सकती है.

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वर्ष कुण्डली के छठे भाव में बैठे ग्रह ऎसे दिखाते हैं अपना असर

वर्ष फल कुण्डली में छठे भाव में बैठे ग्रहों का प्रभाव जानने हेतु कई प्रकार के तथ्यों को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक  होता है. ग्रहों का शुभता होने से जातक आनंद व सुख की अनुभूति कर पाता है, परंतु कमजोर होने पर समस्याओं से भी जूझना पड़ सकता है.

सूर्य ग्रह | Sun Planet

वर्ष फल कुण्डली के छठे भाव में सूर्य शुभ फल देने वाला होता है. कार्यों में सफलता दिलाने में सहायक बनता है. कुछ ज्योतिष आचार्यों के अनुसार के शुभ स्थिति में होने पर व्यक्ति शत्रुओं पर विजय पाता है, निरोग और स्वास्थ्य को पाता है. कर्जों व कष्टों से लड़ने में सहायक होता है.

चंद्र ग्रह | Moon Planet

चन्द्रमा षष्ठम भाव में होने पर मानसिक रुप से अस्थिरता बनी रहती है. मन में अनेक प्रकार के विचारों की उलझनें बनी रहती हैं. बचपन में व्याधि का भय बना रहता है. स्वास्थ्य में कुछ न कुछ दिक्कत बनी रहती है. मजबूत स्थिति में होने पर कुछ शुभता देता है लेकिन मन में उलझनों की स्थिति बनी रहती है.

मंगल ग्रह | Mars Planet

मंगल छठे भाव में होने के कारण व्यक्ति को लड़ने की शक्ति देता है. संघर्ष ओर परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाने में सहायक होता है. खेल कूद में अच्छा प्रदर्शन करने वाला हो सकता है. किसी प्रतियोगिताओं में सफलता दिला सकता है. शिक्षा में सफलता और शत्रुओं पर विजय दिलाता है. कानूनी मसलों में विजय दिला सकता है.

बुध ग्रह | Mercury Planet

बुध के छठे भाव में स्थित होने के कारण कुशाग्र बुद्धि पंचम भाव में होने के कारण व्यक्ति में शिक्षा में सफलता मिलती है. व्यक्ति लेखन में प्रवीण हो सकता है, पर अगर पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो क्रोद्धि व झगडालू होता है. विद्या में रूकावट आती है. लोगों से इर्ष्या रह सकती है.

बृहस्पति ग्रह | Jupiter Planet

जातक को विद्वान होता है शत्रुओं पर विजय पाता है. कठिनाईयों पर विजय पाने में सफल होता है. व्यवसाय को आगे ले जाने में तत्पर रहता है. शुभ गुणों को पाता है, संतान की ओर से सुख का भाव मिलता है. शुभ युक्त व बली अवस्था में होने के कारण जीवन में लोगों से स्नेह प्राप्त होता है. पीडित होने पर संतान की दिक्कत होती है. परेशानी हो सकती है.

शुक्र ग्रह | Venus Planet

व्यक्ति के स्वभाव में चतुरता व चालाकी का भाव हो सकता है. संगीत व कलात्मक अभिरूचियों से प्रसन्न व प्रतिष्ठित रहता है. परंतु पिडित होने पर व्यस्नी हो सकता है, मानसिक तनाव से युक्त हो सकता है, खान-पान में दिक्कत आ सकती है. लोगों के साथ तनाव बना रह सकता है. वैवाहिक संबंधों में तनाव की स्थिति बनी रह सकती है.

शनि ग्रह | Saturn Planet

शत्रुओं पर विजय दिलाता है. योद्धा बनाता है, अत्यधिक परिश्रम करने वाला बनता है. प्रेम से युक्त और कलात्मकता से भरा हुआ बनाता है. वाणी में मिठास आती है, व्यक्ति सभी का प्रेमी बनता है. यदि वह मजबूत स्थिति में हो तो जातक को धनी बनाता है. अशुभता होने पर विवाह में देरी, दरिद्र और परिवार से  दूर कर सकता है,

राहु ग्रह | Rahu Planet

राहु के होने पर शत्रुओं से मुक्त रखने में सहायक होता है, मानसिक स्थिरता मिलती है. ज्ञान बना रहता है, सरकार से धन लाभ मिलता है. सफलता मिलती है, संघर्ष भी बने रहते हैं. अत्यधिक संघर्ष की स्थिति से गुजरना पड़ सकता है. दुविधा बनी रह सकती है, संतान संबंधि परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं.

केतु ग्रह | Ketu Planet

प्रतिष्ठा, सम्मान मिलता है, रोग मुक्त होता है व्यक्ति बोलने में निपुणता मिलती है, संबंधियों से मेल मिलाप व सुख मिलता है. उच्च पदासिन होता है. विष से भय बना रहता है. पशुओं से व विषैले जानवरों से भय बना रहता है.

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जैमिनी ज्योतिष और स्वास्थ्य | Jaimini Astrology and Health

ज्योतिष में कई प्रकार की विवेचना से आप यह जान सकते हैं कि सेहत में होने वाले बदलाव किस प्रकार आपको प्रभावित कर सकते हैं ओर आपके साथी को कौन सी स्वास्थ्य से संबंधित परेशानी आपके तनाव क अकारण बन सकती है इसी में जैमनी ज्योतिष का आंकलन करके यह जाना जा सकता है कि आप का स्वास्थ्य किस तरह से बुरे प्रभाव में आ सकता है.

जैमनी ज्योतिष विधि में बताया गया है कि जिस पुरूष की कुण्डली में शुक्र और केतु उपपद से दूसरे घर में स्थित हो अथवा उनके बीच दृष्टि सम्बन्ध बन रहा हो तो उनके जीवन साथी को गर्भाशय से स्म्बन्धित रोग होने की संभावना रहती है. बुध और केतु उपपद से दूसरे घर में होने पर अथवा उनके बीच दृष्टि सम्बन्ध होने पर जीवनसाथी को हड्डियों से सम्बन्धित रोग की आशंका बनती है.

सूर्य, शनि और राहु उपपद से दूसरे घर में होने पर अथवा इनके बीच दृष्टि सम्बन्ध बनने पर जीवनसाथी को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना होता है. उपपद से दूसरे घर में शनि और मंगल के बीच दृष्टि सम्बन्ध होने पर तथा दूसरे घर में मिथुन, मेष, कन्या या वृश्चिक राशि होने पर जीवनसाथी को कफ से सम्बन्धित गंभीर रोग होने की संभावना होती है.

दूसरे घर में मंगल अथवा बुध की राशि हो और उस पर गुरू एवं शनि की दृष्टि हो तो जीवनसाथी को कान सम्बन्धी रोग होता है. इसी प्रकार दूसरे घर में मंगल अथवा बुध की राशि हो और उस पर गुरू एवं राहु की दृष्टि हो तो जीवनसाथी को दांतों में तकलीफ होती है. उपपद से दूसरे घर में कन्या या तुला राशि पर शनि और राहु की दृष्टि होने से जीवनसाथी को ड्रॉप्सी नामक रोग होने की आशंका रहती है. जैमिनी ज्योतिष में यह भी कहा गया है कि दूसरे घर में उपपद लग्न हो अथवा आत्मकारक तो वैवाहिक जीवन में मुश्किल हालातों का सामना करना होता है.

जिस स्त्री की नवमांस कुण्डली में बुध और लग्न से गुरू त्रिकोण में होता है वह अपने पति के प्रति समर्पित होती है तथा वैवाहिक जीवन की मर्यादाओं का पालन करती है. यह स्थिति तब भी बनती है जब शुक्र लग्न में होता है. वह स्त्री बुद्धिमान एवं नम्र होती है जिनकी नवमांश कुण्डली में चन्द्रमा वृष राशि में होता है तथा बुध एवं शुक्र चौथे घर में होता है.

नवमांश कुण्डली में केतु लग्न में बैठा हो अथवा त्रिकोण में तो स्त्री में नेक गुणों की कमी का संकेत मिलता है. नवमांश कुण्डली में शनि का लग्न अथवा त्रिकोण में होना भी शुभ लक्षण नहीं माना जाता है क्योंकि इससे स्त्री में सौन्दर्य एवं स्त्री जन्य गुणों की कमी पायी जाती है. नवमांश में केतु का लग्न या त्रिकोण में होना स्त्री में बदले की भावना को उजागर करता है. स्त्री की कुण्डली में लग्न स्थान पर मंगल की दृष्टि होने से स्त्री क्रोधी स्वभाव की होती है.

जैमिनी ज्योतिष में कष्ट के कारण

जैमिनी पद्धति के अनुसार कारकांश को इस प्रकार समझें – जैमिनी में आत्मकारक ग्रह नवांश कुंडली में जिस राशि में बैठा होगा उस राशि को यदि हम लग्न मान लें तो वह कारकांश लग्न कहलाती है. इसी प्रकार अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुरुप कारकांश का निर्धारण होता है. कारकांश कुण्डली से भी रोग का पता लगाए जाने में सहायता प्राप्त होती है.

  • स्वास्थ्य के लिए जैमिनी ज्योतिष में रोग के कई कारण होते हैं. केतु अगर आत्मकारक पर दृष्टि दे रहा हो तो व्यक्ति को किसी चोर के कारण कष्ट हो सकता है.
  • केतु अगर पुत्रकारक ग्रह के साथ बैठा हुआ हो. बुध और शुनि से दृष्ट हो तो ये स्थिति नपुंसकता का कारण बनती है.
  • ज्ञाति कारक का संबंध अगर आत्मकारक से हो तो इस स्थिति में जातक कि रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी पाता है. जातक को मानसिक कष्ट अधिक रहता है.
  • आत्मकारक से तीसरे भाव में चंद्रमा हो या दृष्ट हो रहा हो तो यह कष्टदायक होता है, व्यक्ति को कफ जन्य रोग हो सकते हैं.
  • जैमिनी ज्योतिष में जब बहुत से ग्रह तीसरे भाव से संबंध बना रहे हों तो अचानक से बीमारी होने का डर जीवन में सदैव बना रहता है. रोग आसानी से पकड़ नहीं आता है.
  • लग्न से अथवा आत्म कारक से तीसरे भाव में सूर्य स्थित हो या दृष्ट हो, तो ऎसे में अग्नि या किसी हथियार के वार से कष्ट होता है.
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    लक्ष्मी स्वरुप श्री यंत्र | Shri Yantra For Goddess Lakshmi

    श्रीयंत्र में लक्ष्मी जी वास माना गया है. सभी यंत्रों में श्रेष्ठ स्थान पाने के कारण इसे यंत्रराज भी कहते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार एक बार लक्ष्मी जी पृथ्वी से बैकुंठ धाम चली जाती हैं, इससे पृथ्वी पर संकट आ जाता है तब प्राणियों के कल्याण हेतु वशिष्ठ जी लक्ष्मी को वापस लाने का प्रयास करते हैं. पृथ्वी पर ‘‘श्रीयंत्र’’ की साधना करते हैं श्रीयंत्र को स्थापित कर, प्राण-प्रतिष्ठा एवं पूजा करते हैं उनकी इस पूजा एवं श्री यंत्र स्थापना द्वारा लक्ष्मी जी वहां उपस्थित हो जाती हैं. इस यंत्र का प्रयोग दरिद्रता का नाश करता है. इसकी कृपा से व्यक्ति एकाएक धनवान हो जाता है.

    इस यंत्र की संरचना विचित्र है, यंत्रों में जो भी अंक लिखे होते हैं या जो भी आकृतियां निर्मित होती हैं वह देवी देवताओं की प्रतीक होती हैं. यंत्र-शक्ति द्वारा वातावरण में सकारात्मक उर्जा क अप्रवाह होत है. श्री यंत्र को पास रखने से शुभ कार्य सम्पन्न होते रहते हैं. श्रीयंत्र को सर्व सिद्धिदाता, धनदाता या श्रीदाता कहा गया है. इसे सिद्ध या अभिमंत्रित करने के लिए लक्ष्मी जी का मंत्र अति प्रभावशाली माना जाता है मंत्र जप के लिए कमलगट्टे की माला का प्रयोग करना चाहिए.

    यंत्र क्या होते हैं | What Is Yantra

    यंत्र विविध प्रकार में उपलब्ध होते हैं कूर्मपृष्ठीय यंत्र, धरापृष्ठीय यंत्र, मेरुपृष्ठीय यंत्र, मत्स्ययंत्र, मातंगी यंत्र, नवनिधि यंत्र, वाराह यंत्र इत्यादि यह यंत्र स्वर्ण, चांदी तथा तांबे के अतिरिक्त स्फटिक एवं पारे के भी होते हैं. सबसे अच्छा यंत्र स्फटिक का कहा जाता है यह मणि के समान होता है. भक्त, संत, तांत्रिक संन्यासी सभी इस यंत्र की प्रमुखता को दर्शाते हें तथा इन्हें पूजनीय मानते हैं.

    यंत्रों में मंत्रों के साथ दिव्य अलौकिक शक्तियां समाहित होती हैं. इन यंत्रों को उनके स्थान अनुरूप पूजा स्थान, कार्यालय, दुकान, शिक्षास्थल इत्यादि में रखा जा सकता है. यंत्र को रखने एवं उसकी पूजा करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और सफलता प्राप्त होती है. श्रीयंत्र विभिन्न आकार के बनाए जाते हैं जैसे अंगूठी, सिक्के, लॉकेट या ताबीज रुप इत्यादि में देखे जा सकते हैं.

    यंत्र शास्त्र के अतंर्गत कई ऐसे दुर्लभ यंत्रों का वर्णन है जिनका विधि-विधान से पूजन करने से अभिष्ट फल की सिद्धि होती है, यंत्र की चल या अचल दोनों तरह से प्रतिष्ठा की जा सकती है यह यंत्र धन प्राप्ति, शत्रु बाधा निवारण, मृत्यंजय जैसे कार्यों लिए रामबाण प्रयोग होते हैं. अपने आप में अचूक, स्वयं सिद्ध, ऐश्वर्य प्रदान करने में सर्वथा समर्थ यह यंत्र जीवन को सुख व सौम्यता से भर देता है.

    बगलामुखी यंत्र की उपासना से शत्रु का नाश होता है, स्तम्भन करने हेतु इससे बढकर कोई यंत्र नही है. प्रेत बाधा निवारक यंत्र इस यंत्र के विशेष प्रयोग से प्रेतबाधा व यक्षिणीबाधा का भी नाश होता है. महामृत्युंजय इस यंत्र के उपयोग से अकाल मृत्यु से मुक्ति प्राप्त होती है. यह शिव भगवान का प्रिय यंत्र है. भगवान शंकर की स्तुति व उक्त यंत्र की स्थापना भक्त को समस्त बाधाओं से मुक्त कर देती है. रोगों की निवृत्ति के लिये एवं दीर्घायु की कामना के लिये इस यंत्र का उपयोग बहुत लाभदायक होता है.

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