जन्म कुण्डली में भाव और भावेश की स्थिति का विचार नवांश से भी किया जाता है. यह नवांश भाव के सूक्ष्म विश्लेषण का आधार होता है. इससे भाव व ग्रहों के बल का अनुमान लगाने में सहायता मिलती है. जीवन में मिलने वाली शुभता या अशुभता इससे बहुत प्रभावित होती है.
इन्हीं के द्वारा जीवन की स्थिति एवं संबंधों की आत्मिकता को अच्छी तरह से समझ पाते हैं. जन्म कुण्डली तथा नवांश कुण्डली में ग्रह स्थिति और विभिन्न योगों के आधार पर परिवर्तन देखे जा सकते हैं. इससे जातक के सामान्य विवरण का पता चल पाता है.
मिथुन लग्न के पहले नवांश का महत्व | Importance of First Navamsa of Gemini Ascendant
मिथुन लग्न का पहला नवांश तुला राशि का है, लग्न के नवांश का ग्रह स्वामी शुक्र है जिसके कारण धन की प्राप्ति, गुणों में वृद्धि, साहस और शक्ति मिलती है. पहले नवांश में यह शुभ स्थिति का परिचायक है. जातक में शुक्र और बुध दोनों के गुणों का संगम देखा जा सकता है वाणी में प्रभावित करने की क्षमता देखने को मिलती है.
जातका का कद लम्बा और चेहरा सुंदर होगा. चेहरे पर लालिमा लिए होगा, आंखें चमकदार होंगी हाथ लम्बे और कंधे चौडे होंगे और आत्मविश्वास का होना स्पष्ट ही दिखाई देता है. जातक का चेहरा तथा व्यक्तित्व अलग ही दिखाई देता है, मंहगी वस्तुओं पर व्यय करने में आगे रहते हैं. बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाते हैं, आपके चरित्र में दृढ़ता बनी रहती है. दांपत्य जीवन को चलाने में यह जातक अपना पूर्ण सहयोग देने की कोशिश करते हैं.
मिथुन लग्न के पहले नवांश प्रभाव | Effects of First Navamsa of Gemini Ascendant
जातक का स्वभाव आकर्षण से युक्त होगा, स्नेही व कुछ उदार भाव भी रखेंगे. आकर्षक चिजों की ओर झुकाव व साज सज्जा का समान खरिदने की चाह रहेगी. धर्म व सत्यवादी आचरण इनमें रह सकता है. खेलकूद व घूमने फिरने के शौकिन होंगे. लोगों से मेलजोल बनाने वाले होते हैं, कार्यों के प्रति आप निष्ठावान रहते हैं और काम में मन लगाकर कार्य करते हैं.जिम्मेदारियों को निभाने की पूरी चाह रखते हैं. आप उदारवादी रवैया भी अपनाते हैं.
शत्रुओं पर नियंत्रण करना अच्छे से जानते हैं. बदला लेने की प्रवृत्ति भी रहती है और शत्रुओं से बदला लेने की भावना से पिछे नहीं हटते हैं. कार्यों में नैतिक व अनैतिक सभी पक्षों को अपना सकते हैं. किसी भी बात के बारे में बिना लाग लपेट के कह देना इनकी खूबी में शामिल होता है.
काम को लेकर जल्दबाजी रह सकती है, किसी विषय के बारे में जितना जल्दी विचार करते हैं उतना ही धीमें कार्य की प्रगति पर हो सकते हैं. कल्पनाओं की उडा़न अधिक रह सकती है. किसी भी विषय के बारे में समझ रखने की कोशिश कर सकते हैं. अच्छे वक्ता हो सकते हैं, आर्थिक स्थिति जीवन के मध्य भाग से बेहतर रहेगी. बौद्धिक क्षमता के द्वारा आप अपनी कार्ययोजनाओं को आगे तक ले जाने की चाह रखेंगे.
मिथुन लग्न के पहले नवांश का महत्व
जीवन की शुरूआत में काफी प्रगति करते हैं और अग्रसर बने रहते हैं. वाणी में मधुरता और कलात्मकता होने के कारण यह लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. धार्मिक कार्यों में रूचि रखने वाले होते हैं. सामंजस्य स्थापित करने में कुशलता से काम लेते हैं. सहयोगियों का प्रभाव अधिक रहता है, सोच प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाती.
क्रय विक्रय में निपुणता से काम लेते हैं कुछ अच्छी स्तर की बौद्धिक रचनाओं की ओर झुकाव होता है. आर्थिक कामों को निपटाने में काफी निपुण रहते हैं. जातक में निडरता, सांमंजस्य का विचार और विचारों में स्थिरता की अभिव्यक्ति रहती है. शुक्र के प्रभाव से इस नवांश में आपकी मुखाकृति व नेत्र सुंदर होती है, आकर्षक देह प्राप्त होती है. वस्त्र एवं रत्न आभूषण के शौकिन रह सकते हैं. आर्थिक स्थिति को अच्छा बनाए रखने की चाह रहती है जिसके लिए परिश्रम करते हैं.
काम में जल्दबाजी भी कर सकते हैं जिस कारण कभी कभी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. दांपत्य जीवन में सामान्यत: आन्द का माहौल रहता है. जीवन की विपरित परिस्थितियों में भी साथी का पूर्ण साथ मिलता है और उसके साथ को आगे तक ले जाने की चाह भी रखते हैं. जीवन साथी नीतिवान और निपुण होता है और काम के प्रति तथा परिवार दोनों को समान महत्व देने वाला होता है. यदि कुछ कठिनाईयां उभरती भी हैं तो दोनो मिलकर उन पर नियंत्रण पा सकते हैं.
सबसे हम जन्म कुंडली पर नजर डालते हैं. महिला का जन्म अक्तूबर 1964 का है और 22वर्ष की उम्र में इनका विवाह एक कुलीन व संभ्रांत परिवार में संपन्न हुआ. आर्थिक रुप से किसी तरह की कोई कमी नहीं थी. इनके पति भी एक कुशल बिजनेसमैन हैं. संयुक्त परिवार में रहती हैं. जन्म कुंडली का मिथुन लग्न है और चंद्रमा मकर राशि का आठवें भाव में स्थित है. मिथुन लग्न और मकर राशि है. बाकी के ग्रह इस प्रकार से हैं – राहु लग्न में, दूसरे भाव में नीच का मंगल, तीसरे भाव में शुक्र, बुध तथा सूर्य चतुर्थ भाव मे हैं. सप्तम भाव में केतु, आठवें में चंद्रमा, शनि वक्री अवस्था में नवम भाव मे और बृहस्पति वक्री अवस्था में द्वादश भाव में स्थित है.
पंचम भाव व पंचमेश का आंकलन नवांश कुंडली में भी किया जाता है. नवांश कुंडली का लग्न भी मिथुन है, जब जन्म कुंडली और नवांश कुंडली का लग्न एक ही हो तब इसे वर्गोत्तम लग्न कहा जाता है. इस कुंडली में पंचम भाव में तुला राशि में राहु स्थित है और शुक्र अपने भाव से एक भाव पीछे अर्थात चौथे भाव में नीच के हो गये हैं. मंगल छठे भाव के स्वामी होकर फिर यहाँ आठवीं दृष्टि से शुक्र को देख रहे हैं. गुरु नीच राशि में अष्टम भाव में स्थित हैं और नवीं दृष्टि से शुक्र को देख रहे हैं. नवांश कुंडली में पंचम भाव, पंचमेश तथा कारक बृहस्पति तीनो ही अत्यधिक पीड़ित हैं. यहाँ बृहस्पति आठवें भाव में नीच के हैं और इस पर छठे भाव से शनि की दृष्टि भी आ रही है.
संतान सुख के लिए सप्ताँश कुंडली का अध्ययन भी किया जाता है. सबसे पहले तो इसका लग्न और लग्नेश देखा जाता है. इन महिला जातक की सप्ताँश कुंडली में धनु लग्न आता है और लग्न में केतु स्थित होने से यह पीड़ित हो गया है. लग्नेश बृहस्पति होते हैं जो बारहवें भाव में शुक्र के स्थित है और शुक्र इस सप्ताँश कुंडली के लिए छठे भाव के स्वामी बन जाते हैं जो कि संतान प्राप्ति में फिर से बाधा दिखा रहे हैं. इस कुंडली के पंचम भाव में मेष राशि आती है और मेष राशि के स्वामी मंगल है जो सप्तम भाव में राहु के साथ स्थित हैं. सप्तांश कुंडली का लग्न राहु/केतु अक्ष पर, लग्नेश बृहस्पति षष्ठेश शुक्र के साथ बारहवें भाव में, पंचमेश मंगल राहु/केतु अक्ष पर, शनि की दृष्टि लग्न पर है. यहाँ भी हर तरह से पीड़ा नजर आती है.
चंद्रमा को लग्न बनाकर कुंडली को देखें तब मकर लग्न बनता है. पंचम भाव में वृष राशि आती है और पंचमेश शुक्र आठवें भाव में स्थित हैं. दूसरे भाव से शनि की दृष्टि पंचमेश शुक्र पर आ रही है. बृहस्पति तीसरे व बारहवें भाव के स्वामी होकर पंचम भाव में स्थित हैं, जो कि अशुभ है. यहाँ भी पंचम भाव पीड़ित अवस्था में है और कहीं से भी आशा की किरण नजर नहीं आती है.
