लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में शुक्र का सूर्य, चंद्रमा और बुध के साथ संबंध | Relations of Venus With Sun, Moon and Mercury in the Third House of Lal Kitab

शुक्र और सूर्य | Venus and Sun लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में शुक्र की युति सूर्य के साथ होने पर व्यक्ति के स्वभाव में एक असमंजस की स्थिति देखी जा सकती है. उसके मन की कल्पनाओं की सकारात्मकता में विलंब की स्थिति पनप सकती है. व्यक्ति को स्त्रियों का साथ मिलता है किंतु उनसे अधिक घनिष्ठता नहीं रह पाती है. जातक धनार्जन करने में प्रयासरत रह सकता है. अधिक मेहनत करनी होती है, अनियंत्रित इच्छाएं कभी कभी गलत मार्ग की ओर भी ले जा सकती हैं. व्यक्ति को खूब सा धन और भोग विलास की चाह रह सकती...

लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में बुध का गुरू(बृहस्पति), शुक्र, शनि और राहु -केतु के साथ संबंध | Relations of Mercury With Jupiter, Venus, Saturn and Rahu-Ketu in the Third House of Lal Kitab

बुध और बृहस्पति | Mercury and Jupiter बुध और बृहस्पति का योग होने पर एक तथ्य तो यह सामने आता है कि इन दोनों का संबंध बुद्धि और ज्ञान से है, अत: यह मिलकर हों तो व्यक्ति में इन गुणों का समावेश बना रहता है और उसके ज्ञान में वृद्धि होती है. उसकी समझ का दायरा विकसित होता है जो उसे आत्मविश्लेषण का भी बोध कराने में सहायक सिद्ध होता है. परंतु इन दोनों की स्थिति में कोई दुष्प्रभाव नहीं होना चाहिए अपितु इनके शुभ तत्वों में कमी होना स्वभाविक होता है. बुध के साथ बृहस्पति का संबंध...

लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में बृहस्पति का बुध, शुक्र, शनि और राहु-केतु के साथ संबंध | Relation Of Jupiter With Mercury, Venus, Saturn, Rahu/Ketu In The Third House Of Lal Kitab

बृहस्पति और बुध | Jupiter and Mercury लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में बृहस्पति के साथ बुध की युति होने पर जातक को दोनों के शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इस स्थिति में यदि इन पर शुभ ग्रहों का प्रभाव आ रहा होता है तो व्यक्ति अपने सामर्थ्य से अधिक फल की प्राप्ति करता है. वह किसी न किसी प्रकार से दूसरों की सहायता को पाने में सफल रहता है. बंधु जनों का साथ उसे प्राप्त होता है. वह अपने कार्यों में परिश्रम से अधिक अपनी बौद्धिकता को स्थान देता है. जातक को अपने भाई बंधुओं का साथ भी खूब...

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में केतु के साथ सूर्य, चंद्र, मंगल का संबंध | Relation Of Ketu With Sun, Moon and Mars in the Second House Of Lal Kitab

केतु और सूर्य | Ketu And Sun लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में केतु के साथ सूर्य का होना जातक के तेज में कमी करने वाला बन सकता है उसे पिता की ओर से सहायता मे कमी भी मिल सकती है किंतु वह अपने नाम को आगे ले जाने में प्रयासरत रह सकता है. दूसरे घर में यह स्थिति होने से ग्रह एक दूसरे के प्रति सम भाव सा रखते हैं. अपना अपना फल देने की इनकी प्रवृति समान रूप से रहती है. कभी कभी यह स्थिति जातक के बोलने में भी कटुता ला सकती है. साथ ही जातक के मनोभावों को समझने में भी मुशकिल होती है....

लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में बृहस्पति का सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ संबंध | Relations of Jupiter With Sun, Moon and Mars in the Third House Of Lal Kitab

बृहस्पति और सूर्य | Jupiter and Sun लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में बृहस्पति के साथ सूर्य की युति संबंध होने के कारण शुभता का प्रभाव प्रतिफलित होता है. बृहस्पति और सूर्य का संयोग प्रभाव स्वरूप जातक को विद्या के क्षेत्र में बेहर प्रदर्शन करने की क्षमता दे सकता है. वह अपने घर में सभी के लिए सहायक भी हो सकता है या किसी बडे़ के जैसा दायित्व निभाने वाला बन सकता है. भाग्य में उन्नति कर सकता है अपने बल पर काम को ऊँचाईयों तक पहुंचाने में कामयाब हो सकता है. यहां सूरज के मंदे होने...

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में राहु का बृहस्पति, शुक्र, शनि के साथ संबंध | Relation Of Rahu with Jupiter, Venus and Saturn In The Second House Of Lal Kitab

बृहस्पति और राहु | Rahu And Jupiter लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में राहु के साथ बृहस्पति के स्थित होने पर राहु, बृहस्पति के अधीन हो जाता है. इस घर में बृहस्पति की ही चलती है क्योंकि एक ओर तो यह इसका घर होता है. अगर व्यक्ति गरीब भी हो तो भी वह दूसरों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहेगा. साधु जैसा व्यवहार करेगा. जातक के गुणों में उदारता की भावना बनी रहती है कुछ मामलों में वह सख्त हो सकता है किंतु अपने इस पहलु से वह दूर नहीं रह सकता है. इस स्थिति में अगर आठवें घर में बृहस्पति...

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में राहु का सूर्य, चंद्रमा, मंगल और बुध के साथ संबंध | Relation Of Rahu with Sun, Moon, Mars and Mercury in the Second House of Lal Kitab

राहु और सूर्य | Rahu and Sun लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में राहु के साथ सूर्य होने पर जातक को परिवार के सुख में कमी मिलती है. मानसिक तनाव की स्थिति उसे परेशान कर सकती है. राहु इस स्थान पर सूर्य के तेज में अवरोध पैदा करने वाला होगा इसका तेज राहु द्वारा अधिगृहित हो जाएगा. उसमें वह सात्विकता नहीं हो पाएगी जिसका उसे फल देना चाहिए उस फलों को देने में समर्थ नहीं रह पाएगा. जीवन में परिवार के लिए काफी संघर्ष बना रहेगा. जातक की वाणी में भी कठोरता रह सकती है. परिवार से दूरी रह...

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में केतु का बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि के साथ संबंध | Relation Of Ketu With Mercury, Jupiter, Venus and Saturn In The Second House Of Lal Kitab

केतु और बुध | Ketu and Mercury लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में केतु के साथ बुध का युति करना दोनों के फलों में अनुकूलता देने वाला हो सकता है यहां बुध केतु के साथ मिलकर उसके जैसे फलों को देने की कोशिश कर सकत है. यहां जातक के बोलने में स्पष्टता की कमी रह सकती है. जातक अपने विचारों को पूर्ण रूप से सभी के सामने अभिव्यक्त न करे और अधिकांश बातों को मन में ही दबाकर काम कर सकता है. केतु के साथ बुध बैठा हो तो एक का असर अच्छा हो जाता है और दूसरे का मंदा हो जाता है इस स्थिति में...

लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में सूर्य का चंद्रमा, मंगल, बुध और बृहस्पति के साथ संबंध | Relation Of Sun With Mars, Mercury, Moon and Jupiter in the Third House Of Lal Kitab

सूर्य और चंद्रमा | Sun and Moon लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में सूर्य का चंद्रमा के साथ युति संबंध होने पर जातक के लिए यह स्थिति अच्छे फल देने वाली मानी जाती है. जातक को लाभ और शक्ति की प्राप्ति होती है. वह अपने कामों में काफी साहस का परिचय देता है और शुभ फलों को पाने में सफल होता है. किंतु यहां स्थिति जातक के लिए अच्छे फल देने वाली बन सकती है सूर्य बुध की राशि में मित्र स्वरूप स्थित होता है इसलिए यहां के फल सूर्य के लिए बुरे नहीं रह पाते किंतु साथ ही स्थिति के साथ युति व स्थान...

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में शनि का बृहस्पति, शुक्र और राहु केतु के साथ संबंध | Relation Of Saturn With Jupiter, Venus and Rahu/Ketu In The Second House Of Lal Kitab

शनि और बृहस्पति | Saturn and Jupiter लाल किताब कुण्डली में दूसरे घर अगर शनि के साथ गुरू के होने पर अनुकूलता में कमी आ सकती है. यह दोनों साथ में एक दूसरे के साथ होकर दूसरे घर के फलों में कमी कर सकते हैं. परिवार से दूरी बनी रह सकती है यह स्थित हो तो यह अच्छी स्थिति नहीं मानी जाती है. इसके प्रभाव से व्यक्ति को कोई न कोई नुकसान अवश्य झेलना पड़ता है. यदि यह दोनों ही शुभ स्थिति में नहीं हों तो व्यक्ति को अपने धन से हाथ धोना पड़ सकता है या फिर देह संबंधी दिक्कतें परेशान कर सकती हैं....

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में शनि का सूर्य, चंद्र, मंगल और बुध के साथ संबंध | Relation Of Saturn With Sun, Moon, Mars and Mercury In the Second House Of Lal Kitab

शनि और सूर्य | Saturn and Sun लाल किताब कुण्डली के दुसरे घर में शनि के साथ सूर्य की स्थिति व्यक्ति की भाषा में गर्मजोशी लाने का काम करती है वार्तालाप में कुछ उत्तेजना बनी रह सकती है. परंतु यहां एक दूसरे के साथ शत्रु भाव के होने पर प्रभावों में कमी भी आती है. ऎसे समय में कुछ विशेष समय अंतराल में अन्य ग्रह अपने फलों में शुभता नहीं दे पाता है. संबंधों में भी कई बार तनाव की स्थिति बनी ही रहती है. शनि के साथ सूर्य का होना व्यक्ति के स्वभाव में कुछ अकड़ का भाव ला सकता है. सरकार...

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में शुक्र का बृहस्पति, शनि और राहु-केतु के साथ संबंध | Relation Of Venus With Jupiter, Saturn and Rahu-Ketu In The Second House Of Lal Kitab

शुक्र और बृहस्पति | Venus and Jupiter लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर शुक्र के साथ बृहस्पति के होने पर एक का ही प्रभाव फलित हो पाता है और दूसरे का प्रभाव खराब होने लगता है. इस दशा में बृहस्पति के फल नहीं मिल पाते और व्यक्ति को गुरू के प्रभावों से वंचित रहता है, यदि जातक के टेवे में यह स्थिति मिल रही हो तो अगर वह स्वर्ण से संबंधित व्यापार करने की चाह रखता है तो उसे इसमें लाभ के बदले घाटा ही सहन करना पडे़गा. यानि बृहस्पति से संबंधित कोई काम करे तो उसका फल अशुभ ही मिलता है....

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में बुध का गुरू, शुक्र, शनि और राहु-केतु के साथ संबंध | Mercury's Relation with Jupiter, Venus, Saturn and Rahu-Ketu in second house of Lal Kitab Kundali

बुध और बृहस्पति | Mercury and Jupiter लाल किताब के दूसरे घर में बुध और गुरू अर्थात बृहस्पति की युति जातक को ज्ञानी बनाती है और उसे विद्वान लोगों से सम्मान तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है, यह दोनों ही ग्रह व्यक्ति को बौद्धिक क्षमता देने वाले होते हैं और जातक का दिमाग तेज होता है. कामों में कुशलता आती है. अपने ज्ञान और वाक कुशलता के द्वारा वह सभी को अपनी ओर कर लेने की क्षमता रखता है. आर्थिक रूप से जातक को सक्षम बनाती है. ऎसा जातक दूसरों को उपदेश देने में दक्ष होता है. लेकिन एक...

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में बृहस्पति का अन्य ग्रहों के साथ संबंध | Relation of Jupiter With Other Planets In The Second House Of Lal Kitab

बृहस्पति और सूर्य | Jupiter and Sun बहस्पति के साथ सूर्य का होना एक अच्छी स्थिति को दर्शाता है. इन दोनों का प्रभाव इस घर पर 39 वर्षों तक शुभ प्रभाव मिलता रहेगा और जातक को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकेगी. यह दोनों ही सात्विकता से पूर्ण ग्रह हैं इस कारण से यह जहां भी स्थित होते हैं अपने गुणों से उक्त स्थान को अच्छा करने में सहायक होते हैं. दूसरे घर में होने से यह स्थिति जातक को मकान का सुख देती है और अच्छे निवास का प्रतिनिधित्व करती है. संतान का सुख भोगने को मिलेगा. मकान महल...

लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में मंगल का शुक्र, शनि, राहु और केतु के साथ संबंध | Relation Of Mars With Venus, Saturn, Rahu, and Ketu In the Third House Of Lal Kitab

मंगल और शुक्र | Mars and Venus लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में मंगल की स्थिति व्यक्ति के व्यवहार में जो पराक्रम का भाव देने में सहायक बनती है वह उसके लिए हर क्षेत्र में परिश्रम और लगन से सफलता दिलाने में सहायक होती है. मंगल के प्रभाव से व्यक्ति का स्तर उच्च कोटी को पाने वाला बनता है. इससे जातक में कर्म करने की इच्छा तीव्र होती है और वह अपनी स्थिति के अनुरूप आगे बढ़ने में सफल भी होता है. मंगल के मंदे फल हों या अच्छे फल इनका प्रतिपादन तो स्वयं मंगल के स्थिति और उस पर पड़ने...

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में बृहस्पति का शुक्र, शनि और राहु-केतु के साथ संबंध | Jupiter's Association with Venus, Saturn, Rahu and Ketu in Second House of Lal Kitab

बृहस्पति और शुक्र | Jupiter and Venus बृहस्पति के साथ शुक्र यदि लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में बैठे हों तो इस दशा में बृहस्पति के फल नहीं मिल पाते और व्यक्ति को गुरू के प्रभावों से वंचित रहता है, अर्थात अगर कोई व्यक्ति जिसको यह स्थिति मिल रही हो और वह स्वर्ण से संबंधित व्यापार करने की चाह रखता है तो उसे इसमें लाभ के बदले घाटा ही सहन करना पडे़गा. यानि बृहस्पति से संबंधित कोई काम करे तो उसका फल अशुभ ही मिलता है. लेकिन अगर कोई मिट्टी के कामों जैसे कृषि संबंधी काम या वस्त्र...

लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में बुध का सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ संबंध | Conjunction of Mercury with Sun, Moon and Mars in Third House of Lal Kitab Kundali

बुध और सूर्य | Mercury and Sun लाल किताब कुण्डली के तीसरे घर में बुध के साथ सूर्य की स्थिति अच्छी मानी जाती है. बुध की स्थिति तीसरे घर में होने पर इस घर में उसी के स्वामित्व को देने वाली बनती है तथा सूर्य के साथ इसकी मित्रता की भी शुभता को दर्शाने में सहायक होती है. बुध और सूर्य का शुभता से युक्त फल मिलता है. इस स्थान दोनों की युति व्यक्ति के प्रभाव से व्यक्ति प्रेम संबंधों में ईमानदार रहता है. वह अपने साथी के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव रखने वाला होता है और उसके साथ सभी सुख दुख...

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में बुध का अन्य ग्रहों के साथ संबंध | Relation Of Mercury With Other Planets In The Second House Of Lal Kitab - Part 1

बुध और सूर्य | Mercury And Sun लाल किताब कुण्डली में जब हम दूसरे घर में बुद के साथ सूर्य को पाते हैं तो यह तथ्य एक उज्जवल बौद्धिकता और ज्ञान का पैमाना लेकर आता है. बुध के साथ सूर्य का होना जातक क्लो ज्ञान के क्षेत्र में एक ओजस रूप को दिखाता है प्रखर होकर विद्वता सामने आती है और जातक को सही ओर गलत के मध्य भेद करने का ज्ञान भी देती है. इस घर की छाप पर इन दोनों ग्रहों की छवि प्रखर तरीके से उभरकर सामने आती है. जहां इस बुद्धि को तेज की प्राप्ति होती है वहीम उसमें कुछ क्रोध भी...

लाल किताब कुण्डली के पहले घर मे राहु की अन्य ग्रहों से युति | Rahu’s Conjunction With Other Planets In The First House of Lal Kitab

राहु और सूर्य | Rahu and Sun राहु के साथ सूर्य के पहले घर में होने पर कुण्डली की अनुकूल स्थिति खराब होती है यहां इनकी युति होने पर ग्रहण की स्थिति उत्पन्न होती है. राहु के साथ सूर्य का संबंध इस घर के फलों में कमी आएगी और सेहत या स्वभाव में कुछ न कुछ परेशानियां बनी रह सकती हैं. लाल किताब में यह युति पहले घर में जातक को मानसिक परेशानियां झेलनी पड़ती हैं. पहले घर में अगर राहु और सूर्य के समय अगर मंगल पांचवें या नौवें घर में हो तो यह व्यक्ति की नेत्र दृष्टि पर असर डाल सकता है....

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में मंगल का अन्य ग्रहों के साथ संबंध | Relation of Mars With Other Planets In The Second House Of Lal Kitab

लाल किताब कुण्डली का दूसरा घर धर्म ग्रह कहा जाता है यहां स्थित जो भी ग्रह हो वह धर्म ग्रह के रूप में प्रमुखता पाता है और जातक को उससे संबंधि फलों की प्राप्ति होती है. इसी के साथ इस घर का प्रमुख कारक ग्रह यदि स्वयं यहां स्थिति हो जाता है तो जातक को शुभ फलों की प्राप्ति स्वत: ही होने लगती है. इस घर में यदि कोई दुष्ट ग्रह बैठे या कोई खराब ग्रह दृष्टि दे रहा हो तो जातक को इस घर से मिलने वाले फलों में कमी की प्राप्ती होती है. अत: हर ग्रह यहां पर स्थित होकर कई प्रकार के फलों को देता है...