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शनि के पाया के फल (What to Expect From Saturn's Paya)


किसी भी व्यक्ति की जन्म राशि से शनि जिस भी भाव में गोचर कर रहा होता है. उसके अनुसार शनि के पाया अर्थात पाद फल विचार किया जाता है. व्यक्ति के जन्म कुण्डली को आधार बनाकर शनि पाया के फलों का अध्ययन किया जाता है. निम्न रुप से जन्म राशि के अनुसार शनि पाया की शुभता या अशुभता का निर्धारण किया जाता है.

जब शनि गोचर में किसी व्यक्ति की जन्म राशि से 1, 6, 11 भाव में भ्रमण करते है. तो शनि के पाद स्वर्ण के माने जाते है. या फिर जन्म राशि से 2, 5, 9 वें भाव में गोचर करते है. तो रजत पाया व शनि का गोचर जन्म राशि से 3, 7, 10 वें भाव में होने पर ताम्रपाद कहलाते है. इसके अतिरिक्त शनि का जन्म राशि से 4, 8, 12 वें भाव में गोचर होना लोहे के पाद कहलाते है.

शनि पाया अवधि में मिलने वाले सामान्य फल


1. सोने का पाया  की अवधि के फल (Result of Saturn's Gold Paya)
सोने का पाया की अवधि में व्यक्ति को कई प्रकार के सुख मिलने की संभावनाएं बनती है. धन व समृ्द्धि के लिये भी यह समय व्यक्ति के अनुकुल होता है.

2. चांदी का पाया की अवधि के फल (Result of Saturn's Silver Paya)
यह अवधि में शुभ फल देने वाली कही गई है. शनि गोचर की इस अवधि में व्यक्ति को सब प्रकार की भौतिक सुख-सुविधाएं मिल सकती है.

3. तांबे का पाया की अवधि के फल (Result of Saturn's Bronze Paya)
शनि गोचर की यह अवधि व्यक्ति को मिले- जुले फल देती है. जीवन के कई क्षेत्रों में व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है. तो कुछ अन्य क्षेत्रों में उसे असफलता का भी सामना करना पड सकता है.

4. लोहे का पाया की अवधि के फल (Result of Saturn's Iron Paya)
शनि गोचर की यह अवधि व्यक्ति के धन में हानि हो सकती है. व्यवसाय के लिये भी यह समय अनुकुल न रहने की संभावनाएं बनती है. शनि गोचर कि यह अवधि व्यक्ति के स्वास्थ्य में कमी कर सकती है.

जन्म राशि से विभिन्न भावों में शनि के फल


1. प्रथम भाव में शनि स्वर्ण पाया विचार (Saturn's Gold Paya in First House)
गोचरवश जब शनि व्यक्ति की जन्म राशि अर्थात प्रथम भाव में हो तो इस अवधि को शनि का सोने का पाया कहा जाता है. सोने के पाये में शनि व्यक्ति के स्वास्थ्य सुख में वृ्द्धि करता है. व्यक्ति को संतान से कष्ट हो सकता है. व्यक्ति के रुके हुए कार्य पूरे होने होते है. व्यक्ति को व्यापारिक कार्यो से लाभ प्राप्त हो सकते है. पर शिक्षा क्षेत्र में बाधाएं बनी रहती है.

2. द्वितीय भाव में शनि रजत पाया विचार (Saturn's Silver Paya in Second House)
जन्म राशि से शनि जब द्वितीय़ भाव में गोचर कर रहे होते है. तो गोचर की इस अवधि को शनि का चांदी का पाया कहा जाता है. शनि रजत पाया समय में व्यक्ति को कार्यो में सफलता प्राप्त होती है. शनि के प्रभाव से व्यक्ति को व्यापार में लाभ प्राप्त होने की सम्भावनाएं बनती है. उसे भूमि व जायदाद के विषयों से लाभ प्राप्त हो सकते है. तथा इस अवधि में व्यक्ति को सम्बन्धियों से मिलने के अवसर प्राप्त हो सकते है. सम्मान प्राप्ति की संभावनाएं बन सकती है.

3. तृ्तीय भाव में शनि ताम्रपाद पाया विचार (Saturn's Bronze Paya in Third House)
शनि के ताम्रपाद अवधि में व्यक्ति को धर्म के कार्यो में रुचि अधिक हो सकती है. उच्च शिक्षा की संभावनाएं बनती है. तथा व्यक्ति मेहनत से अपने व्यापार में वृ्द्धि करने में सफल होता है. अपने साहस व पराक्रम से उसे अपने शत्रुओं को पराजित करने में सफलता प्राप्त होती है. पर यह अवधि व्यक्ति के वैवाहिक जीवन के लिये अनुकुल नहीं रहती है. आय में बढोतरी के योग बनते है. पर दुर्घटनाएं भी हो सकती है.

4. चतुर्थ भाव में शनि लौहे पाया विचार (Saturn's Iron Paya in Fourth House)
शनि के लोहे के पाये की अवधि में व्यक्ति के कार्यो में बाधाएं आ सकती है. व्यक्ति को आजिविका में बदलाव करना पड सकता है. व्यापार में हानि के योग बनते है. इस अवधि में व्यक्ति के मानसिक तनाव बढने की संभावनाएं बनती है. पारिवारिक कलह के कारण व्यक्ति चिन्ताग्रस्त रह सकता है. शनि के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति की मान-हानि हो सकती है. आय के लिये यह अवधि शुभ रहता है.

5. पंचम भाव में शनि रजत पाया विचार (Saturn's Silver Paya in Fifth House)
व्यापार में वृ्द्धि हो सकती है. व्यक्ति के घर में मंगलकार्य होने की संभावनाएं बनती है. व्यक्ति को इस अवधि में शुभ फल अधिक प्राप्त होते है. प्रतियोगियों को परास्त करने में व्यक्ति सफल रहता है. पर दांम्पत्य जीवन के सुख में कमी हो सकती है.

6. छठे भाव में शनि स्वर्ण पाया विचार (Saturn's Silver Paya in Sixth House)
इस अवधि में शनि का गोचर स्वर्ण पाये में होने के कारण यह अवधि व्यक्ति के लिये शुभ फल देने वाली होती है. इस समय में व्यक्ति के मान-सम्मान में बढोतरी हो सकती है. धन लाभ के योग बनते है. जमीन- जायदाद में वृ्द्धि की संभावनाएं बनती है.

7. सप्तम भाव में शनि ताम्र पाया विचार (Saturn's Bronze Paya in Seventh House)
जब शनि का गोचर व्यक्ति की जन्म राशि से सांतवें भाव पर हो रहा होता है. तो व्यक्ति की भौतिक सुख - सुविधाओं के बढने की संभावनाएं बनती है. पर इसके साथ ही व्यक्ति के मानसिक तनावों में भी बढोतरी हो सकती है. जीवन साथी के स्वास्थ्य में कमी हो सकती है.

8. अष्टम भाव में शनि लोहे पाया विचार (Saturn's Iron Paya in Eighth House)
शनि लोहे पाया अवधि व्यक्ति के कष्टों में बढोतरी कर सकती है. परिवार से भी मतभेद की संभावनाएं बनती है. असमय होने वाली घटनाएं व्यक्ति की परेशानियां बढा सकती है. सम्मान में कमी हो सकती है. तथा ऋण लेने पड सकते है.

9. नवम भाव में शनि रजत पाया विचार (Saturn's Silver Paya in Ninth House)
इस अवधि में व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते है. धन वृ्द्धि होती है. आय अधिक हो सकती है. पर शत्रुओं में कमी होती है.

10. दशम भाव में शनि ताम्र पाया विचार (Saturn's Bronze Paya in Tenth House)
जन्म राशि से दशम भाव में शनि गोचर ताम्र पाया कहलाता है. इस समय में व्यक्ति को प्रयास के अनुरुप सफलता प्राप्ति कि संम्भावनाएं बनती है. सोचे हुए कार्य भी पूरे होते है. पर इस अवधि में व्यक्ति को अपने जीवन लक्ष्यों के प्रति कार्यशील रहना चाहिए. आलस्य का भाव इस अवधि के फलों को अशुभ कर सकता है.

11. एकादश भाव में शनि स्वर्ण पाया विचार (Saturn's Paya in Eleventh House)
बहुत ही शुभ फल मिलने के योग बनते है. धन में वृ्द्धि होती है. प्रतिष्ठा में भी वृ्द्धि हो सकती है.

12. द्वादश भाव में शनि लौहे पाया विचार (Saturn's Paya in Twelfth House)
संबन्धियों से संबन्ध खराब हो सकते है. धन के व्यय अधिक हो सकते है. व्यक्ति पर झूठे आरोप लग सकते है. मन में चंचलता का भाव हो सकता है. यात्राएं करने के अवसर प्राप्त हो सकते है.
Article Categories: Kundli Shani Astrology

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