भावों का बाहरी और आंतरिक महत्व | External and internal significance of Bhavas

प्रश्न कुण्डली में हर भाव के दो महव होते हैं जिनका बाहरी और आंतरिक रूप से अलग-अलग महत्व होता है. भाव के यह दोनों रूप उसके महत्व को समझाने के लिए काफी व्यापक रूप से काम में आते हैं. वराहमिहीर जी ने अपने ग्रंथ बृहतजातक में भावों के महत्व को विस्तार पूर्वक बताया है. बृहतजातक अनुसार भाव के आंतरिक और बाहरी कारक तत्व | According to Brihat Jataka external and internal significations भाव बाहरी कारक आंतरिक...

प्रश्न कुण्डली | Prashna Kundli | What is Prashna Kundali

यदि दो ग्रह एक दूसरे से 1, 4, 7 या 10 की स्थित में हों तो उस मामले में भी घटना घटित हो सकती है लेकिन लगातार संघर्ष व जद्दोजहद के बाद ही कुछ होता है. दो ग्रहों के आपस में सामान्य प्रभाव नहीं हों या 2, 6, 8 और 12 वें भावों में हों, तो उस मामले में, असफलता और नुकसान हो सकता है. ताजिक ज्योतिष में दो महत्वपूर्ण योग हैं जो प्रश्न कुण्डली के जवाबों को निकालने में सबसे ज्यादा उपयोग किए जाते हैं. लग्नेश और सवाल के इन योग को समझने के लिए सूक्षमता से अध्ययन करने की आवश्यकता...

प्रश्न कुंडली का सामान्य विश्लेषण | General Analysis of Prashna Kundali

प्रश्न कुण्डली का प्रत्येक भाव जन्म कुण्डली के भावों की भांति ही महत्वपूर्ण होता है. प्रश्न कुंडली हर भाव प्रश्नकर्ता के जवाब को चाहे न दर्शाए किंतु उसके प्रश्न की सार्थकता एवं पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. लग्न में स्थित राशि प्रश्नकर्ता का सवाल बनती है और अन्य भाव प्रश्नकर्ता के धन संपदा, भाई बंधुओं इत्यादि को दर्शाते हैं जैसा की जन्म कुण्डली के भावों में होता है. षटपंचाशिका के पृथ्युशस अनुसार जो भाव अपने स्वामी द्वारा दृष्ट होते हैं तथा शुभ ग्रहों से संम्बधित होते हैं...

प्रशन कुण्डली में भावों का महत्व | Importance of Houses in Prashna Kundali

प्रश्न कुण्डली का प्रत्येक भाव जन्म कुण्डली के भावों की भांति ही महत्वपूर्ण होता है. प्रश्न कुंडली हर भाव प्रश्नकर्ता के जवाब को चाहे न दर्शाए किंतु उसके प्रश्न की सार्थकता एवं पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. लग्न में स्थित राशि प्रश्नकर्ता का सवाल बनती है और अन्य भाव प्रश्नकर्ता के धन संपदा, भाई बंधुओं इत्यादि को दर्शाते हैं जैसा की जन्म कुण्डली के हावों में होता है. षटपंचाशिका के पृथ्युशस अनुसार जो भाव अपने स्वामी द्वारा दृष्ट होते हैं तथा शुभ ग्रहों से संम्बधित होते हैं वह...

प्रश्न शास्त्र का परिचय | Introduction of Prashna

वैदिक ज्योतिष की अनेक शाखाएं हैं जिनके द्वारा फलित का विचार किया जाता है. इसमें से एक शाखा प्रश्न शास्त्र नाम से है जो एक प्रमुख स्थान पाती है. यह हमें किसी व्यक्ति विशेष के अचानक पूछे गए प्रश्न के आधार पर कि जाती है. प्रश्न शास्त्र एक ऎसी विद्या है जो समय के अभाव में भी एक महत्वपूर्ण फलित देने में समर्थ होती है. प्रश्न का उत्तर उस समय पूछे गए प्रश्न की कुण्डली बना कर दिया जाता है. संस्कृत भाषा में समय को अहोरात्री के रूप में दर्शाया जाता है. अहो का अर्थ होता है दिन तथा रात्री का...

प्रश्न कुण्डली में भावों के कारक तत्व | Elements in Houses of Prashna Kundali

जैसा कि पहले चर्चा कर चूके हैं कि प्रश्न कुण्डली में भाव सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक होता है. सामान्यत: प्रश्न कुण्डली के भाव जन्म कुण्डली की ही भांति होते हैं और इनका अध्ययन भी जन्म कुण्डली के भावों की भांति ही किया जाता है. इनमें भी ग्रहों की दृष्टि और स्थिति के अनुरूप फलकथन होता है. परंतु यहां पर ताजिक की दृष्टि का अलग ही प्रभाव होता है क्योंकि यह पराशर दृष्टि से भिन्न होती है जो प्रश्न कुण्डली के भावों को सुक्षमता के साथ समझने में मददगार सिद्ध होती है. पहला भाव | First...

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