Customised Vedic Jyotish Reports

Premium Reports

Vedic Astrology Reports

शादी कब होगी? (When will I get married)


when-will-i-get-marriedशादी कब होगी! यह प्रश्न भले है छोटा है लेकिन हमारे समाज के लिए यह एक अहम प्रश्न है. बच्चों के जन्म के साथ ही माता पिता उनकी शादी का सपना संजोने लगते हैं. जब युवावस्था में बच्चे पहुंचते हैं तो माता पिता अपने बच्चों के लिए योग्य जीवनसाथी की तलाश करने लगते हैं. यह तलाश जब लम्बी होने लगती है तो मन में प्रश्न उठने लगता है शादी कब होगी?

विवाह के कारक ग्रह और स्थिति (Marriage Karakas and Planetary Positions)


पति पत्नी का रिश्ता ईश्वर तय करता है. ईश्वर द्वारा निर्धारत समय में ही विवाह सम्बन्ध होता है लेकिन अपने कर्तव्य से बंधकर हर माता पिता अपने बच्चों का घर बसाने के लिए चिंतित होते हैं. इस चिंता का निवारण तब होता है जब ग्रह की स्थिति अनुकूल होती है. ज्योतिषीय विधान में विवाह के विषय में सप्तम भाव और सप्तमेश के साथ विवाह के कारक बृहस्पति और शुक्र की स्थिति को देखा जाता है (The karakas for marriage are seventh house, seventh lord, Jupiter and Venus). सप्तम भाव और सप्तमेश अशुभ ग्रहों के द्वारा पीड़ित हो अथवा कमजोर स्थिति में हो तो विवाह में विलम्ब की संभावना रहती है. लग्न और लग्नेश भी इस विषय में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.

प्रश्न कुण्डली में विवाह समय का निर्घारण (Ascertaining the time of marriage through the Prashna Kundali)


अगर विवाह में विलम्ब हो रहा है और इसका कारण जानने के लिए प्रश्न कुण्डली देखते हैं तो पाएंगे कि गुरू जिस भाव में है उस भाव से चौथे घर में क्रमश: चन्द्रमा और शुक्र स्थित होंगे (There's a delay if Moon or Venus are placed in fourth house from Jupiter). अगर इस प्रकार की स्थिति नहीं है तो कई अन्य स्थितियों का भी जिक्र प्रश्न कुण्डली में किया गया है जिनसे मालूम होता है कि व्यक्ति की शादी में अभी विलम्ब की संभावना है जैसे लग्न से अथवा चन्द्र राशि से पहले, तीसरे, पांचवें, सातवें और दसवें घर में शनि बैठा हो. प्रश्न कुण्डली के छठे, आठवें अथवा द्वादश भाव में अशुभ ग्रहो की उपस्थिति भी इस बात का संकेत होता है कि जीवनसाथी को पाने के लिए अभी इतजार करना होगा. सप्तम भाव में अशुभ ग्रह विराजमान हो और शनि अथवा मंगल अपने ही घर में आसन जमाकर बैठा हो तो यह समझना चाहिए कि जीवनसाथी की तलाश अभी पूरी नहीं हुई है यानी अभी विवाह में विलम्ब की संभावना है. सातवें घर में राहु और आठवें घर में मंगल भी इस तरह का परिणाम दिखाता है.

प्रश्न कुण्डली विवाह के विषय में सप्तम भाव के साथ ही द्वितीय और एकादश भाव से भी विचार करने की बात करता है. यही कारण है कि जब चन्द्रमा और शनि की युति प्रथम, द्वितीय, सप्तम अथवा एकादश भाव में होता है (Conjunction of Moon and Saturn in 1st, 2nd, 7th or 11th house causes a delay) तो प्रश्न कुण्डली विवाह में विलम्ब की संभावना को दर्शाता है. ज्योतिष की इस शाखा में मंगल को भी स्त्री की कुण्डली में विवाह कारक ग्रह के रूप में देखा जाता है. अगर कुण्डली में मंगल और शुक्र की युति पंचवे, सातवें अथवा ग्यारहवें भाव में बनती है और शनि उसे देखता है तो निकट भविष्य में विवाह की संभावना नही बनती है.

प्रश्न कुण्डली से विवाह के विषय में उदाहरण (Examples of timing marriage from the Prashna Kundali)


अनुपमा अपनी शादी को लेकर काफी चिंतित थी. कई जगह बात बनते बनते बिगड़ गई थी. इस स्थिति में अनुपमा ने प्रश्न कुण्डली के माध्यम से जानना चाहा कि विवाह कब होगा. इन्हों ने अपना प्रश्न 25 मई 2009 को 5 बजकर 10 मिनट पर पूछा. प्रश्न के अनुसार जो कुण्डली बनी उसमें लग्न तुला और राशि वृष आया. इस कुण्डली में लग्न और राशि दोनों का स्वामी शुक्र है. नक्षत्र कृतिका आया जिसका स्वामी सूर्य हे. कुण्डली विश्लेषण से ज्ञात होता है कि अनुपमा की शादी में अभी कुछ वक्त लग सकता है क्योंकि कुण्डली के निमानुसार इनकी कुण्डली में सातवें घर में मंगल स्वराशि में बैठा है. अष्टम भाव में चन्द्रमा अशुभ ग्रहों के साथ है.
Article Categories: Marriage Astrologyy

bottom
Free Vedic Jyotish

Free Reports

Free Vedic Astrology

All content on this site is copyrighted.


Do not copy any content without permission. Violations will attract strict legal penalties.