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कृष्णमूर्ति पद्धति और चौथा भाव - KP Astrology and Forth House


चौथे घर को सुख (happiness) का घर कहते है. इस घर से भौतिक सुख-सुविधाएं देखी जाती है तथा माता से प्राप्त होने वाले स्नेह को जानने के लिये भी चौथे घर से विचार किया जाता है. व्यक्ति जब कभी घर से दूर जाता है तब माता से दूर रहने की संभावनाएं बनती है. जिसके फलस्वरुप व्यक्ति के सुख में कमी आती है. जिसका कारण चौथे घर पर अशुभ प्रभाव हो सकता है.

विदेश जाने का मार्ग (Way to go Abroad as Per K.P. Systems)


इस घर के पीड़ित हुए बिना व्यक्ति के घर सेदूर विदेश में जाने की संभावनाएं कम ही बनती है. शरीर के अंगों में चौथा घर हृदय स्थान होता है तथा इस घर से वक्षस्थल या छाती का विचार किया जाता है.

चौथे घर के कार्य (Acts of the Fourth House as Per K.P. Systems)


चौथा घर तीसरे घर से द्वितीय घर होने के कारण भाई-बन्धुओं में वृद्धि की संभावना बनाता है. यह घर पंचम से बारहवां घर होता है इसलिये मध्यम स्तर की शिक्षा के लिये देखा जाता है. यह घर सुख स्थान होता है इसलिए घर के सुख के साथ वाहन का सुख, जमीन, खेती, तथा बगीचे की प्राप्ति भी इसी घर से देखी जाती है. कृष्णमूर्ति पद्धति (Krishnamurthy system) में चतुर्थ स्थान से ही कालेज की शिक्षा देखी जाती है परन्तु परम्परागत ज्योतिष में यह शिक्षा पंचम घर से देखी जाती है.

दोनों पद्धतियों में अन्तर (Difference between Both the Systems as Per K.P. Systems)


कृष्णमूर्ति पद्धति में चौथे घर से कालेज की शिक्षा देखी जाती है तथा पांचवें घर से ईश्वरीय ज्ञान, अनुभूति, ईश्वर की पहचान तथा आत्मा के दर्शन की चाह को जाना जाता है. पारम्परिक ज्योतिष में पांचवें घर से ही कालेज की शिक्षा का भी विचार किया जाता है.

अन्य बातें (Othr Information as Per K.P. Systems)


चौथे घर से वाहनों से प्राप्त होने वाले सुख को देखा जाता है. इस स्थान से ही पानी (कर्क राशि का स्थान होने के कारण), कन्सट्रक्शन, सिमेंट, रेती आदि वस्तुओं का विचार इस घर से किया जाता है. चौथा घर शिक्षण संस्थाओं, गाड़ियों , मोटर, हवाई जहाज इत्यादि का होता है. इसलिये इस घर से यात्रा में प्रयोग होने वाले वाहनों के विषय में भी जाना जाता है.

चौथा घर माता का होने के कारण, माता के स्वास्थ्य के विषय में भी इस घर से जाना जाता है. संतान का विदेश गमन, पिता की दुर्घटना आदि का विश्लेषण करने के लिये चौथे घर से विचार किया जाता है. चौथा घर, तीसरे घर से द्वितीय घर होने के कारण पराक्रम व साहस में वृद्धि के लिये विशेष रुप से देखा जाता है. चतुर्थ भाव पंचम भाव का व्यय स्थान होने के कारण संतान सुख में कमी तथा प्रेम प्रसंगों में असफलता के लिए भी देखा जाता है.

घर में इस भाव का स्थान (Place of this House in the Home as Per K.P. Systems)


पढ़ाई का कमरा, पानी रखने की जगह, कुंए आदि चतुर्थ भाव के स्थान माने जाते हैं.
Article Categories: KP Astrology

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