चक्र-समुद्र-गोल योग – नभस योग | Chakra Yoga – Nabhasa Yoga | Samudra Yoga Results | Gol Yoga Results

चक्र योग भी 32 नभस योगों में से एक है.  इस योग की यह विशेषता है, कि जब लग्न भाव से सभी ग्रह विषम भावों में हो, तो चक्र योग बनता है. कुण्डली के विषम भाव 1, 3, 5, 7, 9, 11 भावों को कहा जाता है.  चक्र योग वाला व्यक्ति अपने आजीविका क्षेत्र में उच्च पद पर आसीन होने में सफल रहता है.  ऎसा व्यक्ति को नौकरी से अधिक व्यापार करने की चाह होती है. तथा उसे उत्तम स्तर की सुख -सुविधाएं प्राप्त होती है. 

चक्र योग कैसे बनता है. | How is Chakra Yoga Formed 

इस योग को इस प्रकार भी कहा जा सक्ता है, कि चक्र योग उस समय बनता है, जब लग्न से 12 भावों में से जिसमें लग्न भाव, पराक्रम भाव, शिक्षा भाव, विवाह भाव, भाग्य भाव व आय भाव इन छ: भावों में कुण्डली के सभी ग्रह हो, तब चक्र योग बनता है, चक्र योग में कोई भी ग्रह अगर इस चक्र से बाहर अर्थात सम भाव में स्थित हो, तो यह योग भंग हो जाता है.   

चक्र योग में जब ग्रह विषम भावों में स्थित होते है. तो उनके द्वारा चक्र के समान आकृ्ति बनती है, इसीलिए इस योग का नाम चक्र योग रखा गया है.  

चक्र योग से मिलने वाले फल | Chakra Yoga Results 

चक्र योग व्यक्ति को राजनीति के क्षेत्र में कार्य करने की योग्यता देता है. ऎसा व्यक्ति राजकाज के कार्यो में कुशल होता है. तथा वह जिस भी क्षेत्र में कार्य करता है, उसके पास अतिरिक्त अधिकार सुरक्षित होते है. यह देखा गया है, कि चक्र योग वाले व्यक्ति का प्रभुत्व बीस वर्ष की आयु के बाद बढने लगता है.  

समुद्र योग – नभस योग | Samudra Yoga – Nabhasa Yoga 

नभस योगों को कई नामों से जाना जाता है. नभस योगों का वर्गीकरण राशियों की संख्या के अनुसार होता है, इसलिए इन योगों को संख्या योग भी कहा जाता है. संख्या योगों का एक अन्य नाम सांख्य योग भी है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक से अधिक ग्रहों की युति योग कहलाती है. योग कई प्रकार के होते है, जिसमें आश्रय योग, दल योग, आकृ्ति योग, संख्या योग आदि. इन्हीं संख्या योगों में से एक योग है. समुद्र योग. आईये समुद्र योग को जानने का प्रयास करते है. (sematext)

समुद्र योग क्या है. | What is Samudra Yoga 

समुद्र योग अपने नाम के अनुसार व्यक्ति को शुभ और दीर्घकाल तक फल देता है. इस योग का निर्माण उस समय होता है, जब कुण्डली में सभी ग्र्ह द्वितीय भाव से लेकर सम भावों में स्थित होते है. यह योग चक्र योग का विपरीत योग है. उस योग में ग्रह विषम भावों में होते है, और इस योग में ग्रह सम भावों में. भाव संख्या 2, 4, 6, 6, 8, 10, 12 इन भावों को सम भाव संज्ञा दी गई है.  

समुद्र योग फल | Samudra Yoga Results  

समुद्र योग जिन व्यक्तियों की कुण्डली में होता है, उन व्यक्तियों को जीवन में धन-धान्य की प्राप्ति होती है. वे राजनीति के क्षेत्र में सफल होते है. तथा अपने द्वारा किए गये शुभ कार्यो के कारण उन्हें लोकप्रियता भी प्राप्त होती है. समुद्र योग कुण्डली में होने पर व्यक्ति के संतान सुख में वृ्द्धि होती है. व्यक्ति भौतिक सुख-सुविधाओं से युक्त होता है.   

गोल योग- नभस योग | Gol Yoga – Nabhsa Yoga 

गोल योग कैसे बनता है. | How is Gol Yoga Formed 

जब कुण्डली में सभी ग्रह किसी एक ही राशि में हो, तो इसे गोल योग कहते है. जिस व्यक्ति की कुण्डली में गोल योग हो, उस व्यक्ति को शिक्षा प्राप्त करने में बाधाओं का सामना करना पडता है. यह योग व्यक्ति की आर्थिक स़्थिति को भी प्रभावित करता है.  तथा इस योग के व्यक्ति को स्वयं में उच्च विचार का विकास करना चाहिए. सात्विक कार्यो में रुचि लेने से इस योग के अशुभ फलों में कमी होती है.

गोल योग फल | Gol Yoga Reuslts 

गोल योग योग अशुभ फलकारी है, इस योग की अशुभता में कमी करने के लिए व्यक्ति का सदाचार का जीवन व्यतीत करना भी अनुकुल रहता है. साथ ही व्यक्ति का पुरुषार्थी बनना उसे, जीवन में आगे बढने में सहयोग करता है. गोल योग से युक्त व्यक्ति के स्वभाव में आलस्य का भाव सामान्य से अधिक हो सकता है, इस कारण से भी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है. तथा व्यक्ति का काम में लगे रहना इस योग की अशुभता में कमी करता है.  

कुछ अन्य ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार यह योग व्यक्ति को साहस और जोखिम के क्षेत्रों से जोडता है, तथा इन क्षेत्रों में कार्य करने से व्यक्ति को इस योग के शुभ फल प्राप्त होते है.  यह भी देखने में आया है, कि इस योग के व्यक्ति के स्वभाव में चतुरता का भाव भी पाया जाता है.  

संक्षेप में यह कहा जा सकता है, कि गोल योग में व्यक्ति अगर अपने आलस्य भाव का त्याग करता है, तो उसे पुलिस या सेना के क्षेत्रों से आय प्राप्त होती है. तथा वह व्यक्ति अपने कर्म से इस योग की अशुभता को भंग करने में सफल रहता है.   

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जानिए, बुधादित्य योग कैसे बदलता है आपका जीवन

कुण्डली में ग्रहों अपनी विशेष स्थिति में होने पर विशेष रुप से शुभ या अशुभ फल देने वाले हो जाते है. इस स्थिति को योग कहा जाता है. योग बनाने वाले ग्रहों की फल देने की क्षमता बढ जाती है. योग शुभ हो तो व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते है. इसके विपरीत योग अशुभ बन रहा हो तो व्यक्ति को योग के परिणाम अशुभ रुप में प्राप्त होते है.

बुधादित्य योग क्या है

जब कुण्डली में सूर्य और बुध किसी भी रशि में एक साथ हो तो बुद्धादित्य योग बनता है. बुद्धादित्य योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है, वह व्यक्ति बुद्धिमान, विद्वान, और तेजस्वी होता है. उसमें साहस भाव भी भरपूर पाया जाता है. तथा अपने बौद्धिक कार्यो से वह उन्नतिशील बनता है. इसके अतिरिक्त ऎसा व्यक्ति अपने सिद्धान्तों पर स्थिर रहकर जीवन व्यतीत करता है.

बुधादित्य योग कब देता है शुभ फल

बुध और सूर्य का योग बुध आदित्य योग को बनाता है, बुध ग्रह और सूर्य जिनका एक अन्य नाम आदित्य है. इन दोनों का संयोग व्यक्ति को शुभता और सकारात्मकता देने वाला होता है. बुद्धादित्य योग बहुत सी कुण्डलियों में प्राप्त होता है. पर यह योग कुछ मामलों में ही अपने फल को अधिक मजबूती के साथ सामने लाता है.

  • सूर्य का बुध के साथ मेष राशि में होना.
  • सूर्य बुध का कन्या राशि में होना.
  • सूर्य बुध का मिथुन राशि में होना.
  • सूर्य बुध का सिम्ह राशि में होना.
  • जब सूर्य और बुध इन राशियों में एक साथ स्थित होते हैं तो यह इस योग के शुभ फल देने में सहाय्क बनता है. इन राशियों में सूर्य और बुध की स्थिति अच्छी मजबूत होते हैं ऎसे में इनका शुभ फल मिलना संभव होता है. इसके विपरित स्थिति में सूर्य और बुध के बलहीन होने पर यह योग अपना शुभ फल देने में सक्षम नहीं हो पाता है. कमजोर बल होने के कारण शुभ फलों में बहुत अंतर आ सकता है. तुला एवं मीन राशि में स्थित सूर्य-बुध का योग बहुत अधिक फलदायी नही हो पाता है. तुला में सूर्य नीच का होता है और मीन में बुध नीच राशि का होता है.

    बुधादित्य योग फल

    जन्म कुंडली के प्र्त्येक भाव का अपना फल होता है ऎसे में जिस भाव में ये योग बनता है उस भाव के अनुरुप जातक को फल भी मिलते हैं. जिसे एक सामान्य नजरिये से इस प्रकार समजा जा सकता है.

    जन्म कुण्डली के लग्न भाव पर सूर्य और बुध का योग होने पर बुधादित्य योग बनता है. इस भाव में यह योग जातक को परिवार में मुख्य सदस्य की भूमिका देता है. व्यक्ति अपने घर में घर के मुखिया का रोल निभाता है. समाज में सम्मान और सफलता पाता है. नेतृत्व करने की योग्यत अभी जातक में जन्मजात होती है.

    जन्म कुण्डली के दूसरे भाव में बुधादित्य योग बनने पर व्यक्ति को आर्थिक क्षेत्र में सफलता मिलती है. परिवार का सुख मिलता है और पैतृक संपति का सुख भी पाता है. व्यक्ति बोलने में कुशल वक्ता बनता है ओर लोगों के मध्य एक बेहतरीन विचारक भी बनता है. शिक्षा के क्षेत्र में भी जातक को सफलता प्राप्त होती है.

    जन्म कुण्डली के तीसरे भाव में यह योग व्यक्ति को मेहनती बनाता है और जातक अपनी बौद्धिकता से सफलता पाता है. व्यक्ति में रचनाशीलता भी अच्छी होती है और जातक के भीतर छुपी हुई प्रतिभा भी सभी के सामने आती है. इस प्रतिभा के बल पर वह प्रतिष्ठा भी पाता है. भागदोड़ करने वाला और परिश्रम में आगे रहने वाला होगा. व्यवसायिक सफलता तथा अन्य कई प्रकार के शुभ फल प्रदान कर सकता है.

    जन्म कुण्डली के चौथे भाव में इस योग का निर्माण होने पर जातक को सुम्दर घर और वाहन की प्राप्ति होती है. लोगों का सहयोग मिलता है. सरकार की ओर से लाभ भी प्राप्त होता है. यह स्थिति जातक को बहुत अच्छी कुशलता देती है जिसके चलते जातक रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकता है. जातक को विदेश भ्रमण आदि का भी अवसर प्राप्त होता है.

    पंचम भाव में बुधादित्य योग के बनने पर व्यक्ति मंत्र सिद्धि पाता है, शिक्षा के क्षेत्र में सफल होता है. अपने ज्ञान के द्वारा वह कई चीजों की खोज भी करता है. एक बेहतर अन्वेशी बन सकता है. इस योग के प्रभाव से जातक में कलात्मक ओर रचनाशील होता है. उसके विचारों में गहराई देखने को मिलती है. आध्यात्मिक स्तर पर जातक आगे बढ़ता है.

    जन्म कुण्डली के छठे भाव में बुधादित्य योग का फल जातक को पराक्रमी और साहसी बनाता है. इस स्थान पर व्यक्ति अपने विरोधियों को परास्त कर पाने के लिए बौद्धिक रुप से योजनाओं को बनाने में निपुण होता है. व्यक्ति में वाक चातुर्य होता है. अपने कार्यक्षेत्र में वह शारिरीक परिश्रम से अधिक बौद्धिक परिश्रम अधिक करता है.

    जन्म कुण्डली के सप्तम भाव में इस योग के बनने पर व्यक्ति जीवन साथी के साथ अपने विचारों का टकराव झेल सकता है. व्यक्ति अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करता है और समाज में प्रतिष्ठा भी पाता है.

    जन्म कुण्डली में आठवें भाव में बुधादित्य योग के बनने पर व्यक्ति धार्मिक क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है. जातक को रहस्यों को जानने की जिज्ञासा भी बहुत होती है.पैतृक संपत्ति को भी पा सकता है. जातक कुछ गंभीर और कम बोलने वाला भी हो सकता है. वाद विवाद में निपुण भी होता है.

    जन्म कुण्डली के नवम भाव में बुधादित्य योग बनने पर व्यक्ति भाग्य द्वारा लाभ पाता है. जातक को अपने पिता एवं वरिष्ठ लोगों का साथ और सहयोग मिलता है. व्यक्ति धार्मिक क्षेत्र में आगे बढ़ने वाला होता है. भाई बंधुओं की ओर से प्रेम की प्राप्ति होती है. जातक को सुखमय जीवन, ऐश्वर्य, वाहन सुख इत्यादि का सुख भी मिलता है.

    जन्म कुण्डली के दसवें भाव में बुधादित्य योग के बनने पर व्यक्ति कार्यक्षेत्र में राज्य की ओर से लाभ प्राप्त कर सकता है. व्यापार में अच्छे लाभ मिलते हैं. काम को लेकर यात्राएं भी अधिक होती हैं. जातक को जीवन में अनेक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त हो सकती है. अपने काम में वह समान और उच्च पद भी पा सकता है.

    जन्म कुण्डली के एकादश भाव में बुधादित्य योग बनने पर आर्थिक क्षेत्र में उन्नती मिलती है. जातक अपने भाई बंधुओं का साथ पाता है. लम्बी यात्राएं भी करता है. पुरस्कार एवं पद प्राप्ति करता है.

    बुधादित्य योग जन्म कुण्डली के बारहवें भाव में बनने पर जातक कमाई खूब करता है और खर्च भी दिलखोल कर करता है. बाहरी लोगों से लाभ पाता है.

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    रज्जू-मूसल-नल योग | Moosal Yoga | Nabhas Yoga | Moosal Yoga Results | Rajju Yoga | Nal Yoga Results

    नभस योग कुण्डली में बनने वाले अन्य योगों से भिन्न है. यह माना जाता है, कि नभस योगों की संख्या कुल 3600 है.  जिनमें से 1800 योगों को सिद्धान्तों के आधार पर 32 योगों में वर्गीकृ्त किया गया है.  इन योगों को किसी ग्रह के स्वामीत्व या उसकी दशा अवधि के आधार पर नहीं देखा जाता है. इन योगों से मिलना वाला फल स्वतन्त्र रुप से देखा जाता है. 

    नभस योग कैसे बनते है. | How is Formed Rajju Yoga

    कुण्डली में राहू-केतु को छोडकर सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र व शनि किन किन राशियों में है, इस बात को ध्यान में रखतेहुए नभस योग का वर्गीकरण किया जाता है. आज हम यहां नभस योगों में आने वाले रज्जु योग को समझने का प्रयास करेगें. 

    रज्जु योग फल | What is Rajju Yoga | Rajju Yoga Result 

    सभी ग्रह चर राशियों अर्थात मेष, कर्क, तुला और मकर राशि में हो तो रज्जु योग बनता है. रज्जु योग से युक्त व्यक्ति एक स्थान पर बहुत समय तक ठिक कर नहीं रह पाता है. वह घूमने फिरने का शौकिन होता है, साथ ही उसमें परिवर्तनशील प्रवृ्ति होती है. साधारणत: ऎसा व्यक्ति अविश्वसनीय और अवसरवादी होता है. 

    Moosal yoga | Moosal Yoga Results

    32 नभस योगों में से ही एक अन्य योग है. मूसल योग, यह योग भी विभिन्न राशियों में ग्रहों की स्थिति के अनुसार बनता है. आईये इस योग को जानने का प्रयास करते है.  

    मूसल योग कैसे बनता है. | How is  Moosal Yoga Formed

    सभी ग्रह स्थिर राशियों में अर्थात वृ्षभ, सिंह, वृ्श्चिक तथा कुम्भ राशि में हो, तो मूसल योग बनता है. इस योग से युक्त व्यकि स्थिरता में विश्वास करने वाला होता है. उसमें अपने इरादों पर अटल रहने की प्रवृ्ति होती है. वह् व्यक्ति विश्वसनीय होता है. और अपने नियमों पर दृढ रहता है. अपने इन गुणों के कारण वह धनवार बनता है.  और साथ ही उसे प्रसिद्धि भी प्राप्त होती है.  

    कुछ अन्य शास्त्रों में इस योग के फलों को भिन्न तरीके से लिया गया है. उनके अनुसार जिस व्यक्ति की कुण्डली में यह योग होता है, वह व्यक्ति ज्ञानी, धनी,राजमान्य, प्रसिद्ध,संतान युक्त, और शासनप्रणाली में भाग लेने वाला होता है.  

    नल योग | Nal Yoga- Nabhas Yoga 

    यमनादि आचार्यों ने सारावली शास्त्र में नभस योगों का विस्तृ्त विश्लेषण किया है. इस शास्त्र के अनुसार मुख्य रुप से 32 नभस योग बताये गये है. इन 32 नभस योगों के नाम निम्न है. जिस व्यक्ति की कुण्डली में सभी ग्रह द्विस्वभाव राशियों में हो, उस व्यक्ति की कुण्डली में नल योग बनता है.  द्विस्वभाव राशियां मिथुन, कन्या, धनु और मीन है.

    नल योग फल | Nal Yoga Results 

    नल योग जिन व्यक्तियों की कुण्डली में होता है, उन व्यक्तियों में दिखावा करने की प्रवृ्ति पाई जाती है. ऎसे व्यक्ति देखने में सीधे -साधे होते है. किन्तु चतुर और चालाक होते है. सामान्यत: देखा गया है, कि ये लोग बहुत स्वार्थी भी होते है.  इसके अतिरिक्त यह भी माना जाता है, कि नल योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति में मुख्यत: निराशा की भावना देखी जाती है. नभस योगों में रज्जू योग, मूसल योग व नल योग तीनों योग चर, स्थिर व द्विस्वभाव राशियों की विशेषताओं पर आधारित योग है.  इन तीनों योगों को आश्रय योग भी कहा जाता है.

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    कमल-पक्षी-गदा योग का फल

    कमल योग नभस योगों की श्रेणी में आता है. भिन्न भिन्न राशियों में ग्रहों की स्थिति से नभस योग बनते है. नभस योग 1800 प्रकार से बनते है. इन योगों के नाम इनके द्वारा बनने वाली आकृति के अनुरुप रखे गये है. जैसे- कुण्डली में ग्रह अगर गोलाकार आकृति में स्थित हो तो गोल योग बनता है. इन्हीं मे से एक योग कमल योग है.

    कमल योग कैसे बनता है

    कुण्डली में जब सभी ग्रह लग्न से चारों केन्द्र स्थानों अथवा 1, 4, 7, 10 भावों में हो तो देखने में यह आकृति कमल के समान प्रतीत होती है. इसी कारण इस योग को कमल योग कहते है. इस योग वाला व्यक्ति दीर्घायु और सदाचारी होता है. वह धर्म नियमों का पालन करताहै. उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाओं कि प्राप्ति होती है. इसके साथ ही वह अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध भी होता है.

    कमल योग का फल

    जन्म कुण्डली में बनने वाला कमल योग एक शुभ योग की श्रेणी में आता है. इस योग में यदि शुभ ग्रहों की अधिकता हो तो इस योग के बहुत ही शुभ फल प्राप्त होते हैं. कमल योग के प्रभाव से व्यक्ति को आभुषण एवं वस्त्र इत्यादि की प्राप्ति होती है. व्यक्ति नेतृत्व कर पाता है और लोगों के मध्य अपनी एक प्रभावशालि छवि को बनाता है.

    जातक को अपने परिवार का प्रेम और सहयोग मिलता है. शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता मिलती है. राज्य की ओर से अथव अवरिष्ठ अधिकारी वर्ग की ओर से जातक सम्मान और उच्च स्थान भी पाता है. जातक को प्रेम और सुख की प्राप्ति होती है. विवाह का सुख पाता है. संबंधों में अगर कोई परेशानी भी हो तो मित्रों के सहयोग से उसे बहुत सहयोग मिलता है.

    कमल योग में शुभ ग्रहों का होना शुभता बढ़ाता है अन्यथा यहां पाप ग्रहों की स्थिति होने पर जातक को इस फल का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है. ऎसी स्थिति में व्यक्ति को मिलेजुले परिणाम मिलते हैं.

    पक्षी योग कैसे बनता है

    कुण्डली में जब सभी ग्रह लग्न से चतुर्थ और दशम भाव में स्थित हो तो पक्षी जैसी आकृति बनती है. इस प्रकार बनने वाली आकृति के कारण यह योग पक्षी योग कहलाता है. इस योग का एक अन्य नाम विहंग योग भी है.

    पक्षी योग फल

    जिस व्यक्ति की कुण्डली में पक्षी योग होता है. वह चर प्रकृति का होता है. वह एक स्थान पर अधिक समय तक टिक कर नहीं रह पाता है. इस योग वाला व्यक्ति पक्षी की तरह एक स्थान से दूसरे स्थान पर उडता या भागता रहता है. साधारणतया ऎसा व्यक्ति परिवहन संचार या संप्रेक्षण संम्बन्धि क्षेत्रों से जुडा होता है. या फिर उसका कार्य ऎसा होता है, कि उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर बार-बार जाना पडता है.

    जातक में संघर्ष करने की प्रवृति होती है. वह अपने बल पर आगे बढ़ता है. विरोधियों का दबाव भी अधिक झेलता है. अपनों का साथ बहुत अधिक नही मिल पाता है. कार्यक्षेत्र में अधिक व्यस्त रहता है. जीवन को बेहतर बनाने और सुख सुविधाओं की प्राप्ति के लिए सदैव प्रयत्नशील रहता है.

    गदा योग

    गदा योग में ग्रह कुण्डली में गदा कि आकृति लिए हुए स्थित होते है. गदा योग नभस योगों की श्रेणी में आता है. इस योग से युक्त व्यक्ति शारीरिक बल वाला होता है. उसमें साहस भाव पाया जाता है.

    गदा योग कैसे बनता है

    जब सभी ग्रह, लग्न से किन्ही भी दो आस-आस के केन्द्र स्थानों में हों, जैसे लग्न भाव और चतुर्थ भाव, चतुर्थ भाव और सप्तम भाव में हों तो गदा योग बनता है. गदा योग होने पर व्यक्ति विद्वान होता है. वह अपनी मेहनत पर विश्वास रखता है, तथा अपनी मेहनत के बल पर वह धनी होता है. गदा योग से युक्त व्यक्ति को जोखिम लेकर कार्य करना पसन्द हो सकता है.

    गदा योग फल

    गदा योग के प्रभव से व्यक्ति आशावान होकर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा पाता है. जातक अपने पुरुषार्थ से अपना भाग्य निर्मित करता है. शास्त्र और धर्म का जानकार होता है. कलात्मक एवं रचनात्मकता से युक्त होता है. सदैव आजीविका प्राप्ति में लगा रहने वाला. परिवार के प्रति दायित्व निभाने वाला होता है. जिस प्रकार गदा का उपयोग शत्रुओं का नाश करने के लिए और संकट से बचाव के लिए एक शस्त्र रुप में किया जाता है. उसी प्रकार इस का जन्म कुण्डली में बनना भी जातक को शत्रुओं से बचाने वाला होता है.

    गदा योग के शुभ प्रभाव से व्यक्ति प्रत्योगिताओं में सफलता पाता है. जातक में किसी भी संकट का सामना करने का साहस भी होता है. अपने लोगों का एवं किसी भी संगठन का नेतृत्व करने में कुशल भी होता है.

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    पाइराइट उपरत्न | Pyrite | Pyrite Gemstone Meaning | Pyrite – Healing And Metaphysical Abilities | Fool’s Gold Gemstone

    इस उपरत्न का यह नाम ग्रीक शब्द पाइर(Pyr) से बना है जिसका अर्थ है – आग.  यह एक ऎसा खनिज है जो सोने के साथ विलक्षण समानता रखता है. यह उपरत्न सोने का भ्रम पैदा करता है और व्यक्ति इसकी चमक देखकर धोखा जाते हैं. इसलिए इसे “Fool’s Gold” भी कहा जाता है. लेकिन यह बात भी सत्य है कि इस उपरत्न में थोडी़ सी मात्रा सोने की अवश्य होती है जिससे यह उपरत्न बहुत कीमती बन जाता है. यह उपरत्न सोने के सादृश्य दिखने के कारण पारंपरिक रुप से धन, रुपया तथा अच्छे भाग्य का प्रतीक बन गया है. सूर्य की भांति चमकने वाला रंग इसे सूर्य के साथ जोड़ता है.

    बाजार में जवाहारियों द्वारा यह उपरत्न मर्कासाइट(Marcasite) के नाम से भी जाना जाता है. यह पीतल के समान दिखने वाली एक धातु है जो गहने बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है. यह उपरत्न व्यापक रुप से पाया जाता है. प्राचीन समय में मेक्सिको में पाइराइट से स्क्राइंग शीशा बनाया जाता था. इन शीशों का निर्माण एक ओर से पाँलिश करके उसे समतल बनाया जाता था और शीशे के दूसरी तरफ गोल भाग की ओर स्क्राइंग प्रक्रिया के लिए कुछ रहस्यमयी नक्काशी की जाती थी. यह रहस्यमयी नक्काशी, स्क्राइंग प्रक्रिया में इस्तेमाल की जाती थी.

    संसार की सभी संस्कृतियों में इस उपरत्न से ताबीज बनाने का काम किया जाता था जिससे कि व्यक्ति सुरक्षित रहे. यह पहला उपरत्न था जो चिकित्सा पद्धति में उपयोग में लाया गया था. यह उपरत्न केवल सोने जैसे सुनहरे रंगों में पाया जाता है. कई बार यह उगते सूर्य की आभा लिए रंग में भी पाया जाता है.

    पाइराइट के आध्यात्मिक गुण | Pyrite – Metaphysical Properties

    यह एक अदभुत उपरत्न है जो धारणकर्त्ता को रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करता है. उनके मस्तिष्क में नए विचारों की एक चिंगारी सी छोड़ता है. जिससे वह रचनात्मक विचार रख सकें और अपने नए विचारों को दूसरों के समक्ष बताने में झिझके नहीं. पाइराइट उपरत्न कई तरह की श्रेणियों में पाया जाता है. आयरन पाइराइट के लिए ऎसी धारणा मानी गई है कि यह धारक को अत्यधिक सुरक्षा प्रदान करने वाला उपरत्न है. यह उपरत्न बुद्धिबल को बढा़वा देने में सहायक होता है. सूर्यमुखी पाइराइट धारक को कवच के जैसी सुरक्षा प्रदान करता है. यह नकारात्मक ऊर्जा को आने से रोकने का काम करता है.

    यह उपरत्न धारणकर्त्ता को शारीरिक, भौतिक तथा भावनात्मक स्तर पर  सुरक्षा प्रदान करता है. यह उपरत्न एक अदभुत ढ़ाल बनकर विभिन्न स्त्रोतों से आने वाले बुरे विचारों को आने से रोकने का कार्य करता है. यह व्यक्ति के अंदर आई जड़ता अर्थात निष्क्रियता को समाप्त करता है. धारक के भीतर समाई अपर्याप्तता की भावना को बाहर निकालता है. धारक को जिस क्षेत्र में ऊर्जा की कमी का अनुभव हो रहा है उस क्षेत्र में इस उपरत्न का उपयोग किया जा सकता है. इस उपरत्न को कार्यक्षेत्र पर भी रखा जा सकता है.

    यह उपरत्न धारक को सिक्के का दूसरा पहलू दिखाने में मदद करता है. इसे धारण करने से जातक के अंदर सुस्ती तथा आलस्य का अंत होता है. वह अपने भीतर चुस्ती तथा ताजगी का अनुभव करता है.
    जल्दी-जल्दी थकान होने पर इस उपरत्न का उपयोग करने से लाभ होता है. यह उपरत्न मुख्य रुप से धारक को ऊर्जा, शक्ति तथा सुरक्षा प्रदान करने वाला होता है. यह उपरत्न धारक को खुले रुप से दूसरों के साथ संवाद करने में मदद करता है. विचारों को इमानदारी से व्यक्त करता है. जिन्हें निर्णय लेने में कठिनता का अनुभव होता है या जो दुविधा की स्थिति में अधिक रहते हैं उनके आत्म-विश्वास में यह उपरत्न वृद्धि करता है.

    इस उपरत्न के प्रतिक्रियात्मक गुण इसे अदभुत बनाते हैं. यह ध्यान लगाने में सहायक होता है. प्राचीन समय में इन्का जाति के लोग इस उपरत्न का उपयोग ध्यान तथा योग लगाने में करते थे. यह शारीरिक सहनशक्ति तथा बल में वृद्धि करता है. बुद्धि को सही दिशा में ले जाकर धारक को विचारों को बुद्धिमत्ता पूर्वक लागू करने में सहायक होता है. धारक की धन-सम्पत्ति बढा़ने में यह उपरत्न सहायक होता है. यह विचारों को अभिव्यक्त करने की आवश्यक ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है.

    यह उपरत्न धारक के प्रभामंडल से नकारात्मक ऊर्जा को हटाकर उसके ध्यान को केन्द्रित करने में मदद करता है. इस अदभुत धात्विक उपरत्न के धारण करने से जातक में मानसिक स्थिरता रहती है. उसमें तर्क करने की क्षमता का विकास होता है. धारक चीजों का विश्लेषण करने में कामयाब रहता है. यह उपरत्न धारक को ऎसे मोड़ पर लाता है जहाँ पर वह अपनी एक अलग धारणा स्थापित कर सके.

    पाइराइट के चिकित्सीय गुण | Healing Ability Of Pyrite Crystals

    यह उपरत्न धारक के भीतर आक्सीजन को रक्त तक पहुंचाने में सहायता करता है. यह आक्सीजन की मात्रा में वृद्धि करने में सहायक होता है. संचार तंत्र को बल प्रदान करता है. यह फेफडो़ के लिए लाभदायक होता है. जिन व्यक्तियों को अस्थमा अथवा दमे की शिकायत रहती है उनके लिए यह उपरत्न अत्यंत फायदेमंद है. यह उपरत्न अनियंत्रित हार्मोन्स को नियंत्रित रखने में सहायक होता है. महिलाओं की माहवारी को नियंत्रित रखता है.

    यह उपरत्न धारक के भीतर पैदा हुए भ्रम को दूर करने में सहायक होता है. सूर्य पाइराइट धारक के भीतर से हर तरह का दर्द बाहर निकालने में सहायक होता है. यह उपरत्न जातक के भीतर पैदा हुए अवसाद के लक्षणों को सहजता से दूर करने में सहायक होता है. जिन व्यक्तियों को अकसर बुखार घेरे रहता है उनके लिए यह फयदेमंद उपरत्न है. यह शरीर में आई सूजन को भी दूर करता है. शारीरिक बीमारी को दूर करने के लिए इस उपरत्न को सीधा शरीर पर धारण करना चाहिए.

    इस उपरत्न में अग्नि तथा पृथ्वी तत्व की ऊर्जा मौजूद होती है. यह शरीर के मूलाधार चक्र को नियंत्रित करने में सहायक होता है.

    कहाँ पाया जाता है | Where Is Pyrite Found

    यह उपरत्न पेरु, दक्षिण अफ्रीका, बोलीविया, इलीनोइस(Illinois), कोलोरैडो, अमेरीका के मिसूरी और न्यूयॉर्क, जर्मनी, स्पेन, रुस, इटली, पेन्सिल्वेनिया(Pennsylvania) आदि स्थानों में पाया जाता है.

    कौन धारण करे | Who Should Wear Pyrite

    इस उपरत्न को सभी व्यक्ति अपनी जरुरतों के आधार पर धारण कर सकते हैं. जिन व्यक्तियों में असुरक्षा की भावना विद्यमान रहती है उन्हें यह उपरत्न धारण करना चहिए. इस उपरत्न में सल्फर की मात्रा होती है जो कई बार त्वचा के लिए हानिकर सिद्ध होती है. इसलिए इसे धारण करने में सावधानी बरतनी चाहिए. अधिक समय तक इस उपरत्न को धारण नहीं करना चाहिए.

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    रविवार के दिन क्या कार्य करना शुभ है:? | Auspicious Works Done on Sunday

    “दैनिक जीवन में प्रतिदिन के कार्यो में शुभता बनी रही. जिसके लिये कार्य के लिये शुभ मुहूर्त निकालने के लिये अत्यधिक मेहनत भी न करनी पडे”  इस प्रकार का विचार सभी के मन में आता है. परन्तु इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पाता है. इस स्थिति में वार अनुसार कार्य निर्धारित करने से मुहुर्त भी प्राप्त होता है. तथा मुहूर्त की कठिन गणना से भी बचा जा सकता है. आईये वार के अनुसार किये जाने वाले कार्यो को समझने का प्रयास करते है. 

    रविवार के दिन यात्रा करने के लिये शुभ दिशाएं | Auspicious Direction for Traveling on Sunday

    रविवार के दिन अगर व्यक्ति को यात्रा करनी हों, तो उसे अपनी यात्रा को सुखमय व कष्टरहित बनाने के लिये पूर्व दिशा की यात्रा, इसके अतिरिक्त उतर दिशा की यात्रा भी कि जा सकती है. आग्नेय दिशा अर्थात ( दक्षिण पूर्व) से संबन्धित कार्य भी इस दिन सहजता से पूरे किये जा सकते हे. अगर व्यक्ति को सामान्य रुप से इन दिशाओं की यात्राओं पर नियमित रुप से जाना पडता रहता है. तो उस व्यक्ति को चाहिए कि वह यात्रा से संबन्धित अपने कार्यक्रम को रविवार का दिन निश्चित करना चाहिए. 

    रविवार के दिन उपरोक्त दिशाओं में यात्रा करने से व्यक्ति जिस उद्धेश्य से यात्रा कर रहा है. उस कार्य में सफल होने की संभावनाएं बनती है. तथा यात्रा की अवधि में धन हानि या अन्य कोई शारीरिक कष्ट प्राप्त होने की संभावनाएं भी कम रहती है. 

    रविवार के दिन विधा आरम्भ के विषय | Commencement of Education on Sundays

    रविवार को विधा आरम्भ के लिये शुभ दिन माना जाता है. इस दिन विज्ञान, इंजिनियरींग, सेना, उद्धोग, बिजली, मेडिकल व प्रशासनिक शिक्षा विषयों में प्रवेश लेना विशेष शुभ रहता है. रविवार के दिन के देव सूर्य देव है. तथा ये सभी क्षेत्र सूर्य देव के अन्तर्गत आते है. जिन व्यक्तियों को इन विषयों में उच्च शिक्षा लेने में रुचि हो, उन व्यक्तियों को प्रवेश का दिन अगर संभव हो तो रविवार का दिन रखना चाहिए. 

    सामान्यत: रविवार का दिन सार्वजनिक अवकाश का दिन होता है. तथा अधिकतर शिक्षण संस्थान इस दिन बन्द रहते है. परन्तु विशेष स्थिति में इनके खुले होने की भी संभावनाएं बनती है. 

    रविवार के दिन व्यापार संबन्धी कार्य | Business tasks done on Sundays

    रविवार के दिन कुछ कार्य ऎसे व्यवसायिक कार्य तथा व्यापारिक कार्य आरम्भ किये जा सकते है. जिन्हें करना विशेष शुभ होता है. इस दिन प्रशासनिक कार्य से संबन्धित आरम्भ किया जा सकता है. या व्यवसायिक क्षेत्र में प्रशासनिक कार्य रविवार के दिन अधिकतर कार्य करने का प्रयास करना चाहिए. 

    रविवार के दिन सेना में प्रयोग होने वाली वस्तुओं का व्यापार कार्य आरम्भ किया जा सकता है. सोने या जेवर की व्यापार या दुकान खोली जा सकती है. किसी औषधि की दुकान का मुहूर्त रविवार के दिन करना शुभ रहता है. धातुओं के क्रय- विक्रय के लिये रविवार का दिन अनुकुल रहता है. धातुओं में भी सोने, चांदी तथा तांबें धातु का कार्य कुशलता पूर्वक किया जाता है. गाय व बैलादि खरीदने बेचने के लिये रविवार का दिन शुभ होता है. 

    जिस व्यक्ति को मेडिकल स्टोर को आरम्भ करना हों तो रविवार के दिन का चयन करना चाहिए. बिजली की दुकान, इळैक्ट्रिकल विषयों का व्यापार कार्य करना हो, तो अन्य मुहूर्त उपलब्ध न होने पर रविवार के दिन कार्य आरम्भ किया जा सकता है. 

    इसके अतिरिक्त मंत्र अनुष्ठान, यज्ञादि कार्य करना शुभ होता है. 

    ऊपर बताये गये कार्यो का मुहूर्त समय विशेष रुप से तभी लेना चाहिए. जब कोई अन्य शुभ मुहूर्त न हों, तथा व्यक्ति के पास समय की कमी हों. अगर संभव हो तो वार के अतिरिक्त मुहूर्त समय में अन्य शुद्धियों का भी ध्यान रखना चाहिए. 

    रविवार के दिन किये जाने वाले अन्य शुभ / अशुभ मुहूर्त | Other Auspicious and Inauspicious Task done on Sunday

    रविवार के दिन नये वस्त्र धारण करना शुभ है. परन्तु तेल लगाना मुहूर्त अनुसार शुभ नहीं है. इस दिन नये आभूषण धारण किये जा सकते है. क्षौर क्रियाओं के लिये यह दिन मध्यम शुभ होता है. इस दिन नये जूते पहनने से बचना चाहिए. तथा कोई नया मुकदमा भी दायर नहीं करना चाहिए.   

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    नीचभंग राजयोग

    जब कोइ ग्रह अपनी नीच राशि में स्थित होता है, तो वह शक्ति हीन और निर्बल होता है. इस स्थिति में वह ग्रह अपने शुभ फल देने में असमर्थ होता है. किन्तु अन्य ग्रहों की स्थिति, युति, दृष्टि या परस्पर राशि परिवर्तन आदि के उस पर प्रभाव द्वारा उसकि यह कमजोर स्थिति सुधर जाती है. जिसे नीच-भंग राजयोग कहते है. जो निम्नलिखित स्थितियों में बन सकता है.

    नीचभंग राजयोग नियम

    1.जब नीच राशि का ग्रह लग्न भाव या चन्द्र से केन्द्र स्थान में हो.

    2. जिस राशि में ग्रह नीच का होता है. उस राशि का स्वामी ग्रह, लग्न भाव या चन्द्रमा से केन्द्र स्थान में स्थित हो, जैसे गुरु मकर राशि में नीच के होते है, तो मकर राशि के स्वामी शनि यदि लग्न से केन्द्र या चन्द्र से केन्द्र स्थान में हो, तो नीच भंग राजयोग बनता है.

    3. जिस राशि में ग्रह नीच का होता है. अगर उस राशि में उच्च होने वाला ग्रह लग्न या चन्द्र से केन्द्र स्थान में हो जैसे शनि मेष राशि में नीच के होते है, तो मेष राशि में उच्च का होने वाला सूर्य अगर लग्न या चन्द्र से केन्द्र में हो तो नीच भंग हो जाता है.

    4. जिस राशि में ग्रह नीच का होता है, उस राशि के स्वामी की नीच के ग्रह पर दृष्टि हो जैसे- बुध मीन राशि में नीच का होता है, और उस पर यदि मीन के स्वामी गुरु की दृ्ष्टि हो तब भी नीच भंग राजयोग बनता है.

    5. व जिस राशि में ग्रह नीच का होता है. उस राशि का स्वामी और जिस राशि में ग्रह उच्च का होता है. उस राशि का स्वामी परस्पर केन्द्र स्थान में हो जैसे- मंगल की नीच राशि कर्क का स्वामी चन्द्र और उच्च राशि का स्वामी शनि, परस्पर केन्द्र में हो तो मंगल के ओलिए नीच भंग राजयोग बनता है.

    6. इसके अतिरिक्त नीच ग्रह की राशि का स्वामी और ग्रह की उच्च राशि का स्वामी लग्न या चन्द्र से केन्द्र में हो जैसे शनि की नीच की राशि मेष का स्वामी मंगल और उसकी उच्च की राशि तुला का स्वामी शुक्र लग्न या चन्द्र से केन्द्र स्थान में हो तो शनि के लिए नीच भंग राजयोग बनता है.

    7. जिस राशि में ग्रह नीच का हो रहा होता है. उस राशि में उच्च का होने वाला ग्रह साथ में बैठा हो या उस पर दृ्ष्टि करता हो तो नीच भंग हो जाता है.

    नीच भंग राजयोग फल

    नीच का ग्रह अपनी निर्बल स्थिति के कारण अच्छा फल नहीं दे पाता है. किन्त नीचभंग राजयोग वाला ग्रह अपनी दशा- अन्तर्दशा के मध्य और उसके पश्चात बहुत शुभ फल देता है. नीच भंग में ग्रह जब किसी उच्च के ग्रह के साथ संपर्क में हो तो यह स्थिति उसकी इस नीचता को समाप्त करने वाली होती है. इस स्थिति में नीच ग्रह अपनी अशुभता तो दिखाता है लेकिन जातक को इस अशुभ प्रभाव का अंत एक शुभ फल के रुप में मिलता है. यह बिलकुल ऎसा होगा जैसे की जातक को खराब स्थिति मिलेगी लेकिन उस संकट से वह तुरंत मुक्त होकर अपने जीवन में शुभता पाएगा.

  • नीच भंग योग के होने पर ग्रह अपने अशुभ फलों को कम कर देता है.
  • जातक परेशानियों से निकल कर सुख को भी पाता है.
  • संघर्ष से उसे सफलता मिलती है.
  • परिवार और समाज में सम्मान पाता है.
  • किसी संस्था का निर्माण कर सकता है अथवा उस से जुड़ कर आगे बढ़ता है.
  • अपने विरोधियों को परास्त कर सकता है.
  • नीच भंग राजयोग ग्रह

    1. सूर्य से बनने वाला नीच भंग राजयोग में जातक को सरकार से अगर परेशानी होती है तो राज्य की ओर से उसे लाभ भी मिलता है. व्यक्ति अपनी नीतियों को वरिष्ठ लोगों के सहयोग से आगे ले जाने में सक्षम होता है.

    2. बुध से बनने वाले नीच भंग राजयोग में जातक अपनी बुद्धि का उपयोग गलत काम से आगे बढ़ने में लगा सकता है. जातक को सही दिशा का बोध कराने वाले मित्र भी मिलते हैं. अपने लोगों का सहयोग भी मिलता है.

    3. चंद्रमा के नीच भंग होने पर जातक कमजोर भावुक होता है. दूसरों पर जल्द भरोसा करने वाला और इस कारण स्वयं के लिए परेशानी उत्पन्न कर सकता है. पर इसके साथ ही ज्ञानी ओर प्रेम पुर्वक व्यवहार करने वाला.

    4. मंगल से बनने वाले इस योग में जातक अधिक उग्र हो सकता है. जल्दबाजी में काम करने वाला हो सकता है. व्यक्ति को सरकारी क्षेत्र में काम मिल सकता है. प्रोपर्टी से लाभ मिल सकता है.

    5. शुक्र से बनने वाले इस योग में जातक धनवान और लोगों के मध्य प्रसिद्धि पाने वाला बनता है. व्यक्ति में अहंकार भी अधिक हो सकता है अथवा दिखावे की प्रवृति भी रह सकती है.

    6. बृहस्पति से बनने वाले इस योग के द्वारा जातक अपने ज्ञान और चतुराई से आर्थिक उन्नती पाता है. काम काज में कुशल होता है.

    7. शनि से बनने पर इस योग के प्रभाव से व्यक्ति में कार्यकुशलता के साथ साथ व्यवहारिकता का ज्ञान भी अच्छा होता है.

    विशेष :

    किसी भी जातक की कुण्डली में बनने वाला राजयोग एक शुभ और बहुत प्रभावशाली योग होता है. व्यक्ति को इस योग के प्रभाव से जीवन में सुख और समृद्धि मिलती है. उसे संघर्ष अधिक नहीं करने पड़ते हैं और किसी न किसी रुप में वह दूसरों का सहयोग भी प्राप्त कर लेता है. पर इसी के विपरीत स्थिति जन नीच भंग राजयोग की बनती है तो यहां शुभ प्रभाव सीधे रुप में न मिलकर व्यक्ति को कष्ट के साथ प्राप्त होते हैं अथवा कुछ अच्छा हासिल तो होता है लेकिन उसके लिए संघर्ष की स्थिति भी अधिक रहती है. यही नीच भंग राजयोग का महत्वपूर्ण सार होता है.

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    Petalite Gemstone Meaning | Petalite – Stone Of The Angels | Petalite – Metaphysical, Healing Ability

    It is an unique and a rare gem.It is most popular between the gem collectors.It is specially finished made for them.This gemstone is similar to many other gems and created the illusion of many other gems. In colourless state it looks like a diamond.It is an extremely delicate and beautiful gemstone. The name Petalite has been taken from the Greek word Patalon, which means a leaf of a tree.The way a leaf’s each and every structure appears clearly , likewise the structure of Petalite also appears very clean and clear. 

    This gemstone was first founded in 18 century in Spain and is considered as an angel and  is also known in the form of angel. It is very well known as “Angel Stone” i.e “Stone of the Angels” , because it encourages the acts like an angel.This gemstone provides the assistance to all areas of the media world and the holder is able to communicate on all issues.

    Gemstones like Scolecite,Lepidolite,Tektite,Tourmaline,Morganite,Rose Quartz are suitable for Petalite and can be worn along with it. 

    Petalite – Metaphysical Properties

    This gemstone increases the vision of the holder and provides him with deep peace and joy. It should be kept  near to the permission cycle during the meditation.It gives the holder recess.Keeps the mind calm for Internal investigation. It communicates a balanced energy.People with unstable thoughts, scattered ideas,  can hold this unique gemstone.It provides stability in the views. It brings the holder near to his spiritual refinement.The person is able to  communicate his experiences of  his spirituality.

    It is helpful to fill the emotional shock. It  protects the holder and and keeps him balanced. The person identifies his own personality and awakens love within himself. It keeps the holder  tied in a rhythm and his conscience encourage higher returns.It is is helpful in connecting the holder with deep spirituality. It has been considered to increase the insight and opens it to develop the mental capability and even telepathy. Even a small piece of this gem works like an Amrit.

    Many experts recommend wearing the gemstone especially when he talks to his clients or patients. It operates high mental capacity.This gemstone holds soft and balanced flow of energy which makes the holder aware during the meditation.Many people use it to increase the wisdom of spirituality and provides security.This gem is majorly used to show magic.

    The holder gets connected to the divine power  and also with his civilization and culture. Guides the holder in the emotional front.helps to connect the conscience with the divine power and inspires the soul to do good work for the world. It helps in making holder’s  relations with the angels . It is a better and a unique gemstone for raising consciousness.

    It is helpful to keep the cycles of body balanced . It controls the Vishudh Chakra and Sahasrara. It develops the communication capacity of the holder.  If one is facing barriers from long time in accomplishing a work , then this gemstone is capable to remove them . It is an powerful gem and keeps the positive energy around the holder. It purifies the surrounding of the holder and removes any negative energy. It evidents the existence of the holder in his own eyes and  Introduces the holder with the reality.

    Healing Ability Of Petalite

    It is believed that this gemstone makes the person calm and stress free and easily removes the stress-borne diseases .It keeps away the holder from too much stress.It prevents the holder from disease like Cancer and AIDS. It is helpful in filling the wounds and develops bones. It prevents from decayed feelings , and keeps him calm.

    It operates the end glands smoothly and controls the body cell.It fixes the eye disorders and problems related to the lungs. It prevents the muscles from getting stiff.Removes problems related to the intestines. It makes the joints flexible.

    Colour Of Petalite

    This gemstone is found in many colours. It is found in whatever colors , they all are pastel colors. It occurs in colorless and transparent state.It is found in light pink colour and also in the mixture of grey, white, and red colour.It is also found in grey and white mixture of colours.This gem is also found in yellowish tone and is of an air element.

    Where Is Petalite Found

    Petalite is found in Canada, United States America, Brazil, Sweden, Namibia, Afghanistan, Zimbabwe, Burma, Australia, Russia, Mozambique,  Italy etc.

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    आधानादि नक्षत्र । Adhanadi Nakshatra Meaning | Janma Nakshatra | Karma Nakshatra | Vainashik Nakshatra

    वैदिक ज्योतिष में 28 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है. सभी नक्षत्रों का अपना विशिष्ट महत्व है. 28 नक्षत्रों में से कोई भी नक्षत्र व्यक्ति विशेष के लिए शुभ तथा अशुभ हो सकता है. जो एक नक्षत्र किसी व्यक्ति के लिए अशुभ है वही नक्षत्र किसी अन्य समय में दूसरे व्यक्ति के लिए शुभ हो सकता है. एक निश्चित समय के लिए कोई भी नक्षत्र शुभ या अशुभ हो सकते हैं. इसी प्रकार मुहुर्त में नक्षत्रों को शुभता तथा अशुभता के आधार पर बाँटा गया है.

    सभी व्यक्ति एक निश्चित नक्षत्र में जन्म लेते हैं. जन्म के समय के नक्षत्र को जन्म नक्षत्र कहा जाता है. इस प्रकार बाकी सभी नक्षत्रों का वर्गीकरण भी किया जाता है. नक्षत्रों को बहुत से वर्गों में विभाजित किया गया है. उन्ही विभाजनों में से एक विभाजन आधानादि नक्षत्रों का भी है. आधानादि नक्षत्रों के अन्तर्गत जन्म नक्षत्र, कर्म नक्षत्र, आधान नक्षत्र, वैनाशिक नक्षत्र, सामुदायिक नक्षत्र, सांघातिक नक्षत्र तथा मानस नक्षत्र आते हैं. इन सभी की गणना व्यक्ति के जन्म नक्षत्र के आधार पर होती हैं.

    जन्म नक्षत्र | Janma Nakshatra

    सभी व्यक्ति का जन्म एक निश्चित समय तथा नक्षत्र में होता है. जिस निश्चित नक्षत्र में उसका जन्म होता है, उसे जन्म नक्षत्र कहा जाता है. यह जन्म कालीन चन्द्रमा का नक्षत्र होता है अर्थात जन्म के समय चन्द्रम जिस राशि में स्थित होता है उसे जन्मकालीन चन्द्रमा कहते हैं. जन्म नक्षत्र यदि जन्म के समय अथवा गोचर में पीड़ित होता है तब जातक को मरणभय होता है अथवा उसे बहुत ही भयानक परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है.

    कर्म नक्षत्र | Karma Nakshatra

    जन्म नक्षत्र से गिनती करने पर दसवाँ नक्षत्र कर्म नक्षत्र कहलाता है. यह गिनती अभिजित नक्षत्र सहित करनी है.  यदि जातक का कर्म नक्षत्र गोचर में पीड़ित है तब उसे अपने व्यवसाय में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. उसे काम में कष्ट मिलता है.

    आधान नक्षत्र | Adhan Nakshatra

    जन्म नक्षत्र से 19वाँ नक्षत्र आधान नक्षत्र कहलाता है. यदि आधान नक्षत्र गोचर में पीड़ित हो रहा है तब जातक को प्रवास करना पड़ सकता है. जिस स्थान पर वह रह रहा है उसे किन्हीं कारणों से वह स्थन छोड़ना पड़ सकता है. 

    वैनाशिक नक्षत्र | Vainashik Nakshatra

    इस नक्षत्र की गणना करने में विद्वानों में मतभेद हैं. कई विद्वान इस नक्षत्र की गणना अभिजित सहित करते हैं और कई विद्वान इस नक्षत्र की गणना अभिजित रहित भी करते हैं, इसलिए यह जन्म नक्षत्र से 22वाँ या 23वाँ भी हो सकता है. गोचर के समय यदि इस नक्षत्र से पाप ग्रहों का विचरभ हो रहा हो तब जातक को शरीर में पीडा़ तथा कष्ट होता है. उसे अपने स्वजनों के विरोध का सामना भी करना पड़ता है.

    सामुदायिक नक्षत्र | Samudayik Nakshatra

    जन्म नक्षत्र से 18वाँ ऩक्षत्र सामुदायिक नक्षत्र कहलाता है. गोचर में इस नक्षत्र के पीड़ित होने पर जातक को किसी अनिष्ट का सामना करना पड़ सकता है.

    सांघातिक नक्षत्र | Sanghatik Nakshatra

    जन्म नक्षत्र से 16वाँ नक्षत्र सांघातिक नक्षत्र कहलाता है. सांघातिक नक्षत्र में गोचर के पाप ग्रह विचरण करते हैं तो जातक को किसी बडी़ हानि का सामना करना पड़ता है.

    मानस संज्ञक नक्षत्र | Manas Sangyak Nakshatra

    जन्म नक्षत्र से 25वाँ नक्षत्र मानस संज्ञक कहलाता है. इस नक्षत्र के गोचर में पीड़ित होने पर जतक को किसी बात को लेकर मन:संताप हो सकता है.

    पीड़ित नक्षत्र की पहचान | Identification Of Afflicted Nakshatra

    किसी भी नक्षत्र को कुछ विशेष परिस्थितियों में पीड़ित समझा जाता है. वह परिस्थितियाँ हैं :-

    * शनि तथा सूर्य जिस नक्षत्र में गोचर करें.

    * जिस नक्षत्र में वक्री मंगल गोचर करता हो या मंगल उसका भेदन करता हो.

    * जिस नक्षत्र में ग्रहण लगा हो वह भी पीड़ित होता है.

    * गोचर में जिस नक्षत्र में उल्का से टक्कर हो रही हो वह पीड़ित होता है.

    * गोचर में चन्द्रमा जिसका भेदन करता हो.

    * जो नक्षत्र स्वाभाविक स्वरुप से भिन्न हो.

    * जिस नक्षत्र में केतु का गोचर हो रहा हो.

    उपरोक्त तथ्यों के अतिरिक्त जो नक्षत्र चण्डीशायुध, एकार्गल या लत्तादोष से युक्त हों वह सब पीड़ित नक्षत्र माने जाते हैं. 

    अगर अपना जन्म नक्षत्र और अपनी जन्म कुण्डली जानना चाहते हैं, तो आप astrobix.com की कुण्डली वैदिक रिपोर्ट प्राप्त कर सकते है. इसमें जन्म लग्न, जन्म नक्षत्र, जन्म कुण्डली और ग्रह अंशो सहित है : आपकी कुण्डली: वैदिक रिपोर्ट

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    धनु राशि क्या है । Sagittarius Sign Meaning | Sagittarius Introduction | Who is the Lord of The Sagittarius Sign

    धनु राशि के व्यक्ति मानवतावादी होते है. उनके स्वभाव में फुर्तीलापन देखने में आता है. इस राशि के व्यक्ति सदैव प्रसन्नचित रहने का प्रयास करते है. वे आशावादी होते है. धनु राशि के व्यक्तियों में उत्तम वक्ता के गुण होते है. इस राशि के व्यक्ति सक्रिय रहते है. वे ईमानदार ओर विनम्र होते है. धनु राशि के व्यक्तियों में आत्मत्याग का भाव स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है. ऎसा व्यक्ति मन में किसी के लिए वैंमनस्य नहीं रखता. 

    धनु राशि का स्वामी कौन है. | Who is the Lord of the Sagittarius sign

    धनु राशि का स्वामी गुरु है, गुरु को वृ्हस्पति के नाम से जाना जाता है. गुरु ग्रह सभी ग्रहों में गुरु का स्थान रखते है. इसके अतिरिक्त सभी नौ ग्रहों में गुरु को सबसे अधिक शुभ ग्रह माना जाता है. कुण्डली के जिन भावों पर गुरु की दृष्टि पडती है. वे सभी भाव भी शुभ हो जाते है. 

    धनु राशि का चिन्ह कौन सा है.| Who is the Lord of the Sagittarius sign

    धनु राशि का चिन्ह धनुधारी है. सामान्य जीवन में इस राशि के व्यक्ति अपने जीवन लक्ष्य के प्रति सतर्क रहने वाले होते है. अपने लक्ष्य से उनकी निगाह हटती नहीं है. तथा धनु राशि के व्यक्तियों को खेल-कूद में स्वभाविक रुचि होती है.   

    धनु राशि के लिए कौन से ग्रह शुभ फल देने वाले ग्रह होते है. | Who is the Lord of the Sagittarius sign

    धनु राशि के लिए सूर्य, मंगल ग्रह शुभ फल देते है. सूर्य, मंगल व चन्द्र तीनों ग्रह धनु राशि के स्वामी सूर्य के मित्र है. और मित्र ग्रह होने के कारण वे इस राशि के लिए शुभफल देने वाले ग्रह होते है.  

    धनु राशि के लिए कौन से ग्रह अशुभ फल देते है. | Which Planets are inauspicious for the Sagittarius sign 

    धनु राशि के लिए बुध, शुक्र, शनि अशुभ फल देते है. 

    धनु राशि के लिए कौन से ग्रह सम फल देते है. | Which are Neutral planets for the Sagittarius sign

    धनु राशि के लिए गुरु और चन्द्र सम फल देते है. 

    धनु राशि के लिए कौन सा ग्रह मारक ग्रह कहलाता है. | Which  are the Marak planets for the Sagittarius sign

    धनु राशि के लिए शुक्र व शनि मारक ग्रह है. 

    धनु राशि के लिए कौन सा भाव बाधक भाव है. | Which is the Badhak Bhava for the Sagittarius sign

    धनु राशि के लिए सप्तम भाव बाधक भाव है. 

    धनु राशि के लिए कौन सा ग्रह बाधक भाव का स्वामी होता है. | Which planet is Badhkesh for the Sagittarius sign

    धनु राशि के लिए बुध बाधकेश होता है. 

    धनु राशि में कौन सा ग्रह उच्च स्थान प्राप्त करता है. | Which Planet of the Sagittarius sign, is placed in exalted position

    धनु राशि में कोई ग्रह उच्च स्थान प्राप्त नहीं करता है. 

    धनु राशि किस ग्रह की नीच राशि है. | Which Planet of the Sagittarius sign, is placed in debilitated sign.

    धनु राशि किसी ग्रह की नीच राशि नहीं है. 

    धनु रशि किस ग्रह की मूलत्रिकोण राशि है. | Sagittarius sign is which Planet’s Multrikon.

     धनु राशि में गुरु 0 अंश से 10 अंश के मध्य मूलत्रिकोण राशि में है. 

    धनु राशि में किस अंश पर चन्द्रमा शुभ फल देते है. | Moon is considered to be auspicious at which degree for Sagittarius. 

    धनु राशि में चन्द्रमा 23 अंश पर शुभ फल देते है.।  

    धनु राशि में चन्द कौन से अंशों पर होने पर अशुभ फल देता है. | Moon is considered to be inauspicious at which degree for Sagittarius 

    धनु राशि में चन्द्र 13 अंश, 18 अंश पर होने पर अशुभ फल देता है. 

    धनु राशि के व्यक्तियों के लिए कौन सा इत्र शुभ है. | Which fragrance is auspicious for the Sagittarius sign

    धनु राशि के लिए लिग्नालोइस इत्र शुभ है. 

    धनु राशि के लिए कौन सा अंक शुभ है. । Which are the Lucky numbers for the Sagittarius sign

    धनु राशि के लिए 6, 3, 9, 8, 1, 4 अंक शुभ होते है. 

    धनु राशि के कौन सा वार शुभ वार होता है. । Which are the Lucky Days for the Sagittarius sign

    धनु राशि के लिए बुधवार, शुक्रवार, वीरवार और रविवार शुभ वार है. 

    धनु राशि के लिए कौन रत्न धारण करना शुभ रहता है. | Which is the lucky stone for the Sagittarius people

    धनु राशि के लिए पुखराज धारण करना शुभ रहता है. 

    धनु राशि का शुभ रंग कौन सा है. | Which is the lucky Colour for the Sagittarius people

    धनु राशि के लिए सफेद, क्रीम, हल्का नीला. 

    धनु राशि के लिए किस दिन का उपवास रखना शुभ रहता है. | On which day should the Sagittarius people fast

    धनु राशि के लिए वीरवार का व्रत करना शुभ रहता है. 

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