Articles in Category Basic Astrology
ज्योतिष और स्वास्थ्य | Astrology and Health
चिकित्सा ज्योतिष के विषय में ज्योतिष शास्त्र में बहुत कुछ लिखा गया है. कुछ नियम पुराणों में भी दिए गए हैं. विष्णु वेद-पुराण के अनुसार भोजन करते समय जो नियम दिए गए हैं वह हमें बताते हैं कि भोजन करते
केमद्रुम योग कैसे बनता है और उसका प्रभाव क्या होता है
केमद्रुम योग ज्योतिष में चंद्रमा से निर्मित एक महत्वपूर्ण योग है. वृहज्जातक में वाराहमिहिर के अनुसार यह योग उस समय होता है जब चंद्रमा के आगे या पीछे वाले भावों में ग्रह न हो अर्थात चंद्रमा से दूसरे
क्या आप व्यवसाय में सफल होंगे? ज्योतिष द्वारा जानिये
कुण्डली के बारह भावों में जलग्न को प्रमुख स्थान दिया जाता है. जातक परिजात के अनुसार लग्न, लग्नेश एवं लग्न के कारक सूर्य के बलवान होने पर जातक सुख सुविधा से संपन्न जीवन व्यतीत करता है. लग्न पर यदि
ज्योतिष में रत्न का महत्व | Importance of Gemestones in Jyotish | Gemestones in Jyotish | Gemstones in Astrology
ज्योतिष एवं धार्मिक ग्रंथों में रत्नों की उत्पत्ति बारे में अनेकों कहानियाँ मिलती है. अग्नि पुराण में रत्नों की उत्पत्ति का संबंध वृत्रासुर के वध से जुडा़ है. इस दैत्य का वध करने के लिए महामुनि दधीचि
क्या होता है गण्डमूल नक्षत्र और क्या होगा उसका प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के अनुसार भचक्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं. इन सत्ताईस नक्षत्रों में कुछ नक्षत्र ऎसे होते हैं जिनका क्षेत्र अति संवेदनशील होता है और इन्हीं नक्षत्रों को गण्डमूल नक्षत्र कहा जाता है.
क्या रत्न सचमुच आपका भाग्य बदल सकते हैं? बिना लाग-लपेट के जानिये
सृष्टि में विभिन्न प्रकार के रत्नों का भण्डार मानव को कल्याणकारी मंगल कामनाओं के साथ वरदान स्वरूप प्राप्त हुआ है. व्यक्ति रत्नों को अपने भाग्य को चमकाने के लिए धारण करता है, रत्न द्वारा वह स्वयं को
क्या होगा पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने का प्रभाव? संपूर्ण जानकारी
आकाश में कुंभ राशि में 20 अंश से मीन राशि में 3 अंश 20 कला तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रहता है. क्रान्ति वृ्त्त से 19 अंश 24 कला 22 विकला उत्तर में और विषुवत रेखा से 15 अंश 11 कला 21 विकला उत्तर में
ज्योतिष में दीप्तादी अवस्थाओं का क्या महत्व है?
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की कई प्रकार की अवस्थाओं का वर्णन मिलता है. यह अवस्थाएँ ग्रहों के अंश अथवा अन्य कई तरह के बलों पर आधारित होती हैं. बालादि अवस्था में ग्रहों को बल उनके अंशो के आधार पर मिलता