Articles in Category Basic Astrology
सूर्य का राहु के साथ गोचर क्यों है इतना खास
सूर्य मजबूत व्यक्तित्व के सबसे बड़े कारणों में से एक होता है और राहु छल और भ्रम में कम नहीं है. अब जब सूर्य के साथ राहु का मेल होता है तो यह स्थिति परेशानी को दिखाने वाली अधिक हो सकती है. सूर्य वैदिक
प्रश्न कुंडली के ये सूत्र बताते हैं विवाह होने का सटीक समय
प्रश्न कुंडली बहुत उपयोगी और विश्वसनीय सूत्र है जो विवाह से जुड़े प्रश्नों के सभी हल प्रदान करने में सहायक बनता है. प्रश्न कुंडली क्या होती है पहले ये जान लेना जरुरी है, तो प्रश्न कुंडली वह चार्ट
विवाह के लिए बृहस्पति और शुक्र आखिर क्यों है इतने महत्वपूर्ण
ज्योतिष शास्त्र में कुछ ग्रह विशेष चीजों के कारक रुप में जाने जाते हैं. कारक होने के कारण ग्रह की अहमियत उस चीज के लिए बढ़ जाती है जिस चीज के वह कारक होते हैं. जैसे सूर्य सरकार का कारक है तो मंगल
राहु - चंद्रमा का मीन राशि में गोचर फल
राहु के साथ चंद्रमा का गोचर मीन राशि पर होने के विभिन्न फल प्राप्त होते हैं. इसका असर मीन राशि के अलावा अन्य राशियों पर भी गहराई से पड़ता है. राहु एक पाप ग्रह है चंद्रमा एक शुभ ग्रह है और मीन राशि एक
लाभ पर केतु कैसे डालता है असर जाने अपनी कुंडली से
ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों और राशियों का अपना-अपना महत्व है. वैदिक ज्योतिष में किसी भी अन्य घर की तुलना में ग्यारहवां घर अधिक महत्वपूर्ण है. ग्यारहवां भाव केतु के लिए शुभ फल देता है. केतु इस
सूर्य राशि से जाने जीवन में सफलता स्वभाव और विशेषता का गुण
सूर्य राशि की स्थिति का असर चंद्रमा के अनुरुप ही विशेष होता है. पाश्चात्य ज्योतिष में विशेष रुप से सूर्य को आधार मानक भविष्यवाणी होती है. वहीं किसी कुंडली के आधार स्तंभ के रुप में सूर्य चंद्रमा ओर
शनि के साथ मंगल का षडाष्टक होना देता है गंभीर प्रभाव?
शनि और मंगल से बनने वाला षडाष्टक योग कई तरह से कुंडली पर अपना असर डालता है. सामान्य रुप से यह एक विपरित स्थिति को ही अधिक दर्शाता है. यह खराब योगों के रुप में जाना जाता है. ग्रह की ये स्थिति कई बार
शुक्र के आत्मकारक होने पर मिलता है विशेष लाभ
ग्रहों में आत्मकारक रुप जैमिनी के महत्वपूर्ण सूत्र की परिभाषा है. आत्म कारक ग्रह का असर जीवन में व्यक्ति को कई तरह से असर दिखाने वाला होता है. आत्मक कारक ग्रह यदि कुंडली में शुभस्थ होगा तो उसका बेहतर
मेष राशि में वक्री बृहस्पति का सभी राशियों पर प्रभाव
4 सितंबर 2023 को गुरु मेष राशि में वक्री हो रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति को विस्तार, प्रचुरता और समृद्धि का ग्रह कहा गया है. बृहस्पति का वक्री होना काफी चीजों को बदल देने वाला समय होता
मंगल-केतु का तुला राशि में गोचर देगा गंभीर परिणाम
वैदिक ज्योतिष में केतु के साथ मंगल का गोचर बेहद परिवर्तन के साथ ही एक महत्वपूर्ण घटना का समय भी बन जाता है. मंगल ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक है और केतु क्रोध अलगाव को दर्शाता है. ऎसे में तुला राशि
मंगल के साथ राहु का क्यों बनाता है दुर्घटना का योग
कुंडली में मंगल और राहु एक साथ होने पर दुर्घटना का योग बनाता है. यह एक ऐसा ज्योतिषीय योग है जिसे नकारात्मक योगों की श्रेणी में रखा जाता है. यह वैदिक ज्योतिष में कई चुनौतियों को दर्शाता है. यदि राहु
नौकरी में कब होगा बदलाव जानें अपनी कुंडली से
कार्यक्षेत्र में होने वाले बदलाव कई तरह के हो सकते हैं. यह कभी अच्छे तो कभी खराब या फिर सामान्य रुप से अपना असर डालने वाले होते हैं. नौकरी में प्रगत्ति के लिए कई बार व्यक्ति बदलाव को चुनते हैं तो कुछ
आठवें भाव में मंगल का होना मांगलिक प्रभाव क्यों देता है परेशानी
आठवें भाव में मंगल की स्थिति को व्यापकर रुप से शोध का विषय माना गया है. यहां मंगल की उपस्थिति को साधारण रुप से नहीं देखा जा सकता है. जन्म कुंडली में सभी ग्रहों का और भाव स्थिति का महत्व किसी न किसी
ज्योतिष से संपत्ति के मामलों में समस्या या कोर्ट केस का कारण ?
मकान एवं संपत्ति ऎसी चीजें हैं जिनका सुख पाना एक बड़ा संघर्ष हो सकता है. कई बार इन चीजों में जीवन का संपुर्ण समय उलझा सा रहता है. संपत्ति के विवाद की स्थिति किसी न किसी रुप में जब जीवन पर आती है तो
आपकी कुंडली में चंद्रमा की एक से बारह भाव की कहानी
चंद्रमा ओर सुर्य यह ज्योतिष में दो मुख्य आधार स्तंभ हैं इनके द्वारा संपूर्ण व्यक्तित्व के सबसे प्रमुख गुण दृष्टिगोचर हो सकते हैं. जब चंद्रमा की बात आती है तो चंद्रम अके प्रत्येक पक्ष की स्थिति विशेष
कुंडली में पुष्कर नवांश का महत्व
पुष्कर नवांश एक शुभ नवांश है जो जन्म कुंडली में आशाजनक ऊर्जा लाता है. बृहस्पति एक लाभकारी ग्रह है और सौभाग्य, ज्ञान और ज्ञान का कारक है. पुष्कर नवांश और बृहस्पति के योग के अलावा अन्य ग्रहों की स्थिति
बृहस्पति की विवाह में भूमिका पर कैसे करें विचार
ग्रहों की शुभता की बात जब आती है तो बृहस्पति को सबसे अधिक शुभ ग्रह की श्रेणी में रखा जाता है. यह सभी ग्रहों में विशेष होता है ओर अपनी शुभता का प्रभाव जब दिखाता है तो समय को पलट देने वाला भी होता है.
जन्म कुंडली में राहु कब देता है शुभ फल
जन्म कुंडली में सभी ग्रह अपने अनुसार शुभ फलों एवं अशुभ फलों को देने में आगे रहते हैं लेकिन जब बात आती है राहु की तो यह एक काफी गंभीर होता है. राहु ग्रह व्यक्ति को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला होता
चंद्रमा के साथ गुरु का योग भाग्य को बनाता है प्रबल
चंद्रमा के साथ गुरु का होना एक अनुकूल स्थिति का निर्देश देने वाला सिद्धांत है. यह दोनों ग्रह बेहद शुभ माने जाते हैं. चंद्रमा एक शीतल प्रधान ग्रह है वहीं गुरु शुभता प्रदान करने वाला ग्रह है. इन दोनों
कुंभ राशि में शनि के अस्त होने का प्रभाव
शनि का गोचर या स्थिति जब कुंभ राशि में अस्त होती है तो इसका असर काफी धीमे रुप से मिलने वाले परिणाम के रुप में दिखाई देता है. कुंभ राशि शनि की स्वराशि है ओर यह शनि के स्वामित्व की मूलत्रिकोण राशि भी