मार्च माह 2024 - फाल्गुन कृष्ण पक्ष (सूर्य उत्तरायण) | Phalgun Krishna Paksha (Surya Uttarayan) - 2024 दिनांक व्रत और त्योहार हिन्दु तिथि 01 मार्च फाल्गुन कृष्ण पक्ष षष्ठी, तिथि वृद्धि फाल्गुन कृष्ण पक्ष षष्ठी (6) 02 मार्च भद्रा 07:54 से

फरवरी माह 2025 - माघ शुक्ल पक्ष (सूर्य उत्तरायण) | Magh Shukla Paksha(Surya Uttarayan) - February 2025 दिनांक व्रत और त्यौहार हिन्दु तिथि 01 फरवरी बुध मकर राशि प्रभाव माघ कृष्ण पक्ष तृतीया (3) 02 फरवरी स्वामी बसंत पंचमी माघ कृष्ण पक्ष

जनवरी 2024 - पौष कृष्ण पक्ष (सूर्य उत्तरायण) | Paush Krishna Paksha (Surya Uttarayan) - January 2024 दिनांक व्रत और त्यौहार हिन्दु तिथि 1 जनवरी सन 2024 ईस्वी आरंभ पौष कृष्ण पक्ष पंचमी (05) 4 जनवरी रुक्मिणी अष्टमी पौष कृष्ण पक्ष अष्टमी (8)

शुक्र को जहां भोग-विलास और समृद्धि से जोड़ कर देखा जाता है. विलासिता इसका नैसर्गिक कारक बनती है. इस कारण तुला राशि के लोगों में वैभव-विलासितापूर्ण जीवन जीने इच्छा भी देखने को मिलती है. शुक्र के प्रभाव से व्यक्ति फैशन से अत्यधिक प्रभावित

मंगल सिंह राशि में प्रवेश करने वाले हैं. मंगल का सिंह राशि में गोचर बहुत ही प्रभावशाली रहेगा क्योंकि पिछले काफी समय से मंगल कर्क राशि में गोचरस्थ थे और कर्क राशि में होने के कारण मंगल अपने समस्त फलों को अनुकूल रुप से दे पाने में सक्षम नहीं

राहु अभी तक एक लम्बे समय से मिथुन राशि में गोचरस्थ थे. पर अब वह मिथुन से निकल कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे और फिर वहीं पूरा डेढ़ साल का समय बिताएंगे. राहु को छाया ग्रह का रुप कहा गया है. ऎसे में इस छाया का प्रभाव इतना गहरा होता है की यह

कर्क राशि वालों पर शनि की ढैय्या का होगा खास असर. कर्क राशि वालों के लिए शनि सातवें भाव और आठवें भाव के स्वामी बनते हैं. कर्क राशि वालों के लिए शनि कष्टकारी बनते हैं. इस स्थिति के कारण स्वास्थ्य को लेकर तनाव रह सकता है तथा रिश्तों में दूरी

शनि का गोचर ज्योतिशः की दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना होती है. शनि और गुरु ऎसे ग्रह हैं जिनके राशि परिवर्तन को लेकर सभी में जिज्ञासा रहती है क्योंकि इन दो ग्रहों की जीवन पर बहुत गहरी छाप पड़ती है. ऎसे में शनि का बदलाव एक राशि से

शनि का मकर राशि में गोचर सभी बारह राशियों पर अलग-अलग रुप से पड़ेगा. इसके अलाव शनि का गोचर अनेक घटनाओं को भी प्रभावित करने वाला होगा. सामाजिक एवं राजनीतिक स्तर पर भी ये विश्व पर असर डालने वाला होगा. शनि सबसे मंद गति से चलने वाला ग्रह है,

शनि का गोचर प्रत्येक राशि के लिए अढाई वर्ष का समय लेता है. सभी ग्रहों में शनि ग्रह ही ऎसे ग्रह हैं जो किसी भी राशि में सबसे अधिक समय लेते हैं. इस गोचर में शनि का वक्री-मार्गी गति के साथ गोचर करना भी महत्व रखता है. कई बार तेज गति में तो कई

13 अप्रैल 2021 को नव विक्रम संवत का आरंभ होगा. 2078 का नव संवत्सर “राक्षस” नाम से पुकारा और जाना जाएगा. इस वर्ष संवत के राजा मंगल होंगे और मंत्री भी मंगल ही होंगे. राक्षस नामक संवत के प्रभाव से विकास के कार्यों में व्यवधान की स्थिति देखने

हिन्दु माह के दौरान एकादशी तिथि का बहुत महत्व माना जाता है. इसमें भी निर्जला एकादशी को विशेष स्थान प्राप्त है. एकादशी तिथि को भगवान कृष्ण को भी अति प्रिय रहती है. एकादशी तिथि में भगवान कृष्ण का पूजन होता है साथ ही व्रत एवं उपवास का भी

चोरी के प्रश्न में चोर के स्वरुप तथा अन्य बातों का पता चल जाता है यदि कुण्डली का विश्लेषण भली-भाँति किया जाए. इसके लिए लग्न, चन्द्रमा तथा अन्य संबंधित भाव का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए. आइए इस कडी़ में सबसे पहले आपको चोर के स्वरुप के बारे

जीवन में अनेक समस्याएँ तथा कठिनाइयाँ उभरकर सामने आती हैं. कई व्यक्ति इन कठिनाईयों को बिना मानसिक परेशानियों के झेलते हैं और कई जातक परेशान हो जाते हैं. इन परेशानियों के कारण कई बार घर - परिवार में कलह भी उत्पन्न हो जाते हैं. ऎसे में कई बार

ज्योतिष शास्त्र का निर्माण करने में बहुत से ऋषिमुनियों का सहयोग हुआ. इन सभी के प्रयासों से ज्योतिष द्वारा व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान के समय को जानने में बहुत अधिक सहायता मिल पाई है. इन्ही में से वेदव्यास और कश्यप ऋषि का नाम मुख्य

व्यास जी ने कहा- एक बार नैमिषारण्य तीर्थ में अस्सी हजार मुनि एकत्र हो कर पुराणों के ज्ञाता श्री सूत जी से पूछने लगे- हे महामुने! आपने हमें अनेक पुराणों की कथाएं सुनाई हैं, अब कृपा करके हमें ऐसा व्रत और कथा बतायें जिसके करने से सन्तान की

चोरी के प्रश्न में प्रश्नकर्त्ता का आमतौर पर यह प्रश्न होता है कि चोर कब पकडा़ जाएगा. वह पकडा़ भी जाएगा या नहीं पकडा़ जाएगा. इसे देखने के लिए प्रश्न कुण्डली के कुछ योगों के विषय में आपको जानकारी दी जा रही है. इन योगों को आप तभी समझ पाएंगें

रत्नों के उपयोग का चलन बहुत पहले से ही सामाज में प्रचलित रहा है. इन रत्नों को कभी संदरता बढ़ाने के लिए तो कभी भाग्य में वृद्धि के लिए किसी न किसी रुप में उपयोग किया ही जाता रहा है. ज्योतिष में रत्नों का उपयोग ग्रह शांति एवं उसकी शुभता में

एपेटाइट उपरत्न का मुख्य रंग नीले रंग की आभा लिए हुए हरा रंग है. इसलिए इसे बुध ग्रह का उपरत्न माना गया है. इसके अतिरिक्त यह कई रंगों में उपलब्ध है. यह नीले, हरे, बैंगनी, रंगहीन, पीले तथा गुलाबी रंगों में पाया जाता है. कई रंगों में पाए जाने

मृ्गशिरा नक्षत्र को किसान नक्षत्र कहा जाता है. सरल शब्दों में उसे हिरनी या खटोला भी कहा जाता है. राशिचक्र को 27 समान भागों में विभाजित करने के बाद बाद 27 नक्षत्रों बनते है. इनमें से प्रत्येक नक्षत्र 13 अंश और 20 मिनट का होता है. और एक राशि