जानिए क्यों है इतना महत्वपूर्ण माघ माह और इसके महव के बारे में

हिन्दूओं का एक अन्य पवित्र माह माघ मास है, इस माह का महत्व धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है. इस माह के दौरान हर दिन किसी न किसी रुप में पूजा, पाठ, जप, तप, दान इत्यादि की महत्ता को विस्तार रुप से बताया गया है. इस माह में आने वाले पर्वों का और व्रतों का महत्व धार्मिक और वैज्ञानिक दोनो ही रुपों से महत्वपूर्ण है. इस माह में ठंड की समाप्ति का आगमन देखने को मिलता है. इसी माह के दौरान सूर्य उत्तरायण की ओर अग्रसर होते हैं और गर्माहट का आगमन शुरु होने लगता है. दिन लम्बे और रातें छोटी होने लगती हैं.

माघ माह विशेष

माघ माह में विशेष रुप से नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है. इस माह में पूर्ण श्रद्वा और विश्वास के साथ नदियों में स्नान करने पर व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते है. यह माना जाता है, कि इस माह का प्रत्येक दिन किसी उत्सव से कम महत्व नहीं रखता है.

इस माह में आने वाली अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. उस दिन तीर्थ स्थलों पर दर्शन और तर्पण करने से कल्याण की प्राप्ति होती है. इस माह में स्नान-दान की परम्परा के साथ तिल, गुड़ के दान और सेवन का महत्व कहा गया है. इसके अतिरिक्त इस माह में किए गए विवाह भी विशेष रुप से शुभ और सफल रहते है.

माघ माह में जन्मा जातक

माघ मास में जन्म लेने वाला व्यक्ति विद्वान होता है. ऎसे व्यक्ति को धन-संपति की कोई कमी नहीं होती है. साहसी और जोखिम के कार्य करने में उसे महारत प्राप्त होती है. उसकी भाषा में कटुता होने की संभावना बन रह सकती है. अपने इस स्वभाव के कारण उसके संबन्ध अपने आस-पास के लोगों से मधुर नहीं रहते है. इसके अतिरिक्त वह कामी भी होता है. प्रतियोगियों को परास्त करने का गुण उसे आता है.

माघ माह में जन्मा जातक भाग्य का सहयोग पाता है. जातक अपनी मेहनत और भाग्य के सहयोग से आगे बढ़ता है. इस माह में जन्मे जातक कठोर संघर्ष भी करते हैं और जीवन में अच्छा स्थान स्थान पाने की लालसा भी रखते हैं. अपनी सोच और विश्वास के साथ आगे बढ़ता है. अपने करियर को लेकर एक अलग तरह का जोश रहता है. जातक में नेतृत्व क्षमता भी बहुत अच्छी होती है. जातक संस्कारी और परिवार की नियमों को मानने वाला भी होता है.

इस माह में जन्मा जातक कुछ जिद्दी भी हो सकता है. वह अपनी मनमानी करने वाला हो सकता है. जातक दूसरों को अपनी बातों में इस प्रकार घुमा सकता है कि दूसरे उसकी बात को मानने पर भी मजबूर हो जाते हैं. सभी के साथ घुल मिल कर रहने की आदत भी होती है. अकेला पसंद अच्छा नहीं लगता है वह चाहता है की दोस्तों के साथ या किसी न किसी के साथ सदैव रहे.

सूर्य के उत्तरायण होने का समय

माघ माह का आरंभ सूर्य के उत्तरायण के साथ आरंभ हो जाता है. सूर्य का उत्तरायण होना धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. भारत में इस समय को मकर संक्रान्ति के पर्व रुप में, पोंगल, गुडी़ पड़वा और न जाने अलग अलग नामों के रुप में किसी न किसी तरह से मनाया ही जाता है. ये समय धार्मिक रुप से स्नान दान, पूजा-पाठ के साथ संपन्न होता है. इस दिन दान की जाने वाली वस्तुओ में गुड, तिल, गेंहूं इत्यादि है. इससे शरीर को गर्मी प्राप्त होती है और रोगों से लड़ने की क्षमता भी शरीर में विकसित होती है.

माघ माह के पर्व

षटतिला एकादशी

माघ माह के दौरान दो एकादशियों का आगमन होता है जिसमें से एक षटतिला एकादशी होती है. इस दिन व्रत का विधान होता है. एकादशी का व्रत मोक्ष की प्राप्ति देने वाले माने गए हैं. इसी कारण यह बहुत अधिक शुभ कहे जाते हैं. ये दो एकादशी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के दौरान आती है. माघ माह के दोनों पक्षों की एकादशी तिथि के दिन यह व्रत किया जाता है.

माघ मास अमावस्या

माघ मास की अमावस्या को विशेष रुप से महत्व रखती है इस अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहा जाता है. इस अमावस्या के दिन मौन रहने का महत्व बताया गया है. यह मौन हमे आत्मिक रुप से मजबूती देने वाला होता है. हमारे पापों का शमन करने वाला होता है. इस मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी जहां तीन नदियां गंगा,यमुना और सरस्वती का संगम बताया गया है उस स्थान पर मौन व्रत करने से अनेकों पाप समाप्त होते हैं. इस दिन स्नान दान और पितरों के नाम से भी दान किया जाता है.

बसन्त पंचमी

इस माघ माह में बसंत पंचमी का त्यौहार भी आता है. यह पर्व मौसम में होने वाले बदलाव और उसके सुंदर रुप के दर्शन का समय भी होता है. इस समय के दौरान खेतों में फसल भी पकने लगती है और उस्की सुंदरता से सारा माहौल खुशी और रंग से भर जाता है. यह त्यौहार माघ माह, के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है और बसंत के आगमन के उल्लास को भी दिखाता है. प्रकृति की खूबसूरत छटा हमें इस समय देखने को मिलती है.

सरस्वती जयन्ती

इस माह में विद्या का आशिर्वाद देने वाली देवी मा सरस्वती की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. सरस्वती पूजा प्म्चमी तिथि के दिन की जाती है. इस दिन भगवान विष्णु और सरस्वती पूजन होता है. विद्यालयों एवं अन्य शिक्षण संस्थाओं में सरस्वती पूजन पर अनेकों कार्यक्रम आयोजित किये जाते है. माता सरस्वती विधा और संगीत की देवी है. इस दिन इनका पूजन करने से माता प्रसन्न होती है.कला एवं रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोग भी इस दिन विशेष उत्सव का आयोजन करते हैं.

श्री गणेशचतुर्थी व्रत

माघ माह के समय गणेश चतुर्थी का त्यौहार भी मनाया जाता है. इस समय पर गणेश चतुर्थी का त्यौहार संकष्ट चतुर्थी नाम से मनाया जाता है. इस चतुर्थी का व्रत रखने से जीवन में मौजूद संकटों का नाश होता है. इस चतुर्थी के दिन प्रात:समय स्नान के पश्चात भगवान गणेश की पूजा करती हुई पूरे दिन व्रत किया जाता है. शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और गणेश जी विधि विधान के साथ पूजा अर्चना से व्रत संपन्न होता है. ये व्रत संतान प्राप्ति, सौभाग्य प्राप्ति एवं सुख की कामना हेतु किया जाता है.

माघ का महिना गंगा स्नान के विशेष महत्व से भी जुड़ा हुआ है. इसी के साथ पवित्र स्थलों में स्नान-दान, पूजा-पाठ करने का कई गुना फल इस माह के दौरान प्राप्त होता है. यह माह धार्मिक एवं मांगलिक कार्यों के आरंभ होने का सुत्रपात भी करता है.