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मकर संक्राति खान-पान 2020
Makar Sankranti Food and Dishes

makar sankranti food मकर संक्राति भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है. इस त्यौहार का सम्बन्ध प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और कृषि से है. ये तीनों चीजें ही जीवन का आधार हैं. प्रकृति के कारक के तौर पर इस पर्व में सूर्य देव को पूजा जाता है जिन्हें, शास्त्रों में भौतिक एवं अभौतिक तत्वों की आत्मा कहा गया है. इन्हीं की स्थिति के अनुसार ऋतु परिवर्तन होता है और धरती हमें अनाज देती है जिससे जीव समुदाय का भरण-पोषण होता है.


मकर संक्रांति में सूर्य का दक्षिणायन से उत्तरायण में आने का स्वागत किया जाता है. शिशिर ऋतु की विदाई और बसंत का अभिवादन तथा अगहनी फसल के कट कर घर में आने का उत्सव मनाया जाता है. उत्सव का आयोजन होने पर सबसे पहले खान-पान की है चर्चा होती है. मकर संक्रांति पर्व जिस प्रकार देश भर में अलग-अलग तरीके और नाम से मनाया जाता है. उसी प्रकार खान-पान में भी विविधता रहती है. परंतु, एक गौरतलब बात यह है कि मकर संक्राति के नाम, तरीके और खान-पान में अंतर के बावजूद सभी में एक समानता यह है कि इसमें व्यंजन तो अलग-अलग होते हैं किन्तु उनमें प्रयोग होने वाली सामग्री एक सी होती है.


देश भर में लोग अलग-अलग रूपों में तिल, चावल, उड़द की दाल एवं गुड़ का सेवन करते हैं. इन सभी सामग्रियों में सबसे ज्यादा महत्व तिल का दिया गया है. इस दिन कुछ अन्य चीज भले ही न खाएं किन्तु किसी न किसी रूप में तिल अवश्य खाना चाहिए. इस दिन तिल के महत्व के कारण मकर संक्रांति पर्व को तिल संक्राति के नाम से भी पुकारा जाता है. मंकर संक्रांति में जिन चीज़ों को खाने में शामिल किया जाता है वह पौष्टिक होने के साथ ही साथ शरीर को गर्म रखने वाले पदार्थ भी हैं.


मकर संक्रांति खान-पान का भौतिक एवं धार्मिक आधार (The religious and practical basis of Makar Sankranti foods)

मकर संक्रांति का पर्व माघ मास में मनाया जाता है. भारतवर्ष में माघ महीने में सबसे अधिक ठंढ़ पड़ती है अत: शरीर को अंदर से गर्म रखने के लिए तिल, चावल, उड़द की दाल एवं गुड़ का सेवन किया जाता है. मकर संक्रांति में इन खाद्य पदार्थों के सेवन का यह भौतिक आधार है. इन खाद्यों के सेवन का धार्मिक आधार भी है. शास्त्रों में लिखा है कि माघ मास में जो व्यक्ति प्रतिदिन विष्णु भगवान की पूजा तिल से करता है और तिल का सेवन करता है उसके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं. अगर व्यक्ति तिल का सेवन नहीं कर पाता है तो सिर्फ तिल-तिल जप करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है.


तिल का महत्व मकर संक्रांति में इस कारण भी है कि, सूर्य देवता धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं जो सूर्य के पुत्र होने के बावजूद सूर्य से शत्रु भाव रखते हैं. अत: शनि देव के घर में सूर्य की उपस्थिति के दौरान शनि उन्हें कष्ट न दें इसलिए तिल का दान व सेवन मकर संक्राति में किया जाता है.


चावल, गुड़ एवं उड़द खाने का धार्मिक आधार यह है कि इस समय ये फसलें तैयार होकर घर में आती हैं. इन फसलों को सूर्य देवता को अर्पित करके उन्हें धन्यवाद दिया जाता है कि हे देव आपकी कृपा से यह फसल प्राप्त हुई है अत: पहले आप इसे ग्रहण करें तत्पश्चात प्रसाद स्वरूप में हमें प्रदान करें जो हमारे शरीर को उष्मा, बल और पुष्टता प्रदान करे.


मकर सक्रांति में बिहार और उत्तर प्रदेश का खान-पान (Makar Sankranti Dishes from Bihar and Uttar Pradesh)

बिहार एवं उत्तर प्रदेश में खान-पान लगभग एक जैसा होता है. दोनों ही प्रांत में इस दिन अगहनी धान से प्राप्त चावल और उड़द की दाल से खिंचड़ी बनाई जाती है. कुल देवता को इसका भोग लगाया जाता है. लोग एक-दूसरे के घर खिचड़ी के साथ विभिन्न प्रकार के अन्य व्यंजनों का आदान-प्रदान करते हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग मकर संक्राति को खिचड़ी पर्व के नाम से भी पुकारते हैं. इस प्रांत में मकर संक्राति के दिन लोग चूड़ा-दही, गुड़ एवं तिल के लड्डू भी खाते हैं. चूड़े एवं मुरमुरे की लाई भी बनाई जाती है.


मकर सक्रांति में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का खान-पान (Makar Sankranti Foods from Chhatisgarh)

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मकर संक्रांति के दिन बिहार और उत्तर प्रदेश की ही तरह खिचड़ी और तिल खाने की परम्परा है. यहां के लोग इस दिन गुजिया भी बनाते हैं.


मकर सक्रांति में दक्षिण भारत का खान-पान (Makar Sankranti Dishes From South India)

दक्षिण भारतीय प्रांतों में मकर संक्राति के दिन गुड़, चावल एवं दाल से पोंगल बनाया जाता है. विभिन्न प्रकार की कच्ची सब्जियों को लेकर मिश्रित सब्जी बनाई जाती है. इन्हें सूर्य देव को अर्पित करने के पश्चात सभी लोग प्रसाद रूप में इसे ग्रहण करते हैं. इस दिन गन्ने खाने की भी परम्परा है.


मकर सक्रांति में पंजाब एवं हरियाणा प्रांत में खान-पान (Makar Sankranti Foods from Hariyana and Punjab)

पंजाब एवं हरियाणा में इस पर्व में विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में मक्के की रोटी एवं सरसों के साग को विशेष तौर पर शामिल किया जाता है. इस दिन पंजाव एवं हरियाणा के लोगों में तिलकूट, रेवड़ी और गजक खाने की भी परम्परा है. मक्के का लावा (पोपकोर्न) , मूंगफली एवं मिठाईयां भी लोग खाते हैं.