एक बहुत ही पुरानी कहावत है कि "शरीर स्वस्थ है तो सब स्वस्थ है". अगर शरीर स्वस्थ नहीं रहता तो कुछ भी ठीक नहीं लगता है. कई बार व्यक्ति शारीरिक रुप से तो स्वस्थ रहता है पर मानसिक परेशानियाँ बहुत रहती है जिसका प्रभाव शरीर पर पड़ता है और सेहत बिगड़ जाती है. आज हम अंक शास्त्र के आधार पर स्वास्थ्य का आंकलन करने का प्रयास करते हैं. हर नंबर शरीर के एक भाग को प्रदर्शित करता है. आइए जाने कि कौन सा अंक किस बीमारी को दिखाता है और उससे कैसे बचा जा सकता है. अंक एक और स्वास्थ्य | Number 1 and
हर्ट नंबर का अंक शास्त्र में अपना महत्व माना गया है. यह नंबर व्यक्ति के अंग्रेजी नाम में आने वाले वोवेल्स के आधार पर निकाला जाता है. इस हर्ट नंबर से व्यक्ति के चरित्र चित्रण का तो पता चलता ही है लेकिन साथ ही उसके रोमांस तथा प्रेम संबंधो के बारे में भी पता चलता है. अंक एक और दो के रोमांस की विशेषताएँ | Characteristic of Romance for heart number 1 and 2 आपका हर्ट नंबर एक होने से आप गहरे प्यार की अभिव्यक्ति रखते हैं लेकिन आपका अहंकर आपके प्रेम की अभिव्यक्ति पर अंकुश लगाता
अंक शास्त्र का अगर सूक्ष्मता से अध्ययन किया जाए तब व्यक्ति विशेष के बारे में बहुत सी बाते उजागर होती हैं. हर अंक का अपना महत्व माना गया है. आज हम दिल के नंबर के बारे में बात करेगें. हर व्यक्ति का अपना हर्ट नंबर होता है. हर्ट नंबर की गणना | Counting Heart Number आपके अंग्रेजी के नाम के अक्षर में जितने भी वोवेल्स(a,e,i,o,u) आते हैं उन सभी के अंको के जोड़ से जो नंबर आत है वह हर्ट नंबर कहलाता है. यदि वोवेल्स के जोड़ में 11 अथवा 22 का अंक आता है तब उसका अंतिम जोड़ नहीं
सदियों से मनुष्य प्रकृति के आगे सिर झुकाता आया है. जैसे-जैसे मनुष्य सभ्य होता गया बहुत सी गूढ़ विद्याओं की जानकारी भी प्राप्त करने लगा. सूर्य तथा चंद्रमा के साथ अन्य ग्रहों के विषय में भी जानना आरंभ कर दिया. इस प्रकार जो विद्या ग्रह, नक्षत्र और राशि पर आधारित थी उसे ज्योतिष के नाम से जाना जाने लगा और जो विद्या हाथों की लकीरों पर आधारित थी उसे हस्त शास्त्र कहा गया. इसके साथ जो विद्या अंकों पर आधारित थी उसे अंक ज्योतिष अथवा अंक विद्या के नाम से जाना जाने लगा. नंबर 1 में आने
मास्टर नंबर को अंक ज्योतिष में महत्वपूर्ण नंबर माने गए हैं. आधुनिक अंक शास्त्री इन मास्टर नंबर के महत्व को बखूबी परिलक्षित कर पाए हैं. इन मास्टर नंबर को अंक शात्र में सर्वोत्तम अंक कहा गया है. अंकशास्त्र की पुरानी पद्धति में 11 और 22 जैसे मिश्र अंकों को विशिष्ट स्थान नहीं प्राप्त हुआ लेकिन
सूर्य को सभी बारह राशियों से गुजरने में एक वर्ष अर्थात लगभग 365 दिन का समय लगता है. अंक विद्या में सूर्य की स्थिति के आधार पर हर माह को एक अंक प्रदान किया गया है. इन महीनों की अवधि, सामान्य अवधि से भिन्न होती है. सूर्य की इस अवधि का विश्लेषण, सूर्य के विषुव
अंक शास्त्र में सूर्य तथा चन्द्रमा दो ऎसे ग्रह हैं जिन्हें दो अंक प्राप्त हैं. सूर्य तथा यूरेनस का आपस में परस्पर संबंध माना गया है, इसलिए सूर्य को 1 तथा 4 दो अंक प्राप्त है. वास्तविकता में अंक 1 सूर्य का है और अंक 4 यूरेनस का है. इसी प्रकार चन्द्रमा तथा नेपच्यून का आपस में
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है, आज भी अंकशास्त्री नामांक की गणना इन्हीं प्राचीन तरीकों से करते आ रहे हैं. नामांक जीवन में आवश्यक बदलाव ला
नामांक ज्योतिष एक महत्वपूर्ण विद्या है, जिसके माध्यम से व्यक्ति के विषय एवं उसके भविष्य को जानने का प्रयास किया जाता है. नामांक ज्योतिष में अंकों के माध्यम द्वारा गणित के नियमों का व्यवहारिक उपयोग करके मनुष्य के विभिन्न पक्षों, उसकी विचारधारा , जीवन के विषय इत्यादि का
जीवन में नाम का बहुत महत्व होता है नाम से ही हमारी पहचान होती है. नाम का महत्व खुद ब खुद दृष्टिगत होता है, तथा नाम रखने की विधि को संस्कार कर्म में रखा जाता है और इसमें जातक के जन्म नक्षत्र पर आधारित नाम रखने का प्रयास किया जाता है. कुछ स्थानों पर हम यह भी देखते हैं कि किसी व्यक्ति
नामांक जीवन में बदलाव ला सकता हैं और हमारे जीवन को आशावादी दिशा प्रदान कर सकता है. नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है. आज भी लगभग सभी अंक-शास्त्री
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर ही की जाती रही है. आज भी अंकशास्त्री नामांक की गणना इसी प्राचीन तरीके से करते हैं. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है. अपना नामांक जानने के लिये सर्वप्रथम आप
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है, इनमें से किसी ने नौ अंक को स्थान दिया तो किसी ने स्थान नहीं दिया. आज भी लगभग सभी अंकशास्त्री नामांक की गणना
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर ही की जाती रही है. अंकशास्त्री नामांक की गणना इसी तरीके से करते हैं. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है, नामांक जीवन में आवश्यक बदलाव ला सकते हैं और हमारे जीवन को आशावादी
नामांक को सौभाग्य अंक भी कहते हैं. आज लगभग सभी अंकशास्त्री नामांक की गणना इसी प्राचीन तरीके से करते हैं. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है, इनमें से किसी ने नौ अंक को स्थान दिया तो किसी ने स्थान नहीं दिया. आज हम
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर ही की जाती रही है. व्यक्ति के नाम के अक्षरों के कुल योग से बनने वाले अंक को नामांक कहा जाता है. नामांक गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है, नामांक को सौभाग्य अंक भी कहते
अंकशास्त्र में मूलांक (जन्मांक) और भाग्यांक ज्ञात करना बेहद आसान होता है और अधिकतर सभी को मालूम भी होता है कि किस प्रकार इसे प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन नामांक को निकाल पाना सभी को नही आता और यह थोड़ा लंबा तरीका होता है. अंक शास्त्र के अनुसार नामांक का व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण प्रभाव
भाग्यांक, संयुक्त रूप से अंकों को जोड़ कर प्राप्त किया जाता है. भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का योग(जोड़) करना होता है और जो योग प्राप्त होता है वही भाग्यांक कहलाता है जैसे किसी व्यक्ति का जन्म 6 जून 1959 है तो उस व्यक्ति का भाग्यांक इस प्रकार ज्ञात करेंगे - जन्म तारीख +
भाग्यांक जानने के लिये, जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष की आवश्यकता होती है. भाग्याँक को संयुक्त रूप से अंकों को जोड़ कर प्राप्त किया जाता है. भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का योग(जोड़) करना होता है और जो योग प्राप्त होता है वही भाग्यांक कहलाता है जैसे किसी व्यक्ति का जन्म
भाग्यांक जानने के लिये, भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का योग(जोड़) करना होता है, तथा जो योग प्राप्त होता है वही भाग्यांक कहलाता है, जैसे किसी व्यक्ति का जन्म 6 अप्रैल 1959 है तो उस व्यक्ति का भाग्यांक इस प्रकार ज्ञात करेंगे - जन्म तारीख + जन्म माह + जन्म साल =

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