लाल किताब कुण्डली का दूसरा घर धर्म ग्रह कहा जाता है यहां स्थित जो भी ग्रह हो वह धर्म ग्रह के रूप में प्रमुखता पाता है और जातक को उससे संबंधि फलों की प्राप्ति होती है. इसी के साथ इस घर का प्रमुख कारक ग्रह यदि स्वयं यहां स्थिति हो जाता है तो जातक को शुभ फलों की प्राप्ति स्वत: ही होने लगती है.

इस घर में यदि कोई दुष्ट ग्रह बैठे या कोई खराब ग्रह दृष्टि दे रहा हो तो जातक को इस घर से मिलने वाले फलों में कमी की प्राप्ती होती है. अत: हर ग्रह यहां पर स्थित होकर कई प्रकार के फलों को देता है जिसे समझने के लिए हम यहां यदि मंगल ग्रह को रखें तो उसके फलों की चर्चा करेंगे.

मंगल और सूर्य | Mars and Sun

मंगल के साथ सूर्य की दूसरे भाव में युति अनुकूल ही होती है. मित्र भाव के प्रभाव स्वरूप संयुक्त रूप से 48 वर्षों तक के लिए माना जाता है. यह संयुक्त रूप में किसी भी घर में हों मंगल के नेक व अनुकूल होने पर सूर्य को उच्च फल देने वाला माना जाएगा. आरंभ में दोनों ग्रहों का फल बहुत जल्दी और बहुत प्रबल रूप से मिलता जाता है.

जातक में सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने की चाह जबरदस्त होती है. परंतु यहां इस बात का अवश्य ध्यान में रखना होगा की यह फल ग्रहों की स्थित के अनुरूप ही मिलेंगे. यदि मंगल के खराब होने पर तो विपरित फलों की प्राप्ति होगी. इन प्रभावों में सूर्य का एक भाग और मंगल का दो गुना तक का फल देने की बात कही गई है. इन्हीं के साथ सूर्य और मंगल द्वारा जातक अपने कर्म क्षेत्र में लगा रहेगा.

मंगल और चंद्रमा | Mars and Moon

मंगल और चंद्रमा दोनो ही मित्र हैं ऎसे में यदि यह एक साथ दूसरे भाव में स्थित होते हैं तो जातक के लिए अनुकूल ही माने जाते हैं. इस घर में चंद्रमा शुभ हो तथा अच्छे फल देने वाला हो तो यह दोनों ही एक साथ मिलकर 52 वर्ष तक अच्छा फल देने वाले बनते हैं. धन संपदा अच्छी मिलती है.

परिवार का साथ भी मिलता है और जीवन में अनुकूलता बनी रहती है. लेकिन यदि इनमें से कोई खराब स्थित में हो तो परिणम इसके उलट हो सकते हैं, अत्यधिक व्यय व स्वास्थ्य में कमी और मानसिक तनाव की स्थिति बढ़ सकती है. इसके अतिरिक्त जब इस घर में मंगल शुभ होता है तो दोनों ग्रह मिलकर 28 वर्ष तक अच्छे फल देने वाले बनते हैं

मंगल और बुध | Mars and Mercury

मंगल के साथ बुध का होना दुसरे घर में काफी कुछ मंगल की प्रवृत्ति पर भी निर्भर करने वाला माना गया है दोनों के फलों में मंगल का बुध पर प्रभाव अधिक रहता है यदि टेवे में मंगल अच्छा है तो बुध भी दोगुना अच्छा फल देने की कोशिश करता है. जातक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है. शौर्य और बुद्धिमता साथ मिलकर काम करते हैं

वहीं दूसरे घर में मंगल यदि खराब होकर स्थित हो जाए तो यह स्थिति बुध के द्वारा मिलने वाले फलों में कमी ले आती है. जातक को बुध के खराब फल मिलने लगते हैं और जातक को स्थिति का भान नहीं हो पाता है. मति भ्रमित होने लगती है.

मंगल और बृहस्पति | Mars and Jupiter

मंगल और गुरू के लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में होने पर जातक को अपनी गृहस्थी का सुख मिल पाता है. वह अपने साथी के साथ कुछ आनंद की अनुभूति पाता है, ससुराल पक्ष की ओर से भी जातक को शुभ संदेश भी मिलते हैं वहां से उसे सम्मान और सहायता दोनों की प्राप्ति होती है.

इस घर में मंगल और गुरू के होने पर व्यक्ति को अपने साथियों और बंधुओं का भी खूब साथ मिलता है. लोग उसकी बात को पूरी तरह मानते हैं. परंतु यदि यहां पर इन ग्रहों पर खराब दृष्टि पड़ रही हो तो अच्छे फलों में कमी आ जाती है और जातक को खराब फल ही प्राप्त होते हैं.

मंगल और शुक्र | Mars and Venus

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में मंगल और शुक्र का एक साथ होना व्यक्ति के लिए आर्थिक रूप से काफी मदद्गार रहता है. व्यक्ति को स्त्री और परिवार से खूब सा धन भी मिलता है. ससुराल पक्ष की ओर से सहायता और सहयोग मिलता है.

मंगल और शनि | Mars and Saturn

मंगल का दूसरे घर में शनि के साथ होने पर विवाह के पश्चात ससुराल पक्ष के लिए बहुत उत्तम फल देने वाला होता है. इसी के साथ ही जातक की खुद की दौलत में भी इजाफा होता है, ससुराल पक्ष की ओर से जातक को धन व संपत्ति की प्राप्ति होती है. ससुराल में कोई निसंतान नहीं रहता है. परंतु इन पर कोई अशुभ प्रभाव आ रहा हो तो फलों में कमी आती है और ससुराल पक्ष में परेशानी भी रहती है.

मंगल और राहु-केतु | Mars and Rahu/Ketu

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में राहु या केतु के साथ मंगल के होने पर दोनों का अलग अलग फल मिलता है. आर्थिक स्थिति में बेहतरी बनी रहती है और व्यक्ति अपनी हकुमत चलाने वाला रहता है.