कर्क, सिंह और कन्या राशि पर मंगल की दृष्टि का फल

कर्कस्थ मंगल फल | Mars Aspecting Cancer

कर्क राशि में मंगल के स्थित होने पर जातक को अनुकूल फलों की प्राप्ति होती है. मित्र राशि में रहकर मंगल को कुछ शीतलता का अनुभव भी होता है. मंगल के आक्रामक और उग्र स्वभाव में कुछ कमी आती है. यह स्थिति कर्क में विपरित फल देने वाली बनती है जातक को परिवर्तन अधिक पसंद नहीं होता है. वह स्थिरता में विश्वास रखने वाला होता है. मानसिक द्वंद की स्थिति इनमें अधिक रहती हैं मन के आवेगों को रोक पाना काफी मुशकिल होता है. इस कारण से व्यक्ति में विकलता का भाव निहित होता है.

व्यक्ति में उत्त्म भोजन ओर वस्त्रों की चाह रहती है, आर्थिक स्तर को बेहतर बनाने की कोशिशों में सफलता पाता है. मंगल की कर्क में स्थिति आर्थिक संपन्नता की परिचायक बनती है. इस स्थिति के द्वारा जातक को जीवन में ऎश्वर्य और संपन्नता की प्राप्ति होती है. जातक अपने साथ-साथ दूसरों को भी समृद्ध बनाने में सहायक होता है. कोमलता और दया भावना इनमें बहुत होती है.

दोनों ग्रहों का मित्रवत संबन्ध इस योग में और भी शुभता ला रहा है. आजीविका, स्वास्थय और संचय के साथ- साथ परिवार पर इसका अनुकुल प्रभाव पड़ता है. जोश, उत्साह की स्थिति कुछ कम होती है. कार्यो को त्रुटि रहित रखना इनके स्वभाव का अंग बन सकता है. कुछ करने के लिए कमजोर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन पूरी मजबूती का परिचय देते हैं. इनकी ताकत इनकी दृढ़ता में निहित होती है. बहुत भावनात्मक होते हैं संबंधों में भावनात्मक संबंधों को अधिक महत्व देते हैं. आश्वासन और विश्वास के साथ, सुरक्षा में सहायक और भरोसेमंद होते हैं. शांति से और नम्रता से स्थितियों को संभालने के की कोशिश करते हैं.

सिंहस्थ मंगल का फल | Mars Aspecting Leo

सिंह राशि में मंगल ग्रह महत्वपूर्ण हो सकता है और एक स्थायी छाप बनाना चाहता है. भावुक होते हैं और मजबूत इरादों वाले भी होते हैं. जोखिम लेने और महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए तैयार रहते हैं.इनमें अधिकार और व्यक्तिगत आकर्षण की एक मजबूत स्थिति होती है.

अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहता है. इनमें अहंकार भी आ सकता है सिंह राशि में मंगल ग्रह शारीरिक ऊर्जा को बढा़ने का काम करता है. जातक काफी व्यावहारिक होता है, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बनता है. इन जातकों में नेतृत्व करने की खूबी अच्छी होती है. एक योग्य नेता के रूप में सफल भी हो सकता है.

अपनी राय के साथ अडिग रहने वाला होता है. कभी-कभी उसका व्यवहार दबंग और जिद्दी हो सकता है. अधि स्वाभिमान उनके लिए पतन का कारण भी बन सकता है अत: इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. जातक एक बेहतर खिलाड़ी के रूप में भी नाम कमा सकता है इसमें हास्य की अच्छी समझ होती है, और इनके वचन गर्मजोशी से भरे हुए होते हैं. यह अपने कार्यों के माध्यम से एक विरासत छोड़ना चाहते हैं. जातक में उदारता होती जिस कारण वह एक अच्छे साथी के रूप में उभर कर सामने आता है.

कन्याराशिगत मंगल का फल | Mars Aspecting Virgo

कन्या राशि में मंगल के होने से जातक सज्जनों द्वारा प्रशंसित होता है. जातक काफी व्यवहारिक होता है और जीवन में लक्षय के प्रति सदैव सजग रहता है. यह कई चिजों को एक साथ करने में लगे रहते हैं और इन सभी बातों को संभालने की कला भी इन्हें अच्छे से आती है. कन्या राशि में मंगल की स्थिति जातक को कभी कभी आलोचनात्मक भी बना देती है जिस कारण लोगों से द्वेष की स्थिति भी उभर सकती है. आम तौर पर तार्किक और अनुशासित हैं. जिद्दी हो सकता है, लेकिन वे आक्रामक नहीं होता. आसानी से नर्वस हो सकता है. चीजों को अपने तरीके से करना पसंद करता है.

गुस्सा होने पर यह जल्द ही चिडचिडे़ भी हो जाते हैं. यह कार्यों को अपने अनुसार करने की चाह रखते हैं ओर मेहनत से पिछे नहीं हटते. परंतु तुरंत किसी भी बात पर इनका प्रतिक्रिया करना काफी असहज सा होता है जो स्थिति को खराब भी कर सकता है. यह एक योधा के समान होते हैं और किसी एक बात पर अधिक समय तक लगे नहीं रह सकते.

आथिक स्थित से सपन्न रहता है, संगीत के प्रति लगाव रहता है. बोलने में मधुर होते हैं. जातक धन का अपव्यय भी खूब करता है. विद्वान होता है और धर्म के अनुसार आचरण करने वाला होता है. बहुत से विषयों में जानकार रखने वाला होता है. सुम्दर वस्त्राभूषणों से युक्त होता है तथा सुंदर आकर्षक व्यक्तितव का स्वामी होता है.

"मंगलराशि दृष्टि योगफल - भाग 1"

"मंगलराशि दृष्टि योगफल - भाग 3"

"मंगलराशि दृष्टि योगफल - भाग 4"