Articles in Category Vedic Astrology

गुरु का वृश्चिक राशि में गोचर | Jupiter Transit In Scorpio 2018 | Jupiter In Scorpio: Effects On 12 Rashi | Guru Transit Effects on 12 Zodiac Signs

11 अक्टूबर 19:19 मिनिट पर गुरू तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करने जा रहा है. इस राशि में गुरू के गोचर का प्रभाव सभी राशि के जातकों पर भिन्न - भिन्न प्रकार से होगा. इस दौरान आप भी गुरू

कुण्डली में बने ये योग तो होती है लव मैरिज | Following yogas in kundli are favourable for a love marriage

प्रेम संबंधों को लेकर युवाओं के मन में बहुत सी कल्पनाएं जन्म लेती रहती है. उम्र के इस पड़ाव पर जब व्यक्ति अपने साथी की तलाश में होता है तो उसका मन किन बातों से प्रभावित होगा यह कहना आसान नहीं होता

कालसर्प योग का कुण्डली पर प्रभाव । Effect of Kalsarp yog in kundli

जन्म कुण्डली में राहु-केतु से निर्मित होने वाला योग है. राहु को कालसर्प का मुख माना गया है. अगर राहु के साथ कोई भी ग्रह उसी राशि और नक्षत्र में शामिल हो तो वह ग्रह कालसर्प योग के मुख में ही स्थित

कैसे बनता है यमघंटक योग | How does ‘Yamghantak Yoga’ appear ?

कुछ अशुभ योगों की गिनती में यमघंटक योग का नाम भी आता है. यह वह योग है जो अच्छे कार्यों में त्याज्य होता है. इस योग में व्यक्ति के किए गए शुभ कार्यों में असफलता की संभावना बढ़ जाती है. ज्योतिष में

2018 में वक्री गुरू का राशियों पर प्रभाव । Retrograde Jupiter's effect on Signs in 2018

इस वर्ष 9 मार्च 2018 को 10:15 पर बृहस्पति तुला राशि में वक्री होकर गोचर करेंगे. बृहस्पति का वक्री होना अचानक से होने वाले बदलावों और जीवन की परिस्थितियों में आने वाले उतार-चढा़वों को दर्शाने वाला

2018 में ग्रहों की वक्री और मार्गी स्थितियां | Retrograde and Directional State of Planets in 2018

मंगल 2018 | Mars 2018 मंगल 16 जनवरी 2018 में वृश्चिक राशि में 29:10 पर प्रवेश करेंगे. मंगल 7 मार्च 2018 को धनु राशि में 18:27 पर प्रवेश करेंगे. मंगल 2 मई 2018 को मकर राशि में 16:19 पर प्रवेश करेंगे.

कर्क राशि के गुरू का लग्न पर प्रभाव | Cancer Sign Jupiter Effect in Different Ascendant

गुरू का गोचर मुख्यत स्वराशि, उच्च और नीच राशि स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाला होता है. जब गुरू कर्क राशि में गोचर करता है तो वह अपनी उच्च स्थिति एवं अनुकूल स्थिति को दर्शाने वाला होता है. इस

सूर्य का बृहस्पति के द्रेष्काण में स्थिति का आंकलन | Analysis of Sun In Jupiter Drekkana

ज्योतिष में द्रेष्काण की महत्ता के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया है. द्रेष्काण में किस ग्रह का क्या प्रभाव पड़ता है, इस बात को समझने के लिए ग्रहों की प्रवृति को समझने की आवश्यकता होती है. जिनके

बुध संबंधित व्यवसाय। Business Related to Mercury

बुध के कारक तत्वों में जातक को कई अनेक प्रकार के व्यवसायों की प्राप्ति दिखाई देती है. बुध एक पूर्ण वैश्य रूप का ग्रह है. व्यापार से जुडे़ होने वाला एक ग्रह है जो जातक को उसके कारक तत्वों से पुष्ट

चंद्रमा की शुक्र के द्रेष्काण में स्थिति का आंकलन | Analysis of Moon In Venus Drekkana

जातक के जीवन में ग्रहों की द्रेष्काण में स्थिति उसके जीवन पर बहुत प्रभाव डालने वाली होती है. ग्रह का समक्षेत्री, मित्र क्षेत्री होना स्वराशि में होना बहुत अनुकूल फल देने में सक्षम माना जाता है. जातक

चंद्रमा की शनि के द्रेष्काण में स्थिति का आंकलन | Analysis of Moon In Saturn Drekkana

जातक के जीवन में ग्रहों की द्रेष्काण में स्थिति उसके जीवन पर बहुत प्रभाव डालने वाली होती है. ग्रह का समक्षेत्री, मित्र क्षेत्री होना स्वराशि में होना बहुत अनुकूल फल देने में सक्षम माना जाता है. किंतु

सूर्य का बुध के द्रेष्काण में स्थिति का आंकलन | Analysis of Sun In Mercury Drekkana

ज्योतिष में द्रेष्काण की महत्ता के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया है. द्रेष्काण में किस ग्रह का क्या प्रभाव पड़ता है, इस बात को समझने के लिए ग्रहों की प्रवृत्ति को समझने की आवश्यकता होती है. जिनके

द्रेष्काण द्वारा शरीर के अंगों का ज्ञान | Knowledge of the Body Parts Through Drekkana

वैदिक ज्योतिष में शरीर के अंगों के विषय में अनेकों विचारधाराओं को बताया गया जिसमें जातक के रंग-रूप, आचार-विचार, व्यवहार, उसकी भावनात्मक स्थिति इत्यादि बातों को बोध कराने में वैदिक ज्योतिषाचार्यों नें

मंगल की चंद्र द्रेष्काण में स्थिति का आंकलन | Analysis of Mars in Moon Drekkana

द्रेष्काण द्वारा ग्रहों की युति का जातक के जीवन में बहुत गहरा प्रभाव प्रतिफलित होता है. इसके साथ ही जातक के जीवन में होने वाले बदलावों को भी इसी से समझने में बहुत आसानी रहती है. देष्काण कुण्डली का

जन्म कुंडली में भाग्य स्थान का महत्व | Importance of Bhagya Sthana in Janma Kundli

किसी भी व्यक्ति के लिए उसका भाग्य बली होना शुभ माना जाता है. भाग्य के बली होने पर ही व्यक्ति जीवन में ऊंचाईयों को छू पाने में सफल रहता है. यदि भाग्य ही निर्बल हो जाए तब अत्यधिक प्रयास के बावजूद

दिवारात्रि बली ग्रह का फल | Result of Strong Diva Ratri Planets | Strong Diva Ratri Planets

दिवारात्रि बली ग्रह में जातक को धन ऎश्वर्य और आभूषणों की प्राप्ति होती है. भू-संपदा की प्राप्ति में सफलता मिलती है. वाहन सुख तथा भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है. व्यक्ति के बल व पराक्रम में वृद्धि

सिंह लग्न का नौवां नवांश | Ninth Navansh of Leo Ascendant

सिंह लग्न का नौवां नवांश धनु राशि का होता है जिसके स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं. इस नवांश के अनुरूप जातक के जीवन में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है. जातक का रूप रंग आकर्षक होता है, उसमें बाहुबल की

सूर्य का मंगल के द्रेष्काण में स्थिति का आंकलन | Analysis of Sun In Mars’s Drekkana

ज्योतिष में द्रेष्काण की महत्ता के बारे में काफी कुछ बताया गया है. द्रेष्काण में किस ग्रह का क्या प्रभाव पड़ता है, इस बात को समझने के लिए ग्रहों की प्रवृत्ति को समझने की आवश्यकता होती है. जिनके

कुंडली के प्रकार | Types of Kundalis

जन्म के समय आकाशीय ग्रहों का नक्शा कुंडली कहलाता है. समय विशेष पर ग्रहों को कुंडली में अंकित किया जाता है. हर स्थान पर कुंडली बनाने का तरीका अलग होता है, लेकिन ग्रह नौ ही होते हैं और राशियाँ भी बारह

सूर्य का चंद्रमा के द्रेष्काण में स्थिति का आंकलन | Analysis Of Sun In Moon’s Drekkana

ज्योतिष में द्रेष्काण की महत्ता के बारे में काफी कुछ बताया गया है. द्रेष्काण में किस ग्रह का क्या प्रभाव पड़ता है, इस बात को समझने के लिए ग्रहों की प्रवृत्ति को समझने की आवश्यकता होती है. जिनके