2023 कब होता है माघ स्नान का आरंभ और समाप्ति ? : मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग है माघ स्नान

इस वर्ष माघ स्नान का आरंभ 07 जनवरी 2023 से होगा और इसकी समाप्ति 05 फरवरी को होगी. माघ माह अपने आरंभ से ही पर्व व उत्सवों के आगमन की झलक देने लगता है. यह वह समय होता है जब प्रकृति की छटा और खूबसूरती अपने नव रंग में मौजूद होती है. इस समय पर कई उत्सव और व्रत आते हैं. माघ माह का आरंभ माघ स्नान के आरंभ के साथ शुरु होता है. इस पूरे माह में ही स्नान की महत्ता को अत्यंत ही प्रभावशाली स्वरुप में दर्शाया गया है. इसी के साथ जब माघ माह का अंत समीप आता है तो इस माह के आखिरी दिन में स्नान की समाप्ति होती है. माघ माह के स्नान की समाप्ति में धर्म स्थलों पर मेले और धार्मिक कृत्यों का आयोजन किया जाता है. इस माघ माह में मौसम भी अपने एक अलग रंग में होता है. सर्दियों की कड़कड़ाती सुबह में भी श्रद्धालु भक्त माघ स्नान करते हैं. गंगा, यमुना इत्यादि पवित्र नदियों में आस्था की डूबकी लगाते हैं. उनकी यही आस्था और विश्वास में उनके लिए मोक्ष का मार्ग प्रश्स्त करती है. जीवन की उस यात्रा पर उनके पथ को प्रकाशित भी करती है. यही उन भक्तों की आस्था है जो उन्हें माघ के कठोर मौसम में भी इतनी शक्ति और बल प्रदान करती है.

माघ स्नान में स्नान और दान की महत्ता

भारतीय पंचाग एवं ज्योतिषीय गणना में माघ माह की शुरुआत पौष पूर्णिमा के बाद से होती है और पौष पूर्णिमा के दिन से ही माघ स्नान का भी आरंभ हो जाता है. इस पूरे माह के मध्य एकादशी, बसंत पंचमी, मौनी अमावस्या, तिल चतुर्थी और गुप्त नवरात्रि इत्यादि अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस भी आते हैं. माघ माह का हर दिन अत्यंत प्रभावी होता है. मान्यता है की इस संपूर्ण माह के दौरान समस्त धरा का जल गंगा समान होता है. ऎसे में इस माह के दौरान प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान की विशेष महत्ता होती है. पुराणों में भी इस माह के विषय में विस्तार रुप से उल्लेख मिलता है. कहा जाता है की त्रिदेवों के साथ अन्य देवता भी इस माघ माह के आने पर प्रयाग के संगम स्थल पर आते हैं. यहां निवास भी करते हैं. इसके अतिरिक्त एक अन्य तथ्य के अनुसार अगर आप माघ मास में तीन बार संगम के स्थल पर जाकर स्नान कर लेते हैं तो उसका फल व्यक्ति को हजारों अश्वमेध यज्ञ को करने के समान ही प्राप्त होता है. इस माह में स्नान के साथ साथ दान की महत्ता को भी वर्णित किया गया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस माह के समय में किए गए दान का फल और श्री हरि की कृपा को पाने के लिए यह उत्तम समय बताया गया है. इस समय पर आने वाली षटतिला एकादशी ओर जया एकादशी के दिन पूजन स्नान एवं दान करने से व्यक्ति को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है. महाभारत में एक स्थान पर इस माह की महत्ता को बहुत ही विस्तारित रुप से बताया गया है. इस समय पर श्री विष्णु के पूजन द्वारा क्या फल प्राप्त होता है और इस माह के दौरान आने वाली अमावस्या और पूर्णिमा के दौरान किए गए दान की क्या प्रमुखता है इस सबके बारे में विस्तार रुप में हमें इसमें प्राप्त होता है.

माघ माह में तिल का दान देता है मोक्ष

तिल दान का महत्व भी इस दौरान अत्यंत फलदायी और पापों का नाश करने वाला होता है. इस समय पर आने वाली षटतिला एकादशी तो स्वयं ही इसके भेद को दर्शाती है. इस दिन योग्य ब्राह्मणों को तिल का दान किया जाता है. तिल से संबंधित भोजन को गरीबों में बांटना भी उत्तम माना गया है. तिल के दान को पाप नाश करने वाला माना गया है. इसके साथ ही व्यक्ति नर्क की यातना नहीं भोगता है. व्यक्ति को अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. तिल के दान के साथ ही साथ तिल को आहार रुप में खाने के लिए भी उपयोगी बताया गया है. तिल चतुर्थी का समय हो, तिल एकादशी हो या तिल द्वादशी हो इन सभी उत्सवों को तिल के साथ जोड़ा गया है, अत: इन सभी पर्वों के दौरान तिलों से बने खाद्य पदार्थों को बनाया जाता है. इन तिलों का भोग भगवान को लगाते हैं ओर खुद भी इसे प्रसाद स्वरुप खाया जाता है. इसी के साथ-साथ गरीब लोगों में भी तिल से बने लड़्डू, खीर, रेवडी़ इत्यादि वस्तुओं को बांटा जाता है. ऎसे में तिल केवल धार्मिक स्वरुप ही नही अपितु वैज्ञानिक स्वरुप में भी अपनी उपयोगिता को दर्शाता है, क्योंकि तिल का सेवन गर्म तासिर देने वाला होता है. ऎसे में माघ माह के समय पर पड़ने वाली सर्दी से बचने में भी तिलों का सेवन अत्यंत उपयोगी होता है. तिल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और शरीर सक्रिय रहता है. इसलिए कहा जा सकता है की हिन्दू धर्म उन चीजों पर आधारित है जो तर्क की कसौटी पर खरे उतरते हैं. इसलिए तिलों का उपयोग इस समय पर हर रुप में करने की एक अत्यंत प्रभावशाली विचारधारा रही है.

माघ माह में प्रमुख स्नान और समय

माघ माह में वैसे तो हर दिन के स्नान को विशेष कहा गया है. पर इस माह के दोरान कुछ ऎसी विशेष तिथियां भी आती हैं जो इस समय को और भी अधिक प्रभावशाली बना देता है. पौष पूर्णिमा - पौष पूर्णिमा के साथ ही इस दिवस का आरंभ होता है. इस समय के दौरान जगह-जगह पर अनुष्ठानों यज्ञ किए जाते हैं. माघ स्नान के आरंभ की मुख्य तिथि होती है पौष पूर्णिमा. मकर संक्रांति - माघ माह का दूसरा विशेष स्नान मकर संक्रान्ति के दिन होता है. इस दिन पवित्र नदियों में धर्म स्थलों पर भक्त स्नान करते हैं. मौनी अमावस्या - माघ माह की मौनी अमावस्या का समय भी स्नान के लिए विशेष होता है. इस दिन मौन रहकर साधना की जाती है. बसंत पंचमी - माघ स्नान में बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माँ का जन्म दिवस मनाया जाता है. इस दिन भी पवित्र नदियों में स्नान की महत्ता बतायी गई है. माघी पूर्णिमा - माघ पूर्णिमा के दिन माघ स्नान की समाप्ति होती है. इस तिथि के साथ ही संपूर्ण माघ माह में किए गए कार्यों और पूजा-पाठ, अनुष्ठानों इत्यादि का उत्साह के साथ समापन होता है और फाल्गुन माह की तैयारियों का आरंभ होता है.