<

जानें इस साल कब-कब लगेगा चंद्र ग्रहण

इस वर्ष भारत में 21 जनवरी 2019 को और 16/17 जुलाई को चंद्र ग्रहण की स्थिति बनेगी. 21 जनवरी वाला चंद्र ग्रहण भारत में दृष्य नहीं होगा. पर 16/17 जुलाई 2019 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा. यह ग्रहण अषाढी़ पूर्णिमा के दिन मंगलवार को 16/17 जुलाई की मध्य रात्रि के समय संपूर्ण भारत में खण्डग्रास चंद्र ग्रहण के रुप में दिखाई देगा.

21 जनवरी 2019 खग्रास चंद्र ग्रहण (भारत में अदृष्य)

ग्रहण समय

  • ग्रहण आरंभ (स्पर्श) - 09:04
  • स्पर्श प्रारंभ - 10:11
  • ग्रहण मध्य - 10:42
  • खग्रास समाप्त - 11:13
  • ग्रहण समाप्त - 12:21

  • 16/17 जुलाई 2019 खण्डग्रास चंद्र ग्रहण (भारत में दृष्य)

    ग्रहण समय

  • ग्रहण स्पर्श - 25:31
  • ग्रहण मध्य - 03:01
  • ग्रहण समाप्त - 04:30
  • ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटे 59 मिनिट की रहेगी. भारत में 16 जुलाई 2019 को रात 01:31 पर चंद्रग्रहण का आरंभ होगा. 17 जुलाई को प्रात: काल 04:30 पर इसका समाप्ति काल अर्थात मोक्ष होगा.

    खण्डग्रास चंद्र ग्रहण की सीमा में आने वाले मुख्य देश

    16/17 जुलाई 2019 को जुलाई चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत में दृष्य होगा इसके साथ ही यह विश्व के कुछ अन्य भागों में भी दिखाई देगा जिसमें से अधिकतर यूरोप के भागों, दक्षिण अमरीका के अधिकांश क्षेत्रों, एशिया इत्यादि स्थानों में भी इसे देखा जा सकेगा.

    चंद्र ग्रहण का सूतक काल

    सूतक काल में बालकों, वृ्द्ध, रोगी व गर्भवती स्त्रियों को छोडकर अन्य लोगों को सूतक से पूर्व भोजनादि ग्रहण कर लेना चाहिए. तथा सूतक समय से पहले ही दूध, दही, आचार, चटनी, मुरब्बा में कुशा रख देना श्रेयस्कर होता है. ऎसा करने से ग्रहण के प्रभाव से ये अशुद्ध नहीं होते है.परन्तु सूखे खाने के पदार्थों में कुशा डालने की आवश्यक्ता नहीं होती है.

    ग्रहण अवधि में किये जाने वाले कार्य

    ग्रहण के स्पर्श के समय में स्नान, ग्रहण मध्य समय में होम और देव पूजन और ग्रहण मोक्ष समय में श्राद्ध और अन्न, वस्त्र, धनादि का दान और स्नान करना चाहिए. ग्रहण समय में समुद्र नदी के जल या तीर्थों की नदी में स्नान करने से पुण्यदायक फलों की प्राप्ति होती है. ग्रहण समय के आरम्भ होने से समाप्ति के मध्य की अवधि में मंत्र ग्रहण, मंत्रदीक्षा, जप, उपासना, पाठ, हवन, मानसिक जाप, चिन्तन करना उत्तम होता है.

    ग्रहण समाप्ति के बाद क्या करें

    ग्रहण का मोक्षकाल समाप्त होने के बाद स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए. देवमूर्तियों को स्नान करा कर, गंगाजल छिडक कर, नवीन वस्त्र पहनाकर, देवों का श्रंगार करना चाहिए.

    जिस भी स्थान विशेष पर ग्रहण का प्रभाव हो, या फिर ग्रहण दृष्टिगोचर हो रहा हो, उन स्थानों पर रहने वाले व्यक्तियों को यह जानने की जिज्ञासा रहती है कि शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दिन कार्य किस क्रम में निर्धारित किये जायें. सबसे पहले ग्रहण काल आरम्भ होने के समय स्नान करना चाहिए. ग्रहण काल के मध्य की अवधि में होम और मंत्र सिद्धि के कार्य करने चाहिए. साथ ही ग्रहण समाप्ति समय में स्नान करने के बाद अन्न, वस्त्र, धनादि का दान और इन सभी कार्यों से मुक्त होने के बाद एक बार फिर से स्नान करना चाहिए.

    ग्रहण काल में मंत्र जाप

    ग्रहण काल की अवधि में किसी भी मंत्र का जाप एवं साधना कार्य करना शुभ रहता है. सभी कष्टों को दूर करने वाले मंत्र "महामृ्त्युंजय " मंत्र का जाप भी जाप करने वाले व्यक्ति को लाभ देगा. "ओम् त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनं, उर्वारुक्मिव बंधनात्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्"
    इसके अलावा गायत्री मंत्र -" ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्"
    का जाप भी लाभदायक होता है.