लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में केतु का बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि के साथ संबंध | Relation Of Ketu With Mercury, Jupiter, Venus and Saturn In The Second House Of Lal Kitab

केतु और बुध | Ketu and Mercury

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में केतु के साथ बुध का युति करना दोनों के फलों में अनुकूलता देने वाला हो सकता है यहां बुध केतु के साथ मिलकर उसके जैसे फलों को देने की कोशिश कर सकत है. यहां जातक के बोलने में स्पष्टता की कमी रह सकती है. जातक अपने विचारों को पूर्ण रूप से सभी के सामने अभिव्यक्त न करे और अधिकांश बातों को मन में ही दबाकर काम कर सकता है.

केतु के साथ बुध बैठा हो तो एक का असर अच्छा हो जाता है और दूसरे का मंदा हो जाता है इस स्थिति में दोनों के फल अच्छे नहीं हो सकते हैं. संबंधियों में भी यही स्थिति होती है, यदि बहन का स्वास्थ्य अच्छा है तो संतान का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रह पाता है. इसी प्रकार से यदि बुद्धि अच्छी भी हो तो भी उसमें भ्रम की स्थिति जातक को परेशान ही करती है और वह सही निर्णय नहीं ले सकेगा.

व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार से आर्थिक लाभ तो मिलता है लेकिन व्यर्थ के खर्चे भी बढ़ सकते हैं. कई प्रकार से पारिवारिक संपत्ति का हक मिलने में भी रूकावट हो सकती है किंतु लाभ मिलता अवश्य है. व्यक्ति के टेवे में बना यह योग यदि पाप ग्रहों की छाया पाता है तो परेशानियां बढ़ती हैं और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है

केतु और बृहस्पति | Ketu And Jupiter

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में केतु के साथ बृहस्पति के होने पर फल के प्रभाव में कमी आ जाती है और पूर्ण फल नहीं मिल पाता यहां केतु बृहस्पति का चेला है जिस कारण वह अपने फलों को देने में सफल नहीं हो पाता है. इस स्थिति में यदि घर 8वां खाली हो या उसमें कोई मित्र ग्रह बैठा हो तो व्यक्ति दूसरों से हमदर्दी करने वाला बनता है सभी का ख्याल रखने की चाह रखता है.

केतु का दूसरे भाव में अच्छी स्थिति में होना धन-दायक बनता हैं और उसके साथ गुरू का होना उसकी आर्थिक स्थिति में भी वृद्धि करने वाला बनता है. इसी के साथ यह व्यक्ति को रुके हुए धन की प्राप्ति में भी सहायक होती है. लेकिन इसी के साथ जातक को कुछ परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है उसकी शिक्षा में भी व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं.

व्यक्ति के आर्थिक हालात अनुकूल होते हैं और किसी न किसी प्रकार से उसे संतोष मिल जाता है. लेकिन अगर आठवें घर में उसके शत्रु ग्रह बैठे हों तो व्यक्ति का भाग्य काफी मंदा रहता है और उसे सही लाभ मिल नहीं पाते हैं. भाग्य में रूकावटें आती रहती हैं. धन की तंगी भी झेलनी पड़ सकती है.

केतु और शुक्र | Ketu And Venus

लाल किताब कुण्डली के दुसरे घर में केतु का संबंध शुक्र के साथ होने पर यह फल एक दूसरे से काफी जुड़ा हुआ सा होता है. यह शुक्र का जीवन सहयोगी भी कहा जा सकता है और यदि साथ में है तो, टेवे में यदि इन दोनों में से कोई एक भी अगर शुभ फल देने में सक्षम हो रहा हो तो दोनों मिलकर शुभ देने लगते हैं.

इन दोनों के शुभ होने पर जातक को अच्छे फलों की प्राप्ति होती है वह अपने क्षेत्र में अच्छा नाम कमाने वाला बनता है और सभी के समक्ष सम्मान पाता है. जातक को धन की प्राप्ति होती है वह अपने परिवार के लिए सुख समृद्धि का कारण बनता है. पर उसके भेदों को जान पाना भी काफी कठिन हो सकता है.

जातक के जीवन में इनकी शुभता ही अच्छे फल देने वाली होती है परंतु यदि इनमें से किसी की शुभता मेम कमी आ जाए तो यह फल देने में सक्षम नहीं हो पाते हैं और जीवन में समस्याओं से दो चार होना पड़ सकता है. व्यक्ति की प्रसिद्धि में भी कमी आती है.

केतु और शनि | Ketu And Saturn

शनि के साथ केतु के लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में स्थित होने पर यहां यह व्यक्ति के धन में वृद्धि करने में सहायक बन सकता है यदि शनि अपनी अच्छी स्थिति में हो तो जातक को अचल संपत्ति की प्राप्ति भी होती है. परंतु पारिवारिक चिंता का भी कारण बन सकता है. संपत्ति के साथ साथ ही यह जातक के कर्मों में मेहनत का रंग भरता है और व्यक्ति को न्यायकर्ता बनाता है. जातक लाग लपेट को नहीं अपनाता और अपने प्रयासों में भी प्रयासरत रहता है.

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