द्रेष्काण कुण्डली तथा चतुर्थांश कुण्डली | Dreshkana Kundali and Chaturthansha Kundali

द्रेष्काण कुण्डली या D-3 | Dreshkana Kundali or D-3

यह कुण्डली जातक के भाई-बहनों का अध्ययन करने के लिए उपयोग में लाई जाती है. इस वर्ग कुण्डली में 30 अंश को तीन बराबर भागों में बाँटा जाता है. 

0 से 10 अंश. 

10 से 20 अंश 

20 से 30 अंश 

जन्म कुण्डली में 0 से 10 अंश के बीच में कोई ग्रह है तो वह द्रेष्काण कुण्डली में उसी राशि में लिखा जाएगा जिस राशि में वह जन्म कुण्डली में है. माना जन्म कुण्डली में कोई ग्रह वृष राशि में अंश पर स्थित है तो द्रेष्काण कुण्डली में भी वह ग्रह वृष कुण्डली में जाएगा. 

जन्म कुण्डली में10 से 20 अंश के मध्य कोई ग्रह स्थित है तो वह अपनी राशि से पाँचवीं राशि में जाएगा. माना सूर्य जन्म कुण्डली में 17 अंश का धनु राशि में स्थित है. धनु राशि से पांचवीं राशि देखी जाएगी कौन सी है. धनु राशि से पाँचवीं राशि मेष राशि है. द्रेष्काण कुण्डली में सूर्य मेष राशि में लिखा जाएगा. द्रेष्काण कुण्डली का लग्न भी इसी तरह से निर्धारित किया जाएगा. 

जन्म कुण्डली में 20 से 30 अंश के मध्य कोई ग्रह स्थित है तो द्रेष्काण कुण्डली में वह ग्रह अपनी राशि से नवम राशि में जाएगा. माना शनि जन्म कुण्डली में मीन राशि में स्थित है. मीन राशि से नवम राशि वृश्चिक राशि होती है तो शनि द्रेष्काण कुण्डली में वृश्चिक राशि में लिखे जाएंगें. 

चतुर्थांश कुण्डली या D-4 | Chaturthansha Kundali or D-4

इस कुण्डली से जातक की चल-अचल सम्पत्ति तथा भाग्य का अनुमान लगाया जाता है. इस वर्ग को तुर्यांश या पदमांश भी कहते हैं. इस वर्ग कुण्डली को बनाने के लिए 30 अंश के 4 बराबर भाग किए जाते हैं. एक भाग 7 अंश 30 मिनट का होता है. जन्म कुण्डली में ग्रह यदि पहले चतुर्थांश में स्थित है तो वह उसी राशि में चतुर्थांश कुण्डली में जाएगा. ग्रह दूसरे चतुर्थांश में स्थित है तो वह जिस राशि में स्थित है, उससे चौथी राशि में जाएगा. ग्रह यदि तीसरे चतुर्थांश में स्थित है तो वह जिस राशि में है उससे सातवीं राशि में जाएगा. ग्रह यदि चौथे चतुर्थांश में स्थित है तो वह जिस राशि में स्थित है उससे दसवीं राशि में जाएगा. 

माना जन्म कुण्डली में कोई ग्रह या लग्न वृष राशि में पहले चतुर्थांश में स्थित है तो वह चतुर्थांश कुण्डली में वृष राशि में ही जाएगा. यदि वृष राशि में कोई ग्रह या लग्न दूसरे चतुर्थांश में स्थित है तो वह चतुर्थांश कुण्डली में सिंह राशि में जाएगा. यदि कोई ग्रह या लग्न जन्म कुण्डली में तीसरे चतुर्थांश में स्थित है तो बुध या लग्न चतुर्थांश कुण्डली में वृश्चिक राशि में जाएगा. यदि कोई ग्रह या लग्न जन्म कुण्डली में चौथे चतुर्थांश में वृष राशि स्थित है तो वह चतुर्थांश कुण्डली में कुम्भ राशि में जाएगा. 

आइए आपको चतुर्थांश कुण्डली का वर्गीकरण करना बताएँ :- 

0 से 7 अंश 30 मिनट तक पहला चतुर्थांश होगा.

7 अंश 30 मिनट से 15 अंश तक दूसरा चतुर्थांश होगा. 

15 अंश से 22 अंश 30 मिनट तक तीसरा चतुर्थांश होगा. 

22 अंश 30 मिनट से 30 अंश तक चौथा चतुर्थांश होगा. 

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