रक्षा बंधन का महत्व
Importance of Rakshabandhan

rakshaband_impरक्षा बंधन का पर्व श्रवण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. वर्ष 2017 में यह 7 अगस्त, के दिन मनाया जायेगा. यह पर्व भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है. भारतीय परम्पराओं का यह एक ऎसा पर्व है, जो केवल भाई बहन के स्नेह के साथ साथ हर सामाजिक संबन्ध को मजबूत करता है. इस लिये यह पर्व भाई-बहन को आपस में जोडने के साथ साथ सांस्कृ्तिक, सामाजिक महत्व भी रखता है.


रक्षा बंधन के महत्व को समझने के लिये सबसे पहले इसके अर्थ को समझना होगा. "रक्षाबंधन " रक्षा+बंधन दो शब्दों से मिलकर बना है. अर्थात एक ऎसा बंधन जो रक्षा का वचन लें. इस दिन भाई अपनी बहन को उसकी दायित्वों का वचन अपने ऊपर लेते है.


रक्षा बंधन की विशेषता
Importance of Rakdhabandhan

रक्षा बंधन का पर्व विशेष रुप से भावनाओं और संवेदनाओं का पर्व है. एक ऎसा बंधन जो दो जनों को स्नेह की धागे से बांध ले. रक्षा बंधन को भाई - बहन तक ही सीमित रखना सही नहीं होगा. बल्कि ऎसा कोई भी बंधन जो किसी को भी बांध सकता है. भाई - बहन के रिश्तों की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए यह बंधन आज गुरु का शिष्य को राखी बांधना, एक भाई का दूसरे भाई को, बहनों का आपस में राखी बांधना और दो मित्रों का एक-दूसरे को राखी बांधना, माता-पिता का संतान को राखी बांधना हो सकता है.


आज के परिपेक्ष्य में राखी केवल बहन का रिश्ता स्वीकारना नहीं है अपितु राखी का अर्थ है, जो यह श्रद्धा व विश्वास का धागा बांधता है. वह राखी बंधवाने वाले व्यक्ति के दायित्वों को स्वीकार करता है. उस रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाने की कोशिश करता है.


रक्षा बंधन आज के परिपेक्ष्य में
Raksha Bandhan in Today's Time

वर्तमान समाज में हम सब के सामने जो सामाजिक कुरीतियां सामने आ रही है. उन्हें दूर करने में रक्षा बंधन का पर्व सहयोगी हो सकता है. आज जब हम बुजुर्ग माता - पिता को सहारा ढूंढते हुए वृ्द्ध आश्रम जाते हुए देखते है, तो अपने विकास और उन्नति पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ पाते है. इस समस्या का समाधन राखी पर माता-पिता को राखी बांधना, पुत्र-पुत्री के द्वारा माता पिता की जीवन भर हर प्रकार के दायित्वों की जिम्मेदारी लेना हो सकता है. इस प्रकार समाज की इस मुख्य समस्या का सामाधान किया जा सकता है.


इस प्रकार रक्षा बंधन को केवल भाई बहन का पर्व न मानते हुए हम सभी को अपने विचारों के दायरे को विस्तृ्त करते हुए, विभिन्न संदर्भों में इसका महत्व समझना होगा. संक्षेप में इसे अपनत्व और प्यार के बंधन से रिश्तों को मजबूत करने का पर्व है. बंधन का यह तरीका ही भारतीय संस्कृ्ति को दुनिया की अन्य संस्कृ्तियों से अलग पहचान देता है.


रक्षा बंधन का आधुनिक महत्व
Importance of Raksha Bandhan in Modern Age

आज समय के साथ पर्व की शुभता में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि इसका महत्व ओर बढ गया है. आज के सीमित परिवारों में कई बार, घर में केवल दो बहने या दो भाई ही होते है, इस स्थिति में वे रक्षा बंधन के त्यौहार पर मासूस होते है कि वे रक्षा बंधन का पर्व किस प्रकार मनायेगें. उन्हें कौन राखी बांधेगा , या फिर वे किसे राखी बांधेगी. इस प्रकार कि स्थिति सामान्य रुप से हमारे आसपास देखी जा सकती है.


ऎसा नहीं है कि केवल भाई -बहन के रिश्तों को ही मजबूती या राखी की आवश्यकता होती है. जबकि बहन का बहन को और भाई का भाई को राखी बांधना एक दुसरे के करीब लाता है. उनके मध्य के मतभेद मिटाता है. आधुनिक युग में समय की कमी ने रिश्तों में एक अलग तरह की दूरी बना दी है. जिसमें एक दूसरे के लिये समय नहीं होता, इसके कारण परिवार के सदस्य भी आपस में बातचीत नहीं कर पाते है. संप्रेषण की कमी, मतभेदों को जन्म देती है. और गलतफहमियों को स्थान मिलता है.


अगर इस दिन बहन -बहन, भाई-भाई को राखी बांधता है तो इस प्रकार की समस्याओं से निपटा जा सकता है. यह पर्व सांप्रदायिकता और वर्ग-जाति की दिवार को गिराने में भी मुख्य भूमिका निभा सकता है. जरुरत है तो केवल एक कोशिश की.


एक धागा वृ्क्षों की रक्षा के लिये
Thread for the Protection of Trees

आज जब हम रक्षा बंधन पर्व को एक नये रुप में मनाने की बात करते है, तो हमें समाज, परिवार और देश से भी परे आज जिसे बचाने की जरुरत है, वह सृ्ष्टि है, राखी के इस पावन पर्व पर हम सभी को एक जुड होकर यह संकल्प लें, राखी के दिन एक स्नेह की डोर एक वृक्ष को बांधे और उस वृ्क्ष की रक्षा का जिम्मेदारी अपने पूरे लें. वृ्क्षों को देवता मानकर पूजन करने मे मानव जाति का स्वार्थ निहित होता है. जो प्रकृ्ति आदिकाल से हमें निस्वार्थ भाव से केवल देती ही आ रही है, उसकी रक्षा के लिये भी हमें इस दिन कुछ करना चाहिए.


" हम्रारे शास्त्रों में कई जगह यह उल्लेखित है कि
जो मानव वृ्क्षों को बचाता है, वृक्षों को लगाता है,
वह दीर्घकाल तक स्वर्ग लोक में निवास पाकर
भगवन इन्द्र के समान सुख भोगता है. "

पेड -पौध बिना किसी भेदभाव के सभी प्रकार के वातावरण में स्वयं को अनुकुल रखते हुए, मनुष्य जाति को जीवन दे रहे होते है. इस धरा को बचाने के लिये राखी के दिन वृक्षों की रक्षा का संकल्प लेना, बेहद जरूरी हो गया है. आईये हम सब मिलकर राखी का एक धागा बांधकर एक वृ्क्ष की रक्षा का वचन लें.




Comment(s) on this article


  1. Vinod said on Aug 18, 2013 09:53 PM
    What is the timing of raksha bandhan in 2013
  2. kanti singh said on Jul 22, 2015 02:41 AM
    mea apne bhae se bahut pyar karti hu
  3. Manjeet dahiya said on Aug 29, 2015 12:50 PM
    Very nice n its in real
  4. Girase Mangalsing v. said on Aug 28, 2015 08:20 AM
    Very very nice
  5. jagrati sharma said on Aug 23, 2016 12:43 PM
    This idea is exellent....I like it and will aply ..
  6. Sahana said on Aug 26, 2016 01:07 PM
    Good Useful for studying students and informative
  7. Ananya Shukla said on Jul 31, 2017 10:57 AM
    Tomorrow is my Hindi patra lekhan competition and I got a lot of help from this essay....Thank you....

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