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होली 2017, 13 मार्च
Holi 2017, 13 March

भारत त्योहारों का देश है. यहां एक त्योहार कई संस्कृ्तियों, परम्पराओं और रीतियों की झलक प्रस्तुत करता है. होली शीत ऋतु के उपरांत बंसत के आगमन, चारों और रंग- बिरंगे फूलों का खिलना होली आने की ओर इशारा करता है. होली का त्योहार प्राकृ्तिक सौन्दर्य का पर्व है. होली का त्योहर प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिम के दिन मनाया जाता है.
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, होलाष्टक प्रारम्भ 2017, 5 मार्च - रविवार
Holashtak begins 2017, 5 March- Sunday

वर्ष 2017 में 13 मार्च के दिन होली रंगोत्सव मनाया जाएगा. इस होली को धुलैण्डी के नाम से भी जाना जाता है. होली का त्योहार मस्ती और रंग का पर्व है. यह पर्व बंसत ऋतु से चालीस दिन पहले मनाया जाता है.
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मथुरा, वृंदावन, बरसाने, बीकानेर की अनोखी होली
Mathura, Vrindavan, Barsane and Bikaner's extra-ordinary Holi

होली रंगों का पर्व है, बरसाने की होली इसलिये भी प्रसिद्ध है, क्योकि श्री कृ्ष्ण की प्रेमिका राधा बरसाने की थी. होली और श्री कृ्ष्ण का संबन्ध बहुत पुराना है. इसलिये होली की बात हो, और कान्हा का नाम न आये, ऎसा कैसे हो सकता है
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13 मार्च -2017 होली खेलते समय त्वचा का कैसे ध्यान रखे?
13 March-2017 How to take care of your skin in Holi

होली का पर्व अपने साथ खुशियों, उत्साह और उमंग के साथ होली के रंगों को छुडाने की परेशानी लेकर आता है. प्रात: काल में जब हम होली खेलना शुरु करते है तो हमें यह ध्यान ही नहीं रहता है कि हमारी त्वचा पर जो ये रंग लग रहे है, ये हटेगें भी या नहीं... होली खेलते समय अगर कुछ सामान्य सी सावधानियां रखी जायें, तो इस प्रकार की परेशानियों से बचा जा सकता है. होली खेलने से पहले इन उपायों को करते है तो रंग को शरीर पर चढने से बचा सकते है. और बेफिक्र होकर त्यौहार का मजा ले सकते है.
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होलिका दहन 2017, कब करें, कैसे करें, पूजन विधि.
Holika dahan 2017, When to do, what to do and Puja process

फाल्गुन पूर्णिमा 12 मार्च के प्रदोष काल में होलिका दहन करने का विधान रहेगा. 12 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा उदय व्यापिनी है. 12 तारिख को भद्रा पूंछ- 04:21 से 05:33 और भद्रा मुख- 05:33 से 07:30 का समय रहेग आत: होलिका दहन के लिए 18:27 से 20:25 को शुभ बेला में होलिका-दहन किया जा सकता है. अत: शास्त्रोक्त मतानुसार 12 मार्च को ही होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत होगा.
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होलिका कथा
Holika narration

होलिका दहन से संबन्धित कई कथाएं जुडी हुई है. जिसमें से कुछ प्रसिद्ध कथाएं इस प्रकार है. कथाएं पौराणिक हो, धार्मिक हो या फिर सामाजिक, सभी कथाओं से कुछ न कुछ संदेश अवश्य मिलता है. इसलिये कथाओं में प्रतिकात्मक रुप से दिये गये संदेशों को अपने जीवन में ढालने का प्रयास करना चाहिए. इससे व्यक्ति के जीवन को एक नई दिशा प्राप्त हो सकती है. होलिका दहन की एक कथा जो सबसे अधिक प्रचलन में है, वह हिर्ण्यकश्यप व उसके पुत्र प्रह्लाद की है.