दस महाविद्या साधना | Dus Mahavidya Sadhana | Gupt Navratri

दस महाविद्या देवी दुर्गा के दस रूप कहे जाते हैं. प्रत्येक महाविद्या अद्वितीय रुप लिए हुए प्राणियों के समस्त संकटों का हरण करने वाली होती हैं. इन दस महाविद्याओं को तंत्र साधना में बहुत उपयोगी और महत्वपूर्ण माना जाता है. दस महाविद्या को उच्च स्तर कि साधनाओ में से एक माना जाता है, यह दस महाविद्याएं इस प्रकार हैं.

देवी काली | Devi Kali

देवी काली को मां दुर्गा की दस महाविद्याओं मे से एक मानी जाती हैं. देवी काली शक्ति का स्वरूप है. मां ने यह काली रूप दैत्यों के संहार के लिए लिया था इनकी उत्पत्ति राक्षसों का अंत करने के लिए हुई थी तथा धर्म की रक्षा और उसकी स्थापना ही इनकी उत्पत्ति का कारण था देवी काली की पूजा संपूर्ण भारत में कि जाती है. देवी काली की व्युत्पत्ति काल अथवा समय से है जो सबको ग्रास कर लेती है. देवी काली का स्वरूप काला व डरावना हैं किंतु भक्तों को अभय वर देने वाला है. शक्ति भगवती निराकार होकर भी समस्त जन का दु:ख दूर करने के लिये अनेकों रूप धारण करके अवतार लेती रहीं हैं. देवी काली काल और परिवर्तन की देवी मानी गईं हैं तंत्र साधना में तांत्रिक देवी काली के रूप की उपासना किया करते हैं. देवी काली को भवतारणी अर्थात 'ब्रह्मांड के उद्धारक' रूप में प्रतिष्ठित किया जाता है. तंत्र साधना में देवी काली की उपासना सर्वोत्कृष्ट है इनसे संपूर्ण अभिष्ट फल की प्राप्ति होती हैं.

देवी तारा | Devi Tara

दस महाविद्याओं में से माँ तारा की उपासना तंत्र साधकों के लिए सर्वसिद्धिकारक मानी जाती है. देवी तारा को सूर्य प्रलय की अघिष्ठात्री देवी का उग्र रुप माना जाता है. जब चारों और निराशा ही व्याप्त हो तथा विपत्ति में कोई राह न दिखे तब मां भगवती तारा के रूप में उपस्थित होती हैं तथा भक्त को विपत्ति से मुक्त करती हैं. उग्र तारा, नील सरस्वती और एकजटा इन्हीं के रूप हैं. शत्रुओं का नाश करने वाली सौंदर्य और रूप ऐश्वर्य की देवी तारा आर्थिक उन्नति और भोग दान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए सहायक मानी जाती हैं. देवी तारा ब्रह्मांड-नायिका एवं राज-राजेश्वरी हैं, सृष्टि का समस्त ज्ञान शून्यआकाश में केंद्रित है और देवी तारा इसी शून्य में अवस्थित कही गई हैं. माँ तारा परारूपा हैं एवं महासुन्दरी कला-स्वरूपा हैं तथा देवी तारा सबकी मुक्ति का विधान रचती हैं.

माता ललिता | Mata Lalita

देवी ललिता जी का ध्यान रुप बहुत ही उज्जवल व प्रकाश मान है. कालिकापुराण के अनुसार देवी की दो भुजाएं हैं, यह गौर वर्ण की, रक्तिम कमल पर विराजित हैं. ललिता देवी की पूजा से समृद्धि की प्राप्त होती है. दक्षिणमार्गी शाक्तों के मतानुसार देवी ललिता को चण्डी का स्थान प्राप्त है. इनकी पूजा पद्धति में  ललितोपाख्यान, ललितासहस्रनाम, ललितात्रिशती का पाठ किया जाता है. दुर्गा का एक रूप ललिता के नाम से जाना गया है.

माता भुवनेश्वरी | Matha Bhuvaneswari

माता भुवनेश्वरी सृष्टि के ऐश्वयर  की स्वामिनी हैं. चेतनात्मक अनुभूति का आनंद इन्हीं में हैं. गायत्री उपासना में भुवनेश्वरी जी का भाव निहित है. भुवनेश्वरी माता के एक मुख, चार हाथ हैं चार हाथों में गदा-शक्ति का एवं दंड-व्यवस्था का प्रतीक है. आशीर्वाद मुद्रा प्रजापालन की भावना का प्रतीक है, यही सर्वोच्च सत्ता की प्रतीक हैं. विश्व भुवन की जो, ईश्वर हैं, वही भुवनेश्वरी हैं. इनका वर्ण श्याम तथा गौर वर्ण हैं. इनके नख में ब्रह्माण्ड का दर्शन होता है. माता भुवनेश्वरी सूर्य के समान लाल वर्ण युक्त दिव्य प्रकाश से युक्त हैं. माता के मंत्रों का जाप साधक को माता का आशीर्वाद प्रदान करने में सहायक है. इनके बीज मंत्र को समस्त देवी देवताओं की आराधना में विशेष शक्ति दायक माना जाता हैं इनके मूल मंत्र और पंचाक्षरी मंत्र का जाप करने से समस्त सुखों एवं सिद्धियों की प्राप्ति होती है.

त्रिपुर भैरवी | Tripura Bhairavi

माँ त्रिपुर भैरवी तमोगुण एवं रजोगुण से परिपूर्ण हैं. माँ भैरवी के अन्य तेरह स्वरुप हैं इनका हर रुप अपने आप अन्यतम है. माता के किसी भी स्वरुप की साधना साधक को सार्थक कर देती है. माँ त्रिपुर भैरवी कंठ में मुंड माला धारण किये हुए हैं. माँ ने अपने हाथों में माला धारण कर रखी है. माँ स्वयं साधनामय हैं उन्होंने अभय और वर मुद्रा धारण कर रखी है जो भक्तों को सौभाग्य प्रदान करती है. माँ  ने लाल वस्त्र धारण किया है, माँ के हाथ में विद्या तत्व है. माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा में लाल रंग का उपयोग किया जाना लाभदायक है. भागवत के अनुसार महाकाली के उग्र और सौम्य दो रुपों में अनेक रुप धारण करने वाली दस महा-विद्याएँ हुई हैं. भगवान शिव की यह महाविद्याएँ सिद्धियाँ प्रदान करने वाली होती हैं.

छिन्नमस्तिका॒ | Chinnamasta

दस महा विद्याओं में छिन्नमस्तिका॒ माता छठी महाविद्या॒ कहलाती हैं. छिन्नमस्तिका देवी को मां चिंतपूर्णी के नाम से भी जाना जाता है. मार्कंडेय पुराण व शिव पुराण आदि में देवी के इस रूप का विशद वर्णन किया गया है इनके अनुसार जब देवी ने चंडी का रूप धरकर राक्षसों का संहार किया. दैत्यों को परास्त करके देवों को विजय दिलवाई तो चारों ओर उनका जय घोष होने लगा. परंतु देवी की सहायक योगिनियाँ अजया और विजया की रुधिर पिपासा शांत नहीँ हो पाई थी, इस पर उनकी रक्त पिपासा को शांत करने के लिए माँ ने अपना मस्तक काटकर अपने रक्त से उनकी रक्त प्यास बुझाई. इस कारण माता को छिन्नमस्तिका नाम से पुकारा जाने लगा.

धूमावती | Dhumavati

धूमावती देवी का स्वरुप बड़ा मलिन और भयंकर प्रतीत होता है. देवी का स्वरूप चाहे जितना उग्र क्यों न हो वह संतान के लिए कल्याणकारी ही होता है. मां धूमावती के दर्शन से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है. नष्ट व संहार करने की सभी क्षमताएं देवी में निहीत हैं. ऋषि दुर्वासा, भृगु, परशुराम आदि की मूल शक्ति धूमावती हैं. सृष्टि कलह के देवी होने के कारण इनको कलहप्रिय भी कहा जाता है. चौमासा देवी का प्रमुख समय होता है जब देवी का पूजा पाठ किया जाता है. माँ धूमावती जी का रूप अत्यंत भयंकर हैं इन्होंने ऐसा रूप शत्रुओं के संहार के लिए ही धारण किया है. यह भय-कारक एवं कलह-प्रिय हैं. माँ भक्तों के सभी कष्टों को मुक्त कर देने वाली है.

माँ बगलामुखी | Maa Baglamukhi

देवी बगलामुखी स्तंभव शक्ति की अधिष्ठात्री हैं. यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनकी बुरी शक्तियों का नाश करती हैं. माँ बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है इन्हें पीला रंग अति प्रिय है. देवी बगलामुखी का रंग स्वर्ण के समान पीला होता है. देवी बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं यह स्तम्भन की देवी हैं. संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश हैं माता बगलामुखी शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है. इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर  प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है. बगलामुखी देवी रत्नजडित सिहासन पर विराजती होती हैं रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो शत्रुओं का नाश करती हैं.

देवी मातंगी | Devi Matangi

देवी मातंगी दसमहाविद्या में नवीं महाविद्या हैं. यह वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी कही जाती हैं. यह स्तम्भन की देवी हैं तथा इनमें संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश हैं. देवी मातंगी दांपत्य जीवन को सुखी एवं समृद्ध बनाने वाली होती हैं इनका पूजन करने से गृहस्थ के सभी सुख प्राप्त होते हैं.  माँ मातंगी पुरुषार्थ चतुष्ट्य की प्रदात्री हैं. भगवती मातंगी अपने भक्तों को अभय का फल प्रदान करती हैं. यह अभीष्ट सिद्धि प्रदान करती हैं. देवी मातंगी को उच्छिष्टचांडालिनी या महापिशाचिनी भी कहा जाता है. मातंगी के विभिन्न प्रकार के भेद हैं उच्छिष्टमातंगी, राजमांतगी, सुमुखी, वैश्यमातंगी, कर्णमातंगी, आदि यह देवी दक्षिण तथा पश्चिम की देवता हैं . ब्रह्मयामल के अनुसार मातंग मुनि की  दीर्घकालीन तपस्या द्वारा देवी राजमातंगी रूप में प्रकट हुईं.

कमला | Kamla

इनका वर्ण स्वर्ण जैसी आभा देने वाला है. गजराज सूंड में सुवर्ण कलश लेकर मां को स्नान कराते हैं.  कमल पर आसीन हुए मां स्वर्ण से सुशोभित हैं. सुख संपदा की प्रतीक देवी कमला समृद्धि दायक हैं. इनकी साधना द्वारा साधक धनी और विद्यावान बनता है. व्यक्ति को यश और सम्मान की प्राप्ति होती है. चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने वाली माता कमला साधक को समस्त बंधनों से मुक्त कर देती हैं. माँ कमला धन संपदा की आधिष्ठात्री देवी है, भौतिक सुख की इच्छा रखने वालों के लिए इनकी अराधना सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं.


Comment(s): 24:

  • upasna wasnik on 12 April, 2013 00:29:40 AM
    namaste mera naam upasna wasnik hai meri date of birth 16-02-1987 hai place :nagpur and time:3:10PM hai.mai mere mata peeta ko khushiya dena chahti hu but aisa nahi ho pa raha hai meri financial condition bohot kharab hai.mai Mba kar rahi hu but exam me fail hogayi hu jabki paper ache likhe the mera bhagya mera sath nahi deraha hai.mai kisise pyar bhi karti hu wo bhi aaj kal bat nahi karta hai.mai hamesha suicide ke bare me hi sochti rahti hu.3mahino se bimar bhi hu.mere mba karne me bohot rukhwate aarahi hai achanak mera accident hojata hai achanak tabiyet kharab hojati hai ae 1sal se horaha hai lagta hai jaise koi kar raha hai.kuch bhi bura hone k pahle muze mahsus bhi hota hai kuch galat hone wala hai.mai roz puja karti hu 2bar.please koi to muze is mushibat se nikalo
    Reply
    • rajesh on 14 June, 2013 22:18:22 PM
      upasna ji jivan bahut amulya hai ise suicide karke na khatam kare. jitni himmat suicide ke liye chahiye uske agar 10% bhi hum problems ko door karne mein lagaye to hum jarur kamyab honge.ishwar aapki madad karenge magar karna aapko khud hi hai. Bhagwan ko nischhal bhav se ro kar pukare, sab kuchh unhe saunp de. wo jaroor aapki madad karega. dhyan karein aap sabhi negative vicharo se mukt ho jaenge. maa karunamayee ke aap pe krupa ho. jai mata ki. with regards rajesh
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    • Pandit S.K.Chandra on 28 November, 2013 15:18:46 PM
      Pl. send us your detail in my mail. I send u all details. I suggest to worship mata TARA. my mail add : satish_air2003@yahoo.com
      Reply
    • sundeep on 04 April, 2014 06:21:13 AM
      app par agar upri badha hai to app koi sidhi baba kea mazar par jaa kar baba sea vinti karoo ..aur baba kea pas pani ke botal lea jaa kar rakha deana..aur wahi pani rooz pena..app ke problem solve hoo jayegee..apne baat sirf baba sea hee bolo ..aur kisi sea mat kahnaa..baba kea paas thursday ko jaruu jana...
      Reply
    • pt vikash pathak on 09 December, 2015 10:28:20 AM
      Aap aapni ghar me khirse mha bidhiya ka haban karale aap bilkul thik ho jaye gi ram ram
      Reply
    • dipesh on 09 August, 2016 13:53:54 PM
      devi kavach 3 bar subah dopahar or Sam ko lakh dukho ki ek dava he
      Reply
  • kapil pathak on 16 August, 2013 14:47:23 PM
    prabhu mein vammarg (left hand path) dwara chamunda devi ki tantra sadhana karna chahta hoon.
    kripya mujhey marg darshan devein
    aapki ati kirpa hogi.
    Reply
  • Mani Biswakarma on 15 September, 2013 17:32:35 PM
    ye blog hindu aastha walo ko bahut hi lav dayak hai agar isha adhyan achhi tarah se kare to. dhanya hai aise prachar me lage bhakto ki.
    jai maata ji jai gurudev.
    agar aap ki kripa hui to ek ek maa ka gupta rahshya email se bhej de. dhanyabad
    Reply
  • Rameshwar shastri on 30 January, 2014 02:31:21 AM
    Bhavani isa good name so reply name is bhavani
    Reply
  • Aryan on 17 September, 2014 14:46:38 PM
    Please provide beej and panchakshari mantra for Devi Mahavidya Bhuwaneshwari
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  • masika on 20 September, 2014 01:14:36 AM
    guru ji koi aisi durga sadhana btaye jo jald hi sabhi sidhiyo ko dene wali ho
    Reply
  • masika on 20 September, 2014 01:18:00 AM
    guru ji koi aisi durga sadhana btaye jo jald hi sabhi sidhiyo ko dene wali ho
    Reply
  • mahender on 25 September, 2014 08:19:01 AM
    mujhe dus maha vidya me se koi ak karna chahta hu agar aap ki kirpa ho guru dev ji
    Reply
  • sharwan sharma on 29 January, 2015 10:29:44 AM
    guru ji koi durga sadhana ka marag btaye
    Reply
  • Ramesh Baburao KOlhe on 10 May, 2015 03:00:22 AM
    namaste meraRAmesh KOlhe date of birth 01-01-1984 hai place :MUmbai and time:04:00AM hai.mai mere mata peeta ko khushiya dena chahta hu but aisa nahi ho pa raha hai meri financial condition bohut kharab hai.mai Graduate Hu aur LLB KI padahi kar raha hu but exam ke lyeye or college exam kahi se nahi ho raha hi.mai kisise pyar bhi karta tha MAGER USNE MUJHE DHOLA DIYA AUR POLICE COMPLTE BHI KARVA KE MUJHE MAR KHILAYA AUR SHAKIL NAME KE LADKE KE SAAT BHAG GAEE. AUR MUJHE SHIV SHAKTI AUR BHUAT ATAM DIKHI PADATE HI AUR MERI ABIYAATEK SAL SE AISA HO RAHA HI aarahi hachanak tabiyet kharab hojati hai ae 1sal se horaha hai lagta hai jaise koi kar raha hai.kuch bhi bura hone k pahle muze mahsus bhi hota hai kuch galat hone wala hai.mai roz puja karti hu 2bar.please koi to muze is mushibat bAACHAVO MAIN OM NAMHASHIVYA KA JAP KARTA HU
    Reply
  • shelly rajan on 19 September, 2015 07:10:18 AM
    sir main kamla vidya ka pura gyan chata hu plzz batya
    Reply
  • radha on 04 October, 2015 12:00:40 PM
    Mujhe das mahavidya ki sadhana sidhi karni h jap mantra or usko karne ki purn vidhi dataye
    Reply
  • Abhijeet on 13 October, 2015 11:32:02 AM
    sir namaste, kya yeh maahavidya ka koi kaat hhain ya nahin!
    Reply
  • manish kumar on 26 October, 2015 10:15:52 AM
    Guru Ji, mein jo kuch bhi karta ho bhool jata ho kuch samjh nahi aata hai ki koi kya kaha raha hai.

    mein maa tara ki sadhna karna chahata ho kripya mera marg darshan kare.
    Reply
  • Puneet Sukhwani on 14 November, 2015 09:14:30 AM
    Guru Ji me Kamla Mata ki pooja karna chahta hu kirpya karke aap bataye
    Reply
  • umesh giri on 18 November, 2015 10:24:06 AM
    Guruji mai bahut pira me hu caro or we paresan bhi maa ki upasana le lite Marc bataye

    Reply
  • pt vikash pathak on 09 December, 2015 10:30:57 AM
    Aap aapni ghar me khirse mha bidhiya ka haban karale aap bilkul thik ho jaye gi ram ram
    Reply
  • nagender mishra on 08 January, 2016 14:19:32 PM
    Guru ji paranm guru ji mai bahut garib hoo.koi aisa upai batane ki kripa kare. Mera pariwar sukhi se rehe..guru ji pramam...guruji
    Reply
  • Rajesh kumar on 31 January, 2016 11:22:44 AM
    My dob. 13/1/1889 4:25 Pm
    Sar meri sadi ni ho rhi koe kam thik se ni hota plz upay btaye
    Reply
  • Ram on 03 May, 2016 03:00:40 AM
    Durga kavach ka path kar Ke gau(cow) mutra Evan Ganga jal ka pure ghar me 21 days tak chidkav kare. Koi bhi badha nahi rahegi... Hindu dhrama vijyate
    Reply
  • tanu sharma on 23 May, 2016 07:49:37 AM
    i want to do love marriage..but my parents r strictly against love mrg..is there any way /pooja to convince dem for my mrg??
    Reply
  • Chandra shekhar joshi on 05 September, 2016 12:21:10 PM
    Gurujee pranam
    Meri naukri kab lagegi air me Kamla devi ki aradhana karna chats hu.
    Kripya meri samasya ka samadhan kare.
    Dob..02/11/1971
    Time..09.30
    Place..Kanpur uttar Pradesh
    Reply
  • sanju on 06 September, 2016 14:19:13 PM
    Muje shatru par Vijay karani he ushke liye kya karna hoga
    Reply
  • aashu on 18 September, 2016 11:53:08 AM
    baglamukhi mata jiki poja karna va karvana chahata hoon guide karien
    Reply

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