हस्त रेखा शास्त्र में अंगूठे का अत्यधिक महत्व माना गया है. इसे हथेली का राजा कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. अगर अंगूठा ना हो तो हम इसके बिना किसी काम के करने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं. आज हम आपको अंगूठे की विशेषताओ के बारे में
मानव हाथ में बने पर्वतों का आंकलन बहुत सी बातों के विश्लेषण में किया जाता है. उनमें से एक विषय रोग होने की संभावना को जानना भी होता है. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में बनी जीवन रेखा में दोष हो और पर्वत भी दोषपूर्ण हो तब रोग होने की संभावना
सदगुणी व्यक्ति का हाथ | Auspicious (Sadgun Yoga) हस्तरेखाओ के माध्यम से व्यक्ति के चरित्र का चित्रण भी बहुत अच्छी तरह से किया जाता है बशर्ते की हाथ देखने वाला व्यक्ति इस क्षैत्र में कुशलता प्राप्त हो और वह बारीकी से हर क्षेत्र के सकारात्मक
जिस प्रकार व्यक्ति की जन्म कुण्डली से उसके व्यक्तित्व के बारे में बहुत सी जानकारी मिलती है ठीक उसी तरह हस्तरेखाओ के माध्यम से भी व्यक्ति विशेष के व्यक्तित्व के बारे में बहुत सी बाते बताई जा सकती हैं कि वह कैसा होगा और उसके जीवन में किस तरह
हस्तरेखाएँ व्यक्ति के जीवन की बहुत सी बातों पर रोशनी डालती हैं. जीवन में किस क्षेत्र में व्यक्ति सफलता पाएगा और किस क्षेत्र में असफल होगा, यह सब हमें हाथो की लकीरों से पता चल जाता है बशर्ते कि हाथ देखने वाला व्यक्ति इस क्षेत्र में महारथ
आज इस लेख के माध्यम से पाठको को हाथ में स्थित क्रॉस और द्वीप के महत्व के बारे में बताया जाएगा. सभी चिन्हों का अपना महत्व होता है. आइए हम क्रॉस व द्वीप की स्थिति का विस्तार से अध्ययन करें. शुक्र पर्वत पर क्रॉस के चिन्ह का फल | Impact of
हस्त रेखा में हर छोटी-बड़ी रेखा और सभी प्रकार के चिन्ह अपनी एक विशेषता रखते हैं. यह चिन्ह हाथ में जिस जगह स्थित होते हैं वहाँ से संबंधित अच्छे अथवा बुरे फलों की प्राप्ति व्यक्ति विशेष को होती है. हाथों में स्थित यह चिन्ह विभिन्न प्रकार के
अंगूठे केवल केरोमनोमी में नहीं बल्कि काइरमैन्सी के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. हस्तरेखा शास्त्र में की गई भविष्यवाणियों केवल लाइनों द्वारा प्रतिनिधित्व तथ्यों पर ही आधारित नही होती. लेकिन, एक अच्छे हस्तशास्त्र ज्ञाता को किसी
हस्त रेखा विज्ञान | Science of Palmistry आज के युग मे हर व्यक्ति किसी ना किसी गूढ़ विद्या के माध्यम से अपना भविष्य फल जानने की इच्छा रखता है. वर्तमान समय में आधुनिकरण के कारण जातक घर बैठै ही इन्टरनेट के द्वारा अपना भविष्य फल जान सकता है
हस्तरेखा शास्त्र मे उंगलियों के जोड़ों के अध्ययन का बहुत महत्व है। जोड़ों का स्थूल रूप कार्य के क्षेत्र में जहां व्यक्ति सक्रिय होता है, उसको निर्धारित करता हैं। यह व्यक्ति में उंगलियों से संबंधित गुणों के विस्तार का भी संकेत करता है।
जिस हाथ की हथेली और उंगलिया वर्गाकार होती है उसे वर्गाकार हाथ के रूप में जाना जाता है। इस तरह के हाथ बहुत आम हैं और जीवन के कई क्षेत्रों में यह देखे जा सकते हैं। सामान्यतः ऐसे हाथ के नाखून छोटे और वर्गाकार होते हैं। ऐसे हाथ वाले लोग
ग्रिल (रेखाओं का जाल) | The Grille ग्रिल हाथ पर बहुत कम देखा जाता है। यह अधिकतर हथेली में पर्वत पर मौजूद होता है। यह एक बिंदु के माध्यम से हाथ की ऊर्जा को नष्ट करता है। हाथ में इन संकेतों की उपस्थिति दर्शाती है कि व्यक्ति की ऊर्जा लगातार
त्रिभुज | Tribhuj त्रिभुज को हथेली पर विशिष्ट और स्पष्ट चिन्ह के रूप में देखा जा सकता है और यह परस्पर दो रेखाओं के कटने से नहीं बनता। यह एक अच्छा व भाग्यशाली संकेत माना जाता है लेकिन यह तब अधिक महत्वपूर्ण है जब यह एक स्वतंत्र चिन्ह के रूप
इस तरह के हाथ निम्न मानसिकता से प्रभावित के लोगों में पाया जाता है। यह खुरदरे, स्थूल, साथ ही बड़े, और भारी हथेली वाले होते हैं। इनकी उँगलियां और नाखून छोटे और स्थूल होते हैं। हथेली इतनी छोटी होती है कि यह मुश्किल से उंगलियों के आधार पर
शांकव हाथ में मध्यम आकार की हथेली, शंकुकार उंगलियों और शंक्वाकार नाखून होते हैं। नुकीले नाखून और हाथ पूर्ण रूप से एक शंकु की उपस्थिति देता है। इसका आकार, हाथ के दूसरे प्रकार अर्थात मानसिक हाथ जैसा ही होता है। जो इसी तरह बेहद लंबे और
हृदय रेखा की स्थिति व्यक्ति के भीतर मौजूद रोमांटिक संभावनाओं को निर्धारित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस रेखा कि विभिन्न प्रकार की स्थिति द्वारा विपरीत लिंगों के बीच आकर्षण, प्रेम, रोमांटिक जीवन की प्रकृति, जीवन साथी कैसा
हस्तरेखा शास्त्र में हाथ का संपूर्णता से अध्ययन किया जाना चाहिए। इसलिए, हस्तरेखा शास्त्र को दो वर्गों में अर्थात कीरोनोमी और कीरोमेन्सी मे विभाजित किया गया है। हस्तरेखा शास्त्र की पहली शाखा मे हाथों और उंगलियो के आकार और व्यक्ति के चरित्र
ह्र्दय रेखा का आरंभ तर्जनी उंगली के नीचे हथेली को पार करता हुआ कनिष्ठा पर समाप्त होता है। यह रेखा जीवनरेखा और मस्तिष्क रेखा के ऊपर हथेली के शीर्ष पर स्थित है। यह रोमांटिक संभावनाओं, विपरीत लिंग के मध्य आकर्षण ,भावनात्मक स्थिरता और
शुक्र का घेरा | The Girdle of Shukra अर्धवृत्त का आरंभ तर्जनी और मध्यमा उंगली से और समाप्त कनिष्ठा और अनामिका के आधार के बीच होता है इसे ही शुक्र का घेरा कहते हैं।यह व्यक्ति को बेहद संवेदनशील और एक उग्रवादी बनाता है। आमतौर पर यह मानसिक या
द्वीप | An Island द्वीप को अधिकतर दुर्भाग्यपूर्ण संकेत माना जाता है। लेकिन यह हाथ की रेखा या जिस स्थान पर यह पाया जाता है उसके महत्व को दर्शाता है। अक्सर यह वंशानुगत बुराइयों को बताता है। उदाहरण के रुप में मस्तिष्क रेखा पर गहरा चिह्नित