Category Archives: jyotish

यूप-शर-शक्ति योग – नभस योग | Yup Yoga- Nabhasa Yoga | Shakti Yoga- Nabhasa Yoga | Shara Yoga – Nabhasa Yoga

यूप योग लग्न से चतुर्थ भाव अर्थात कुण्डली के पहले चार भावों में सभी ग्रह होने पर बनता है. यह योग शुभ योगों की श्रेणी में आता है. यह योग क्योकि लग्न, भाव, धन भाव, तृ्तीय भाव अर्थात यात्रा भाव … Continue reading →

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जानिए ओपल रत्न के फायदे और कैसे बदल सकता है ये आपका भाग्य

उपल उपरत्न ओपल के नाम से अधिक विख्यात है. संस्कृत में यह स्वागराज तो हिन्दी में यह सागरराज कहलाता है. मूलरुप में उपल रंगहीन होता है परन्तु रंगहीन अवस्था में इसका मिलना बहुत ही दुर्लभ होता है. प्रकृति में सोलह … Continue reading →

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गजकेसरी योग | Gaja Kesari Yoga Effects | What is Gaja Kesari Yoga | How is Formed Dhana Yoga

योग का शाब्दिक अर्थ युति है. ज्योतिष में योग का अर्थ है, ग्रहों की एक ऎसी स्थिति है, जिसमें ग्रह विशेष परिणाम देता है. समान्यत: योग ग्रहों के एक विशेष स्थिति में बैठने पर ज्योतिष योग बनते है. ज्योतिष ज्ञान … Continue reading →

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तंजानाइट उपरत्न । तंजनाईट | Tanzanite Gemstone | Quality Of Tanzanite | Who Should Wear Tanzanite | Zoisite

सबसे पहले यह उपरत्न तंजानिया में पाया गया था इसलिए इसका नाम तंजानाइट रखा गया. यह नीले से बैंगनी रंग में पाया जाता है (It is found in colors ranging from blue to purple). हम यह भी कह सकते हैं … Continue reading →

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चर दशा में स्थिर कारक | Fixed Karak in Char Dasha

पिछले पाठ में आपने जैमिनी कारकों के बारे में पढा़ था जिनका क्रम उनके अंशों के आधार पर होता है.  जैमिनी ज्योतिष में कई विद्वान स्थिर कारकों का भी प्रयोग करते है. यह स्थिर कारक निम्नलिखित हैं.  (1) सूर्य तथा … Continue reading →

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जैमिनी मण्डूक दशा के वर्ष | Years of Gemini Mandook Dasha

जब जैमिनी दशा के वर्ष निर्धारित करने हों तब सबसे पहले आप सम और विषम राशियों की एक तालिका बना लें. कुण्डली में जिस राशि के दशा वर्ष निर्धारित करने है उस राशि के स्वामी से राशि तक गिनती करें. … Continue reading →

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क्या हीरा अनुकुल रहेगा? | Is Heera Stone Good for Me (Can I Wear Diamond Gemstone)

शुक्र रत्न हीरा सदा से ही अपने आकर्षक आभा के कारण चर्चा का विषय रहा है. इस रत्न को वज्रमणी, इन्द्रमणी, भावप्रिय, मणीवर, कुलीश आदि नामों से भी पुकारा जाता है. हीरा धारण करने वाले व्यक्ति के वैवाहिक सुख-शान्ति में … Continue reading →

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षोडशांश कुण्डली तथा विशांश कुण्डली | Shodhshansha Kundli and Vishansha Kundli

षोडशाँश कुण्डली या D-16 |  Shodhshansha Kundli or D-16 इस कुण्डली का विश्लेषण वाहन सुख के लिए किया जाता है. इस वर्ग का उपयोग वाहन से संबंधित कष्ट, दुर्घटना तथा मृत्यु का आंकलन करने के लिए भी किया जाता है. यह … Continue reading →

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जैमिनी कारक | Jaimini Karak

पिछले पाठ में आपने जैमिनी दशा में उपयोग में आने वाले कारकों के बारे में जानकारी हासिल की है. कारकों का निर्धारण करना आपको आ गया होगा. जिस प्रकार पराशरी सिद्धांतों  में प्रत्येक भाव का अपना महत्व होता है. उसी … Continue reading →

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त्रिशांश कुण्डली तथा खवेदाँश कुण्डली | Trishansha Kundali and Khavedansha Kundali

त्रिशाँश कुण्डली या D-30 | Trishansha or D-30  इस कुण्डली का अध्ययन जीवन में होने वाली बीमारी तथा दुर्घटनाओं के लिए किया जाता है. इस कुण्डली का अध्ययन जातक के जीवन में आने वाले सभी प्रकार के अरिष्ट देखने के लिए … Continue reading →

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