नव संवत्सर 2082 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) कैसा रहेगा प्रभाव

नव संवत्सर को सिद्धार्थ नामक संवत के नाम से जाना जाएगा. इस वर्ष संवत के राजा सूर्य होंगे और मंत्री सूर्य होंगे. वर्ष के राजा सूर्य होने से राष्ट्र में विरोधाभास की स्थिति बनी रहने वाली है. इस समय मौसम का प्रतिकूल प्रभाव भी देखने को मिल सकता है. लोगों के मध्य द्वेष और विवाद की स्थिति भी देखने को मिल सकती है. विरोधी देशों के मध्य टकराव और युद्ध जैसी स्थितियां उभर सकती हैं. आकाल, बाढ़ अथवा प्राकृतिक प्रकोप का असर भी रह सकता है. इस सम्वत में ग्रहों को निम्न अधिकार प्राप्त होंगे जिनके अनुरुप यह पूरा वर्ष प्रभावित रहेगा. आईए जानते हैं इसके बारे में.

संवत राजा सूर्य
इस सम्वत वर्ष के राजा सूर्य होने से स्थिति थोड़ी अनियंत्रित सी हो सकती है. कुछ पारस्परिक विरोध और द्वेष की स्थिति राष्ट्र में देखी जा सकती है. राजनेताओं के मध्य भी स्थिति असंतोषजनक होगी, एक दूसरे पर आक्षेप और टकराव के मौके कोई भी नही छोड़ना चाहेगा. प्राकृतिक रुप से भी परेशानी झेलनी पड़ेगी, बाढ़ एवं सूखे की समस्या देश के कई राज्यों को प्रभावित करेगी. किसी रोग के कारण अस्थिरता व भय का माहौल भी होगा

संवत मंत्री स्वामी सूर्य
सूर्य के मंत्री पद में आने पर राजनैतिक क्षेत्र में हलचल बढ़ जाती है. केन्द्र और राज्य सरकारों के मध्य विवाद अधिक देखने को मिल सकता है. आर्थिक क्षेत्र अच्छा रहता है. धन धान्य में वृद्धि होती है. सरकारी नीतियां कठोर हो सकती हैं. इस समय पर इस समय पर बाजार में मूल्यों में वृद्धि भी देखने को मिल सकती है.

सस्येश (फसलों) का स्वामी
इस समय सस्येश बुध होने से स्थिति में थोडी़ परेशानी रह सकती है. अनाज महंगा हो सकता है. पशुओं में कुछ रोग उत्पन्न हो सकते हैं. इस समय पर मौसम की प्रतिकूलता के चलते खेती को नुकसान हो सकता है.

मेघेश का स्वामी सूर्य
मेघेश सूर्य हैं, इस कारण कहीं अधिक वर्षा तो कहीं सूखे की स्थिति बनेगी. इस कारण जान-माल का नुकसान भी होगा. राज्य में नियमों की कठोरता के कारण लोगों के मन में चिंता और विरोध की स्थिति भी पनपेगी. बीमारी का प्रभाव लोगों पर जल्द असर डाल सकता है.

धान्येश चंद्रमा का प्रभाव
धान्येश चंद्रमा के होने से रसदार वस्तुओं में वृद्धि देखने को मिल सकती है. चावल कपास की खेती अच्छी हो सकती है. दूध के उत्पादन में भी तेजी आएगी. तालाब, नदियों में जल स्तर की स्थिति अच्छी रहने वाली है.

रसेश शुक्र का प्रभाव
रसेश का स्वामी शुक्र के होने से साधनों की वृद्धि होगी. आर्थिक रुप से संपन्न लोगों के लिए समय ओर अनुकूल रह सकता है. फल और फूलों की पैदावर भी अच्छी होगी. विद्वान और ब्राह्मण व्यक्तियों को उचित सम्मान भी प्राप्त हो सकेगा.

नीरसेश बुध का प्रभाव
नीरसेश अर्थात धातुएं इनका स्वामी बुध के होने से माणिक्य, पन्ना, पुखराज इत्यादि में महंगाई देखने को मिल सकती है. गर्म वस्त्र, चंदन हरे रंग की वस्तुएं, वनस्पतियों में तेजी देखने को मिलेगी.

फलेश शनि का प्रभाव
फलेश शनि का प्रभाव होने पर फल की तादाद में कमी रह सकती है. इस समय वृक्षों पर फूल कम लग पाएंगे ऎसे में फलों का उत्पादन भी कम होगा. पर्वतीय स्थलों पर मौसम की अनियमितता के कारण अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है.

धनेश मंगल का प्रभाव
इस समय में मंगल के धनेश होने से महंगाई का दौर अधिक रहने वाला है. व्यापार से जु़डी वस्तुओं में उतार-चढा़व की स्थिति बनी ही रहने वाली है. इस समय देश में आर्थिक स्थिति और अनाज उत्पादन में अनियमितता के कारण परेशानी अधिक रह सकती है.

दुर्गेश शनि का प्रभाव
दुर्गेश अर्थात सेना के स्वामी इस समय शनि होंगे. इस स्थिति के चलते अराजकता को निपटाने के लिए कठोर नियमों का सहारा लिया जा सकता है. इस समय जातीय सांप्रदायिक मतभेद भी उभरेंगे. पशुओं या कीट इत्यादि द्वारा फसल, कृषि को नुक्सान भी पहुंच सकता है.

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