रुद्राक्ष मंत्र | Rudraksha Mantra

रुद्राक्ष भगवान शिव के नेत्रों से उत्पन्न अश्रु हैं, जिनकी उत्पत्ति त्रिपुर नामक दैत्य को मारने हेतु जब भगवान शंकर ने कालाग्निनामक शस्त्र जब धारण किया तभी हजारों वर्षों के उपरांत नेत्र खुलने पर उनमें से कुछ बूंदें अश्रु रुप में बह गई जो पृथ्वी की सतह पर आ गिरी तथा रुद्राक्ष रुप में परिवर्तित हो गईं. इस प्रकार रुद्राक्ष एक अत्यंत फलदायी वृक्ष है.

रुद्राक्ष के मंत्रों का उचारण करने से आप अनेक प्रकार के शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं. इन रुद्राक्ष मंत्रों के द्वारा जीवन में आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है तथा सकारात्मक उर्जा प्राप्त होती है, पापों का नाश होता है तथा समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

रुद्राक्ष अनेक प्रकार के बताए गए हैं इन्हें मुख एवं रंगों के आधार पर वर्गीककृत किया जाता है. इन पर पाई जाने वाली धारियों ही इनके मुख कहलाते हैं. रुद्राक्ष मुख्य रुप से चौदह मुखी तक पाए जाते हैं और इनसे आगे की संख्या वाले रुद्राक्ष बहुत दुर्लभ होते हैं.

रुद्राक्ष धारण करने से शिव, पार्वती, विष्णु, गणेश, सूर्य, दुर्गा समेत समस्त देवी देवता प्रसन्न होते हैं तथा आशीर्वाद प्रदान करते हैं. शिवमहापुराण संहिता में रुद्राक्ष धारण करने के मंत्रों का उल्लेख है भी क्या गया है. इसलिए प्रत्येक मुख वाले रुद्राक्ष के साथ उनके मंत्र का उच्चारण करना विशेष फलदायी होता है.

एकमुखी रुद्राक्ष मंत्र | Ek Mukhi Rudraksha

एक मुखी शिव के सामान माना गया है. यह साक्षात भगवान शिव का रुप है इस एक मुखी रुद्राक्ष के मंत्र जाप करने से सर्व कामनाएं पूर्ण होती हैं. एक मुखी रुद्राक्ष का मंत्र है- ऊँ ह्रीं नम:

दो मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Do Mukhi Rudraksha Mantra

द्विमुखी रुद्राक्ष के लिए “ऊँ नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए इस मंत्र की पांच माला प्रतिदिन करने से घोर पापों का नाश होता है. अर्धनारीश्वर स्वरुप इस रुद्राक्ष के मंत्र जाप द्वारा स्वर्ग प्राप्ति होती है.

त्रिमुखी रुद्राक्ष मंत्र | Teen Mukhi Rudraksha

तीन मुखी रुद्राक्ष के लिए “ ऊँ क्लीं नम:” मंत्र का जाप करें. यह त्रिमुखी रुद्राक्ष अग्नि का स्वरुप कहा जाता है. यह गार्हपत्य, आहवनीय तथा दक्षिणाग्नि का रुप है, इस मंत्र का जाप करने से सफलता प्राप्त होती है.

चार मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Chaar Mukhi Rudraksha

चतुर्मुखी रुद्राक्ष के लिए “ऊँ ह्रीं नम:” मंत्र का जाप करें. इस मंत्र जाप द्वारा ज्ञान की प्राप्ति होती है तथा संतान की कामना पूर्ण होती है, यह चार मुखी रुद्राक्ष भगवान ब्रह्मा का रुप रहा है यह रुद्राक्ष श्रेष्ठफल प्रदान करता है.

पांच मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Paanch Mukhi Rudraksha Mantra

पंच मुखी रुद्राक्ष मंत्र “ऊँ ह्रीं नम:” का जाप करने से पंचदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह कालाग्निरुद्र का स्वरूप कहा जाता है. इस मंत्र का नियमित जाप करने से मान सम्मान, धन प्राप्ति होती है. इसके कम से कम तीन दाने अवश्य धारण करने चाहिए.

छ: मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Chheh Mukhi Rudraksha Mantra

षष्ठ मुखी रुद्राक्ष के लिए “ऊँ ह्रीं हुं नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए. भगवान कार्तिकेय के रुप कहा जाने वाला यह रुद्राक्ष आरोग्य प्रदान करता है नियमित रुप से इसके मंत्र का जाप करने से विद्या, ज्ञान की प्राप्ति होती है.

सात मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Saat Mukhi Rudraksha Mantra

सप्त मुखी रुद्राक्ष के लिए “ऊँ हुं नम:” मंत्र का जाप करें. इस मंत्र के जाप द्वारा धन संपत्ति की प्राप्ति होती है सात मुखी रुद्राक्ष के मंत्र से भगवान सूर्य एवं सप्तऋषि प्रसन्न होते हैं. यह मंत्र व्यक्ति को यश, कीर्ति एवं सूर्य के समान तेज प्रदान करता है.

आठ मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Aath Mukhi Rudraksha Mantra

अष्टमुखी रुद्राक्ष के लिए “ऊँ हुं नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए. इस मंत्र के नियमित उच्चारण द्वारा भैरव जी की कृपा प्राप्त होती है. इस मंत्र जाप द्वारा दीर्घायु का वरदान मिलता है तथा व्यापार में सफलता प्राप्त होती है.

नौ मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Nau Mukhi Rudraksha Mantra

नव मुखी रुद्राक्ष मंत्र “ऊँ ह्रीं हुं नम:” के उच्चारण द्वारा नव शक्तियों का आशिर्वाद प्राप्त होता है. इसे रुद्राक्ष को भुजा में धारण करके इस मंत्र का जाप करें यह आपका रोगों से बचाव करेगा तथा मृत्यु का भर समाप्त होगा.

दस मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Dus Mukhi Rudraksha Mantra

दशम मुखी रुद्राक्ष मंत्र “ऊँ ह्रीं नम:” का जाप अशुभ ग्रहों को शांत करता है. भगवान विष्णु का प्रतीक यह रुद्राक्ष बीज मंत्र द्वारा भूत प्रेत बाधा, जादूटोनों से मुक्त करता है तथा व्यक्ति को सुरक्षा का अहसास कराता है.

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Gyarah Mukhi Rudraksha Mantra

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के लिए “ऊँ ह्रीं हुं नम:” बीज मंत्र का जाप करें. एकादशमुखी रुद्राक्ष के इस मंत्र के नियमित जाप द्वारा भाग्य वृद्धि होती है. व्यक्ति को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है.

बारह मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Baraha Mukhi Rudraksha Mantra

द्वादश मुखी रुद्राक्ष के बीज मंत्र “ऊं क्रौं क्षौं रौं नम:” का जाप व्यक्ति को अश्वमेधादि का फल प्रदान करता है. इस मंत्र के उच्चारण द्वारा असाध्य रोगों से छुटकारा प्राप्त होता है.

तेरह मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Terah Mukhi Rudraksha Mantra

त्रयोदश मुखी रुद्राक्ष के “ऊँ ह्रीं नम:” मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है. यह रुद्राक्ष मनोकामनाओं को पूर्ण करने में सहायक है इस रुद्राक्ष मंत्र द्वारा संतान, धन, प्रेम की प्राप्ति होती है. यह मंत्र दरिद्रता का नाश करता है.

चौदह मुखी रुद्राक्ष मंत्र | Chaudah Mukhi Rudraksha Mantra

चौदह मुखी रुद्राक्ष के “ ऊँ नम:” मंत्र उच्चारण से भगवान हनुमान जी का आशिर्वाद प्राप्त होता है. पराक्रम एवं साहस में वृद्धि होती है.

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