प्रश्न कुण्डली में ग्रह विचार । प्रश्न कुण्डली में ग्रह गुण धर्म | Position of planets in prashna kundali

प्रश्न कुण्डली का विवेचन करने से पूर्व हमे इस बात का ध्यान भी रखने की आवश्यकता है की कौन सा ग्रह किस वस्तु एवं स्थिति को दर्शाने वाला होता है. सभी ग्रहों का एक महत्वपूर्ण स्थान होता है. हर ग्रह किसी कारक एवं प्रभाव को लक्षित करने वाला होता है. ऐसे में जब हम प्रश्न कुंडली को हल करते हैं तो इन को समझने की अत्यंत आवश्यकता होती है.

प्रश्न कुण्डली में सूर्य

सूर्य राजा का कारक है, दिन में बली होते हैं. पुरूष वर्ग से संबंधित होता है. क्रोध व उग्र प्रचंडता लिए हुए. सत्व प्रकृति से युक्त होता है. स्थिर स्वरूप एवं पाटल वर्ण युक्त है. तिक्तरस पूर्ण, पित्त की अधिकता से प्रभावित, शूरवीर, पिंगल नेत्रों वाला. सुंदर रुप से युक्त एवं चातुर्य एवं बौधिकता पूर्ण है. कम बालों वाला एवं मध्यम गाल, हड्डी एवं क्षार तत्व को दर्शाने वाला. चतुष्पद का स्वामी है. पूर्व दिशा का द्योतक होता है. वन में विचरने वाला, पशु भूमि, मूल वृक्ष इत्यादि का स्वामी है.

प्रश्न कुण्डली में चंद्र

स्त्री वर्ग से संबंधित है. गौर वर्ण वाला, मृदुवाणी से युक्त होता है. सुन्दर नेत्रों वाला, निर्मल बुद्धि वाला, घुंघराले बालों और श्वेत प्रभा लिए होता है. तपस्वी की भांति, बड़ा एवं पुष्ट युवा की भांति होता है. जलचर का स्वामी, अपराह्न का स्वामी, धातु का स्वामी, कफ प्रकृति वाला, सत्व गुणों से युक्त होता है. जल युक्त पृथ्वी का स्वामी, सर्प तथा रुप्य का स्वामी, स्त्रियों का अधिपति होता है.

प्रश्न कुण्डली में मंगल

पुरूष है, कटु स्वभाव वाला, तम प्रकृति से युक्त होता है. युवा वर्ग का स्वामी, उग्र स्वभाव होता है. रक्त वर्ण वाला, पित्त प्रकृति प्रधान है. मध्याह्न में बली होता है. चौपाया युक्त, चौकोर आकार का, व्यंग्य से पूर्ण, कटु रस युक्त. धातु का स्वामी, स्वर्णकार, दग्ध पृथ्वी, वनचारी स्थान का स्वामी. चपल एवं उदार चित्त वाला. पशु पालक है. पिंगल नेत्रों वाला, निर्दय एवं अधिक गर्व करने वाला होता है. दक्षिण दिशा का द्योत्तक होता है.

प्रश्न कुण्डली में बुध

प्रश्न कुण्डली में बुध स्त्री स्वरूप होता है. बाल्य अवस्था का, ग्राम में रहने वाला, नील वर्ण से युक्त, सुवर्ण, गोलाकार युक्त. सम धातु वाला. शमशान पृथ्वी को दर्शाता है. प्रभात के समय बली होता है. शुद्र एवं पक्षियों का स्वामी, रस से युक्त, चतुर, दयालु स्वभाव का होता है. सांवले रंग वाली कमर और नाडियों से व्याप्त शरीर वाला, कलह पसंद, मृदुवाणी वाला, कौतुहलकारी, सुखी एवं उत्तर दिशा का स्वामी.

प्रश्न कुण्डली में गुरू

प्रश्न कुण्डली में बृहस्पति पुरुष स्वरूप होता है. ब्राह्मण वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं. द्विपद के स्वामी है. ग्राम में निवास करने वाला. रस से युक्त, सम धातु और सत्व प्रकृति से युक्त है. वृद्ध और अधिक चर्बी युक्त होता है. सुंदर वर्ण वाला होता है.रत्नों से युक्त है. देवमंदिर का स्थान, जीव है. शुभ स्वरुप वाला. ईशान दिशा का स्वामी होता है और प्रभात समय बली होता है. सुनहरे बालों वाला होता है. व्यवसाय से जीविकोपार्जन करने वालों का प्रतिनिधित्व करता है.

प्रश्न कुण्डली में शुक्र

प्रश्न कुण्डली में शुक्र को स्त्री स्वभाव युक्त माना गया है. रजोगुणों से युक्त है. शुभ स्वभाव वाला, युवा अवस्था को दर्शाता है. जलचर का प्रतिनिधित्व करता है. कफ प्रकृति वाला, अम्ल प्रधान, अपराह्न का स्वामी होता है. सुंदर नेत्रों एवं केश वाला है. स्निग्ध कांति वाला है. कामदेव का स्वामी, जलीय पृथ्वी वाले स्थान का स्वामी है. श्वेत वर्ण वाला हाथी जैसी चाल वाला है.

प्रश्न कुण्डली में शनि

शनि को स्त्री एवं शुद्र की संज्ञा दी गई है, यह संध्या का स्वामी है. क्रूर स्वभाव वाला, नीले वर्ण से युक्त. वृद्ध अवस्था वाला होता है. लोह धातु का स्वामी है. वायु प्रकृति से युक्त है. पश्चिम दिशा का द्योतक है. वन में विचरण करने वाला. मलिन स्वरुप का काला बडा़ लम्बा शरीर, जटाओं वाला कठोर रोम और बालों वाला तथा दुष्ट स्वभाव वाला होता है. भस्म तृण इत्यादि से युक्त पृथ्वी का स्वामी होता है.

प्रश्न कुंडली में राहु

प्रश्न कुण्डली में राहु को शनि के समान ही दर्शाया गया है. शनि में मौजूद जो भी प्रकृति होती है वही राहु में भी मानी जाती है. यह जाति से निषाद या मलेच्छ होता है. चर प्रकृति का तम गुणों वाला. नील एवं कृष्ण वर्ण से युक्त. नैऋत्य कोण का स्वामी है. सर्प को दर्शाता है व अस्थि युक्त होता है.

प्रश्न कुण्डली में केतु

प्रश्न कुण्डली में केतु को भी शनि के समान ही माना गया है. तो कुछ के अनुसार यह मंगल स्वरुप भी होता है. यह जाति से निषाद या मलेच्छ होता है. तम गुणों वाला. धुम्र एवं कृष्ण वर्ण से युक्त. कषाय स्वाद का पाप प्रधान, वायु प्रकृति वाला. ऊसर भूमि का स्वामी है. वृद्ध अवस्था वाला यह अनेक रुप रचने में समर्थ होता है. बहरूपिया भी कह सकते हैं. शिखा रखने वाला है.

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