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कमजोर ग्रह के उपाय | Remedies for weak planets

लाल किताब कुंडली में कमजोर ग्रहों के कारण उचित फलों का मिल पाना कठिन होता है. ऐसे में कमजोर ग्रह को बलवान बनाने के लिए बहुत से उपाय दिए गए होते हैं. ग्रह को ताकत देने के लिए जो उपाय हैं उन्हें करने पर व्यक्ति को लाल

लाल किताब में ग्रहों व राशियों का संबंध | Relations Between Planets and Signs in Lal Kitab

लाल किताब कुण्डली में ग्रहों व राशियों के महत्व को बहुत स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. यहां राशियों के स्वामी हैं जिसमें मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं. वृष और तुका के स्वामी शुक्र हैं, मिथुन और कन्या के

लाल किताब का खाना नम्बर 9 | House No. 9 in Lal Kitab

लाल किताब के खाना नम्बर 9 को भाग्य विधाता कहा जाता है. इसे लाल किताब में किस्मत की कहानी कहते हैं. इस घर का स्वामी और कारक दोनों ही बृहस्पति हैं. लाल किताब में इस स्थान को गुरू की गद्दी कहा गया है. नौंवा घर कर्मों का

लाल किताब में आठवां भाव | Eighth House of Lal Kitab

लाल किताब में आठवां घर मृत्यु व बिमारी का घर कहा गया है. इस घर का स्वामी मंगल है और कारक ग्रह शनि है इसलिए इस घर को शनि-मंगल की सांझी गद्दी कहा जाता है. मंगल ही यहां वृश्चिक का भावेश भी होता है. यह भाव न्याय, बुद्धि तथा

लाल किताब का खाना नम्बर 7 | Lal Kitab Seventh House

लाल किताब का सातवां घर वैवाहिक जीवन तथा गृहस्थी के स्वरूप को बताता है. यह गृहस्थी का कारक है. विवाह संबंधी समस्त शुभाशुभ फलों का निर्धारण इसी से किया जा सकता है. इसी के साथ जातक अपने जीवन के निर्वाह हेतु किस काम को

लाल किताब का खाना नम्बर 6 | Lal Kitab Sixth House

लाल किताब में छठे घर को पाताल कहा जाता है, इसे पाताल की दुनिया, रहम का खजाना और खुफिया मदद का घर भी कहते हैं. इस घर से माता-पिता और ससुराल के साथ संबंधों का विचार करते हैं. इस घर के कारक ग्रह केतु माने गए हैं और स्वामी

लाल किताब का खाना नम्बर 5 | Fifth House of Lal Kitab

लाल किताब में पांचवां घर शुभाशुभ भाव कहलाता है. यह मिश्रित फल देने वाला होता है जीवन में मिलने वाली सफलता या असफलता सभी का विचार इस भाव से किया जाता है. संतान और संतान से संबंधी अच्छी-बुरी सभी बातों का विचार किया जाता

लाल किताब का खाना नम्बर 4 | Fourth House in Lal Kitab

लाल किताब कुण्डली के चौथे घर को माता का घर कहा जाता है. इसका स्वामी और कारक ग्रह चंद्रमा है और इस घर को केन्द्र स्थानों में से एक माना जाता है. लाल किताब में इस केन्द्र स्थानों को बंद मुट्ठी का भाव कहा जाता है. इसे बंद

लाल किताब का तीसरा भाव | Third House in Lal Kitab

लाल किताब कुण्डली में तीसरे घर को भाई बंधुओं का भाव कहा जाता है. इस घर का स्वामी बुध और कारक मंगल होता है. इस घर को मुख्यत: मृत्यु और भोग का घर माना जाता है. इस घर में राहु और बुध उच्च तथा शुक्र नीच का हो जाता है. इस घर

लाल किताब का दूसरा भाव | Second House in Lal Kitab

ज्योतिष में कुण्डली के दूसरे भाव को धन भाव कहते हैं, परंतु लाल किताब कुण्डली में इसे धर्म भाव कहा जाता है. भाव का कारक बृहस्पति होने से इसे गुरू मंदिर भी कहा जाता है. धर्म भाव में जो भी ग्रह होता है या गोचर में चलकर आता

लाल किताब का खाना नम्बर 1 | First House of Lal Kitab

लाल किताब में कुण्डली के फले घर को राज्य सिंहासन कहते हैं. कुण्डली में ग्रहफल का ग्रह राजा कहा जाता है. ज्योतिष में इसे लग्न कहा जाता है. इस लग्न से ही जीव अर्थात रूह और माया अर्थात प्रकृत्ति का संबंध परिलक्षित होता है.

लाल किताब अनुसार कुर्बानी के बकरे | Qurbani Ke Bakre in Laal Kitaab

कुर्बानी के बकरे के बारे में लाल-किताब पद्धति का अपना सिद्धांत होता है जिसका अर्थ होता है कि जब कोई ग्रह अपने शत्रु ग्रह से पीड़ित होता है तो वह अपना कष्ट दूसरे ग्रह के फल के अशुभ हो जाने से प्रदर्शित करता है और जिस

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