लाल किताब अनुसार कुर्बानी के बकरे | Qurbani Ke Bakre in Laal Kitaab

कुर्बानी के बकरे के बारे में लाल-किताब पद्धति का अपना सिद्धांत होता है जिसका अर्थ होता है कि जब कोई ग्रह अपने शत्रु ग्रह से पीड़ित होता है तो वह अपना कष्ट दूसरे ग्रह के फल के अशुभ हो जाने से प्रदर्शित करता है और जिस ग्रह के द्वारा वह अपना अशुभ फल प्रकट करता है उसे कुर्बानी का बकरा कहते हैं. कुंडली में यदि शनि सूर्य से पीड़ित हो तो उस कुंडली में शुक्र के फल अशुभ मिलेगें अर्थात शुक्र कुर्बानी का बकरा बन जाएगा. इसी प्रकार अन्य ग्रहों का अपनी सुरक्ष के लिए किसी और ग्रह का सहारा लेना आम बात है.

अगर चन्द्र व शुक्र ग्रह टकराव पर स्थित हों तो जातक की माँ का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है अथवा संतान एवं माता के संबंधों में तनाव भी रह सकता है.

बृहस्पति : बृहस्पति पीड़ित होने पर अपना अशुभ फल केतु के द्वारा प्रकट करता है. माना कि बृहस्पति पंचम भाव में स्थित हो और केतु किसी भी भाव में स्थित हो तो ऎसी स्थिति में बृहस्पति के पीड़ित होने पर पंचम भाव पर कोई अशुभ असर नही होगा बल्कि छठा भाव जो केतु का भाव है पर ही अशुभ प्रभाव पडे़गा.

इसी प्रकार यदि सूर्य के अशुभ होने की स्थिति में भी उसका अशुभ असर केतु के द्वारा प्रकट होगा.

चन्द्रमा अपना अशुभ प्रभाव बृहस्पति, सूर्य, मंगल के द्वारा प्रकट करता है.

सूर्य:- जब सूर्य ग्रह पीडित होता है तो अपना अशुभ प्रभाव केतु के द्वारा प्रकट करता है.

यदि चंद्रमा पीडित होता है तो अपना अशुभ प्रभाव सूर्य, मंगल अथवा बृहस्पति में से किसी भी ग्रह द्वारा प्रकट कर सकता है. ऎसा करने से उसके अशुभ प्रभावों में स्वत: ही कमी आ जाती है.

यदि कुण्डली में मंगल ग्रह पीडित होता है तो वह अपना अशुभ प्रभाव सूर्य की भाँति केतु के द्वारा ही प्रकट करता है.

लाल किताब कुण्डली में यदि बुध ग्रह पीडित होता है तो वह अपना अशुभ प्रभाव शुक्र के द्वारा प्रकट करता है.

कुण्डली में यदि बृहस्पति ग्रह भी जब पीडित होता है तो अपना अशुभ प्रभाव केतु के द्वारा ही प्रकट करता है.

शुक्र ग्रह पीडित होता है तो वह अपना अशुभ प्रभाव चन्द्रमा के द्वारा प्रकट करता है.

यदि कुण्डली शनि ग्रह पीडित होता है तो वह अपना अशुभ प्रभाव शुक्र के द्वारा प्रकट करता है.

राहु-केतु अपवाद हैं यह अपना अशुभ असर स्वंय अपने से सम्बन्धित वस्तुओं या रिश्तेदारों द्वारा प्रकट करते हैं.

कुर्बानी के बकरों में सूर्य, मंगल व बृहस्पति तीनों अपना अशुभ प्रभाव केतु पर डालते हैं. इसे हम इस प्रकार भी समझ स्कते हैं जैसे यदि कुण्डली में बृहस्पति किसी भी प्रकार से पीडित है तो वह केतु से सम्बन्धित रिश्तेदार द्वारा अपना अशुभ फल प्रकट करेगा. क्योंकि भाव न.6 केतु का पक्का भाव है इस स्थिति में जातक के मामा को परेशानी रहेगी.

इसी प्रकार यदि कुण्डली में शुक्र पीडित हो तो वह अपना अशुभ प्रभाव चन्द्रमा के द्वारा प्रकट करेगा. इस स्थिति में माता का स्वास्थ्य ठीक नहीं होगा तथा सम्बन्धों में तनाव रहेगा. इस प्रकार ग्रह स्वंय पीडित होने पर अन्य अपने मित्र ग्रह की बली देता है.

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