लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में शनि का बृहस्पति, शुक्र और राहु केतु के साथ संबंध | Relation Of Saturn With Jupiter, Venus and Rahu/Ketu In The Second House Of Lal Kitab

शनि और बृहस्पति | Saturn and Jupiter

लाल किताब कुण्डली में दूसरे घर अगर शनि के साथ गुरू के होने पर अनुकूलता में कमी आ सकती है. यह दोनों साथ में एक दूसरे के साथ होकर दूसरे घर के फलों में कमी कर सकते हैं. परिवार से दूरी बनी रह सकती है यह स्थित हो तो यह अच्छी स्थिति नहीं मानी जाती है. इसके प्रभाव से व्यक्ति को कोई न कोई नुकसान अवश्य झेलना पड़ता है. यदि यह दोनों ही शुभ स्थिति में नहीं हों तो व्यक्ति को अपने धन से हाथ धोना पड़ सकता है या फिर देह संबंधी दिक्कतें परेशान कर सकती हैं.

अगर कुण्डली में इनकी थोडी़ सी स्थिति भी खराब हो तो जातक को स्वास्थ्य का नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसी के साथ परिवार के सदस्यों से उचित सहयोग भी नहीं मिल पाता है. यदि वर्षफल में यह स्थिति बन रही हो तो स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए और इससे बचाव के लिए गुरू संबंधी वस्तुओं का दान भी करना चाहिए. साथ ही शनि के उपाय के लिए मंदिर जाना चाहिए और माथा टेकना चाहिए.

शनि और शुक्र | Saturn and Venus

लाल किताब कुण्डली के दूसरे घर में शनि के साथ शुक्र के होने पर जातक में विषय वासना अधिक रह सकती है. यह एक तरह से केतु का बनावटी रूप भी माना जाता है. जातक काफी ऎशो-आराम की चाह रख सकत है इससे प्रभावित होने पर जीवन में इच्छाएं अधिक रहती हैं ओर विचारों में भी बेचैनी होना स्वाभाविक होता है. यह दोनों अधिकतर मिलकर एक लम्बी अवधि तक अपना फल देते हैं.

शनि के साथ शुक्र के होने पर यह एक दूसरे के प्रति वैर भाव नहीं रखते हैं एक दूसरे के लिए सहायक के रूप में मददगार बनते हैं. जातक को अपने पिता की ओर से काफी सम्पति मिल सकती है और उसके पिता का सहयोग बना रह सकता है, जीवन में सुख व वैभव बना रह सकता है. परंतु यदि यहां पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि पड़ रही हो तो फलों में विपरित स्थिति का होना स्वभाविक ही है.

इस घर में जीवन साथी के साथ संबंधों में सुख की प्राप्ति हो सकती है. पिता का रूतबा बना रह सकता है. जीवन में अनेक बाधाओं से पार पाते हुए यह सफलता से आगे निकल आ सकते हैं. शनि नेत्र बनकर सभी कुछ देखता जाता है और उसका फल शुक्र रूप में सामने आता है दोनों के एक दूसरे के साथ होने पर फल में मिले जुले फल मिलते ही रहते हैं.

शनि और राहु | Saturn and Rahu

शनि के साथ राहु का संबंध जब दूसरे घर से बनता है तो इनकी नकारात्मकता का होना स्वाभाविक ही होता है क्योंकि जातक के जीवन में इन दोनों ग्रहों की अहम भूमिका रहती है और यह कई प्रकार से इस भाव को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं. यहां बैठकर यह व्यक्ति को घर से दूर जाकर रहने के लिए विवश कर सकते हैं उसकी आमदनी का स्रोत भी परदेस से ही बन पाता है. आर्थिक स्थिति में कई बार झंझट आने लगते हैं स्थिरता की कमी यहां अवश्य खल सकती है.

यह संबंध जातक के व्यवहार को बहुत अधिक प्रभावित करता है इससे जातक कई प्रकार के बुरे कमों से भी लिप्त रह सकता है या अधिक तामसिक चिजों का सेवन भी कर सकता है जिससे उसका सत्यवादी स्वरूप कुछ कम होने लगता है और कुछ नकारात्मक छवि भी उभर कर सामने आ सकती है.

शनि और केतु | Saturn and Ketu

शनि के साथ केतु के लाल किताब कुण्डली के दुसरे घर में स्थित होने पर यहां यह व्यक्ति के धन में वृद्धि करने में सहायक बन सकता है यदि शनि अपनी अच्छी स्थिति में हो तो जातक को अचल संपत्ति की प्राप्ति भी होती है. परंतु पारिवारिक चिंता का भी कारण बन सकता है.

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