दोगुना-तिगुना लाभ पाने के लिए करें इस योग में खरीदारी । Dwipushkar and Tripushkar Yoga Dates in 2018

ज्योतिष में खरीदारी करने से संबंधित कई योगों के बारे में विवरण मिलता है. जिनमें शुभाशुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है. इन्ही योग में से ऎसे दो योग हैं द्विपुष्कर योग और त्रिपुष्कर योग. इन योगों में भूमि संपति से संब्म्धित कार्य शुभ होते हैं. आभुषण इत्यादि की खरीदरई के लिए भी यह यह उत्तम माने जाते हैं. इसके अतिरिक्त वाहन, वस्त्र एवं नए व्यवसाय का आरंभ करने के लिए भी इन योगों के अनुरूप काम करना अनुकूल फल देने में सहायक होता है.

इन योगों में यदि किसी तरह का कोई अनिष्ट हो जाए तब वह भी दुगुना अथवा तिगुना ही होने की संभावना रहती है. त्रिपुष्कर योग की शांति के लिए तीन गौओं के मूल्य का धन और द्विपुष्कर योग में दो गौओं के मूल्य का धन तथा तिलों से बनी पीठी का दान करना शुभ फलदायी रहता है. इस समय किया गया शुभ कार्य दोगुना और तिगुना फायदा देने वाला होता है.

इस वर्ष 2018 में बनने वाले द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर योग इस प्रकार रहेंगे

द्विपुष्कर योग तिथियाँ 2018 | Dwipushkar Yog Dates 2018

प्रारंभ काल समाप्तिकाल
दिनाँक समय (घं. मि.) दिनाँक समय (घं. मि.)
28 जनवरी 08:28 28 जनवरी 25:42
6 फरवरी 08:01 6 फरवरी 10:53
24 मार्च सूर्योदयकाल 24 मार्च 10:06
1 अप्रैल 17:05 2 अप्रैल 05:52
26 मई सूर्योदयकाल 26 मई 17:41
5 जून 09:17 5 जून 17:57
29 जुलाई 04:21 30 जुलाई सूर्योदयकाल
8 अगस्त 05:16 8 अगस्त सूर्योदयकाल
1 अक्तूबर 05:45 1 अक्तूबर सूर्योदयकाल
24 नवम्बर 15:10 25 नवम्बर 06:38


त्रिपुष्कर योग तिथियाँ 2018 | Tripushkar yog Dates 2018

प्रारंभ काल समाप्तिकाल
दिनाँक समय (घं. मि.) दिनाँक समय (घं. मि.)
3 जनवरी 04:08 3 जनवरी सूर्योदयकाल
7 जनवरी 25:10 7 जनवरी 25:10
17 फरवरी 11:28 18 फरवरी 04:51
3 मार्च सूर्योदयकाल 3 मार्च 20:55
17 अप्रैल 25:57 18 अप्रैल 03:45
21 अप्रैल 19:43 22 अप्रैल 16:18
1 मई 06:48 1 मई 15:56
6 मई 15:56 7 मई 04:40
19 जून 25:46 20 जून 04:59
24 जून 03:53 25 जून 04:55
30 जून सूर्योदयकाल 30 जून 15:21
28 अगस्त सूर्योदयकाल 28 अगस्त 17:09
1 सितंबर 21:45 2 सितंबर 20:48
21 अक्तूबर 05:48 22 अक्तूबर सूर्योदयकाल
30 अक्तूबर 13:08 30 अक्तूबर 27:51
4 नवम्बर 03:14 4 नवम्ब 21:35
14 नवम्बर 04:23 14 नवम्बर 05:37
23 दिसंबर 20:52 24 दिसंबर सूर्योदयकाल