Articles in Category Nakshatra

वर्ष 2018 में बनने वाला गुरु पुष्य योग दिलाएगा सफलता | Guru Pushya Yoga Will Bring Success In 2018

गुरू पुष्य योग एक बहुत ही विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण योग माना जाता है. ज्योतिष में इस योग की बहुत महत्ता है. इस योग के समय किए गए कार्यों में सफलता एवं शुभता की संभावना में वृद्धि होती है. इसके साथ ही

मुंडन मुहूर्त्त 2018 | Mundan Muhurat in 2018 | Auspicious Mundan Dates 2018 | Mundan Sanskar Muhurat 2018

प्राचीन काल से, भारतीय वैदिक ज्योतिष में ऋषियों ने सोलह संस्कारों का वर्णन किया है. इन सोलह संस्कारों के अन्तर्गत यह भी कहा जाता है कि बच्चे के मुण्डन संस्कार समारोह के बारे में भी उल्लेख किया गया

साढ़ेसाती का नक्षत्रों पर प्रभाव | Effects of Sadesati On Nakshatras

जन्म चंद्र से जब गोचर का शनि बारहवें भाव में आता है तब व्यक्ति की साढ़ेसाती का प्रभाव आरंभ हो जाता है. यह साढ़ेसाती का पहला चरण माना जाता है. अब जन्म चंद्र के ऊपर शनि आता है तब दूसरा चरण और जन्म

नक्षत्र और शरीर के अंग | Relation Between Nakshatra and Body Parts

वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों को भी शरीर के आधार पर वर्गीकृत किया गया है. सभी नक्षत्र शरीर के किसी ना किसी अंग का प्रतिनिधित्व करते ही हैं और इन अंगों से संबंधित परेशानी भी व्यक्ति को हो जाती हैं. जो

अश्विनी नक्षत्र | Ashwini Nakshatra | Characteristics of Ashwini Nakshatra

भचक्र में शून्य से 13 अंश 20 कला तक का विस्तार अश्विनी नक्षत्र के अधिकार में आता है. अश्चिनी नक्षत्र दो "अश्विन" से उत्पन्न हुआ नक्षत्र है. यह दो सितारो का समूह है. लेकिन कुछ अन्य मतानुसार अश्विनी

गण्डमूल नक्षत्र का प्रभाव | Effect of Gandmool Nakshatra | Gand Mool Nakshatra Effects

ज्योतिष ग्रंथों में अनेक स्थानों पर गंडांत अर्थात गण्डमूल नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है. रेवती नक्षत्र की अंतिम चार घड़ियाँ और अश्वनी नक्षत्र की पहली चार घड़ियाँ गंडांत कही जाती हैं. ज्योतिष शास्त्र

गण्डमूल नक्षत्र | Gandmool Nakshatra | Gandmool Pooja

वैदिक ज्योतिष के अनुसार भचक्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं. इन सत्ताईस नक्षत्रों में कुछ नक्षत्र ऎसे होते हैं जिनका क्षेत्र अति संवेदनशील होता है और इन्हीं नक्षत्रों को गण्डमूल नक्षत्र कहा जाता है.

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र | Purva Bhadrapada Nakshatra | Purvabhadra Nakshatra

आकाश में कुंभ राशि में 20 अंश से मीन राशि में 3 अंश 20 कला तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रहता है. क्रान्ति वृ्त्त से 19 अंश 24 कला 22 विकला उत्तर में और विषुवत रेखा से 15 अंश 11 कला 21 विकला उत्तर में
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