सप्तमांश कुण्डली या D-7 | Saptamansha Kundali or D-7

इस कुण्डली से संतान का अध्ययन किया जाता है. इस वर्ग कुण्डली को बनाने के लिए 30 अंश के सात बराबर भाग किए जाते हैं. जो ग्रह विषम राशि में होगें उनकी गिनती वहीं से आरम्भ होगी जिस राशि में वह ग्रह स्थित होगें. जो ग्रह जन्म कुण्डली में सम राशि में स्थित होगें उनकी गिनती स्थित राशि से, सातवीं राशि से होगी. माना कोई ग्रह सम राशि, वृष में तीसरे सप्ताँश में स्थित है. अब ग्रह की गणना वृष से सातवीं राशि यानि वृश्चिक से गिनती आरम्भ होगी. वृश्चिक राशि से तीसरा सप्ताँश मकर राशि है. इस प्रकार ग्रह सप्ताँश कुण्डली में मकर राशि में लिखा जाएगा.  

30 अंश के सात बराबर भाग निम्न प्रकार से हैं :- 

0 अंश से 4अंश 17 मिनट 8 सैकण्ड का पहला सप्ताँश होगा. 

4अंश 17मिनट 8 सैकण्ड से 8 अंश 34 मिनट 16 सैकण्ड तक दूसरा सप्ताँश होगा. 

8 अंश 34 मिनट 16 सैकण्ड से 12 अंश 51 मिनट 24 सैकण्ड तक तीसरा सप्ताँश होगा. 

12 अंश 51 मिनट 24 सैकण्ड से 17 अंश 08 मिनट 32 सैकण्ड तक चतुर्थ सप्ताँश होगा. 

17 अंश 08 मिनट 32 सैकण्ड से 21 अंश 25 मिनट 40 सैकण्ड तक पांचवाँ सप्ताँश होगा. 

21 अंश 25 मिनट 40 सैकण्ड से 25 अंश 42 मिनट 48 सैकण्ड तक छठा सप्ताँश होगा. 

25 अंश 42 मिनट 48 सैकण्ड से 30 अंश तक सातवाँ सप्ताँश होगा. 

आप ग्रह को देखें कि वह जन्म कुण्डली में कितने अंशों पर स्थित है और कौन से सप्ताँश में आता है 

नवाँश कुण्डली या D-9 | Navamansha Kundali or D-9

लग्न कुण्डली के बाद यह अत्यधिक महत्वपूर्ण कुण्डली है. इससे वैवाहिक जीवन का आंकलन किया जाता है. जीवन के सभी क्षेत्रों का अध्ययन भी किया जाता है. इस कुण्डली का निर्माण करते समय सबसे पहले तो कुछ बातों पर ध्यान देना होगा. सभी बारह राशियों को तीन भागों में बाँटा गया है. 

1,5,9 राशियाँ अग्नि तत्व राशियाँ हैं. यदि कोई ग्रह जन्म कुण्डली में इन राशियों में स्थित है तो गिनती का आरम्भ मेष राशि से होगा. माना कोई ग्रह धनु राशि में है तो मेष राशि से गिनती आरम्भ होगी. 

2,6,10 राशियाँ पृथ्वी तत्व राशियाँ हैं. कोई ग्रह जन्म कुण्डली में जब पृथ्वी तत्व राशि में होगा तो गिनती का आरम्भ मकर राशि से होगा. माना कोई ग्रह वृष राशि में स्थित है तो मकर राशि से गिनती आरम्भ करेंगें. 

3, 7, 11 राशियाँ वायु तत्व राशियाँ हैं. यदि कोई ग्रह जन्म कुण्डली में वायु तत्व राशि में होगा तो गिनती का आरम्भ तुला राशि से होगा. कोई ग्रह कुम्भ राशि में स्थित है तो गणना तुला राशि से होगी. 

4, 8, 12 राशियाँ जल तत्व राशियाँ हैं. यदि कोई ग्रह जन्म कुण्डली में जल तत्व राशि में स्थित है तो गिनती का आरम्भ कर्क राशि से होगा. जैसे कोई ग्रह वृश्चिक में है तो कर्क राशि से गिनती आरम्भ होगी. 

नवाँश कुण्डली को बनाने के लिए सबसे पहले 30 अंश को नौ बराबर भागों में बाँटा जाएगा. एक भाग 3 अंश 20 मिनट का होगा. 30 अंश के नौ बराबर भाग निम्न प्रकार से है :- 

* 0 से 3 अंश 20 मिनट तक पहला नवाँश 

* 3 अंश 20 मिनट से 6 अंश 40 मिनट तक दूसरा नवाँश 

* 6 अंश 40 मिनट से 10 अंश तक तीसरा नवाँश 

* 10 अंश से 13 अंश 20 मिनट तक चतुर्थ नवाँश 

* 13 अंश 20 मिनट से 16 अंश 40 मिनट तक पांचवाँ  नवाँश 

* 16 अंश 40 मिनट से 20 अंश तक छठा नवाँश 

* 20 अंश से 23 अंश 20 मिनट तक सातवाँ नवाँश 

* 23 अंश 20 मिनट से 26 अंश 40 मिनट तक आठवाँ नवाँश 

* 26 अंश 40 मिनट से 30 अंश तक नौवाँ नवाँश होगा. 

नवाँश कुण्डली बनाने ���ी विधि | Method of preparing a Navamansha Kundali

आइए अब नवाँश कुण्डली बनाना सीखें. सर्वप्रथम आप जन्म कुण्डली में लग्न के अंश तथा ग्रहों के अंश को नोट कर लें. माना लग्न में कर्क राशि है और लग्न 4 अंश 15 मिनट का है. अब यह देखें कि कर्क लग्न किस तत्व में आता है. कर्क राशि जलतत्व राशि है और लग्न के अंश दूसरे नवाँश में आते हैं. जल तत्व राशियों की गणना कर्क राशि से होती है. कर्क राशि से दो राशि आगे तक गिनती करने पर सिंह राशि आती है. इस प्रकार नवाँश कुण्डली में सिंह नवाँश उदय होता है. 

अब नवाँश कुण्डली में ग्रहों की स्थापना करें. चन्द्रमा कुण्डली में धनु राशि में 15 अंश पर स्थित है. धनु राशि अग्नि तत्व राशि है. इसलिए गिनती का आरम्भ मेष राशि से होगा. चन्द्रमा धनु राशि में 15 अंश पर स्थित होने पर वह छठे नवाँश में आता है. अब जन्म कुण्डली में मेष राशि से छठी राशि देखेगें कि कौन सी है. मेष से छठी राशि कन्या राशि आती है. नवाँश कुण्डली में चन्द्रमा कन्या राशि में स्थित होगा. इस प्रकार आप सभी ग्रहों की स्थापना नवाँश कुण्डली में करें. 

आइए एक बार फिर से नवाँश को दोहरा लें. नवाँश कुण्डली बनाने के लिए आपको ग्रहों को देखना है कि वह कौन से तत्व में है. जिस तत्व में ग्रह स्थित हैं उस तत्व की दी राशि से गणना आरम्भ करेंगें. जैसे अग्नि तत्व राशि की गणना मेष से शुरु होगी. पृथ्वी तत्व की गणना मकर राशि से आरम्भ होगी. वायु तत्व की गणना तुला से आरम्भ होगी. जल तत्व राशियों में स्थित ग्रहों की गणना कर्क राशि से शुरु होगी. 

माना कोई ग्रह मेष राशि में प्रथम नवाँश में स्थित है तो वह नवाँश में मेष राशि में ही जाएगा. कोई ग्रह मकर के पहले नवाँश में स्थित है तो वह भी मकर राशि में स्थित होगा. तुला राशि में पहले नवाँश में ग्रह स्थित है तो वह नवाँश कुण्डली में तुला राशि में ही जाएगा. कोई ग्रह कर्क राशि के पहले नवाँश में स्थित है तो वह नवाँश कुण्डली में कर्क राशि में स्थित होगा.  

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