नव सम्वत्सर 2014 | हिन्दु नववर्ष | प्लवंग सम्वत

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नया सम्वत आरंभ हो रहा है जो प्लवंग नामक विक्रमी सम्वत होगा. नव संवत का प्रवेश काल 30 मार्च रविवार की अर्द्धरात्रि को 12 बजकर 15 मिनट पर उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के समय ब्रह्म योग कालीन वृश्चिक लग्न में आरंभ होगा. लेकिन 31 मार्च सोमवार के दिन रेवती नक्षत्र, ऎन्द्र योग और मीनस्थ चंद्रमा युक्त प्लवंग नामक सम्वत का प्रारंभ होगा.

इसलिए आगामी समय के मध्य में व्रत, दान, अनुष्ठान, होमादि शुभ कार्यों के संकल्प में इसी का उपयोग होगा. इस नव सम्वत में राजा और मंत्री दोनों ही उपाधियां चंद्रमा को प्राप्त हुई हैं. अगर राजा और मंत्री एक ही ग्रह हों तो स्थिति अधिक अच्छी नहीं मानी जाती है. फिर भी प्लवंग नामक सम्वत होने के कारण इस साल वर्षा सामान्य रहेगी, लोगों में रोगों की अधिकता रह सकती है. शासकों के मध्य वाद विवाद और टकराव की स्थिति का माहौल देखा जा सकता है.

धर्म ग्रंथों के अनुसार प्लवंग में जन्में व्यक्ति क्रूर और अधिक क्रोध करने वाला होता है. उसमें दूसरों की वस्तुओं की प्राप्ति की लालसा रहती है. किंतु साथ ही वह दूसरे व्यक्तियों का पालन कर्ता भी बनता है. वह किसी दल का मुखिया एवं समाज में प्रमुख पद पाने वाला होता है. योग साधना की ओर उसका मन लगा रहता है, उसकी योग साधना उसे एक योग्य मनुष्य बनाने में सहायक बनती है. वह अपने प्रभाव से समाज में उच्च स्थान भी पा सकता है.

चंद्रमा वर्ष का राजा

इस वर्ष के राजा चंद्रमा हैं. जिस वर्ष चंद्रमा हो उस समय देश में वर्षा और धन धान्य की प्रचुरता देखी जा सकती है. रस से युक्त वनस्पतियों की अधिकता रह सकती है. नौजवानों में विशेष उत्साह देखा जा सकता है. इस समय मांगलिक कार्यों में अधिक धन व्यय हो सकता है. महंगाई का जोर बना रहेगा. किसी प्रमुख नेता का प्रादुर्भाव बढे़गा. समाज में महिलाओं की भागीदारी बढे़गी.

चंद्रमा वर्ष का मंत्री

इस वर्ष के मंत्री का पद भी चंद्रमा को ही प्राप्त हुआ है. इस कारण सुख-साधनों का सामान बढे़गा. अनाज की पैदावार भी सामान्य से अच्छी कही जा सकती है. गेहुँ, चावल, सरसों, मक्का की पैदावार भी अच्छी रहेगी. दूध और पानी के व्यापार में उछाल आएगा साथ ही श्वेत वस्तुओं की बिक्री भी बढे़गी.

वर्ष का सस्येश बुध

इस वर्ष बुध सस्येश हैं जिस कारण साधनों की उपलब्धि के साथ ही महंगाई का भी जोर बना रहेगा. धार्मिक गतिविधियों में तेजी आएगी. लोग अद्यापन्न कार्यों में लगे रह सकते हैं.

वर्ष का धान्येश मंगल

इस वर्ष के धान्येश मंगल हैं इस कारण से ग्रीष्म काल में फसलों में कुछ प्रभाव पड़ने के कारण से मंहगाई का कारण बना रह सकता है. इसी के साथ सोना, ताम्बा जैसी धातुओं के मूल्यों में वृद्धि का रूख देखा जा सकता है.

वर्ष का मेघेश सूर्य

इस वर्ष के मेघेश सूर्य हैं ओर इस कारण से नदी-नालों के जल स्तर में कमी देखी जा सकती है. जौ, गेहूँ, चना इत्यादि की पैदावार में अच्छे लाभ होने के संकेत मिलते हैं.

वर्ष का रसेश शुक्र

वर्ष का रसेश शुक्र है होने से रस से भरपूर पदार्थों की प्रचुरता बनी रहेगी. वर्षा पर्याप्त रहेगी. सौंदर्य प्रसाधनों की ओर भी रूझान होगा. मौसमी फूल और फलों की वृद्धि रहेगी साथ ही कृषी उत्पादन में वृद्धि बनी रहेगी.

वर्ष का निरसेश बुध

इस वर्ष नीरसेश बुध के होने से कई प्रकार के वस्त्रों का निर्माण होगा, शंख, चंदन और सुगंधित वस्तुओं के भाव में भी वृद्धि का रूख बना रह सकता है.

वर्ष का फलेश शनि

फलेश के शनि के होने पर फलदार वृक्षों और फलों के उत्पादन में कमी रह सकती है. कुछ क्षेत्रों में अचानक से वर्षा एवं बाढ़ का खतरा बना रह सकता है. इस समय उपद्रव और आतंक की स्थिति बढ़ सकती है व श्वास संबंधी रोगों की अधिकता प्रभावित कर सकती है.

वर्ष का धनेश मंगल

धनेश के मंगल होने के कारण व्यापारिक वस्तुओं में उतार-चढा़व की स्थिति बनी रह सकती है. इस समय पर अगर पहले से ही वस्तुओं को जमा करके बाद में बेचा जाए तो अच्छे लाभ की स्थिति मिल सकती है.

वर्ष का दुर्गेश सूर्य

दुर्गेश सूर्य के होने के कारण राजनेताओं की गतिविधियों में तेजी बनी रह सकती है. सरकारी तंत्र में काफी परिवर्तन के आसार साफ देखे जा सकते हैं.


Comment(s): 1:

  • Bhanu on 27 May, 2014 05:49:37 AM
    can u please explane this samvtaser for rashi effect
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