मार्गशीर्ष सोमवती अमावस | Margashirsha Somvati Amavasya | Margashirsha Somvati Amavasya Vrat 2013

मार्गशीर्ष सोमवती अमावस्या 2 दिसंबर, 2013 को सोमवार के दिन संपन्न होगी. सोमवती अमावस से तात्पर्य यह होता है कि किसी भी माह की अमावस्या जब सोमवार के दिन होती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है. यह अमावस्या पितरों के तर्पण कार्यो के लिये सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है. इस दिन व्रत भी किया जा सकता है जिसका शुभ फल आपके कर्मों को शुभता प्रदान करने वाला होता है.

सोमवार शिव उपासना का दिन है तथा इस दिन शिव एवं हनुमान जी की पूजा उपासना काल, भय, पीड़ा और रोग निवारण में प्रभावी मानी गई है और विशेषत: जब सोमवार के दिन अमावस्या का संयोग बन पडे़ तो शिव व हनुमान जी की पूजा करने से कठिनाईयों एवं उलझनों से छुटकारा प्राप्त होता है.

शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत कहा गया है इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा व पेड तले तेल का दीपक प्रज्जवलित करना चाहिए, इसी के साथ शनि देव की पूजा करनी चाहिए. इस दिन मंत्र जाप करना विशेष रुप से कल्याणकारी होता है.

इसके अतिरिक्त इस दिन पीपल की 108 परिक्रमा कर, पीपल के पेड और श्री विष्णु का पूजन करने का नियम है. विवाहित स्त्रियां इस दिन अपने पतियों की दीर्घायु की कामना हेतु व्रत भी रखती है. इस दिन की गई पूजा उपासना से गोदान का फल प्राप्त होता है.

सोमवती अमावस्या पर पीपल पूजा | Somvati Amavasya - Worshipping Peepal Tree

सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की पूजा बहुत फलदायी कही गई है. पीपल के वृक्ष की जड़ में दूध, जल, को अर्पित करते हुए पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा करनी चाहिए और पेड़ के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा पूर्ण करनी चाहिए. मुख्यत: इस सोमवती अमावस्या के व्रत को स्त्रियों के द्वारा किया जाता है. व्रत करने के बाद और पीपल की प्रदक्षिणा करने बाद अपने सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा देना शुभ होता है. इन पूजा उपायों से पितृदोष, ग्रहदोष और शनिदोष का बुरा प्रभाव समाप्त होता है तथा परिवार में शांति का आगमन होता है.

स्नान दान की सोमवती अमावस | Significance of Holy Donation on Somvati Amavasya

सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान करने का विशेष महत्व कहा गया है. सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहने का सर्वश्रेष्ठ फल कहा गया है. देव ऋषि व्यास के अनुसार इस तिथि में मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्त्र गौ दान के समान पुण्य का फल प्राप्त होता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है. इस दिन कुरुक्षेत्र के ब्रह्मा सरोवर में डूबकी लगाने का भी फल कहा गया है. इस स्थान पर सोमवती अमावस्या के दिन स्नान और दान करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है.

देश भर में इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक की अवधि में पवित्र नदियों पर स्नान करने वालों का तांता सा लगा रहेगा. स्नान के साथ भक्तजन भाल पर तिलक लगवाते है. यह कार्य करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. सोमवती अमावस्या का व्रत करने वाली स्त्रियों को व्रत की कथा अवश्य सुननी चाहिए.

कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य सभी दुखों से मुक्त होकर सुख को पाता है. ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों की आत्माओं को शांति प्राप्त होती है.


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