तर्जनी अंगुली के पोरो का अध्ययन | Analysis of Phalanges in Index Finger

आज हम तर्जनी अंगुली के पोरों के बारे मे जानने का प्रयास करेगें. हर पोर का महत्व माना गया है़ उसी के बारे में आपको बताया जाएगा.

तर्जनी अंगुली का पहला पोर | First Phalange in Index Finger

हर अंगुली में मुख्य रुप से तीन पर्व होते हैं और आपकी तर्जनी अंगुली भी मुख्य रुप से तीन मुख्य भागों में बंटी होती है. इस अंगुली के सबसे ऊपर के नाखून वाले भाग को पहला पर्व कहा जाता है.

यदि यह पर्व अंगुली के अन्य दो पर्वों से बड़ा होता है तब आपके भीतर नेतृत्व की योग्यता होती है. अच्छा नेता बनने के सभी गुण मौजूद होते हैं. आपका यह नेतृत्व किसी भी प्रकार का हो सकता है अर्थात आप राजनीति में एक सफल नेता बन सकते हैं या आप अपने घर का नेतृत्व बखूबी निभा सकते हैं. आप किसी धार्मिक संस्था का नेतृत्व कर सकते हैं या फिर आप अपने कार्यक्षेत्र पर एक कुशल नेता सिद्ध हो सकते हैं.

यदि पहला पर्व अन्य दो पर्वों से छोटा हो तब व्यक्ति स्वयं को दूसरों की नजरों से छिपा कर रखता है. ऎसे व्यक्ति में हीन भावना भरी हो सकती है. स्वयं को हर काम में पीछे रखने का वह प्रयास करता है.

तर्जनी अंगुली का मध्य पोर | Second Phalange in Index Finger

आइए अब मध्य भाग वाले पोर का विश्लेषण करते हैं. तर्जनी अंगुली के बीच वाले पोर को मध्य पोर कहा जाता है. यदि इस अंगुली के अन्य दो पोरो से यह पोर बड़ा है तब व्यक्ति में अहं भाव भरा होता है. ऎसे व्यक्ति में अहं भावना के साथ कार्य कुशलता भी पर्याप्त मात्रा में होती है. यदि यह मध्य पर्व अन्य दो पर्वों से छोटा है तब व्यक्ति में कार्य कुशलता कम होती है.

तर्जनी अंगुली का तीसरा पर्व | Third Phalange in Index Finger

तीसरे पर्व की ओर बढ़ते हैं, यदि इस अंगुली का तीसरा पर्व बड़ा हो तब व्यक्ति की अहं भावना किसी ऎसे शारीरिक बल की तलाश करती है जिसमें वह अपना पूर्ण बल दिखा सकें. व्यक्ति ऎसे पद की चाह रखता है जिसमें उसके शारीरिक बल का उपयोग पूरा हो सकें.

ऎसा व्यक्ति सेना, पुलिस, खेल प्रतियोगिता अथवा ऎसे पद पर काम करना चाहता है जिसमें शारीरिक बल की जरुरत होती है. एसे व्यक्ति को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का शौक रहता है.

तर्जनी अंगुली की अन्य विशेषताएँ | Other Characteristics of Index Finger

अंत में हम तर्जनी अंगुली की अन्य विशेषताओं के बारे में बताने का प्रयास करेगें. यदि तर्जनी का आगे का सिरा गोल हो तब व्यक्ति अध्यापन कार्य करता है अथवा किसी शिक्षण संस्थान जैसे शैक्षिक काम से जुड़ता है.

यदि इस अंगुली का पहला पोर चौकोर हो तब व्यक्ति वकील अथवा जज बनता है, जिससे उसके अंदर छिपे अहं भाव की तृप्ति पूर्ण रुप से हो सकें. ऎसे व्यवसाय से व्यक्ति को लाभ भी मिलता है.

यदि पहला पोर मूसल जैसा है तब व्यक्ति बहुत बातूनी होता है और उसे दिखावा भी पसंद होता है. अन्य लोगों के समक्ष प्रदर्शन अधिक करते हैं. यदि इस अंगुली का पहला सिरा नुकीला है तब व्यक्ति आध्यात्मिक क्षेत्र में नेतृत्व करने की इच्छा अपने मन में रखता है. नुकीला सिरा बहुत कम व्यक्तियों के हाथों में पाया जाता है.

यदि तर्जनी अंगुली अपने मूल स्थान अर्थात जड़ में अन्य अंगुलियों के बराबर जुड़ी है तब यह संयमित होती है अर्थात इस अंगुली की विशेषताएँ नियंत्रित रजती है. यदि यह निम्न स्थिति में हो तब इसे छोटी तर्जनी के रुप में जाना जाता है और यदि कुछ ऊंची है तब इसे उच्च स्थिति में माना जाता है अर्थात इसकी उच्च व नीच स्थिति के आधार पर इसकी विशेषताएं भी कम या अधिक होगी.

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